पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य मे जैन स्थानक बठिंडा मे बोलते हुए डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जैन धर्म के अनुयायी श्रावक के 12 व्रतो पर प्रकाश डाला एवं नवमा सामायिक का महत्व बतलाया! जीवन मे समता विषमता के भाव आते जाते रहते है! विषमता के वातावरण मे समता भाव को बनाए रखना ही धर्म का स्वरूप है! प्रात : काल से हमारी दैनिक जीवन चर्य प्रारम्भ होती है रात भर बिसों कार्यों के लिए बिसो लोगों से मिलना जुलना घर परिवार समाज व्यपार मे नाना भांति के लोगों से नाना प्रकार के कार्य व लेंन देन बना रहता है! उन तमाम गतिविधियों मे मन को समता भाव से बनाए रखना, इसके अलावा आत्म साधना हेतू सामायिक की साधना का वर्णन आगमो मे आया है! जिसके अंतर्गत मन वचन काया के तमाम कार्यों का परित्याग कर आत्म चिंतन मनन किया जाता है करते हुए परम शुद्ध अवस्था प्राप्त हो जाए तो केवल ज्ञान की प्राप्तिकर समस्त कर्मों का नाश हो जाता है! ऐसी उत्क...
दुर्ग/ जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग मे भगवान जन्म वाचन एवं माता त्रिशला के 14 स्वप्न पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर प्रस्तुति दी। श्रमण संघ महिला मंडल श्रमण संघ बालिका मंडल एवं पाठशाला के छोटे-छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति दी जिसे उपस्थित जन समुदाय ने बेहद सराहा। भगवान जन्म वाचन के समय चुनरी उड़ाने की याद तपस्या की एवं जाप अनुष्ठान की बोली लगाई गई। 118000 नवकार महामंत्र की बोली श्री जितेंद्र कोचर ने ली। इसी तरह प्रदीप श्री श्रीश्रीमाल ने 81000 नमोथुण माला फेरने की बोली ली। 500000 गाथा स्वाध्याय करने की दो लोगों ने बोली ली। इसी तरह माता त्रिशला के 14 स्वप्न की भोली भी त्याग और तपस्या के संकल्प लेने वालों को दी गई और इन तपस्वी ओं का सम्मान जुगराज नेमीचंद संचेती परिवार निर्मल कुमार मनीष कुमार मेहता परिवार मदनलाल श्री श्...
श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में गुरूवार प्रातः दिनांक 9 सितम्बर 2021 को श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के छठा दिन सूत्र वाचन, प्रवचन एवं धर्माराधना प्रतियोगिताएं, प्रतिक्रमण आयोजित किया गया। पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के छठा दिन के अवसर पर महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने विशेष प्रवचन – है रे बुढ़ापा विषय पर फ़रमाया कि संसार परिवर्तनशील है। इसके कण कण में प्रत्येक क्षण परिवर्तन का चक्र चला करता है। आज जो बालक है, कल को वह वृद्ध हो जाता है। वृद्धावस्था में व्यक्ति शारीरिक, मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है इच्छाओं की वृद्...
7 सितंबर अशोक नगर / मांत पिता की सेवा ही सच्ची सेवा है। पयुर्षण महापर्व के पांचवे दिवस विज्ञान समिति अशोक नगर मे आयोजित विशेष धर्मसभा को सम्बोधित करते हुये प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने कहां कि महावीर स्वामी राम श्रीकृष्ण आदि महापुरुषों ने अपने माता पिता की सेवाकर करके भगवान बने। श्रवण कुमार ने मात पिता सेवा करके अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया। ऐसे ही अनेक पुरूषों ने सेवा को सार जानकर दिन दुखीःयो की सेवा करेके अपने जीवन को महान बनाया। सेवा निस्वार्थ होगी तभी व्यक्ति अपने को महान बना पायेगा ! महेशमुनि मुनि सचिन मुनि अखिलेश मुनि व डॉक्टर वरूण मुनि आदि संतोने ने कहां कि जैसी सेवा करोगे वैसा ही फल मिलेगा। धर्मसभा सैकड़ों भाई बहनो उपवास एकांसन आयंबिल आदि के प्रत्याख्यान लिये। मीडिया प्रवक्ता सुनिल चपलोत लोकाशाह जैन स्थानक अशोक नगर उदरयपुर
पर्युषण के पांचवे दिन भगवान महावीर के जन्मोत्सव पर बोलते हुए डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने महावीर के अंनत उपकारों का वर्णन किया आज जो भी जैनधर्म का स्वरूप दिखलाई दे रहा है! अहिंसा सत्य क्षमा शाकाहार दया दान पुण्य अनेकान्त वाद अपरिग्रह वाद मानववाद ये सभी शिक्षाएं हमें महावीर की बदौलत प्राप्त हुई है! यधपी महावीर का जन्म चेत सुदी तेरस के दिवस हुआ फिर भी आज के दिवस भी उनको स्मरण वन्दन किया जाता है! महवीर वाणी को ही आगम वाणी कहा जाता है! इन आगमो का पठन पाठन ही वस्तुत : स्वाध्याय सामायिक कहा जाता है! महावीर के तप धर्म का विवेचन करते हुए मुनि जी ने जैन धर्म का दूसरा नाम तप धर्म बतलाया! जो कठोर तप जप ध्यान साधना प्रभु वीर ने की वो बेमिसाल है!सम्पूर्ण जगत जैन धर्म के इस अखण्ड तप से अचम्भइत है! एक दिन के उपवास से लेकर सेकंडो दिवस गर्म पानी के आधार पर कई भक्तजन आज भी दृढ संकल्प से इस तप को पूर्ण करते ह...
जीवन में सदविचार की भावना जीवन को प्रगति की और अग्रसर अग्रसर करती है। हमें इस जीवन में पुण्य का उपार्जन पाप का विसर्जन ध्यान का अर्जन आत्मा के सृजन का विचार इस मानव जीवन को सदमार्ग की ओर ले जाती है। उक्त विचार जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग की धर्म सभा में संत गौरव मुनि ने व्यक्ति किये। पयुर्षण पर्व की धार्मिक संस्कार में सभी वर्ग के लोग अपनी हिस्सेदारी दर्ज कर रहे है। संत गौरव मुनि ने आगे कहा शुभ विचार, दया के विचार जीवन में स्वस्थ चिंतन को जन्म देती है। अशुभ एवं अपवित्र विचार मानव मन मस्तिक में अहंकार की भावना को जन्म देती हे और जहां अहंकार होता है वहां विनाश निश्चित है। पयुर्षण पर्व के दौरान दैनिक दिनचर्या के रूप में सुबह प्रतिक्रमण, प्रार्थना, प्रवचन मंगल पाठ, महिलाओं की धार्मिक शिक्षा, धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम संध्याकालीन प्रतिक्रमण रात्रि में जयमल जी महाराज का चमत्कारी ज...
सैकड़ों महिला ओ ने चुदड़ी उपवास हांथ जोड़ कर पच्खाण लिये 7 सितंबर अशोक नगर पयुर्षण महापर्व के चतुर्थ दिवस मंगलवार विज्ञान समिति मे चुदड़ी के उपवास करने वाली बहनों व भाईयो को धर्मसभा मे सम्बोधित करतें हुयें प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने कहां कि मानव की आत्मा संसार से मुक्ति पाने के लिए अनादिकाल से भ्रमण कर रही है। मुक्ति के दवाजे को पाने का सबसे सहज मार्ग दान परन्तु हर्ष और प्रमोद के द्वारा दान करने वाले ही पुण्य का संचय करके अपनी आत्मा को निर्मल और पुण्यसाली बना सकते है। बिना भावों से दिया गया दान जीवन मे कौई महत्व नहीं रखता है दान देतें समय भावना उत्तम होगी तभी दान का सही फल मिल पायेगा और आत्मा संसार सागर से योनियों से मुक्त हो पायेगी! महेशमुनि मुकेश मुनि अखिलेश मुनि व डॉक्टर वरूण मुनि आदि संतो ने कहाँ कि जैसा करोगे वैसा ही फल प्राप्त करोगे दान पुण्य करने से बंधे कर्मो बंधन टुटते है ! लोका...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने पर्युषण के चतुर्थ दिवस पर चारित्र संयम पर बोलते हुए उन महान त्यागी तपस्वी आत्माओं को वंदन करते हुए चारित्र के तीन प्रकार बतलाए! मन वचन काया का संयम जीवन में अत्यावशक है! मन के संयम के अभाव में तरह तरह के रोग शोक जीवन में पनपते रहते है! जब व्यक्ति मन का गुलाम बन जाता है मन में हजारों इच्छाएं प्रतिदिन उभरती पणपति रहती है! उन तमाम इच्छाओ को इस जन्म में तो क्या कई जन्मो में भी पूर्ण नहीं की जा सकती! मन के मते चलने वालों का पतन ही हुआ है! मन संयम से जीवन का उथान कल्याण होता है! इसी के साथ वाणी का संयम भी आवश्यक है वाणी के चलते तो महाभारत हो गया! हम घर परिवार संघ समाज में शान्ति चाहते है तो हमेशा बोलने के पूर्व एक एक शब्द हृदय रूपी तराजू में तोल तोल के बोलना सीख लें! इसी से जुडा हुआ है अपनी काया का संयम अर्थात पांच इन्द्रियों को वश में रखना भी जरुरी है! जो हमे...
बेंगलुरु। श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में सोमवार प्रातः दिनांक 6 सितम्बर 2021 को श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के तीसरे दिन सूत्र वाचन, प्रवचन एवं धर्माराधना प्रतियोगिताएं आयोजित किया गया। पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के तीसरे दिन के अवसर पर महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने विशेष प्रवचन कैसी करे तपस्या जो दूर हो समस्या विषय पर फ़रमाया की हमारा देश तप त्याग प्रदान देश है। वैभव कितना भी महान क्यों न हो लेकिन तप त्याग उससे भी महान होता है। तप की साधना का वैज्ञानिक व धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व है। शरीर को निरोगी बनाये रखने ...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आज पर्युषण पर्व के तीसरे दिन प्रवचन करते हुए श्रद्धा विश्वास को प्राण की तरह अमूल्य बतलाया। जीवन के प्रत्येक कार्यों में चाहे घर के व्यपार के यात्रा के कोर्ट कचहरी या पार्टी इत्यादि प्रत्येक कार्य में एक दूसरे पर श्रद्धा न हो तो वो कार्य कदापि सफल नहीं हो सकता! धर्म आराधना साधना में तो देव गुरु धर्म के प्रति प्राण तुल्य श्रद्धा होनी ही चाहिए, शरीर का महत्व प्राण से तो धर्म का महत्व श्रद्धा से होता है! मुनि जी ने देव शब्द को पवित्र मानते हुए अरिहंत प्रभु की व्याख्या की जिनके जीवन में तनिक मात्र भी राग द्वेष नहीं रहता, समस्त जीवों को एक नजर से समता से देखते है! भगवान महावीर के जीवन में भयंकर से भयंकर उपसर्ग परिषह आए किन्तु कभी भी विचलित नहीं हुए चेहरे पर सदा करुणा दया वात्सल्य भाव बना रहा! इसी के साथ गुरु शब्द को त्यागी संयमि जीवन का प्रतीक माना गया! जो अर...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने पर्युषण पर्व को आत्मा का पर्व बतलाते हुए कहा जैसे हमारा मन व्यापार में घर के काम धंधे मे समाज मे आगे बढ़ना चाहता है वैसे धर्म कार्य मे आत्म कल्याण मे आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए ही ये पर्व आए है! भगवान महावीर ने आत्म ज्ञान को आत्मा का निजगुण बतलाया है अर्थात ज्ञान सदा साथ रहता है! जनरल दुनियादारी के ज्ञान को हम सदा बढ़ाने का प्रयास करते है! विश्वभर मे स्कूल कालेज यूनिवर्सिटीयों मे तरक्की विकास के तरीके सिखाए जाते है जो आगे जाकर राग द्वेष को बढ़ाने के विधवंस के कारक बनते है। इसी ज्ञान के साथ साथ अध्यात्म का ज्ञान, सभी को शान्ति सुखी बनाने वाली शुभ भावनाओं को कक्षायो को विकारो के जीतने का ज्ञान दिया जाना वर्तमान मे अत्यावशक है नहीं तो एक दिन इन्सान इन्सान को ही मिटा देने का ज्ञान हासिल कर विश्व को विनाश के कागार पर लाकर खड़ा कर देगा। मुनि जी ने आगमो की व्य...
5 सितंबर अशोक नगर उदरयपुर पर्वाधिराज पयूषण महापर्व के दुसरे दिन विज्ञान समिति मे आयोजित विशेष धर्मसभा मे प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने अपने केशलोंच करते हुयें कहां कि सत्य थक सकता है परन्तु कभी हार नहीं सकता है। सत्य को झुठलाया और मिठाया नहीं जा सकता सत्य ही जीवन और सत्य ही ईश्वर है। इंसान अगर झूठ भी बोलता है तो सत्य का साहरा लेकर, सत्य के बिना मानव जीवन की राह व आत्मा का उध्दार नहीं कर पायेगा ! इसदौरान नानेश मुनि डॉक्टर वरूण मुनि ने अंतगढ़ शास्त्र का वाचन करते हुये कहां कि कि सत्य को स्वीकार ना मुश्किल हो सकता है परन्तु सत्य के बिना मनुष्य का जीवन नहीं चल सकता है। उपप्रवर्तक अमृत मुनि महेशमुनि, तपस्वी मुकेश मुनि हरीशमुनि आदि संतो की प्रेरणा पर चातुर्मास समिति के संयोजक मांगीलाल लुणावत अध्यक्ष कांतिलाल जैन, ओकारसिंह सिरोया, राजेन्द्र खोखावत, कन्हैयालाल महता, सुरेश गुन्देचा, रणजीतसिंह सोजतिय...