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अहिंसा का पहला सूत्र मन की हिंसा से बचो: साध्वी नूतन प्रभाश्री

अहिंसा का पहला सूत्र मन की हिंसा से बचो: साध्वी नूतन प्रभाश्री

साध्वी पूनम श्री जी ने बताया कि मन पर नियंत्रण से ही धर्म की यात्रा संभव 

Sagevaani.com @शिवपुरी ब्यूरो। हिंसा मन, वचन और काया से की जाती है। सबसे पहले मन में हिंसा उपजती है और इसकी प्रतिक्रिया वचन तथा शरीर में देखने को मिलती है। अहिंसा का पहला सूत्र यह है कि सबसे पहले मन की हिंसा से बचो क्योंकि इससे बच गए तो मन और काया की हिंसा से भी बच जाओगे उक्त वक्तव्य प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में दिया। धर्मसभा में साध्वी पूनम श्री जी ने बताया कि मन पर नियंत्रण रखने वाले ही धर्म की यात्रा कर पाते हैं। मन बश में हुआ तो नर से नारायण बनने में देरी नहीं लगती। धर्मसभा में पूर्व विधायक और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष माखन लाल राठौर भी पहुंचे और उन्होंने जैन सतियों से आशीर्वाद लिया।

धर्मसभा में सबसे पहले साध्वी वंदनाश्री जी ने धीरे-धीरे मोड तू इस मन को, इस मन को तू इस मन को, मन मोड़ा फिर डर नहीं कोई दूर प्रभू का घर नहीं, भजन का सुमधुर स्वर में गायन किया। इसके बाद साध्वी पूनम श्री जी ने अपने उदबोधन में मन पर नियंत्रण करने के उपाय बताते हुए कहा कि मन को जीतना नहीं बल्कि जीना है। मन की सफलता पर रोक लगाना है।

उन्होंने कहा कि मन सांसारिक जगत में स्थिर रहता है लेकिन आध्यात्मिक क्षेत्र में मन स्थिर नहीं रह पाता है। जिसने अपने मन पर नियंत्रण कर लिया, समझलिए उसने सारी दुनिया को जीत लिया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अहिंसा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि सिर्फ किसी को मारना ही हिंसा नहीं बल्कि किसी के प्रति बुरे भाव रखना भी हिंसा है। उन्होंने कहा कि यदि हमें अहिंसक जीवन को अपनाना है तो सबसे पहले अपने व्यवहार और वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

आज मनाई जाएगी संत जीवन मुनि की 41 वीं पुण्यतिथि

मालव केशरी पूज्य श्री सौभाग्य मुनि जी महाराज की सेवाभावी सुशिष्य श्री जीवन मुनि जी की 41 वीं पुण्य तिथि साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की धर्मसभा में 4 सितम्बर सोमवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर 15 मिनिट का सामूहिक जाप किया जाएगा और श्रावक तथा श्राविका 2-2 सामायिक कर मुनि श्री को अपनी भावांजलि अर्पिर्त करेंगी। इसके बाद साध्वी रमणीक कुंवर जी और साध्वी नूतन प्रभाश्री जी गुणानुवाद सभा को संबोधित कर पुज्य जीवन मूनि के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालेंगे। जीवन मुनि जी ने अपने 53 साल के साधना जीवन में गुरू सेवा की अनुपम मिशाल पेश की थी।

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