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साधु और साध्वियों को साधना के आठ सूत्रों में होना चाहिए पारंगत: साध्वी नूतन प्रभाश्री

साधु और साध्वियों को साधना के आठ सूत्रों में होना चाहिए पारंगत: साध्वी नूतन प्रभाश्री

साध्वी जी ने बताया भगवान महावीर ने कहा साधना के जो आठ सूत्रों को उपलब्ध है उसे ही बोलने का अधिकार है

Sagevaani.com /शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी भगवान महावीर की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन कर रही हैं। उत्तराध्यन सूत्र के 25 वें अध्ययन में उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने साधू और साध्वियों के लिए साधना के आठ सूत्र बताए हैं। इन आठ सूत्रों में पारंगत होने पर ही उन्हें धर्म के संबंध में बोलने का अधिकार है। इन सूत्रों को भगवान महावीर ने प्रवचन माताऐं कहा है। साधक और संयमी के लिए आठ प्रवचन माताऐं हैं। इनमें पांच समितियां ईर्या, भाषा, ऐषणा, आदान प्रदान और उच्चार निसर्ग समिति और तीन गुप्तियां-मनो गुप्ति, वचन गुप्ति और काया गुप्ति शामिल हैं।

साध्वी जयाश्री जी ने अमोलक है जीवन गवांकर न जाऐं, सांसों के यह ये मोती लुटाकर न जाऐं, भजन का गायन किया। इसके बाद साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने साधू और साध्वियों के लिए आवश्यक आठ प्रवचन माताओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हमारी एक माता तो वह होती है जो हमें जन्म देती है और सांसारिक जीवन छोडऩे के बाद संन्यास पथ पर जो आत्माऐं आगे बढ़ती है उनके लिए आठ प्रवचन मातायें हैं।

जो साधक और संयमी को संस्कारित करती है। आठ प्रवचन माताओं में से पहली समिति ईर्या समिति को विस्तार से बताते हुए साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कहा कि साधक जो भी प्रवृत्ति करें उसमें सावधानी रखें। वह उठें, बैठे और चले होश पूर्वक। इसके बाद उन्होंने दूसरी समिति भाषा समिति की व्याख्या करते हुए कहा कि साधक को बोलने में विवेक रखना चाहिए। ऐसा कोर्ई बचन नहीं बोलना चाहिए जो कड़वा हो, छेदकारी हो, भेदकारी हो, निश्चियकारी हो, कठोर अथवा करकस हो। झूठ बोलने से भी उसे परहेज रखना चाहिए। तीसरी समिति एषना समिति का अर्थ है कि भोजन किस तरह से करना चाहिए। साधू को आहार कैसे लाना चाहिए। किन घरों से लाना चाहिए। इसका विवेक रखना चाहिए।

आहार 47 दोषों से मुक्त होना चाहिए। चौथी समिति आदान प्रदान की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहाकि साधु को कौन सी चीज लेना चाहिए और कौन सी नहीं लेना चाहिए। किन चीजों का आदान प्रदान करना चाहिए। इसमें भी विवेक रखना चाहिए। पांचवी समिति उच्चार निसर्ग समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि मलमूत्र विर्सजन में भी विवेक रखना चाहिए। ताकि मलमूत्र विर्र्सजन करते समय हिंसा न हो। किसी प्राणी या जीव को कष्ट न हो। इसी तरह तीन गुप्तियां मन,वचन और काया गुप्ति सब प्रकार के अशुभ कार्यो से मुक्त होने में सहायक होती है। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि जो साधू और साध्वी उक्त आठ प्रवचन माताओं का अच्छी तरह आचरण करता है वह संसार से सदा के लिए मुक्त हो जाता है और मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होता है।

बाहर से पधारे धर्मावलम्बियों का हुआ सम्मान

साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज साहब का चार्तुमास शिवपुरी में धूमधाम और उत्साह के साथ जारी है प्रतिदिन जैन साध्वियों के दर्शन, वंदन और प्रवचन सुनने के लिए दूर-दूर से धर्मावलम्बित शिवपुरी पधार रहे हैं। आज की धर्मसभा में पुणे महाराष्ट्र से आए धर्माबलम्बियों का स्वागत चार्तुमास कमेटी ने किया।

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