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सबव्रतो मे श्रेष्ठ व्रत है शीलव्रत- प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज

28 अक्टूबर अशोक नगर सब व्रतों मे श्रेष्ठ व्रत है शीलव्रत प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने बुधवार को शील व्रत के संकल्प लेने पर अनूमोदना करते हुये कहां कि भागशाली पुरूष ही ऐसे व्रतों को अंगीकार करके जीवन को श्रेष्ठ बनाकर संसारी मोह के बंधनो से छुटकारा पाते है। श्री संघ के महामंत्री राजेन्द्र खोखवत ने बताया कि बुधवार को सौभाग्यपुरा मे स्थिति नाकोड़ा सुकन पैलेस मे संत शिरोमणी सुकन मुनि महाराज के मंगल पदार्पण पर श्री संघ अध्यक्ष कांतिलाल जैन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत अरिवंद झगड़ावत यशवंत परमार संजय चंडालियामांगीलाल जोशी, राजेश चपलोत, सुंदरलाल तातेड़ आदि पदाधिकायो व परिजनों की उपस्थिति मे प्रथम बार गुरूदेव के आगमन पर ख्यातिलाल सुरजदेवी चंडालिया ने सहजोड़े आजीवन शील व्रत का सकल्प लिया। जिसपर लोकाशाह जैन स्थानक पदाधिकायो शोलमाला माला पगड़ी व चंदड़ी ओढ़कर चंडालिया दमपत्ती का शीलव्रत के त्य...

उमराव अर्चना शताब्दी वर्ष 2021-22

श्रमण संघीय प्रथम यवाचार्य श्री मिश्रीमलजी म.सा.’मधुकर’ की अनतेवासिनी काशमीर प्रचारिक पू .राजगुरुमाता उमरावकुवजी अर्चना म .सा .की सुशिष्या महासती डॉ श्री हेमप्रभाजी .म.सा. की सत्प्रेरणा से श्रमण संघीय जैन धार्मिक परीक्षा बोर्ड की स्थापना 2016 में रायपुर (छत्तीसगढ़ )में की गई ।इसके यअंतर्गत में जैन संस्कार आरोहण की पाठयक्रम में सूत्रज्ञान, सामान्य ज्ञान, धर्म कथाएं आदि को सुव्यवस्थित स्थान दिया गया है। यह परीक्षा राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक,तमिलनाडु कक्षा 1-5 तक परीक्षा ली जाती है। इस वर्ष 15 अगस्त 2021 को यह परीक्षा ली गई हैं।इसका परिणाम 24 अक्टूबर 2021 को जैन भवन में विराजित साध्वी श्रिद्धी जी, साध्वी सिद्धिजी के निश्रा में घोषित किया गया। बोर्ड एस. एस. जैन संघ साहुकारपेट का आभार व्यक्त करते है। इस परीक्षा के पुरस्कार के लाभार्थी श्रीमान श्रेणिकराज जी पुष्प कुमार जी चो...

आत्म उज्ज्वलता का अनुष्ठान है संथारा : साध्वी अणिमाश्री

श्रीमती माणकदेवी बोकडिया की स्मृति सभा का आयोजन  साहूकारपेट, चेन्नई  : – साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में सुश्राविका  श्रीमती माणकदेवी बोकड़िया के अनशन के साथ देवलोकगमन हो जाने पर तेरापंथ सभा भवन में स्मृति सभा का आयोजन किया गया।  साध्वी अणिमाश्री ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा जन्म व मृत्यु दोनों अनिवार्य अंग है। जन्म के साथ मृत्यु जुड़ी हुई है। जो आया है, उसका जाना निश्चित है। किंतु विरले व्यक्ति ऐसे होते है, जो कलात्मक ढंग से मरने की कामना करते हैं एवं समाधिमय मृत्यु की दिशा में अग्रसर होते हैं। बहन माणकदेवी बोकडिया ने इस तत्व को गहराई से समझा एवं अनशन ग्रहण कर भगवान महावीर की वाणी को चरितार्थ किया। संथारा आत्म उज्ज्वलता एवं निर्मलता का महान अनुष्ठान है। अनासक्ति व निर्लेपता जैसे गुणों से युक्त व्यक्ति ही साधना का मार्ग स्वीकार कर सकता है। लगता है माणकबाई के जीवन में अनासक्ति के ...

धार्मिक क्षेत्र मे हृदय की शुद्धता आवश्यक है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने मनोभाव को पवित्र बनाने के लिए गुरुजनो की स्तुति प्रार्थना का स्मरण करना आवश्यक बतलाते हुए कहा जो कार्य शुद्ध हृदय से किया जाता है उस कार्य की सफलता मे कई गुणा वृद्धि स्वतः हो जाती है! जिनवाणी जो तीर्थंकर भगवान की वह पवित्र वाणी है जिसमें रंच मात्र भी राग द्वेष के भाव नहीं रहते, झरने से निकला हुआ पानी एक दम निर्मल होता है उसमें किसी भी प्रकार का कूड़ा कचरा नहीं होता, आकाश से बादलों द्वारा जो बुंदे गिरती है एक दम साफ स्वच्छ जल को लिए रहती है! धरती पर आकर अस्वच्छ हो जाती है!परमपिता परमात्मा की वाणी पूर्णतः शुद्धता को लिए रहती है!हमारा अपना हृदय ही विविध पापों से भरा पड़ा रहता है हृदय रूपी पात्र अशुद्धि से भरा है अगर शुद्ध पात्र मे भगवद वाणी ली जाएगी तो उसका असर भी मांगलकारी होगा! मुनि जी ने उदारहण देते हुए कहा एक योगी शहर मे अमृतबेचने आया भीड़ अपने अपने पात्र ...

श्रृंगार परिवार टी 20 सीजन दो का भव्य समापन

JMC इंडियंस टीम बनी नई चैंपियन चेन्नई 24.10.2021 :  शकुंतलादेवी पितलिया स्मृति मारूति बिल्डर, सहप्रायोजक उम्मेदसिंह बोकड़िया श्रृंगार परिवार टी 20 सीजन दो क्रिकेट टूर्नामेन्ट के फाइनल मैच में जे एम सी इंडियंस ने 916 वारियर्स को आठ विकेट से हराकर एसपीटी 20 सीजन 2 विजेता ट्राफी का खिताब अपने नाम किया।  टॉस हारने के बाद  ए एम जैन कॉलेज के हरे-भरे मैदान पर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वारियर्स टीम ने निर्धारित 30 ओवर में 8 विकेट पर 158 रन बनाकर JMC के सामने एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। सावधानी से लक्ष्य का पीछा करते हुए JMC इंडियंस ने मौसम के व्यवधान के समय तक 15.3 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 87 रन बना लिए थे। बारिश के न रुकने की स्थिति में अंततः अम्पायरों द्वारा पिच को आगे के खेल हेतु अयोग्य घोषित किया गया एवं डकवर्थ लुईस नियम के अनुसार घटे हुए लक्ष्य के आधार पर JMC इंडियंस को विजेता घोषित किया गय...

कंफर्ट जोन से निकल चैलेंज को करें स्वीकार : साध्वी अणिमाश्री

उत्कर्ष – करे शिखर का स्पर्श : जैन कन्या सम्मेलन का हुआ आयोजन    साहूकारपेट, चेन्नई :-   साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई के तत्वावधान में कन्या मंडल द्वारा जैन कन्या सम्मेलन का शानदार आयोजन हुआ। उत्कर्ष कार्यक्रम में कन्याओं की वर्धमान उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को सतगुणित कर दिया। हर मुख से एक ही स्वर अनुगुंजित हो रहा था कि कन्याओं का ऐसा भव्य कार्यक्रम पहली बार आयोजित हो रहा है।    साध्वी अणिमाश्री ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि कन्या परिवार का आभूषण है। कन्या दो परिवारों को जोड़ने वाला सेतु है। कन्या को संस्कारी बनाना दो परिवार के गौरव को अभिवर्धित बनाने वाला घटक तत्व है। आज कन्याओं ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। विभिन्न विषयों पर कार्यक्रम रख कर उन्होंने कामयाबी की इबारत लिखी है। जीवन में उत्कर्ष की कामना रखने वालों ने कभी शिखर को स्पर्श नहीं क...

प्रार्थना से मानसिक शारीरिक रोगों का निवारण होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्तामर स्तोत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि यह चमत्कारी महास्तोत्र भक्त द्वारा की गई आदिनाथ की भक्ति है! इसीलिए प्रारम्भ मे भक्त व अमर देव को स्मरण किया गया अत : नामकरण भक्तामर रखा गया! इसके विभिन्न श्लोकों मे यंत्र मंत्र तंत्र का उपयोग किया गया प्रत्येक शलोक मे विशेष ध्वनियों का उच्चारण हुआ है! प्राचीन काल मे बड़ी से बड़ी बीमारिओ का निराकरण ध्वनि विज्ञान से सम्पन्न होता था! आज भी किरणों द्वारा ऑप्रेशन आदि कराये जा रहे है मूलत :हमारी ध्वनियों से ही संसार का सम्पूर्ण क्रम चल रहा है! टी. वी. मोबाइल या अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग भावना व ध्वनि से हो रहे है! आने वाले समय मे दृश्य व अदृश्य ध्वनियों से संसार का संचालन सम्भव है! जो विज्ञान तंत्र मंत्र यंत्र के माध्यम से जाना जाता है नामकरण समयानुसार अदलते बदलते रहते है! मूल विषय वस्तु वो ही विधमान रहती है! नास्ति...

श्रीमती नंदा देवी पारख ने आज तपस्या का एक नया इतिहास रच दिया

दुर्ग/ तपस्या का नया इतिहास रचने वाली श्रीमती नंदा देवी पारख ने आज तपस्या का एक नया इतिहास रच दिया। आज उनके सम्मान में भव्य शोभायात्रा उनके निवास स्थान से निकाली गई। हर्ष हर्ष जय जय, तपस्वी हो तो कैसी हो नंदा बहना जैसी हो, के जय घोष के साथ श्रमण संघ स्वाध्याय मंडल साधुमार्गी युवा संघ श्रमण संघ महिला मंडल साधुमार्गी महिला मंडल, सहित जैन समाज के विभिन्न संगठन समता भवन दुर्ग में विराजित संत हर्षित मुनि के आशीर्वाद एवं 108 तपस्या का संकल्प समता भवन दुर्ग में दिलाया गया। हटरी बाजार, मोती कंपलेक्स जवाहर चौक गांधी चौक समता भवन शनिचरी बाजार होते हुए बांदा तालाब स्थित जय आनंद मधुकर रतन भवन मैं यह शोभायात्रा संपन्न हुई। आज श्रीमती नंदा देवी का सम्मान करने अभिनंदन करने छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से जैन समाज के अनुयाई विभिन्न सभा समितियों के साथ आज उनका अभिनंदन किया। जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब ...

सेवा कार्य से मानव महानता को प्राप्त करता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आदिनाथ भगवान के भक्ति स्वरूप आचार्य मानतुंग जी द्वारा विरचित भक्तामर स्तोत्र की व्याख्या करते हुए कहा मानव जीवन की परसन्नता के लिए तरह तरह के प्रयास करता रहता है तन की बीमारिओ को दूर करने के लिए जीवन भर उपाय करता है परन्तु एक बिमारी पूर्ण होते ही दूसरी बिमारी तैयार हो जाती है! इसी क्रम मे जीवन समाप्त हो उठता है! ज़िन्दगी का कुछ समय धन को इकठा करने मे तो कुछ समय बिमारी के लिए धन खर्च करने मे लगाकर भी पूर्णतः सफलता नहीं मिलती! इसके पीछे मूल कारण है पाप जिसपर इन्सान ध्यान न देकर सदा पाप के उपार्जन पर लगा रहता है! पुण्य के कार्य न करने के कारण अशांति सदा तन मन की बनी रहती है! रविवार के इस कार्यक्रम मे सुप्रसिद्ध डाक्टर नरेश गोयल (मालिक दिल्ली हार्ट एन्ड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल )के पिता श्री जगदीश जी गोयल एवं माता श्री शीला गोयल जी द्वारा जैन स्थानक बठिंडा मे ...

सामूहिक एकासना एवं सामूहिक आयबिल‌‌ तप की आराधना की

दुर्ग जैन संत श्री गौरव मुनि का जन्म दिवस एवं तप वीरांगना शतक वीर नंदा देवी पारख के 108 उपवास की उग्र तपस्या के अनुमोदनार्थ जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में पांच दिवसीय आयोजन चल रहा है। इसी क्रम में कल जैन संप्रदाय के सभी सदस्यों ने मिलकर सामूहिक एकासना एवं सामूहिक आयबिल‌‌ तप की। आराधना की यह आयोजन ऋषभ देव परिसर में आयोजित की गया था। जिसमें जैन समाज के 650 श्रावक श्राविका ने इस तप में  अपनी हिस्सेदारी निभाई। छत्तीसगढ़ प्रवर्तक जैन संत श्री रतन मुनि के सानिध्य में तथा गौरव मुनि के मार्गदर्शन में तब त्याग जप अनुष्ठान का कार्यक्रम निरंतर गतिमान है। नंदा देवी के सम्मान में सवा लाख नवकार महामंत्र का जप अनुष्ठान आज प्रातः जय आनंद मधुकर रतन भवन में सवा लाख नवकार महामंत्र का जप अनुष्ठान कराया गया। जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के अनुयायियों ने इस अनुष्ठान में हिस्सा लिया। आज प्रातः 7:...

हनुमान की तरह सेवक बनकर समर्पित भाव रखना धर्म है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी आदिनाथ भगवान के गुणों का वर्णन करते हुए कहा, परमात्मा मे अनन्त अनन्त गुण होते है वे गुणों के भंडार होते है सच्चे मन से अगर उनके गुणों का वर्णन कर समर्पण कर दिया जाए तो इन्सान जीवन की ऊंचाइयों को छू लेता है! आज का मानव अपने ही अहंकार के चलते अपने आपको ज्यादा ही बुद्धिमान मानकर चलता है उसे ईशवर पर कम अपने आप पर ज्यादा भरोसा रहता है! वह पूर्णतः माता पिता गुरु ईशवर के प्रति समर्पित नहीं हो पाता परिणामत : उसकी सफलता आधी अधूरी रह जाती है! हमारा जीवन बड़ो के प्रति समर्पित होना चाहिए मुनि जी ने उदाहरण देते हुए कहा वर्तमान मे भगवान राम से भी अधिक हुनमान जी को ज्यादा महत्व दिया जाता है क्योंकि हनुमान जी का सम्पूर्ण जीवन प्रभु राम के चरणों मे समर्पित रहे। दो शब्द सेव्य सेवक हमारे यहाँ प्रचलित रहे है। राम जी सेव्य थे एवं हनुमान सेवक रहे वर्तमान मे हर इंसान सेव्य मालिक स...

प्रभु भक्ति से मानव शरीरवादी से आत्मवादी बनता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने प्रवचन करते हुए तीर्थंकरो की विशेषताओ का वर्णनकिया, पुण्य के प्रबल उदय से अनेक प्रकार के रोग शोक व आधिव्याधी स्वत : समाप्त होने लग जाती है! दुष्ट से दुष्ट आत्माये भी उनके सामने नत मस्तक होकर अपने जीवन को रूपात्रिक कर देती है! जिसे पूर्वाचार्यो ने सत्संग कहा जिसका ततपर्य है आत्मा को जानना आत्मा को पहचानना हमारे अपराध आत्मा कोन जानने से आत्मा के प्रति अविशवास के कारण बढ़ते है! सभी जीवों का सुख दुख मेरा अपना है! सामने वाले का कष्ट मेरा कष्ट अनुभव होने लग जाए तो धरती स्वर्ग का रूप धारण कर लेती है! मानव ही नहीं पशु जगत को भी अभय दान प्राप्त हो जाता है!जितनी भी हिंसाए हुई या हो रही है उसका मूल कारण है हम शरीर को ही सर्वस्व मान लेते है। इसका अधिक से अधिक पोषण करने मे जिन्दगी गुजार देते है नतीजा शरीर एक दिन मिट्टी मे विलय हो जाता है!पंच भूतों से निर्मित शरीर पुन ...

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