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शक्ति सम्पन्न बने युवा : साध्वी अणिमाश्रीजी

दो दिवसीय दक्षिणांचल युवा सम्मेलन का दूसरा दिवस वेपेरी, चेन्नई में आयोजित दक्षिणांचल विराट युवा सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर साध्वी अणिमाश्रीजी ने युवाओं को शक्ति सम्पन्न बनने की विशेष प्ररेणा दी। साध्वी श्री ने कहा कि शक्तिवान स्वयं अपनी तो रक्षा कर सकता है साथ में वह घर, परिवार, समाज, संगठन की रक्षा में भी योगभूत बन सकता है। साध्वीश्रीजी ने युवाओं के साथ जनसभा को शक्ति संवर्धन, शक्ति रक्षक से सम्पन्न बनने के लिए मंत्रोच्चार का अनुष्ठान करवाया। संघ हमें सम्मान, स्वाभाविक, पहचान देता है : पंकज डागा अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज डागा, महामंत्री पवन माण्डोत ने कहा कि चेन्नई का यह दक्षिणांचल सम्मेलन श्रद्धा, भक्ति, समर्पण, शक्ति का सुंदर आयोजन हैं। संख्या की अपेक्षा गुणात्मक दृष्टि से यह विराट सम्मेलन है। यह संघ हमारा है, अपना है, इस संघ को ह्रदय में संजोकर, ह्रदय में बचाकर, ह्रदय में रमाकर ह...

बालक का जीवन भीतर बाहर से सरल होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने बाल दिवस पर बोलते हुए कहा कि बालक ईशवर का अवतार कहा जाता है क्योंकि बालक हृदय सरल साफ होता है। उसमें तेरे मेरे की गंदगी नहीं होती, उसका जीवन जैसा भीतर रहता है वैसा बाहर वाणी द्वारा नजर आता है। ज्यों ज्यों वो लोगों के सम्पर्क आता है वैसे भेदभाव के विचार ग्रहण करता रहता है! आकाश के बादलों से बरसा हुआ पानी सदा स्वच्छ होता है किन्तु धरती पर आकर दुनिया की संगत से मैला होता चला जाता है! भगवान महावीर ने भी साधको के लिए बालक वत बनकर साधना करने से सफलता मिलती है! मोह माया अहंकार आदि साधक के बाधक तत्व होते है!सभी ग्रंथो मे पंथो मे बालक जीवन को पवित्र बतलाया गया है! छोटी छोटी टहनिया जिधर झुकाते है उधर झुक जाती है बड़े बृक्ष टूट जाते है पर नरम नहीं होते बाल संस्कार का बड़ा ही महत्व रहा है!स्कूल व प्रारंभिक शिक्षा मे बच्चों को अच्छे संस्कार प्रदान कर दिए जाए तो वे ही द...

युवा प्रकाश के पथ पर गतिशील बने : साध्वी अणिमाश्रीजी

दो दिवसीय दक्षिणांचल विराट युवा सम्मेलन का हुआ आगाज    अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान, तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई की आयोजना में, साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में पिरीयार टिडाल, व्येपेरी, चेन्नई में दो दिवसीय दक्षिणांचल विराट युवा सम्मेलन का आयोजन हुआ।   युवाओं को विराट सम्बोधन सम्प्रेषित करती हुई साध्वी अणिमाश्रीजी ने कहा कि हमारे मन में गणभक्ति और गुरु भक्ति का दरिया लहराता रहे। हमारी श्रद्धा-भक्ति, हमारी वाणी-व्यवहार में मुखरित होनी चाहिए। हमारी आस्था चट्टान से भी मजबूत होनी चाहिये। हमें होश और जोश के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जोश तो जन्म से ही रहता है, होश को साथ में जोड़ किया जाने वाला कार्य सफल निष्पत्ति को प्राप्त करता है। संस्कारों का सम्पोषण चलता रहेसाध्वीश्री ने विशेष प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जिन्दगी का प्रकाश है – हमारे संस्कार, श्रद्धा, समर्पण। संस...

मुमुक्षु दीक्षार्थी भाई बहनों का श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ दुर्ग की ओर से अभिनंदन किया जाएगा

दुर्ग / संयम पथ की ओर अग्रसर होने वाली मुमुक्षु दीक्षार्थी भाई बहनों का श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ दुर्ग की ओर से अभिनंदन किया जाएगा। यह आयोजन सुधर्म पौषध शाला बांधा तालाब दुर्ग में आयोजित होगा। एक साथ 17 दीक्षार्थी भाई बहन संयम जीवन अंगीकार करने वाले हैं। सदर जैन मंदिर से 14 नवंबर को प्रातः 8:30 बजे दीक्षार्थी भाई बहनो की भाभी शोभायात्रा भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसने जैन समाज के सभी संप्रदाय की लोग भाग लेंगे। आयोजन समिति के संयोजक उत्तम बरडिया एवं डी के गोलछा ने जैन समाज के लोगों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। शासन प्रभावक, मधुरभाषी परम् पूज्य खरतरगच्छाचार्य श्री जिनपीयूषसागर सूरीश्वरजी म.सा. के वृहद हस्तों से सम्पन्न होने वाली दीक्षाएंमुमुक्षु लब्धि संखलेचा- 8 दिसम्बर 2021- रायपुरमुमुक्षु सुश्री भूमि गोलछा 8 दिसम्बर 2021- रायपुरमुमुक्षु रजत चोपड़ा- 23 जनवरी ...

इन्सान नहीं इन्सान का आचरण बोलता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन सभा मे बोलते हुए डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने देश का उत्थान पतन व्यक्ति के आचरण को बतलाते हुए कहा कि व्यक्ति का सुधार ही परिवार समाज राष्ट्र का सुधार लाता है क्योंकि व्यक्ति व्यक्ति से मिलकर ही राष्ट्र के लाखों करोड़ों लोगों का समूह तैयार होता है। एक एक बूंद जब मीठी होती है तब नदी तालाब बांध का पानी मीठा बनता है। इसके विपरीत एक एक बूंद खारी होने पर विशाल समुद्र का पानी खारा बन जाता है! इन्सान के एक एक गुण इन्सान को महान बना डालता है एवं छोटे छोटे दुर्गुण इन्सान को दुर्गनी बना देते है!नमो चरितस मे भगवान महावीर ने आचरण संयम को नमस्कार करने की प्रेरणा प्रदान की है! वह संयम किसी भी पंथ समुदाय जाति मे पाया जा सकता है! हमारा चारित्र बोलता है! उपर से दिखावटी जीवन भले ही साफ सुथरा दिखलाई देता है भीतर मे अगर आचरण नहीं है तो संख्या के अभाव मे कोरा बिन्दु वत ज़ीरो शून्य है! शरीर तो है पर भीतर प्राण ...

दवा की तरह धर्म भी विधि विधान नियम पूर्वक ग्रहण करने से लाभ होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने ज्ञान दर्शन चारित्र तप के अंतर्गत दर्शन की व्याख्या करते हुए कहा यों तो दर्शन का शब्दार्थ देखने से सम्बन्ध रखता है। यहाँ आत्म गुण होने से दर्शन का भावार्थ श्रद्धा के साथ लिया गया है! हमारी जीवन यात्रा पल पल विशवास पर टिकी रहती है! चलना फिरना खाना पीना परिवार व्यापार डाक्टर ड्राइवर बाप बेटे पति पत्नि सर्वत्र विश्वास के बल पर ही जीवन टिका हुआ रहता है! यहाँ तक कि एक शवांस छोड़ने के बाद एक पांव उठाने के बाद दूसरा शवांस दूसरा पांव काम करेगा या नहीं अगर अविश्वास हो तो जीवन क्रम ही समाप्त हो जाता है! भगवान महावीर स्वामी ने श्रद्धा का सम्बन्ध धर्म के साथ जोड़ते हुए कहा अरिहंत परमात्मा उनकी आज्ञा मे रहने वाले मुनिराज, एवं उनका दिया हुआ उपदेश ही वास्तविक देव गुरु धर्म कहलाता है! हमारा जितना विश्वास दुनियादारी पर है उतना धर्म तत्व पर नहीं हो पाता आवश्यकता है अध्यात्म...

दुर्ग में पद्मावती तप का समापन हुआ

दुर्ग / जय आनंद मधुकर रतन भवन में 23 जुलाई से प्रारंभ हुए माता पद्मावती तप का आज समापन हुआ। लगातार 16 सप्ताह तक चले इस तपस्या में 80 भाई बहनों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक शुक्रवार को इस तप को किया जाता है। संत गौरव मुनि के मार्गदर्शन में आयोजित तप एवं जप अनुष्ठान में लोगों ने हर्ष और उल्लास के वातावरण में इस तपस्या में भाग लिया और एकासना व्रत किया। प्रत्येक शुक्रवार को श्रमण संघ परिवार दुर्ग की ओर से तपस्वीओ के एकासना की व्यवस्था जय आनंद मधुकर रतन भवन में रहती थी। माता पद्मावती एकासना करने वाले तपस्वीओं का अभिनंदन आज जय आनंद मधुकर रतन भवन के प्रांगण में श्रमण संघ महिला मंडल के संयोजन में अभिनंदन का कार्यक्रम आयोजित था। बड़ी संख्या में श्रमण संघ परिवार के सदस्य उपस्थित थे। श्रमण संघ महिला मंडल की सदस्यों ने भक्ति गीत गाकर तपस्वीओं का अभिनंदन किया। श्रीमती रश्मि बेगानी सरिता श्री श्री माल रोमा ...

राजेन्द्र लुक्कड़ अपनी तीन दिवसीय अधिकारीक यात्रा पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं

दुर्ग भारतीय जैन संघटना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेन्द्र लुक्कड़ अपनी तीन दिवसीय अधिकारीक यात्रा पर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। दुर्ग एवं रायपुर के विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। 12 नवंबर को भारतीय जैन संघटना दुर्ग जोन के द्वारा आयोजित दुर्ग शहर के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दुर्ग जैन समाज के वरिष्ठ प्रतिष्ठित, प्रमुख एवं प्रबुद्ध जनों से जैन समाज की गतिविधियों पर ऋषभ नगर दुर्ग में सामूहिक चर्चा करेंगे। दुर्ग नगर में चातुर्मास हेतु विराजित संत एवं साध्वी मंडल के दर्शन वंदन करेंगे और रात्रि 8:00 बजे जैन समाज में युवाओं की भूमिका विषय पर प्रेरक उद्बोधन देंगे व युवा समुदाय से मुलाकात करेंगे। यह आयोजन अविश एडुकेम अग्रसेन चौक दुर्ग में आयोजित होगा। भारतीय जैन संघटना दुर्ग जोन के अध्यक्ष प्रफुल्ल संचेती राजेश कोटेचा उत्तम बरडिया दिनेश बाफना ने जैन समाज के सभी...

तपोयोगी श्रमण की साधना स्वयं ही चमत्कार है: डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज

बेंगलुरु। श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में कर्नाटक गज केसरी, घोर तपस्वी पूज्य श्री गणेशलालजी म.सा. की 142 वीं जन्म जयंती सामायिक दिवस के रूप में श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग, बेंगलुरु में दिनांक 10 नवंबर 2021 को मनाया गया। महासाध्वी डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने कर्नाटक गज केसरी पूज्य श्री गणेशलालजी म.सा. की 142 वीं जन्म जयंती के अवसर पर गुणानुवाद करते हुए फ़रमाया कि तपोयोगी श्रमण की साधना स्वयं ही चमत्कार है, उसकी निस्पृहता, कठोर-तितिक्षा, परिषह जेयता और सुख दुःख में स्थितप्रज्ञता संसार के लिए एक अजूबा है, आश्चर्य है। परन्तु यही तो साधक की कसौटी है। गुरुदेव सिद्ध श्रमण त...

नवकार महामंत्र के पांच पद नानाभांति गुणों को जागृत करते है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने नवकार महामंत्र के पंचम पद नमो लोए सव्व साहू नम की व्याख्या करते हुए कहा कि साधु मुनि महात्मा गुरु साधक ये शब्द प्राय एक सा अर्थ रखते है जिनमे गुणों का आभास होता है एवं हमारा मन व तन इनके प्रति नमस्कार भाव से जागृत होता है! संसार मे कुछ पवित्र उत्तम शब्दावली होती है जो अध्यात्म की प्रेरणा प्रदान करती है उन्ही शब्दों मे नवकार मंत्र की ये पांच पदावली जिनमे अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय साधु शब्द है! जिनका स्मरण मात्र पापों का क्षय व पुण्यो का शुभ उदय होता है! हमारी जीवन चर्या अधिकांश पाप मय कार्यों मे व्यतीत होती है कुछ क्षण धर्म स्थान मन्दिर गुरुद्वारा गिरजाघर या मस्जिद जाने आने पर मन मे पवित्र भाव उत्पन्न होते है! अगर ये शुभ भाव प्रतिपल क्षण क्षण बने रह जाए तो पापों का आवागमन सम्पूर्णत : समाप्त हो सकते है!साधु का सम्बन्ध गुणों के साथ है! जिनकी भावनाएं हमेश...

ज्ञान की आराधना से जीवन का चंहुमुखी विकास होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने नवकार मंत्र के चतुर्थ पद नमो उवझायानं के महत्व को बतलाते हुए कहा कि उपाध्याय का सीधा सम्बन्ध ज्ञान के साथ रहता है! आचार्य संघ के अनुशास्ता होते है तो उपाध्याय संघ मे ज्ञान का शुभ वितरण करते है! यहाँ ज्ञान से सम्बन्ध अध्यात्म ज्ञान से लिया गया है जो पांच प्रकार से उपलब्ध होते है जिसे मतिज्ञान श्रुतज्ञान अवधिज्ञान मन : पर्यव ज्ञान व केवल ज्ञान से जाना जाता है! पांच इन्द्रियों व मन के सहयोग से जो ज्ञान प्राप्त होते है उसे मति ज्ञान कहा जाता है! इसके साथ ही जो श्रवण से सुनने से प्राप्त होता है उसे श्रुत ज्ञान कहते है इसी का विस्तार रूप पूर्वभवो का या वर्तमान जीवन की विविध भूत भविष्य मे होने वाले घटनाओं का स्मरण होना अवधि ज्ञान के अंतर्गत आता है! सामने वाले के दिल दिमाग़ मे जो बातें विचार चल रहे है उसके दिल की बातों को सहज मे जान लेना मन : पर्यव ज्ञान कहलाता ह...

आचार्य तुलसी ने मानव मन में नैतिकता की ज्योत जलाई : साध्वी उज्ज्वलप्रभा

अणुव्रत दिवस एवं तप अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित  आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में श्री सुसवाणी भवन, विल्लुपुरम में तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाधिशास्ता गणाधिपति पूज्य गुरुदेव तुलसी का 108 वां जन्म दिवस मनाया गया।  नमस्कार महामंत्र से प्रारम्भ कार्यक्रम में साध्वीश्री उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि अमृतपुरुष आचार्य श्री तुलसी ने मानव मन के गलियारे में स्थित अनैतिकता का तमस दूर कर नैतिकता की ज्योत जलाई। वे सांप्रदायिक मंच से असांप्रदायिक, सार्वजनिक सार्वभौमिक अणुव्रत की उद्घोषणा करने वाले प्रथम जैनाचार्य कहलाए।  साध्वीश्री अनुप्रेक्षाश्री ने कहा आचार्य तुलसी कुशल जीवन शिल्पकार थे। उन्होंने अपने शिष्यों को योग्य, योग्यता और योग्यतम बनाया। साध्वीश्री प्रबोधयशा ने देसी भाषा में एक कथानक द्वारा समझाया कि हमें केवल दर्पण में अपनी बाहरी सुंदरता को ह...

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