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पर्युषन पर्व 8 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ संपन्न होंगे

डबवाली (लहू की लौ) इन दिनों जैन समाज का पर्युषण पर्व चल रहा है जिसके तहत वीरवार को 7वें दिन जैन स्थानक में भगवान महावीर जन्म कल्याणक दिवस श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। युवती मंडल ने बहुत ही सुंदर नाटिका पेश की जिसमे नम्रता जैन प्रिया जैन आस्था जैन संजना जैन व वैराग्न खुशी जैन ने भूमिका अदा की। इस दौरान चल रही तपस्या की अनुमोदना की गई। अठहाई तप करने वालो की आज मेंहदी थी …अठहई करने वालों के नाम रोहित जैन, रविंद्र जैन, प्रियांशी जैन, पारुल जैन, रेनू जैन, सुनीता जैन, भावना जैन है। प्रधान सुभाष जैन पप्पी ने बताया कि जैन स्थानक में चातुर्मास के लिए विराजमान महान जैन साध्वियों के सानिध्य में पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है। पर्युषन पर्व 8 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ संपन्न होंगे। पर्युषण पर्व जैन धर्म में महावीर स्वामी जी के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म और जियो और जीने दो की राह पर...

गर्भ से ही संस्कार शुरु होते है

मानव जीवन दुर्लभ है पाना, इसे यो व्यर्थ ना गमाना! दुध दही मख्खन घी अपना ( सफेद) रंग नही बदलता, वैसे ही संघ समाजने अपना रंग नही बदलना चाहिए! गर्भ से ही संस्कार शुरु होते है ! साध्वी जिनाज्ञा श्री जी! जीवन मोबाईल जैसा बन गया है, उसे जिवो और जिने दो मे परिवर्तित करो! डॉ. मेघाश्री जी। जीवन हमारा संस्कारोंसे परिपूर्ण होना चाहिएँ! कॉमप्युटर, लॅपटॉप, मोबाईल चलाना आसान है किंतु व्यक्ति घरका संचालन नहीं कर पाता! स्वयंमे समताके भाव, सहनशिलता, समयपरिवर्तन आवश्यक – डॉ. राज श्री जी। आँज के प्रवचन का विषय था “ संस्कारो का शंखनाद”! विविध द्रष्टांत देकर गुरुणीसा ने जिनवाणी सुनायी ! कॉंच के बर्तन को जिस प्रकार हम जतन करते उसी प्रकार रिश्ते निभाने चाहिएँ! आज गणेशजी के शुभआगमन पर विघ्नहर्ता से सुख और शांति की कामना कर विश्वस्त मंडल पहुँचा गणेशभक्त राजेश जी साखला जी के माताजी श्रीमती प्रमिलाबाई साखला जी...

पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य मे श्री आत्मानंद जैन सभा रायकोट द्वारा शोभा निकाली

Sagevaani.com /रायकोट (भल्ला): पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य मे श्री आत्मानंद जैन सभा द्वारा श्री सुमतिनाथ जैन मंदिर से सभा के सरपरस्त ऐवंत कुमार जैन और अध्यक्ष अमित जैन( मीतू) के नेतृत्व मे आज स्वपन उतारे गए और शोभा यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर श्री जैन स्थानक मे चतुर्मास हेतु विराजमान जिन शासन पारस मणि श्री समता जी महाराज, प्रवचन पारस मणि श्री सुयशा जी महाराज और वीर शिरोमणि श्री प्रगति जी महाराज विशेष रूप मे मंदिर पधारे।इसके इलावा सांसद डा,अमर सिंह और उनका बेटा कामिल बोपाराय मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित हुए। इस मौके निकाले गए भगवान के पालने का ड्रा एस एस जैन सभा रायकोट के प्रमुख मार्ग दर्शक धर्मवीर जैन, सतीश जैन, राजेश जैन, विनोद जैन श्री लकखी राम बजरंग दास जैन परिवार को मिला। लाभार्थी परिवार ने पालना श्री को सिरोधारय करते हुए बैड वाजो के साथ शहर के बजारो की परिक्रमा की गई। जिसमे बडी संख्या ...

आत्मा की शुद्धि का पर्व है पर्युषण: धर्मवीर जैन

Sagevaani.com /रायकोट(भल्ला) एस एस जैन सभा रायकोट के प्रमुख मार्ग दर्शक धर्मवीर जैन ने कहा कि आत्मा की शुद्धि का पर्व है पर्युषण। सम्पूर्ण जैन जगत मे यह आठ दिन का पर्व विशेष महत्व रखता है।यह पर्व हमे प्रेरणा देता है कि अपनी आत्मा मे रह रहे विकारो को दुर कर आत्म शुद्धि करे। उन्होंने कहा कि जगह-जगह साधु साध्वीया की कृपा से इन दिनो धर्म की प्रभावण विशेष रूप से होती है। यह पर्व हमे संदेशा देता है कि हम सोचे हम कहा से आए है,और हमारा क्या लक्ष्य है। हम स्वय अपने बारे मे सोचे। हर व्यक्ति जितना दुसरो के बारे मे जानने की कोशिश करता है अपने बारे मे नही जो अपने भीतर झाँककर अपने अवगुण दुर करेगा तभी महान बन सकता है, तो आये हम भी अपने बारे मे चिंतन करे। धर्मवीर जैन ने कहा कि जप तप द्वारा इन पर्व का लाभ ले। उन बुराईयो को छोडे जिनसे हमारी आत्मा का अहित होता है। इससे ही मैत्री भाव बनेगा पर्युषण की मधुर बेल...

कृषि करो या ऋषि बनो

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा कल्प सूत्र के द्वारा बताया भगवान आदिनाथ ने सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिए नगर, गांव, मकान आदि बनाने और उन्हें बसाने का उपदेश दिया था। इसी के साथ उन्होंने वर्ण व्यवस्था का उपदेश भी दिया। उन्होंने वर्ण व्यवस्था की स्थापना प्रजा के कार्य के अनुसार की थी। जो लोग विपत्ति के समय मनुष्यों की रक्षा करने के नियुक्त किए गए थे, वे क्षत्रिय कहलाए।उनका सूत्र वाक्य था- ‘कृषि करो या ऋषि बनो। ‘ साध्वी विनीत प्रज्ञा ने अंतगढ़ सूत्र के द्वारा बताया अतिमुक्त कुमार का उदाहरण देते हुए बताया कि वह एवंता मुनि कैसे बने, 8 वर्ष की उम्र में ही उन्होने संयम को ग्रहण कर लिया था पात्र को तिराते तिराते- अपने जीवन को तिरा लिया केवल ज्ञान और केवल दर्शन को प्राप्त कर लियाl इस धर्म सभा का संचालन नरेंद्र बडोला ने किया एवं चंदन बाला महिला मंड...

चौसाळा नगरीत भव्य तपहोत्सव

पर्वधीराज पर्वुशषण दिनी चौसाळा येथील पावन भूमी मध्ये परमपूज्य श्री दिलीपकवरजी म.सा. यांच्या सुशिष्या स्वाध्याय प्रेमी परमपूज्य श्री कुसुमकॅंवरजी म.सा. आणि प्रवचन प्रभाविका परमपूज्य श्री अरुणप्रभाजी म.सा. आधी ठाणा 2 यांच्या सानिध्या, श्रीमती कमलबाई जवाहरलालजी खिवंसरा 9 उपवास श्रीमती जंयकंवरबाई मिठुलाल बेदमुथा 8उपवास, सौ. सुवरणा कांतिलाल खिवंसरा 9 उपवास, पचखावणी 08/09/2024 रोजी चौसाळा येथे होणार आहे तसेच मनोज खिवंसरा व सौ आणिता अणिल ललवानी एकासना मासखंमण चे भाव आहेतl चौसाळा सारख्या छोट्या गावामध्ये जैन समाजाचे कमी घर असताना 24 वर्षानंतर चातुर्मासचा योग आला जैन धर्मात पर्वुशषण पर्व महत्वपूर्ण मानले जातात आठ दिवस एकासना, आंबील, वास, तेला, आठाई अशा बऱ्याच तपस्या चालू आहेत आठव्या दिवसि माता ९ उपवास चि पचखावणी आहे श्री वर्धमान जैन स्थानक चौसळा येथे 9:०० (नऊ वाजता) त्यांची पचकावणी होणार आहे l चातु...

साध्वी श्री धैर्यप्रभाजी की गुणानुवाद सभा

Sagevaani.com /माधावरम्: साध्वी श्री धैर्यप्रभाजी के देहावसान पर गुणानुवाद स्मृति सभा को संबोधित करते हुए डॉ. साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि साध्वीश्री धैर्यप्रभाजी सहज, सरल साध्वी थी। आपका बचपन चैन्नई के महानगर छल्लाणी परिकर में बीता और यौवनता की दहलीज पर कदम रखते ही बोहरा परिवार की पुत्रवधू बन गयी। संसार में रहते हुए भी आप कमल की तरह निर्लिप्त रही। इसी का परिणाम आप संसार का विराट वैभव छोड़कर पूरे परिवार सहित संयम की राह पर चल पडी। आपकी वैराग्य भावना प्रबल थी, साधना निर्मल थी, आपके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता थी- आपने चैन्नई में ही जन्म, शिक्षा, शादी और दीक्षा ग्रहण की। जिनके करकमलों से दीक्षा ली, उन्हीं के चरणों में 45 दिन की तपस्या में डायमंड सिटी सूरत में महाप्रयाण को प्राप्त हो गये। सिंहवृत्ति से संयम धारण किया और सिंहवृत्ति से ही उसका पालन किया। आप समता की प्रतिमूर्ति थी।  गुणानुवाद सभा...

जिसका उद्देश्य प्रशस्त हो ऐसा सत्य वचन ही बोलना चाहिए

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 4️⃣8️⃣ *🕉️सत्य ही परमेश्वर है.!🕉️* 🌼 सत्य ही 🤍 जीवन का सार है, महासमुद्र से भी अधिक गंभीर है.!🌊 चंद्र से भी अधिक शीतल,🌙 सूर्य से भी अधिक तेजस्वी है☀️ 🌷 जो प्रिय हो, जो उचित हो, जो हितकारी हो, जो मर्यादायुक्त हो.. जो अकार्य प्रेरक न हो जिसका उद्देश्य प्रशस्त हो.. ऐसा सत्य वचन ही बोलना चाहिए.! ❌ जिसका उद्देश्य मलिन हो, जो संयम का घातक हो, कलह को बढ़ानेवाला हो, वैर के बीज बोनेवाला हो, द्रव्य भाव प्राणों का नासक हो, ऐसा सत्य कभी नहीं बोलना चाहिए.! 🛑 *अपनी* *प्रशंसा एवं* *दूसरों की निंदा भी* *असत्य के समकक्ष ही हैं.!* ⚡ असत्य का जनक है लोभ जननी है कामना.! 💐 असत्य से दूर रहेगा वो समस्त अनर्थो से बचेगा.! *श्रीप्रश्न व्याकरण अंगसूत्र📚* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श...

जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप

*क्रमांक — 475* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹जीव और कर्म के बंध पश्चात् परिणमन का स्वरूप* *7. कर्म का बंध कार्मण शरीर से — समयसार में सूक्ष्म दृष्टि से वर्णन करते हुए कहते हैं कि पहले बंधे हुए सभी कर्म, पृथ्वी के पिण्ड समान पुद्गल पिण्डवत् हैं और आत्मा कर्म और कर्मोदयज भाव से भिन्न है।* *पुढवी पिंडसमाणा पुव्वणिबद्धा दु पच्चया तस्स ।* *कम्मसरीरेण दु ते बद्धा सव्वेपि णाणिस्स ।।* *यहाँ इस कथन का तात्पर्य यह है कि पुद्गल का स्वभाव और जीव का स्वभाव भिन्न है। ये सजातीय नहीं हैं। विजातीय होने के कारण कर्मप्रकृतियाँ जीव से नहीं बल्कि कार्मण शरीर से ही एक होकर पृथ्वी पिण्डवत् बंधी हुई हैं। यह आचार्य कुन्दकुन्द ने समयसार में शुद्ध निश्चय नय से कहा है।* *उपरोक्त आगम वाणी एवं आचार्यों द्वारा प्राप्त समस्त उद्धरणों को पढ़कर हमें चार प्रकार के निरूपण प्राप्त होते हैं।* *1. प्रथमतः यह प्रत...

मॉं वात्सल्य का सागर है – डॉ. राज श्री जी म. सा.

मॉं का ह्रदय ममता का मंदीर होता है, मॉं वात्सल्य का सागर है – डॉ. राज श्री जी म. सा. अवगुण छोडो गुणरी करना बात, माता पिताने जाणो थे, उनकी सेवा है प्रभुका सन्मान! -साध्वी जिनाज्ञा श्री जी आज पर्युषण पर्व का छटा पुष्प गुंफा गया! प्रवचन का विषय था “सॉंस बहुके रिश्ते कैसे मधुर बने”! डॉ. राज श्री जी ने कहा मॉं जन्म देती है, सॉंस जीवन जिना सिखाती है! तीन बातोका ज़िक्र किया सॉंस ने कुछ बातोके लिए कानसे बहरा , ऑंखसे गहरा बनना है, बहुने सॉंस की प्रत्येक बात मानना सिखना चाहिएँ, अपनी बातकी सफ़ाई ना दे! डॉ. मेघाश्री जी ने एक उच्चशिक्षीत बेटे की कहानी सुनाकर उपस्थितों को भावना विवश किया! साध्वी समिक्षा श्री जी ने विषय से संबंधित स्तवन सुनाया! साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने अपनी आदतें बदलनेका एहलान किया जैसे दुसरोकी कमियॉं ना देखो,दुसरोकी मजाक ना उडावो, टोका टोकी ना करो, ज़्यादा कंजुसी से जीवन मत जिवो...

अज्ञान, ऐसी रात जिसमें न चाँद हैं त तारे

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे पर्व पर्यूषण के छठे दिन परम पूज्य गुरुदेव श्रीपन्ना लाल जी महाराज का 134 वा जन्मदिवस मनाया साध्वी डॉक्टर चंद्रप्रभा ने कहा परम श्रद्धेय, महामहिम, संत शिरोमणि, स्व० पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महाराज साहब ‘प्राज्ञ’ भी एक ऐसे ज्योति:पुंज महापुरुष थे, जिन्होंने आत्म-विकास के साथ-साथ अनेकानेक भव्यात्माओं को भी सम्यस्ज्ञान का प्रकाश उपलब्ध कराया था। वे स्वयं यूये के समान तेजस्वी एवं प्रतिभावान तो थे ही, साथ ही सूर्य से विकसित कमल की भाँति विषय-कषाय रूपी पंक से निलेंप, उन्नत एवं आत्मगुणों से पूर्ण प्रकाश- मान भी थे। सज्ञायंमि रओ सया’ इस शास्त्र-वचन के अनुसार वे सर्देव स्वाध्याय में लिन रहते थे । इससे पूज्य गुरुदेव श्री ने अन्तर्मूखता प्राप्त की। जो मनुष्य स्वाध्याय से जितनी अन्‍्तर्मुखता प्राप्त करेगा उतनी ही उसकी द्ृत्ति ...

हमारे कर्म सभी को सुख पहुंचाने वाले हों

आज पर्वाधिराज पर्युषण के छठे दिन सभी जन अति उत्साह-उमंग से प्रवचन सभा में उपस्थित हुए। आज के विषय थे, “फूल और कांटे” एवं “प्याले में उबाल” । पूज्यनीय महासति प्रियंकाश्रीजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन को जीना हमारे हाथ में है । चाहे हम उसे फूलों की सुगंध से भरदें या कांटो का जाल पैदाकर खुद भी कष्ट झेलें ओर दूसरों को भी परेशानी में डालें । कभी कभी हम फूलों के मोहपाश में इतना जकड जाते हैं कि कुत्सित कांटों का ध्यान ही नहीं रहता । ईश्वर ने हमें बहुत दिया है, फूल भी तो कांटे भी । हमें अपना महत्व बनाए रखना है, हमारे कर्म सभी को सुख पहुंचाने वाले ओर हितकारी हों, मनभावन हो । पूज्यनीय महासती सरिताश्रीजी महाराज साहब ने “प्याले में उबाल” (क्रोधी स्वभाव) पर बडी अनुकरणीय समझाइश दी । क्रोध की अवस्था में हम अपना संतुलन खोकर दूसरों के साथ ही खुद का ज्याद...

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