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धर्म धारण करने योग्य है: जयतिलक मुनिजी

धर्म धारण करने योग्य है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि धर्म धारण करने योग्य हैl ये सदाकाल साथ रखना है धर्म तो हमारे हृदय के कण कण में होना चाहिएl धर्म के बिना जीवन व्यर्थ है धर्म के बिना जीवन भार है। धर्म हितकारी है ये सभी प्रकार से साता पहुँचा कर जीव को भव सागर से तारता हैl यदि धर्म न हो तो संसार में सिर्फ दुःख ही होगा। परम सुख को पाने के लिए धर्म मार्ग का निरुपण जिनेश्वर भगवान द्वारा किया गया है।

राग, द्वेष, ममत्व से युक्त धर्म आगार धर्म और राग- द्वेष, ममत्व से रहित धर्म अणगार धर्म है। अणगारc धर्म पालन करने वाले अपनी साधना द्वारा आत्मा के कर्म मैल को साफ करते है। आगार धर्म में राग द्वेष होने से भगवान ने पापों की मर्यादा का निर्देश दिया और श्रावक के 12 व्रतों का अनुपम, निरूपण किया। ये पालन करने में सरल है इनका पालन जीव अपने साथ अनेक अन्य संसारी आत्माओं का भी भला करता है ।धर्म ही एक मात्र भलाई का मार्ग है । धर्म कभी छूटना नहीं चाहिए भले ही संसार की सभी वस्तु छूट जाए। धर्म ऐसा कल्याणकारी मिल है जिसे सदैव अपने साथ रखना चाहिए।

पांच अणुव्रत में दायरा बहुत ज्यादा रखने से उनकी रक्षा करना मुश्किल है इसलिए भगवान ने तीन गुणव्रत का निरुपण कर दिया । पाप की मर्यादा करने के बाद उस मर्यादा की रक्षा करनी चाहिए। 14 नियम का नियमित पालन करने से बुद्धि कुशाग्र हो जाती है। 14 नियम धारण करने योग्य है इनके पालन में प्रमाद नही करना चाहिए।

दीपावली पर पटाखे नहीं फोड़ने वाले बच्चों को ईनाम मंगलचंद मनोहर लाल लोढा परिवार की ओर से दिए गए। इस अवसर पर सेक्रेटरी ललित बेताला, उपाध्यक्ष अशोक कोठारी, कार्यकारिणी सदस्य ज्ञानचंद कोठारी, ममता कोठारी, स्वीटी चोरड़िया आदि ने 120 बच्चों को ईनाम दिए।

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