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आचार्य तुलसी के जीवन कौशलों से जीवन को सुवासित करने की दी प्रेरणा

विल्लीवक्कम, चेन्नई 17.06.2022 ; तेरापंथ धर्म संघ के नवमाधिशास्ता आचार्य श्री तुलसी की 26वीं पुण्यतिथि पर “आचार्य तुलसी जीवन दर्शन” विषयक कार्यशाला, मुनि श्री सुधाकरजी के सान्निध्य में, श्री जैन संघ, विल्लीवक्कम की आयोजना में अमृत जैन भवन में आयोजित की गई। धर्म परिषद् को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री ने बताया कि आचार्य तुलसी के अणुव्रत, जीवन विज्ञान इत्यादि जनोपयोगी अवदानों से जैनाचार्य होते हुए भी वे जनाचार्य बन गए। उनके मानव समाज को उद्घोष थे कि जो स्वयं पर शासन करना सिख जाता है, वह औरों पर भी शासन कर सकता है। आचार्य श्री कहते थे कि जो हमारा विरोध करें, उसका प्रतिकार की अपेक्षा विनोद समझ कर आगे बढ़ते जाएं। सब हमसे सहमत हो यह जरुरी नहीं, अतः मत भेद होते हुए भी मन भेद नहीं रखें। विवेक ही सबसे बड़ा धर्म है। इंसान में इंसानियत जरूरी होनी चाहिये। महापुरुष महान होते है, हम उनके गुणानुव...

श्री उगमराज सांड बने तेरापंथी सभा के अध्यक्ष

पट्टालम, चेन्नई : 05.06.2022 श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, चेन्नई का 71वाँ वार्षिक अधिवेशन तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम में तेरापंथ सभा अध्यक्ष प्यारेलाल पितलिया की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। नमस्कार महामत्र एवं भगवान महावीर की मंगल स्तुति के साथ आज की कार्यवाही प्रारम्भ हुई। अध्यक्ष ने सभी सदस्यों का स्वागत किया। मंत्री गजेन्द्र खांटेड़, कोषाध्यक्ष अनील सेठिया एवं अन्य विभागों के संयोजकों/प्रभारियों ने अपने कार्यों को सदन के सामने प्रस्तुत किया, जिसे ऊँ अर्हम् की ध्वनी मत से पारित किया गया। अभूतपूर्व, ऐतिहासिक कार्यकाल की संपन्नता पर सम्पूर्ण समाज ने प्यारेलाल पितलिया का सम्मान किया एवं उनके प्रति आभार प्रकट किया। अगले कार्यकाल 2022-2024 के तेरापंथ सभा के अध्यक्ष पद की कार्यवाही के लिए चुनाव अधिकारी श्री एम जी बोहरा को मंच सौंपा गया। चुनाव अधिकारी श्री एम जी बोहरा ने आज के चुनाव की प्रक...

वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ रायपुर के द्वारा लाल गंगा जैन पटवा भवन शैलेंद्र नगर रायपुर में श्रमण संघीय युवाचार्य श्री महेंद्र ऋषि जी एवं उप प्रवर्तनी साध्वी श्री सन्मति श्री जी के पावन सानिध्य में छत्तीसगढ़ स्तरीय श्रमण संघ का सम्मेलन हर्ष और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री रतन मुनि जी महाराज का मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से श्रमण संघ परिवार के सदस्यों ने हिस्सा लिया और संध के नित्य नये उत्थान के लिए लोगों ने अपनी विचार रखे। संध की मजबूती के लिए और अधिक समर्पण के साथ श्रमण संघ को बुलंदियों तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय सेवाएं देने की बात की गयी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए युवाचार्य भगवन श्री महेंद्र ऋषि जी ने कहा हमें मजबूत बनना है कठोर नहीं। हमें मजबूत बनना हे संजू के संघ के लिए हमें मजबूत बनना है धर्म...

ऋषभगिरि-मांगीतुंगी तीर्थ (नासिक) में बनी है 108 फुट भगवान ऋषभदेव प्रतिमा

15 जून से विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अंतर्राष्ट्रीय महामस्तकाभिषेक युग की आदि में जन्में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण नासिक (महाराष्ट्र) के ऋषभगिरि-मांगीतुंगी पर्वत पर हुआ है। यह प्रतिमा पर्वत ढ़ाई हजार फिट की ऊंचाई पर पर्वत की अखण्ड पाषाण शिला में निर्मित है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा विश्व की सबसे ऊंची मोनोलिथ आइडल का खिताब प्राप्त हुआ है। यह प्रतिमा जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी भारतगौरव दिव्यशक्ति गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा से सन् 2016 में निर्मित हुई है। इस प्रतिमा निर्माण का कार्य पिछले 20 सालों से लगातार चल रहा था और सन् 2016 में इसका अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भारी उत्सव के साथ सम्पन्न हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने भी इस महामहोत्सव में अपने सहयोग करके अथाह पुण्य अर्जित किया। अब आगामी 15 जून...

रोल मॉडल बने पेरेंट्स: साध्वी डॉ मंगल प्रज्ञा

तेरापंथ भवन पल्लावरम में परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की प्रबुद्ध शिष्या साध्वी श्री डॉ मंगल प्रज्ञा जी के सानिध्य में ‘ज्ञानशाला मॉल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पल्लवरम के ज्ञानार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी वृंद के संस्कार गीत से हुआ। ज्ञानार्थीयों द्वारा ज्ञानशाला मॉल की प्रस्तुति दी। एक भावपूर्ण नाटिका के द्वारा उन्होंने वर्तमान में अपेक्षित संस्कारों की विविध संस्कारों की आइटमस लेकर आए और आह्वान किया कि सभी जन उनके बच्चों के लिए ये प्रोडक्ट्स खरीदे। ज्ञानशाला के विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को दिशा दर्शन देते हुए कहा- बच्चों के प्रथम रोल मॉडल उनके माता-पिता होने चाहिए। आप बच्चों पर समय इन्वेस्ट करें,संवाद करें, संस्कारों की सौगात दे,जीवन मूल्यों का संवर्धन करें, आपकी अजागरूकता बच्चों के भविष्य पर बुरा प्रभाव भी डाल सकती है। ज्ञानार्...

लंबे अंतराल के पश्चात छत्तीसगढ़ की धरती पर युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी का हुआ आगमन

दुर्ग/ युवाचार्य भगवन श्री महेंद्र ऋषि जी अपने शिष्य श्री हितेंद्र ऋषि जी महाराज साहब के साथ मुरमुंदा से बिहार कर मंगल साधना केंद्र मंगलम पधारे। आज श्रमण संघ परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में युवाचार्य भगवन एवं छत्तीसगढ़ प्रवर्तक के मंगल मिलन के साक्षी बने। 10 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात छत्तीसगढ़ की धरती पर युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी का आगमन हुआ। युवाचार्य भगवान के अगवानी करने उप प्रवर्तक डॉ सतीश मुनि श्री रमन मुनि श्री आदित्य मुनि उनका स्वागत अभिनंदन करने मंगल साधना केंद्र मंगलम के गेट में आतुर थे। इतने लंबे समय के मिलन के पश्चात पूरा संत समुदाय भाव विभोर हो गया। युवाचार्य भगवान ने रतन मुनि जी महाराज के दर्शन एवं वंदन करते हुए उनका कुशल क्षेम पूछा। धर्म सभा में युवाचार्य भगवान ने कहा आज मैं जो कुछ भी हूं आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी एवं छत्तीसगढ़ प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव रतन मुनि जी महाराज की...

परिवार आग्रह से नहीं आदर से चलते हैं : साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा

पल्लावरम, चेन्नई 31.05.2022 : तेरापंथ सभा भवन पल्लावरम् में समायोजित “परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला” को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा ने कहा परिवार समाज की एक इकाई है। परिवार तब अच्छा होता है, जब परिवार में जीने वाला हर सदस्य अच्छा हो। आनंद का जीवन सभी जीना चाहते हैं, पर वह मंगलमय जीवन कैसे जिया जाए? इस पर चिंतन आवश्यक है। परिवार में रहने वाले बुजुर्गों के सद् अनुभवों से प्रत्येक सदस्य अपने को भावित करें और छोटी-छोटी बातों में उलझना छोड़े, तो शांति का साम्राज्य स्थापित हो सकता है। आदरभाव, अनाग्रह, चेतना, व्यवहार, कुशलता, वचन की मिठास, प्रमोदभाव, सकारात्मक सोच आदि ऐसे बहुमूल्य सूत्र है, जिनको जीवन का आधार मानकर चलने वाला व्यक्ति परिवार में वास्तविक सुख की अनुभूति कर सकता है। साध्वीश्रीजी ने प्रासंगिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा परिवार आदर से चलते हैं आग्रह से नहीं। परिवा...

श्री उत्सव मेले का भव्य आयोजन

अखिल अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई के तत्वावधान में अग्रवाल विद्यालय वेपेरी में दो दिवसीय श्री उत्सव मेले का आयोजन हुआ। श्री उत्सव मेले के 1 दिन पूर्व महिला मंडल ने चेन्नई में विराजित चारित्रआत्माओं के दर्शन कर मंगल पाठ का श्रवण किया।  श्री उत्सव मेले में लगभग 60 बहनों ने स्टाल लगाये। मुख्य अतिथि अधिवक्ता मद्रास हाई कोर्ट श्रीमती शीला भंडारी, अभातेममं कार्यसमिति सदस्या मालाजी कातरेला, टीपीएफ अध्यक्ष राकेश खटेड, अनुदानदाता उगमराज सांड ने श्री उत्सव मेले के अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये। मंचीय कार्यक्रम का संचालन मंत्री रीमा सिंघवी ने किया। आगंतुकों का स्वागत राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या श्रीमती मालाजी कातरेला ने किया। मुख्य अतिथि का परिचय कोषाध्यक्ष हेमलता नाहर ने दिया। मुख्य अतिथि का साल एवं मोमेंट द्वारा और प्रायोजक उगमराज सांड का शाल के द्वारा...

मंत्र साधना आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण आलम्बन – साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा

सोमवती अमावस्या पर मंत्र प्रयोग एवं विशद विवेचन   मंत्र साधना आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण आलम्बन – साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा   पल्लावरम्, चेन्नई 30.05.2022  ; “मंत्रों का चमत्कार” विषय पर पल्लावरम तेरापंथ भवन में प्रवचन करते हुए साध्वी डॉ मंगलप्रज्ञा ने कहा सभी धर्मों में मंत्रों का महत्वपूर्ण स्थान है। जैन परंपरा को सार्वकालिक और सार्वजनिक प्रार्थना का उत्सव है- नमस्कार महामंत्र। गंगा का उत्सव गंगोत्री है। वैसे ही महामंत्र नमस्कार एक विशिष्ट विघ्नविनाशक साधना है। इस महामंत्र की मंदाकिनी में स्नान करने वाला व्यक्ति अव्यक्त आनंद की अनुभूति करता है, समस्याओं का समाधान पाता है। जैन परंपरानुसार मंत्र साधना आत्मशोधन और कर्म निर्जरा के लिए होती है। जीवन में विघ्न बाधाओं से प्रताड़ित व्यक्ति के लिए मंत्र सशक्त आलंबन है। नव ग्रहों को संतुलित करने के लिए और ग्रहों से उत्पन्न कठिनाइयों के...

जैनत्व के संस्कारों को सुरक्षित रखने में योगभूत जैन संस्कार विधि

अपनी विरासत को सुरक्षित, संवर्धित एवं गौरवान्वित करने वाला उपक्रम है जैन संस्कार विधि। यह विधि हर किसी के लिए सरल, सुगम, सात्विक, मित्तव्ययी, हृदयगम, जनोउपयोगी है। जैन संस्कार विधि जैनं जयति शासनम् के अन्तर्गत अपने जैन संस्कारों को सुरक्षित रख अपनाने में योगभूत बन रही है। चेन्नई के होटल लीला पेलेस में जैन संस्कार विधि से समायोजित पाणीग्रहण संस्कार अभातेयुप जैन संस्कारक टीम चेन्नई ने संपूर्ण विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के द्वारा संपन्न करवाया। नमस्कार महामंत्र से शुरुआत कर संस्कारक श्री पदमचंद आंचलिया, श्री स्वरूप चन्द दाँती ने संपूर्ण सात फेरों की जानकारी वर-वधु को बताते हुए सात फेरे पूर्ण करवाये। संस्कारक श्री मांगीलाल पितलिया ने सभी को तिलक लगाया एवं संस्कारक श्री संतोष सेठिया ने सभी को मोली बांधी। अनेक रोचक प्रसंगों द्वारा संस्कारको ने कार्यक्रम को सुनियोजित एवं व्यवस्थित तरीके से संपादि...

वाणी को बाण नहीं, वीणा बनाएं : मुनि सुधाकर

किलपॉक, चेन्नई  : मुनि श्री सुधाकरजी एवं मुनि श्री नरेशकुमारजी के सान्निध्य में किलपॉक स्थित बाबूलाल डूंगरवाल निवास स्थल पर रविवारीय विशेष आध्यात्मिक प्रवचन “कैसे बोले कि हर काम बन जाए” का आयोजन किया गया।    प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए कहा मुनि सुधाकरकुमार ने कहा कि  शब्द संसार के रचयिता हम स्वयं हैं। शब्दों में अद्भुत शक्ति होती है। एक शब्द स्वर्ग जैसा नजारा बना सकता है, वही एक शब्द नरक से भी बदतर हालत पैदा कर सकता है। एक शब्द पराए को अपना, अपने को पराया बना सकता है। व्यक्तित्व को प्रभावशाली एवं कलापूर्ण बनाने के लिए संप्रेषण की कला का विकास जरूरी है। आपके शब्द आपके व्यक्तित्व को पहचान देते हैं। वाणी में सत्यता, उच्चता, मधुरता का समावेश होना चाहिए।   मुनिश्री ने आगे कहा वाणी को बाण नहीं वीणा बनाएं। कब, कहां, कैसे, क्यों एवं किस से बोल रहे हैं, बोलने से पहले सोचें। आपकी वाणी...

देश को मजबूत बनाने में युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान : मुनि श्री पृथ्वीराज स्वामी

  तेरापंथ युवक परिषद् द्वारा YOUTH AWAKENING का आगाज   छापर : अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में जागो युवा जागो (YOUTH AWAKENING) का आयोजन तेयुप छापर द्वारा आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य तपोमूर्ति मुनि श्री पृथ्वीराजजी स्वामी (जसोल) के सान्निध्य में कालु कल्याण केन्द्र, छापर में किया गया।   कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सामूहिक संगान से किया गया। छापर समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं सभी परिषदों के कार्यकर्ताओं का स्वागत तेयुप छापर के अध्यक्ष श्री सौरभ भुतोड़िया ने किया एवं अपना वक्तव्य रखते हुए सभी युवाओं को साहस के साथ आगे बढ़नें की प्रेरणा दी। अपने वक्तव्य में श्री सौरभ भुतोड़िया ने अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अनेक आयामों मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव, आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर, आई डोनेशन आदी के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई।  मुनि श्री पृथ्वीराजजी स...

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