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धरती के मंदार – भगवान महावीर: साध्वी अणिमाश्री

भगवान महावीर निर्माण कल्याणक (दीपावली) पर विशेष आलेख वीतरागता की अनुभूति में रमण करने वाली चेतना का नाम है भगवान महावीर। अध्यात्म के द्वारा अपना कायाकल्प करने वाली चेतना का नाम है- भगवान महावीर। सुख भोग के हजारों हजारों साधनों के बीच रहकर भी त्याग के शिखर का स्पर्श करने वाली चेतना का नाम है – भगवान महावीर। अहंकार और ममकार पर विजय प्राप्त करने के लिए स्वयं के साथ युद्ध करके परम विजेता बनने वाली चेतना का नाम है भगवान महावीर। दुनिया के बीच रहकर भी खुद को समझने वाली चेतना का नाम है- भगवान महावीर। राजसी ठाठ-बाट में पलकर महलों को त्याग, आत्मोत्कर्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील का नाम है – भगवान महावीर। विक्रम पूर्व 542 और ईसा पूर्व 499 की यह घटना है जब क्षत्रियकुण्ड ग्राम के महाराज सिद्धार्थ के राजमहल में महारानी त्रिशला की रत्नकुक्षि से चैत्र शुक्ला त्रयोदशी की मध्यरात्रि में एक शि...

गरीब जैन परिवार को अपना घर देगा रायसोनी परिवार

दुर्ग/छत्तीसगढ़ जैन संत गौरव मुनि का जन्म जय आनंद मधुकर रतन भवन दुर्ग में दान एवं सेवा विषय पर प्रवचन चल रहा था उस समय प्रवचन में रायसोनी परिवार के सदस्य गुलाब राय सोनी एवं किशोर राय सोनी प्रवचन सभा में उपस्थित थे। संत गौरव मुनि के दान विषय पर प्रवचन से प्रभावित होकर श्रमण संघ परिवार के लिए जय लाल गुलाब मधुबन के नाम से एक भवन बनाकर देने की घोषणा की। धर्म सभा में की और वह घोषणा आज छत्तीसगढ़ प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव रतन मुनि के आशीर्वाद से अब मूर्त रूप लेने जा रही है। रायसोनी परिवार की प्रमुख सदस्य माता हावड़ी बाई सोनी की प्रेरणा से उनके पुत्र गुलाब किशोर राय सोनी ने एक सर्व सुविधा युक्त भवन जय लाल गुलाब मधुबन श्रमण संघ के लिए बनाकर देने जा रहे हैं। जहां यहां आने वाले साधु साध्वी के सानिध्य में धार्मिक क्रियाओं का संचालन एवं चातुर्मास एवं अन्य दिवस में साधु संत यहां विराजमान रहेंगे। साथ ही श्र...

महावीर वाणी से ही विशव मे अमन चैन सम्भव: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने उत्तराध्ययन सूत्र क़े माध्यम से महाप्रभु महावीर वाणी पर बोलते हुए जीवन की क्षण भंगूरता का वर्णन किया, जीवन मे सुख दुख लाभ हानि का सम्बन्ध बना रहता है! इन क़े आने जाने पर अहंकार व कष्ट का अनुभव न करके मन मे सदा समत्व योग की साधना मे मन को लगाए रखना ही वास्तविक धर्म साधना है! सनतकुमार चक्रवर्ती सुन्दर रूप यौवन राज्य वैभव से सम्पन थे किन्तु जीवन मे अचानक दाह ज्वर से सम्पूर्ण शरीर मे आग आग सा अनुभव होने लगा धर्म स्मरण करते रहे वेदना शान्त हुई एवं स्वयं राज्य वैभव का त्याग कर संयम क़े मार्ग को अनुसरण करते! इसी प्रकार कपिल केवली गरीब ब्राह्मण परिवार क़े होने से राजा से याचना हेतु महलो मे गए राजा दान देने को तैयार होता, कपिल की इच्छाएं अनंत रूप धारण कर लेती है पुन : शुभ भावों का जागरण होता है तो सर्वस्व त्याग कर केवली बन कर मोक्ष को प्राप्त कर लेते है! किए हुए पाप ...

प्रतिशोध रखने वाला मानव जीवन मे कभी सुखी भोग सकता: प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज

1 नवंबर/अशोक नगर परोपकारी उपकारी पुरूष का उपकार नहीं भुले वरना जिंदगी मे कभी सुख नहीं मिलने वाला प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने लोकाशाह जैन स्थानक मे सोमवार को आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करतें हुये कहे कहां कि प्रतिकार प्रतिशोध रखने वाले मानव के जीवन मे कभी सुख शांति नही मिलेगी और आत्मा यूहि योनियों मे भटकती रहेगी ! हरीश मुनि ने कहां कि  सांसो का कौई भरोसा नहीं कब आये या ना आये यह कौई नहीं बता सकता परन्तु फिर भी इंसान जगत को अपना समझ के जीवन को बरबाद कर रहा है! श्री संघ.के अध्यक्ष कांतिलाल जैन ने बताया कि संत शिरोमणी सुकन मुनि महाराज  दिपावली के दुसरे दिन तीन दिवसीय तैले तप और मौन साधना के शुक्रवार को प्रातः लोकाशाह जैन स्थानक मे सभी को सर्व सिध्द दायक महामंगल पाठ सुनायेंगे ! मीडिया प्रवक्ता, सुनिल चपलोत, लोकाशाह जैन स्थानक, अशोक नगर, उदयपुर

दीपावली पूजन थाली डेकोरेशन प्रतियोगिता

तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा आयोजित साहूकारपेट, चेन्नई  :- तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई के तत्वावधान में दीपावली के उपलक्ष्य में दीपावली पूजन थाली डेकोरेशन प्रतियोगिता का आयोजन सोमवार को तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में किया गया।  हस्तनिर्मित थाली डेकोरेशन के साथ जैन संस्कार विधि द्वारा पूजन सामग्री सहित प्रतियोगिता रखी गयी। इस प्रतियोगिता का साध्वीवृंद ने अवलोकन किया। लगभग 13 बहनों ने बड़े उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक की भूमिका अभातेयुप जैन संस्कारक श्रीमान स्वरूप चन्द दाँती एवं अभातेमम राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या श्रीमती दीपा पारख निभाई। स्वरूप चन्द दाँती ने सभी प्रतियोगियों को जैन संस्कार विधि पूजन एवं सामग्री के बारे में विशेष जानकारियों से सभी अवगत कराया एवं दीपाजी ने अपने भावपूर्ण विचार व्यक्त करते हुए रिजल्ट घोषित किया। इस प्रतियोगिता का अनेक भाई बहनों ने अवलोकन कर...

महावीर के जीओ व जीने दो के सिद्धांत को जीवन मे उतारे: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जीवन का संयम बतलाते हुए भगवान महावीर की निर्वाण पूर्व वाणी जो जैन जगत मे उत्तराध्ययन सूत्र के नाम से विख्यात रही है जिसे जैनों की गीता कहा जाता है! इसके 36 अध्यायों मे जैन धर्म के 36 सिद्धांतो का गुणों का वर्णन किया गया, सेंकड़ो उदाहरणों द्वारा जीवन मे तप त्याग की महत्ता प्रदर्शित की गई! सूत्र के प्रथम अध्याय मे सर्व प्रथम अहंकार का परित्याग कर विनम्र नम्रता का वर्णन किया गया! जीवन मे आगे बढ़ने हेतु विनय धर्म आवयशक है! अपने से बड़े जो भी व्यक्तिगण हो चाहे हमारे परिचित पारिवारिक या संसार की समस्त आत्माए भी हो मन मे समस्त प्राणिओ को नमस्कार विनय का भाव रखना आवश्यक है! मुनि जी ने अकड़पन को अहंकार की निशानी बतलाया एवं अकड़ने वालों का पतन निशचित होता है! प्राप्त वस्तुओं का सदा सदुपयोग हो न कि अहंकर हो! सूत्र के दूसरे अध्याय मे जीवन मे तरह तरह के कष्ट आते जाते रहते...

आचार्य देवेन्द्र मुनि गुणों के गुलदस्ता व धर्म नायक थे: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

आचार्य देवेन्द्र जन्म जयंति के उपलक्ष्य मे आयोजित समारोह मे बोलते हुए डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आचार्य के गुणों व अतिश्यो का वर्णन करते हुए कहा कि वे ज्ञान दर्शन चारित्र तप जप साधना से सम्पन रहते है साथ ही उनकी 8 सम्पदाए पुण्य दायक बनी रहती है उनके वचन अमृत तुल्य होते है जो फलदाई बनते है! हमारा जीवन भी उनके तुल्य बने हम भी उनकी बताई हुई भक्ति पूजा पाठ का अनुसरण करें! जीवन तो क्षण भंगूर है नाशवान है चाहे अमीर हो गरीब हो चाहे सबल हो निबल हो सभी के संग कुदरती व्यवहार एक सा रहता है आना जाना यही जीवन की वास्तविकता है व सदा बनी रहेगी! विश्व का कोई भी वैज्ञानिक इसे चुनौती नहीं दे पाता! सभा मे धर्म संचालन करते हुए साहित्यकार श्री सुरेन्द्र मुनि जी ने भक्तामर समापन की घोषणा करते हुए विधिविधान संम्पन्न करवाये एवं गुरु देवेन्द्र को सामूहिक वन्दना समर्पित की! समारोह की अध्यक्षता करते हुए लुधियाना के...

भक्ति की शुभ तरंगों से आज भी रोग निवारण संभव: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्तामर के उप संहार पर बोलते हुए कहा कि इसके रचनाकार रचना करते हुए प्रभु आदिनाथ की भक्ति मे इतने तल्लीन हो गए कि उनकी एकाग्रता पूर्णतः समर्पित होने लगी, युगल शब्दों की ध्वनिओं से जो बेडियों से शरीर बंधा जकड़ा हुआ था वह स्वतः मुक्त होने लगा एवं समस्त कष्टो का निवारण हो गया! वस्तुत : भक्ति का तापमान जब चरम सीमा पर पहुँचता है तो अशुभ परमाणु अशुभ पापमय शक्तियां समाप्त हो जाती है अर्थात आसुरी शक्तियां भी देविक शक्तिओं के सामने नत मस्तक हो जाती है! इतिहास के उज्जवल पृष्ठ इस बातों के आज भी साक्षी है! चाहे नल दमयंती के कष्ट हो, चाहे राम सीता की, मीरा, कबीर, सूरदास या प्रभु महावीर आदि के जीवन मे आने वाली बाधाएं हो उनका सहज निवारण हो जाता है! इसके पीछे मुनि जी ने तीव्र भावों के परिणामों का असर बतलाया जो वर्तमान मे भी सम्भव है! सभा मे आचार्य श्री देवेन्द्र जयंति निम...

कार्यकर्ता सामजस्य और समपर्ण भाव से करे कार्य : साध्वी अणिमाश्री

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा ट्रस्ट बोर्ड की टीम का शपथ ग्रहण साहुकारपेट, चेन्नई  :- साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा ट्रस्ट बोर्ड, साहुकारपेट की नवगठित टीम का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। साध्वी अणिमाश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि समस्या जीवन में आती रहती है। जो व्यक्ति समस्या का समाधान खोज लेता है, उससे निजात पा लेता है, पार पा लेता है। वह सफलता की सिढ़ी पर आरोहण कर लेता है। समस्या कई बार नये आयामों का उद्घाटन करने वाली भी बनती है, बशर्ते समाधान की दिशा में बढ़ा हमारा कदम सम्यक हो, निस्वार्थ हो।  साध्वीश्री ने ट्रस्ट बोर्ड की नवगठित टीम के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना करते हुए कहा कि चेन्नई तेरापंथ सभा एवं ट्रस्ट बोर्ड का सामजस्य बेजोड़ हैं। सभी संघीय संस्थाओं के साथ अच्छा तालमेल है। पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं में संघ और संघपत...

साधना की सफलता के लिए जप तप की साधना करना अति आवश्यक: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जैनआचार्य श्री देवेंन्द्र मुनि जी के पंच दिवसीय जयंति महोत्सव पर आज प्रथम जाप दिवस पर बोलते हुए कहा कि साधना के महामार्ग पर आगे बढ़ने के लिए जप व तप का करना अतिआवश्यक है! साधक की पहचान ही इन्ही मार्गो से होती है! जप के नानाभांति भेद शास्त्रों मे उल्लंखित है उनमे से प्रमुख तीन भेद भावय जाप जो जोर से उच्चारण के साथ संम्पन्न किया जाता है जिसकी ध्वनि से वातावरण पवित्र बनता है एवं अनेक प्रकार के रोग शोक शान्त होते है! जिसे वर्तमान मे सामूहिक जाप से जाना जाता है! जो वायुमंडल को अपने शब्द तरंगों से व्याप्त कर देता है सामूहिक जप मे आने वाले भक्तजनो साधको गुरुजनों के प्रबल पुण्य का भी प्रभाव पड़े बिना नहीं रहता, एक भी पुण्य पुरुष उसमें सम्मलित होता है तो उसका लाभ सभी को प्राप्त होता है! चंदन फूल इत्र की सुवास की भांति जाप की सुवास भी बाहरी व आंतरिक कष्टों का निवारण...

निःशुल्क जनरल फिजिशियन व चाइल्ड मेडिकल चैकअप कैम्प लगाया गया

लोगों की पुरजोर मांग पर एस एस जैन सभा बठिंना की और से कपड़ा मार्किट सिथत जैन स्थानक मे आज दिनांक 28 अक्टूबर दिन वीरवार को निःशुल्क जनरल फिजिशियन व चाइल्ड मेडिकल चैकअप कैम्प लगाया गया! सुबह 9.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले इस कैम्प मे पंजाब कैंसर केयर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डाक्टर जाहिद मंजूर काजी व शिशु रोग विशेषज्ञ डाक्टर विवेक गुप्ता जी ने 50 से उपर मरीजों का चेकअप करके उचित परामर्श दिया। जबकि इस कैंप मे जरुरतमंदो को दवाएं भी मुफ्त दी गई! दोपहर एक बजे तक चले इस कैंप मे ई सी जी, शुगर, और ब्लड चैकअप भी मुफ्त किया गया! सभा के प्रधान महेश जैन व महासचिव उमेश जैन ने डाक्टर टीम और अन्य सहयोगिओ का आभार जताया! जैन सभा की तरफ से डाक्टर एवं उनके साथ आये स्टॉफ के लिए चाय पानी व खाने का इंतजाम किया! आये हुए सभी मरीजों ने जैन सभा व डाक्टर सहबान की इस नेक कार्य के लिए भरपूर प्रशंसा की औ...

साधना की सफलता के लिए तनमन की शुद्धि आवश्यक है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आदिनाथ भगवान के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनकी गुण महिमा मे विरचित आचार्य श्री मानतुंग के भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से नाम स्मरण का विवेचन किया!प्रभु का नाम स्मरण दवा से बढ़कर भी महा दवा का कार्य करती है! आवश्यकता है हमारा भक्त का रोम रोम समर्पित हो! भक्ति करते समय किंचित मात्र भी मन मे मोह वासना या सासारिक वस्तुओं की लालसा पैदा नहीं होनी चाहिए! अक्सर हमारा मन धर्म साधना के समय नाना भांति सांसारिक वस्तुओं को प्राप्त करने का इच्छुक बना रहता है इसीलिए मन को गुरुजनों ने उल्टी चाल घोड़े की उपमा से संवारा है! जिस भावना का निषेध किया जाता है वही भावना बार बार उभर कर सामने प्रकट होती रहती है!उदारहण देते हुए मुनि जी ने उस साधक का वर्णन किया जिसको कहा गया साधना काल मे बन्दर का रूप स्वरूप नजर नहीं आना चाहिए जयोही साधना प्रारम्भ की गई त्यों ही हजारों की संख्या म...

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