हमारा मोह संसार में है। मोहनीय कर्म की स्थिती में 70 क्रोडा क्रोडी सागरोपम भोगना पडेगा। बडे बडे घरों मे कुत्ते बड़ी बड़ी गाडी में घूमते है है एसी घर मे रहते है मालिक उन्हें खुद नहलाता है, भले ही माता पिता की सेवा न करता हो, परिग्रह रखोगे तो सुख सुविधाएं मिलेगी लेकिन ऐसे कुत्ते जैसा भव मिलेगा। धन मे अत्याधिक आसक्ति रखोगे तो अगले जन्म में नाग बनकर उस धन की चौकीदारी करोगे। तो ताजगी गार्डन के फूल मे है, वह गमले के फूल मे नही है तो महक गमले के फूल मे है वैसी प्लास्टिक के फूल में नही। कुछ व्यक्ति गार्डन के फूल की तरह होते है खुद भी खाते है और को भी खिलाते है, सबका ख्याल रखते है, कुछ व्यक्ति गमले के फूल समान होते है जो खुद खाते है ज्यादा से ज्यादा अपने परिवार का ध्यान रखते है, बाकी किसी के बारे में नही सोचते है। और कुछ व्यक्ति कागज के फूल के समान होते है जो न तो खुद खाते है न दुसरो को खिलाते है । द...
परिग्रह करोगे तो या तो खाएगा परिवार, या ले जाएगी सरकार-पूज्याश्री डॉ संयमलताजी मसा मालव केसरी श्री सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा के आज्ञानुवर्तिनी पंडित रत्न मालव भूषण श्री महेन्द्र मुनि जी मसा के देवलोक गमन पर श्री वर्धमान स्थनकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक द्वारा गुणानुवाद सभा का आयोजन रखा गया, जिसमें महासाध्वी डॉ संयमलता जी मसा ने 04 लोग्गस का काउसग्ग करवाया, संघरत्न इंदरमल जैन, महेंद्र बोथरा, अजय खमेसरा एवं विनोद बाफना ने भी म.सा. के प्रति आदरांजली अर्पित की, ततपश्चात मसा ने माँगलिक फरमाइ। महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी मसा ने परिग्रह के बारे में बताया की जितना हम छोडना चाहते है उतनी ही इच्छा बढ़ती जाती है। परिग्रह भी 02 प्रकार के होते है। सचित परिग्रह और, अचित परिग्रह, सचित परिग्रह में दास-दासी, नौकर-चाकर, पशु-पक्षी आदि का परिग्रह होता है और अचित परि...