स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व हितेषी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत युग प्रभावक, श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय : ज्ञान का सागर श्री अभिधान राजेंद्र कोष*🪔 ~ जीवन में पापों का क्षय हो और आराधना की भावना से गुणों का प्रगटिकरण हो वह है सम्यक् ज्ञान। ~ श्री अभिधान राजेंद्र कोष विश्व का कोहिनूर हीरा है यदि हमारे मन में उसकी कीमत है तो ही हमारे लिए उपकारी साबित होगा। ~ जैन दर्शन ने जो समग्र विश्व को जो ज्ञान का दान दिया है उससे सर्वश्रेष्ठ ज्ञान किसी भी धर्म ने नहीं दिया है। ~ श्री अभिधान राजेंद्र कोष का प्रारंभ सियाणा नगर में और पूर्णाहुति गुजरात की सूरत नगरी में हुआ था यह ज्ञान साधना साडे14 साल तक चली थी। ~ श्री अभिधान राजें...
गुणगान से मनाई गई भक्तो के भगवान और अहिंसा के पूजारी का जन्म जयंती समारोह चैन्नई मे Sagevaani.com @चैन्नाई। अहिंसा के पुजारी और भक्तों के भगवान थे,पूज्य गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमल जी महाराज एवं लोकमान्य संत रूपचन्द जी महाराज। रविवार अयनावरम् जैन दादाबाड़ी मे गुरू द्वय के जन्म जयंती गुणगान समारोह में महासती धर्मप्रभा ने गुरूद्वय के जीवन पर प्रकाश डालते कहा कि पूज्य गुरूदेव श्री का सम्पूर्ण जीवन एक जलती हुई मशाल था, एक ऐसी मशाल जो पूरे संघ और समाज का मार्ग प्रशस्त कर रही है ।वो एक दृढ़ संकल्पी, अटूट विश्वास के धनी, आत्म विश्वास से परिपूर्ण, दिन दुखियो के सच्चे हितेषी, जीवदया के प्रबल प्रेरक, संघठन हामी व श्रमणसंघ की ढ़ाल थे। उन्होंने श्रमणसंघ को एक सूत्र में पिरोने के लिए राजस्थान की धरा पर सात- सात बार साधू सम्मेलन करवाए। गुरूदेव ने सदैव जोड़ने में विश्वास किया तोड़ने में नहींl वचन सिध्द योगी...
साध्वी पूनम श्री जी ने बताया कि मन पर नियंत्रण से ही धर्म की यात्रा संभव Sagevaani.com @शिवपुरी ब्यूरो। हिंसा मन, वचन और काया से की जाती है। सबसे पहले मन में हिंसा उपजती है और इसकी प्रतिक्रिया वचन तथा शरीर में देखने को मिलती है। अहिंसा का पहला सूत्र यह है कि सबसे पहले मन की हिंसा से बचो क्योंकि इससे बच गए तो मन और काया की हिंसा से भी बच जाओगे उक्त वक्तव्य प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में दिया। धर्मसभा में साध्वी पूनम श्री जी ने बताया कि मन पर नियंत्रण रखने वाले ही धर्म की यात्रा कर पाते हैं। मन बश में हुआ तो नर से नारायण बनने में देरी नहीं लगती। धर्मसभा में पूर्व विधायक और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष माखन लाल राठौर भी पहुंचे और उन्होंने जैन सतियों से आशीर्वाद लिया। धर्मसभा में सबसे पहले साध्वी वंदनाश्री जी ने धीरे-धीरे मोड तू इस मन को, इस मन को त...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl भायंदर में बालिकाओं का अधिवेशन रखा गया, उसमें 150 बालिका की उपस्थिति रही एवं बालिका का प्रोग्राम बहुत ही शानदार रहाl हमारे गुरणी मैया श्री सत्य साधना जी महाराज साहब ने बालिकाओं को त्याग करवाया और भी अनेक बातें बताइए आज का युग कैसा हैl इस युग में बालिका को कैसे रहना चाहिए एवं हमारे संग के अध्यक्ष मंत्री कोषाध्यक्ष नवयुग मंडल के अध्यक्ष मंत्री कोषाध्यक्ष महिला मंडल के अध्यक्ष मेवाड़ मंडल के उप प्रमुख उपाध्यक्ष आदि की उपस्थिति रहीl प्रोग्राम अच्छे से सम्पन्न हुआ हुआ, बालिका मंडल की अध्यक्ष रवीना कटारिया मंत्री एवं कोषाध्यक्ष आदि ने अच्छी तरह से प्रोग्राम रखा आप सभी धन्यवाद के पात्र हो जीवन का दूसरा सेतु ...
राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु एवं श्री माहेश्वरी स्पोर्ट्स क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “G.S.राठी संगीतमय नगर मंथन” दिनांक 3 सितंबर 2023, रविवार, सुबह 7.30 बजे आयोजन किया गया। प्रार्थना के पश्चात मुख्य अतिथि डी जी वैष्णव कालेज के प्रधानाचार्य Dr. संतोष बाबु जी ने ध्वज लहरा कर कार रैली का शुभारंभ किया। रजत अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि रजत ने इस बार श्री महेश्वरी स्पोर्ट्स क्लब के साथ म्यूज़िकल कार ट्रेजर हन्ट का आयोजन किया है । जिसमें आप सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है । आज के इस आयोजन में ट्रेजर हंट की पहली कार को फ्लैग ऑफ़ करेंगे हमारे डी जी वैष्णव कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर संतोष बाबूजी, मैं उनका भी स्वागत करता हूँ । इस कार रेली के प्रायोजक श्री गौरीशंकर ज़ी राठी, जलपान प्रायोजक श्री आशीषजी अभिषेक जी मूंदड़ा, कॉलेज के प्रा...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में चातुर्मास के लिए विराजित आचार्य श्री देवेंद्रसागरजी की निश्रा में तप-जप एवं आराधना की जा रही है। इसी कड़ी में रविवार को तप की पूर्णाहुति पर तपस्वियों की शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा की शुरुआत प्रातः 9 बजे हुई। वरघोडे़ में आगे-आगे चल रहे चेन्नई के प्रसिद्ध बैंड ने अपनी सुर लहरियों से लोगों को काफी आकर्षित किया। बैंड के म्यूजिक से लोग इतने प्रभावित हुए कि अपने आप को रोक नहीं सके और नृत्य करके भक्ति की। वरघोड़ा में जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शोभायात्रा के लाभार्थी रतनबाई कुंदनमलजी बोकाड़िया परिवार भगवान को लेकर रजत रथ पर आसीन थे। भगवान के दोनों और नन्हे बच्चे चंवर ढुला रहे थे। युवावर्ग रथ को खिंचकर चल रहे थे। इसके पीछे साध्वीजी मंडल के साथ श्राविकाएं चल रही थी। आगे चार बग्घी पर तपस्वी सवार थे।शोभायात्रा नोर्थटाउन स...
नवकार मंत्र के पांचों पदों के रंगों की बताई महत्ता Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास के शनिवारीय प्रश्नोत्तर में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि सारें रंगों का राजा होता है- सफेद। सफेद रंग निर्दोष, स्वच्छ, दाग रहित होता है, इसलिए अरिहंत को सफेद रंग का प्रतिक मानते है, उन्होंमें किसी भी तरह का दोष नहीं होता। सिद्धों के लिए लाल रंग। लाल रंग स्वस्थता का प्रतिक है। सबसे खतरनाक रोग है कर्मों का, सिद्ध सारे कर्मों से मुक्त हो गए और स्वस्थ आत्मा में आत्मस्थत हो गए। दीपक के ऊपरी ज्योति की तरह वे भी ज्योति में समा गए। लाल रंग वशीकरण का रंग है और सिद्धों ने सभी को वंश में कर ही सिद्धत्व को प्राप्त किया है और हम भी सिद्ध बनना चाहते है...
स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व हितेषी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दानेश्वरी श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय : जन्म गुरु वैभवरत्न बने प्रभु जन्म*🪔 ~ जिनके भीतर में प्रभु बनने की प्यास और पुरुषार्थ सर्वश्रेष्ठ है वह भक्त अवश्य भगवान बनता ही है। ~ साधक सत्य की खोज के लिए, और पाने के लिए प्रबल पराक्रम करता ही है। ~ हमें यदि आत्म कल्याण पसंद है और अनुसरण भी है तो हमारे जीवन में सर्वस्व बलिदान के लिए प्रतिपल तैयारी होनी ही चाहिए। ~ पराई चीजे, पराई व्यक्ति, पराई घटना, को कब तक मेरा मानना चाहिए। ~ समाधि भाव में रहना वह महा ज्ञान का हिस्सा, महा लोक की यात्रा है। ~ मुक्ति के अंश को पाने की पूर्ण भावना भक्त को हर पल मुक्ति म...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने अध्यात्म कल्पद्रुम ग्रंथ के बारहवें अध्याय देव शुद्धि अधिकार की विवेचना करते हुए कहा गुरु तत्त्व का बहुत महत्व है। धर्म की स्थापना तीर्थंकर परमात्मा ने की। उसकी रक्षा करने का कार्य गुरु करते हैं। सद्गुरु का मिलना सौभाग्य की ही नहीं, सद्भाग्य और अहोभाग्य की बात है। अब प्रश्न यह उठता है देव बड़े या गुरु? परमात्मा को हम देव कहते हैं, गुरु महाराज को गुरुदेव कहते हैं। परमात्मा के लिए देव के आगे कुछ नहीं लगता है। गुरु के आगे देव लगता है। गुरु देव के जैसे होते हैं, इसलिए गुरुदेव कहते हैं। गुरु स्वयं देव बनने वाले हैं। गुरु के आचार में देव के आज्ञा की प्रतिष्ठा है। ज्ञानी कहते हैं परमात्मा हमें खोजने नहीं पड़ते, गुरु हमें खोजने पड़ते हैं। परमात्मा पुरुष में सिंह के समान होते है क...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि् अंतराय कर्म क्यों बंधुओं यदि आपकी कोई प्रिय वस्तु आपसे कोई छीन ले तो आपको कैसा लगता है, बुरा लगता है ना? जैसे हम कई धर्म कर रहा है उसे अंतराय देते हैं तो कैसा लगता है बुरा लगता है वह भी आत्मा मोक्ष प्राप्त करने के लिए रख जाता हैl श्री अनुतरोवाई दशा में 33 आत्मा ए ऐसी थी मात्र 5 मिनट कि देरी संयम लेने की 33 सागरोपम अगले भव कि आयु तक मोक्ष रुक गयाl सोचो फिर हम उसे भव आत्माओं को कितने समय तक संसार में बांधकर रखते हैं, आप कहते हो मरु देवी माता बिना सयममोक्ष प्राप्त हो गया पर वह मरु देवी माता ने 65000 पीढ़ियां देखी एक भी पिढी को घर में में अंतराय नहीं दीl हमने कितनी पीढ़ियां देखी और हम कितन...
साध्वी जी ने बताया कि धर्म का मूल है ज्ञान, ज्ञान के बिना नहीं होता धर्म Sagevaani.com @शिवपुरी ब्यूरो। जैन दर्शन में ज्ञान का बहुत अधिक महत्व है। भगवान महावीर ने बताया कि बिना ज्ञान के बड़ी से बड़ी धर्म आराधना का कोईर् मूल्य नहीं है। ज्ञान धर्म की बुनियाद है उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी पूनम श्री जी ने स्थानीय कमला भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अहिंसा पर सारगर्भित उदबोधन देते हुए कहा कि प्राणों का हनन करना हिंसा है वहीं प्राणों की रक्षा करना अहिंसा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राण से अर्थ क्या है। उन्होंने शास्त्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी दूसरे को पांचों इन्द्रियों, मन बचन काया से प्रताणित करना श्वास और जीवन समाप्त करने को हिंसा कहते हैं और धार्मिक व्यक्ति को इससे बचना चाहिए। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने सोने बाले जागो,...
बिन्नी नोर्थटाउन में तपोत्सव के तहत गांव सांझी का भव्य आयोजन श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी के सान्निध्य में सामूहिक तपोत्सव पारणा उत्सव के तहत पहले दिन संघ भवन में गांव सांझी एवं मेहंदी वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। शहर के विभिन्न महिला मंडलों की सदस्याओं ने प्रभु की भक्ति की। करीबन एक हज़ार से अधिक महिलाओं ने इस आयोजन में लाभ लिया।गांव सांझी का लाभ शा अशोककुमार मांगीलालजी खिंवसरा परिवार ने लिया। सांझी में आने वाले प्रत्येक महिलाओं को विशेष प्रभावना द्वारा भक्ति कि गई। रविवार को तपस्वियों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि इच्छाओं का निरोध करना ही तप का परिपालन है। जिस प्रकार आकाश अनंत और विशाल है उसी प्रकार इच्छाएं अनंत हैं। इच्छाओं के बीच मानव जीवन यात्रा करता है। मनुष्य ही व्रत नियम और तपस्या कर सक...