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जैन धर्म में मुख्यतः सात प्रकार के व्यसनो का विवेचन किया गया है

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने विहार यात्रा परारम्भ करने के पूर्व समाज सेवी प्रमोद जैन के निवास स्थान पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए जीवन में निर्वयसन जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान की, एक छोटा सा नौकामें पडा छेद एक दिन पूरी नौका को ही पानी में डूबा देता है। प्रारम्भ में छोटा सा दुर्व्यसन बढ़ते बढ़ते जीवन को बर्बाद कर के छोड़ता है! बीड़ी सिगरेट गुटके आदि के सेवन करने की आदत घर परिवार को तहस नहस कर देती है! हज़ारों लाखों रूपये बर्बाद कर देती है! विशव के समस्त धर्मके नायको ने व्यसन मुक्त जीवन की प्रेरणा प्रदान की है! जैन धर्म में मुख्यतः सात प्रकार के व्यसनो का विवेचन किया गया है जिसके अंतर्गत शराब मांस जुआ परनारी सेवन, वैश्य गमन का उल्लेख है हमारा देश का उत्थान व पतन व्यसनो को लेकर होता है! इन्सान गिरता है देश गिरने लगता है! इन्सान सुधरता है देश सुधरने लगता है! मुनि जी ने वर्तमान समय ...

सत्संगत जीवन की दशा-दिशा को बदलता है : साध्वी अणिमाश्रीजी

मंगल भावना समारोह में भीतर से धनवान बनने की दी प्रेरणा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की आयोजना में साध्वी अणिमाश्रीजी के सुखद, सानन्द चातुर्मास की परिसम्पन्नता के अवसर पर दो दिवसीय मंगल भावना समारोह आयोजित किया गया।    साध्वी अणिमाश्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सत्संग जीवन की दशा-दिशा को बदल सकता है। बरसात का पानी आता है, तब व्यक्ति जैसे टंकी, बाल्टी या कटोरी में ग्रहण कर लेता है, उसी के आधार पर वह तृप्त हो जाता है। उसी तरह साधु-साध्वियां आते हैं, उनका जो लाभ उठाते हैं, वे जीवन दर्पण में अमूलचूल परिवर्तन कर जाते हैं। जीवन को सरस बना जाते हैं।   साध्वीश्री ने श्रावक समाज को भीतर से भी धनवान बनने की विशेष प्रेरणा प्रदान की। उन्होंने कहा कि भौतिक रूप से बाहरी धनवान तो बन रहे हैं, साथ में आध्यात्म की लौ जला भीतरी धनवान भी बने। एक कथानक के माध्यम से विकास के सोपान पर आरोहण के त...

दुर्ग के जय आनंद मधुकर रतन भवन में चातुर्मास समापन संपन्न हुआ

दुर्ग /जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब दुर्ग में आज चातुर्मास समापन संपन्न हुआ। चातुर्मास काल के दौरान विभिन्न तप आराधकों के सम्मान में बांधा तालाब परिसर में भक्ति संगीत संध्या का आयोजन किया गया था। जिसमें अंचल के ख्याति नाम कलाकार जीतू पारख ने भक्ति गीत ओ से शानदार समा बांधा कल देर रात तक लोगों ने भक्ति संगीत का आनंद लिया। चातुर्मास के समापन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा देने वाले सदस्यों का सम्मान जय आनंद मधुकर रतन भवन में चातुर्मास के दौरानउत्कृष्ट सेवा देने वाले सदस्यों का श्रमण संघ दुर्ग की ओर से अभिनंदन किया गया। जिसमें भोजनशाला में पूरे 4 महीने निस्वार्थ भाव से अतिथि सत्कार करने वाले श्री नेमीचंद चोपड़ा चंद्रशेखर पारख नीलम बाफना तथा साधु संतों के आहार सेवा के उत्कृष्ट संपादन के लिए श्री नितिन संचेती एवं सौरभ रतन बोहरा को श्रमण संघ परिवार ने सम्मानित किया। इसी तरह इस ...

विनय दान ईशवर का स्मरण करना ही विदाई का असली अर्थ: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने विदाई शब्द की विवेचना करते हुए कहा कि वि का अर्थ विनयधर्म से लेते हुए विनय को रामबाण दवा का रूप दिया जो सर्वत्र काम मे आने वाली है! हारी हुई बाजी विनय से जीत ली जाती है!अहंकार से जहाँ पतन होता है विनय से उत्थान होता है! आज के समय विनय का भाव समाप्त हो रहा है! पशिचमी सभ्यता के कारण भोजन से लेकर विद्यालयों मे देने वाले खड़े रहते है एवं विद्यार्थी पाने वाले कुर्सी टेबलों का प्रयोग कर रहे है! धर्म का प्रारम्भ ही विनय भावना से होता है!विदाई का दूसरा अक्षर दा अर्थात दान की प्रेरणा देता है!हमारे मन मे जब तक समस्त जीवात्मा के प्रति करुणा दया का भाव न हो तब तक दान पुण्य परोपकार के कार्य होने असम्भव है! तीसरा अक्षर ई अर्थात ईशवर भजन की समर्पण की प्रेरणा देता है! ईशवर परमपिता का स्मरण कीर्तन भजन करने वाला मानसिक शान्ति को प्राप्त करता है मानसिक शान्ति के चलते आने वा...

पुरषोत्तम जैन नाहटा के निवास स्थान पर कल रहेंगे डा राजेंद्र मुनि जी

आप सभी को यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होगी कि जन जन की आस्था के केन्द्र श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव डाक्टर श्री राजेन्द्र मुनि जी महाराज एवं साहित्यकार श्री सुरेन्द्र मुनि जी महाराज वर्ष 2021 का इतिहासिक चातुर्मास बठिंडा मे सम्पूर्ण करके कल दिनांक 20 नवंबर को सुबह 8 बजे विहार करके सुश्रावक श्री पुरषोत्तम जैन नाहटा के निवास स्थान कोठी नम्बर 343 गली नम्बर 1/3 नजदीक गोड़िया मठ, सराभा नगर बठिंडा मे पधारेंगे! वहां पर जाप व प्रवचन के बाद सबके लिए नाश्ते की व्यवस्था की गई है! दोपहर 3 बजे गुरुदेव वहां से विहार करके सुश्रावक श्री प्रमोद जैन के निवास स्थान # 116 टैगोर नगर पधारेंगे!रात्रि विश्राम करने के उपरान्त 21तारीख को गुरुदेव भूच्चो की तरफ विहार करेंगे! आप सभी से विनम्र निवेदन है कि आप सभी बताए गए कार्यक्रम मे समय पर पधारें व गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त करें!          निवेदक  एस एस जैन सभा बठ...

पुखराज बडौला हुए चन्दादेवी डागा प्रेक्षा, सेवा, संस्कार पुरस्कार से सम्मानित

तेरापंथ सभा द्वारा प्रदत्त किया गया सम्मान प्रबुद्ध साध्वीश्री अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा चेन्नई के तत्वावधान में चंदादेवी डागा प्रेक्षा, सेवा, संस्कार पुरस्कार प्रदान किया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा धर्मसंघ में विशिष्ट सेवा प्रदान कर्त्ता को प्रतिवर्ष चन्दादेवी डागा प्रेक्षा, सेवा, संस्कार पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष यह पुरस्कार संघनिष्ठ, श्रद्धानिष्ठ, सेवाभावी व्यक्तित्व तेरापंथ सभा चेन्नई के पुर्वाध्यक्ष आदरणीय पुखराज बडौला की संघ एवं समाज के प्रति महनीय सेवाओं को देखते हुए प्रदान किया गया। साध्वीश्री ने पुखराजजी एवं उनके परिवार द्वारा प्रदत्त की जा रही संघीय सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सदैव इसी तरह अपनी गणभक्ति, गुरूभक्ति वृद्धिंगत करते रहे। तेरापंथ सभा अध्यक्ष प्यारेलाल पितलिया ने सम्मान पत्र का वाचन करने के साथ कहा कि योग्य व्यक्ति...

मिथ्यात्व को दूर करके धर्म की स्थापना करने वाले वीर पुरुष थे वीर लोकाशाह: डॉ. श्री रुचिकाश्री जी

श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में वीर लोकाशाह जयंती, चातुर्मास समापन एवं कृतज्ञता अर्पण दिवस श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग, बेंगलुरु में दिनांक 18 नवंबर 2021 को आयोजित किया गया। महासाध्वी डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने प्रवचन में फ़रमाया कि वीर लोकाशाह ने धर्म को पुनः जागृत किया वास्तविक जिनशासन की शोभा एवं संयम की उत्कृष्टता क्या है लोकाशाह ने साधु जीवन को अपनाकर सभी समाज के समक्ष दर्शाया। वीर लोकाशाह के जीवन का परिचय देते हुए कहा कि वे मिथ्यात्व को दूर करके धर्म की स्थापना करने वाले वीर पुरुष थे। साध्वी जी ने आध्यात्मिक चातुर्मास समापन के अवसर पर बोले कि जन से जैन, जै...

दुराग्रह से दूर होने का प्रयास करें: साध्वी अणिमाश्रीजी

रुपांतरण कार्यशाला एवं श्रृंखलाबद्ध नीवी तप का हुआ आयोजन साहूकारपेट चेन्नई :-  साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई की आयोजना में make your life happy through  ….The doctorine of non-absolutism or multiple view-ism… अपने जीवन को खुशहाल बनाएं …. गैर-निरपेक्षता या बहु-दृष्टिकोणवाद का सिद्धांत…  श्री रूपांतरण एक्सप्रेस कार्यशाला का आयोजन साहुकारपेट तेरापंथ सभा भवन में किया गया। साध्वीश्रीजी के द्वारा नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीश्री अणिमाश्री ने अपने ओजस्वी उद्धबोधन में कहा कि अनेकांतवाद स्यादवाद का कोण है। आग्रह और दुराग्रह व्यावहारिक जिंदगी को दूषित बना देता है। हाथी और पांच अंधो की कहानी के द्वारा सुंदर विश्लेषण करते हुए कहा व्यक्ति अनेकान्त को समझकर दुराग्रह से दूर होने ...

जिन भगवान की स्तुति से अंनत पापों का नाश होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने अरिहंत परमात्मा के उपकार स्वरूप स्वयं देवेन्द्र द्वारा की गई स्तुति नमोत्थूनम की व्याख्या करते हुए कहा यह साधना अरिहंत सिद्धओं को वंदना के लिए निर्मित की गई जो संसार से मुक्त हो चुकी उन समस्त आत्माओं को जो भूत भविष्य या वर्तमान मे विधमान रहती है! ये वो महान आत्माए होती है जो जगत को ज्ञान रूपी सूर्य से प्रकाशमान करती है! आप कीचड मे कमलवत संसार से उपर उठ गए हो स्वयं तिरते हो संसार को तिराते हो स्वयं अभय मे विराजमान रह कर दुनिया के भय का निवारण करते हो। ज्ञान रूपी चक्षु के दाता हो समता के प्रदाता हो, पुरषों मे उत्तम श्रेष्ठ हो एवं सिंहवत शौर्यता के धारक हो लोक मे सर्वोत्तम हो लोक के नाथ हो लोक को उपर उठाने वाले हो ऐसे अरिहंत भगवान आपको मै वन्दन नमन करता हूँ! वस्तुतः मानव मन जैसे शब्दों का उच्चारण करता है वैसा भाव भीतर जागृत होता है! अपशब्द के उच्चारण से पाप...

रतन भवन बांधा में चातुर्मास अपने अंतिम पड़ाव की ओर

दुर्ग / जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तलाब दुर्ग में चातुर्मास अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है इन चार माह में लगातार धर्म ध्यान आराधना जप अनुष्ठान त्याग तपस्या का नित्य पति दिन आयोजन किया गया। जिसमे जैन समाज के अनेक सभी वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि, डॉक्टर सतीश मुनि के सानिध्य एवं गौरव मुनि के मार्गदर्शन में चातुर्मास में अनेक आयोजन हर्ष और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुए। जय आनंद मधुकर रतन भवन के प्रांगण में कल 3 दिवसीय स्वाध्याय शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 50 श्रावक-श्राविकाओं हिस्सा लिया इस दिवसीय स्वाध्याय शिविर में अंतगण सूत्र, मोक्षगामी आत्माओं की स्तुति ध्यान योग एवं जैन दर्शन के अनेक विषयों को सारगर्भित शब्दों में समझाया जा रहा है। राजगुरु माता उमराव अर्चना के दिव्य आशीर्वाद एवं साध्वी हेम प्रभा जी की प्रेरणा से श्रमण संघीय जैन स...

जप तप से शारीरिक मानसिक शक्ति का संचार होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भगवान पार्श्व नाथ जी के महिमा स्वरूप भद्रबाहु स्वामी रचित श्री उपसर्गहर्म स्तोत्र जो जैन समाज मे सर्वाधिक प्रसिद्ध रहा है। वर्तमान मे अधिकांश जन जिसकी साधना उपासना मे रत है एवं भारत भर मे जिनके ज्यादा मात्रा मे पार्श्व नाथ मन्दिरो का निर्माण हो रहा है। ऐसे एक सौ आठ पार्श्व नाथ की वन्दना स्वरूप इस पाठ की रचना की गई। नियमित जिसका पठन पाठन करने से अनेक प्रकार के कष्ट निवारण व प्रत्यक्ष चमत्कार रूप देखा जा रहा है! पार्श्व नाथ भगवान के जीवन मे सब से ज्यादा समता भाव का अभ्यास था! ध्यान अवस्था मे जहाँ कमठ तापस मे घमाली देव बन कर कष्टों पर कष्ट देता जा रहा था तो धरनेन्द्र पद्मावती देव देवी जो पूर्वभव मे नाग नागिन रूप मे लकड़ी मे अधजले थे पार्श्वनाथ ने अन्तिम समय बचाकर उनका कष्ट निवारण किया फल स्वरूप वे भी रक्षा हेतु उपस्थित हो गए! किन्तु तीर्थंकर पार्श्वनाथ के ह्...

सोच मैं मोच आती हैं तब रिश्तों मे खरोंच आती हैं – मुनि अर्हत् कुमार

“सोच मैं मोच आती हैं तब रिश्तों मे खरोंच आती हैं – मुनि अर्हत् कुमार ” समझपुर्वक बनाया गया समूह ही समाज कहलाता हैं। जिसकी सबसे छोटी इकाई परिवार है। परिवार सामंजस्य की एक प्रयोग शाला हैं। परिवार की एकता के लिए आवश्यक है एक दूसरो के प्रती स्नेह , समर्पण और सामंजस्य का भाव। जिस परिवार मै बड़ों के प्रति सम्मान और छोटो के प्रति वात्सल्य का व्यवहार होता है। वह परिवार साक्षात स्वर्ग हैं। यह सुविचार मुनि श्री अर्हत् कुमारजी नै ‘ टूटते परिवार बिखरते परिवार ‘ की वर्कशॉप पर व्यक्त किए, उन्होंने आगे कहा – बौद्धिक युग मैं शिक्षा का जितना विकास हो रहा है उतना ही मूल्यों का हास भी हो रहा है। यह एक ज्वलंत समस्या हैं। परिवार टूट रहे हैं और रिश्तों मै दरार पड़ रही हैं। घर टूटता हैं तो दिवारे टूटती हैं लेकिन जब आदमी टूटता हैं तो साहस, शक्ति, घैर्य, संकल्प व विश्वास सब कुछ ...

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