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साधना मे स्थान -समय -माला -आसन व मन की शुद्धि आवश्यक: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने नवकार महामंत्र की महिमा के सम्बन्ध मे बोलते हुए कहा कि इसमें संसार की पवित्र आत्माओं को नमन किया गया है। चाहे वे आत्माए किसी भी पंथ ग्रन्थ की धर्म व सम्प्रदाय की रही हो जिन्होंने संसार से उपर उठ कर अपने जीवन को परम विशुद्ध अवस्था मे पहुंचा दिया है वे हमारे लिए प्रतिपल प्रतीक्षण वंदनीय अर्चनीय है!मुनि जी ने साधक के लिए कुछ नियम व उप नियमो का उल्लेख करते हुए कहा साधना के समय स्थान की पवित्रता आवश्यक है स्थान से ही वातावरण का निर्माण होता है! इसीलिए स्थानक मन्दिर गुरूद्वारे गिरजाघर का महत्व रहा है कि वहां का माहौल भक्ति पूर्वक रहता है! वहां जाते ही मन मे नमन का भाव जागृत होता है अहंकार का विसर्जन होता है संसार की आसक्ति दूर होती है! स्थान के साथ साथ आसन आदि का भी अपना महत्व है! आसन जो धर्म कार्य मे प्रयोग उपयोग मे आते हो, वे आसन अशुभ माने जाते है जिन पर बैठ...

आचार्य तुलसी आलोकधर्मी महापुरुष थे: साध्वी अणिमाश्रीजी

आचार्य तुलसी के 108 वें जन्म-दिवस का आयोजन  साहुकारपेट, चेन्नई :-  तेरापंथ सभा भवन में साध्वीश्री अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ के नवम् गणपाल गुरुदेव श्री तुलसी का 108वॉ जन्म-दिवस श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति में मनाया गया।   साध्वी अणिमाश्री ने अपने श्रद्धासिक्त उद्‌गार व्यक्त करते हुए कहा- आचार्य तुलसी आलोकधर्मी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने आलोक का जीवन जीया एवं दुनिया को आलोक दिया। आचार्य तुलसी का समग्र जीवन महकते गुलदस्ते की तरह है। उनके जीवन के हर कण की सौरभ अद्वितीय है, विलक्षण है। मानवता के मंगल कलश का हर चिंतन, निर्णय और क्रियान्विती के गठबंधन के साथ गतिशील रहता था। उनके अवदानों की प्रलम्ब श्रृंखला, कीर्तिमानों का उज्ज्वल इतिहास, पराक्रम की प्रचण्डताओं का अद्भुत वेग आज भी धर्मसंघ की हर धड़कन में अभिनव प्राणों का संचार कर रहा है। उनके जीवन-गणित के समीकरणों का तराजु...

नवकार मंत्र की साधना से सिद्धत्व सुख की प्राप्ति होती है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने नवकार मंत्र के अक्षरों को ब्रह्म स्वरूप बतलाते हुए कहा कि जिस प्रकार ब्रह्मा द्वारा सृष्टि का निर्माण होता है उसी प्रकार शब्द रूपी मंत्राक्षरों से हमारी जीवन यात्रा सुखद शान्त मनोकामना पूर्ण होती है! नमो सिद्धांनम दूसरे पद की महिमा अनंत अगमय वर्नातीत है! सिद्ध अर्थात वे आत्माए जो सम्पूर्ण कर्मों का संसार का राग द्वेष का क्षय करके मोक्ष पद को प्राप्त कर चुकी है जो जगत विजेता है! संसार के मार्ग दर्शक है! परोक्ष रूप से समस्त जीवों के कल्याण कर्ता है! हमें जो भी धर्म के ज्ञान दर्शन चारित्र के गुण प्राप्त हुए है वे अरिहंत सिद्ध की कृपा से मिले है! हर इन्सान सुख का इच्छुक होता है जीवन भर सुख को पाने के लिए रातदिन एक कर देता है इस आपधापी दुनिया मे स्वयं का आपा धापा भूल जाता है! दुखों को पैदा करके उन पदार्थों से सुख की चाहना रखता है! पेट्रोल से आग बुझाने का कार्...

ऊर्जा के अक्षय धाम थे आचार्य श्री तुलसी- मुनि अर्हत् कुमार जी

मदुरै/जन्म लेना एक नियति है पर कुछ व्यक्ति जन्म लेकर ऐसा काम कर जाते हैं जिनका जीवन जन जन के लिए प्रेरणा स्रोत बन जाता है। आचार्य श्री तुलसी जिन्होंने 11 वर्ष की उम्र में संयम श्री का वरण कर आचार्य कालूगणी के दिल को जीता, 22 वर्ष की उम्र में तेरापंथ जैसे प्राणवान धर्म संघ के आचार्य पद को सुशोभित किया। तेरापंथ धर्म संघ का परचम सात समुद्र पार लहरा कर एक नया कीर्तिमान बनाया । इस पद लोलुपता के युग में स्वयं के आचार्य पद का विसर्जन कर विश्व के सामने एक मिशाल पेश की। आचार्य श्री तुलसी ने अनेक अवदान दिए जिसमें एक है अणुव्रत आंदोलन। अणुव्रत आंदोलन समस्त मानव जाति के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। आचार्य श्री तुलसी ने झोपड़ी से लेकर राष्ट्रपति भवन तक अणुव्रत की सौरभ फैलाई । हमें अणुव्रत के नियमों को स्वीकार कर अपने जीवन को सरसब्ज बनाना चाहिए । सहयोगी संत मुनि भरत कुमार जी ने कहा तेरापंथ के उज्जवल नक्षत...

नवकार महामंत्र की साधना से अनेक लब्धिया प्राप्त होती है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने महावीर वाणी के सार रूप नवकार महामंत्र पर बोलते हुए कहा जीवन में अत्यधिक प्रभाव शब्दों का ही बना रहता है! व्यक्ति सुबह शाम कुछ न कुछ बोलता ही चला जाता है बिना बोले रहना हर व्यक्ति से असम्भव हो जाता है। मौन में रहने वाला ही मुनि बन पाता है मगर निरंतर बोलने से तन मन की शक्ति समाप्त होती है कुछ समय मौन रहने का अभ्यास होना चाहिए। कम से कम 10 घंटो के बोलने के बाद 2 घंटो का मौन आवश्यक बतलाया गया! शब्दों से शुभ अशुभ वातावरण का असर होता है! शब्द भीतर जाकर हमारे शरीर के तत्वों में रासायन पैदा करते है उसी से शरीर की मन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है। एक अशुभ असत्य कड़क शब्द के उच्चारण से घर में वातावरण उग्र हो उठता है तो एक शब्द से वातावरण शान्त हो जाता है! इन्ही शब्द शक्ति से आगम निगम वेद पुराण हज़ारों हज़ार ग्रंथो का निर्माण होता आया है! वर्तमान में टी वीं, पुस्तक...

महावीर ने मैेत्री भावना के द्वारा प्राणी मात्र के सुख की कामना की: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

नूतन वर्ष प्रदीपदा के उपलक्ष्य में बोलते हुए डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भगवान महावीर निर्वाण एवं गौतम स्वामी के केवल ज्ञानी बनने का उल्लेख किया! जैन इतिहास में इन दोनों भव्य आत्माओं का महती श्रद्धा के साथ नाम स्मरण किया जाता है! आज जो कुछ भी जैन धर्म संबंधित विचार धारा प्रवाहित हो रही है वे इन्ही की बदौलत है! प्रभु महावीर की धर्म दर्शन की व्याख्या सम्प्रदाय तक सिमित न होकर विशव व्यापी रही है! जैन धर्म के सिद्धांत प्राणी मात्र के लिए उपकारी है! आज नूतन वर्ष पर मंगल कामनायें की जाती है! संसार के सभी जीव सुखी रहें किसी को किसी भी प्रकार का कष्ट न सतावे! हमारी पावन परम्परा वसुधव कुटुंबकम की रही है! सारा जगत मेरा अपना परिवार है मै उसी का एक अंग हूं! उनका सुख दुख मेरा है! वेदों में भी कहा गया है हे परम पिता परमात्मा मेरी आँखों में ऐसी दृष्टि प्रदान कर दो जिससे जो भी मुझे नजर आवे वो मुझे अपना मि...

युवा समाज रत्न सुनील सांखला जैन को जैन कांफ्रेंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर प्रतिष्ठित

  बेंगलुरु। श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस नई दिल्ली के आगामी 2021-23 कार्यकाल के लिए अपनी कार्यकारिणी में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आनन्दमल जी छल्लानी ने बेंगलुरु निवासी युवाओं के प्रेरणा लोकप्रिय समाजसेवी युवा समाज रत्न सुनील सांखला जैन को जैन कांफ्रेंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर प्रतिष्ठित किया है। श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस नई दिल्ली स्थानकवासी जैन समाज की 116 वर्षीय मातृ संस्था है। ज्ञातत्व रहे कि सांखला राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे, समाज में राग द्वेष न फैले और जैन कॉन्फ्रेंस के चुनाव न हों और सर्वसमिति से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन हो को ध्यान में रखते हुए प्रथम पहल कर अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष का नामांकन वापस ले लिया था । सुनील सांखला जैन सभी गुरु भगवंतों के कृपा पात्र युवा श्रावक है, आपने इस संस्था के कर्नाटक प्रांतीय युवा शाख...

सभी के प्रति हृदय के मंगल भाव प्रगट करना ही दीपावली की सार्थकता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भगवान महावीर स्वामी के उपदेशों का वर्णन करते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रदान किए गए उपदेश उस जमाने की अपेक्षा वर्तमान समय में अत्यधिक आवश्यक है! वर्तमान समय में संसार में चारों और आपधापी भाषा व धर्म और राष्ट्रीय सीमाओं के नाम पर आपसी विवाद एवं कोरोना डेंगू कैंसर आदि भयंकर बीमारिओ का आक्रमण बढ़ता जा रहा है! सत्य अहिंसा क्षमा अपरिग्रह शाकाहार आदि सिद्धांतो को मानव जीवन में धारण कर ले तो बहुत कुछ जगत में शान्ति सम्भव है! जीवन का अंतिम लक्ष्य हर प्राणी का शान्ति सुख को पाना ही रहता है! उस हेतु वह जीवन भर प्रयासरत रहता है! मुनि जी ने उदाहरण देते हुए कहा, एक व्यक्ति होटल की 52वीं मंजिल में ठहरता है व घूमने निकल जाता है रात को विश्राम के लिए पुन : होटल पर पहुंचा किन्तु लाइट की खराबी होने से लिफ्ट बन्द हो चुकी थी। अपने दो साथिओं के साथ पैदल ही सीढ़िया चढने लगा एवं ब...

तेरह करोड़ की सम्पत्ति से अधिक मूल्यवान है साधुत्व के तेरह नियम: आचार्य महाश्रम

महातपस्वी महाश्रमण ने नवदीक्षित साध्वी को प्रदान की बड़ी दीक्षा साधुत्व के समस्त नियमों को प्रदान कर छेदोपस्थापनीय चारित्र में किया स्थापित आदित्य विहार, तेरापंथ नगर, भीलवाड़ा (राजस्थान)सात दिन पूर्व दीक्षित हुई साध्वी रोहिणीप्रभाजी को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, महातपस्वी, शान्तिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने बुधवार को बड़ी दीक्षा प्रदान की। आचार्यश्री ने उन्हें साधुत्व के समस्त नियमों का स्वीकरण करवाते हुए सामायिक चारित्र से छेदोपस्थापनीय चारित्र में स्थापित कर साधुत्व के नियमों के पालन की पावन प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने पांच महाव्रत, पांच समितियां व तीन गुप्तियां इन साधु के तेरह नियमों को 13 करोड़ की सम्पत्ति से भी अधिक मूल्यवान बताते हुए पूर्ण जागरूकता के साथ नियमों का पालन करने और उसे बढ़ाते रहने को उत्प्रेरित किया। चतुर्दशी तिथि होने के कारण तेरापंथ धर्...

सामाजिक धार्मिक त्यौहार नकारात्मकता का त्याग करने की प्रेरणा देते है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक व दिवाली क़े शुभ प्रसंग पर वीरवाणी का विवेचन करते हुए इन्सान क़े जीवन में जब जब भी त्यौहर आते है उसका मन उत्साह से आशा से भर जाता है व निराशा कष्ट को भूलने का प्रयास करता है! नकारात्मक भावों का विसर्जन कर सकारात्मक भावों को जागृत करता है! प्रभु महावीर ने आम जनता को उपदेश देते हुए कहा, मानव जीवन का सार धर्म है, इस हेतु उसे सतत प्रयास करते रहने चाहिए, रोटी कपड़ा मकान पा लेना ही हमारे जीवन का एक मात्र लक्ष्य न होकर तप जप पुण्य परोपकार आदि आत्मीय गुणों को भी पाना आवश्यक है! इस हेतु हरिकेशी मुनि राज व अनाथी मुनि क़े उदारहण देते हुए कहा गया इस राजकीय वैभव वस्तुओं का परित्याग कर इन आत्माओं ने संयम ग्रहण कर उस अनन्त आधात्मिक वैभव को प्राप्त किया जिसका अंतिम परिणाम सर्व कर्म क्षय करके मोक्ष को पाना है! मुनि मात्र वेश भेष से न होकर आंतरिक ...

भवसागर को तरने की नौका है : तपस्या: साध्वी अणिमाश्रीजी

मासखमण तप अनुमोदना साहुकारपेट, चेन्नई  :- साध्वीश्री अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में श्रीमती मनोजदेवी सुंदरलाल भूरा के मासखमण तप का अभिनन्दन कार्यक्रम समायोजित हुआ।   साध्वीश्री अणिमाश्री ने अपने प्रेरक उद्‌बोधन में कहा- अन्तर्मुखी चेतना का जागरण करती है- तपस्या। जीवन आनन्द की राह प्रशस्त करती है – तपस्या। भवसागर को तरने की नौका है- तपस्या। शक्ति का अभिनव व सशक्त स्रोत है- तपस्या। तपस्या जिनशासन का प्राण तत्व है। तपस्या से जिनशासन की नीवें गहरी होती है। सावण व भाद्रव में तपस्या की झड़ी लग जाती है। किन्तु कुछ विरले तप अनुरागी होते हैं, जो आसोज व कार्तिक में भी तपस्या की लौ जलाते हैं।  श्रीमती मनोज भूरा वो तपस्विनी है, जिसने कार्तिक मास में मासखमण कर अपने जीवन को तप से ज्योतिर्मय बनाया है। इस चातुर्मास का यह दसवां मासखमण, दशो दिशाओं को उल्लसित कर रहा है। श्रीमती मनोज भूर...

संस्कारों के उन्नयन में सहयोगी जैन संस्कार विधि : साध्वी अणिमाश्री

तेरापंथ भवन में दीपावली पूजन का बताया गया डेमो चेन्नई के चारों एटीडीसी में जैन संस्कार विधि द्वारा दीपावली पूजन   अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद् द्वारा साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में जैन संस्कार विधि दीपावली पूजन कैसे किया जाए का डेमो बताया गया।  मंगलमय उद्बोधन में साध्वी अणिमाश्री ने कहा कि जैन संस्कार विधि सहज, सरल, सात्विक विधि है। यह मित्तव्ययता के साथ संस्कारों के उन्नयन में भी सहयोगी बनती है। अल्पहिंसा, अल्पपरिग्रह से ओत:प्रोत यह विधि ह्रदयगम्य हैं। जैनम् जयतु शासनम् के उद्देश्य के साथ यह जैनत्व के संस्कारों को वृद्धिंगत करती है। अपनी संस्कृति अपनी पहचान के रूप में यह विधि सभी के लिए अनुकरणीय है।   जैन संस्कार विधि से दीपावली पूजन कार्यशाला का आगाज          साध्वीश्रीजी के श्रीमुख से नमस्कार महामंत्र उच्चारण के ...

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