15 जून से विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अंतर्राष्ट्रीय महामस्तकाभिषेक
युग की आदि में जन्में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण नासिक (महाराष्ट्र) के ऋषभगिरि-मांगीतुंगी पर्वत पर हुआ है। यह प्रतिमा पर्वत ढ़ाई हजार फिट की ऊंचाई पर पर्वत की अखण्ड पाषाण शिला में निर्मित है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा विश्व की सबसे ऊंची मोनोलिथ आइडल का खिताब प्राप्त हुआ है। यह प्रतिमा जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी भारतगौरव दिव्यशक्ति गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा से सन् 2016 में निर्मित हुई है। इस प्रतिमा निर्माण का कार्य पिछले 20 सालों से लगातार चल रहा था और सन् 2016 में इसका अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भारी उत्सव के साथ सम्पन्न हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने भी इस महामहोत्सव में अपने सहयोग करके अथाह पुण्य अर्जित किया।
अब आगामी 15 जून 2022 से इस विशाल प्रतिमा का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महामस्तकाभिषेक महोत्सव आयोजित किया गया है। भगवान ऋषभदेव 108 फुट मूर्ति निर्माण कमेटी द्वारा यह आयोजन 6 वर्षीय प्रथम अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में सम्पन्न होगा, जिसमें देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा अनेकानेक केन्द्रीय व प्रादेशिक मंत्रीगणों के पधारने की संभावनाएं हैं।
महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मेन हाइवे के निकट मांगीतुंगी मार्ग पर ऋषभदेवपुरम् तीर्थ परिसर में इस महोत्सव का मुख्य केन्द्र स्थापित किया गया है। बाहर से आने वाले बंधुओं के लिए टेंट की सैकड़ों अटैच कॉटेज का निर्माण हो रहा है। इस तीर्थ परिसर में 100 सुपर डीलक्स कमरों की विशाल धर्मशाला भी बनकर पूरी तरह तैयार है। विभिन्न कार्यक्रमों के लिए विशाल वाटरप्रूफ पांडाल का निर्माण, अनेक भोजनालय, साधु-संतों की व्यवस्थाएं, ऊपर पहाड़ पर प्रतिमा स्थल का सौन्दर्यीकरण आदि अनेकानेक कार्य पूर्णता की ओर हैं। साथ ही यात्रियों को पहाड़ पर जाने के लिए 4 व्हील ड्राइव की नई बोलेरो कारें भी समिति द्वारा खरीद कर यात्री सुविधा का प्रबंध किया गया है। विशेषरूप से ऋषभदेवपुरम् तीर्थ में 81 फुट ऊंचा सर्वतोभद्र महल बनकर तैयार हुआ है, जिसका उद्घाटन 15 जून 2022 को सम्पन्न होगा। इसी के साथ महोत्सव के प्रथम दिवस ऋषभदेवपुरम् तीर्थ के अन्तर्गत भरत चक्रवर्ती उद्यान में भगवान भरत स्वामी की 10 फुट ऊंची विशाल पद्मासन प्रतिमा भी विराजमान की जायेगी।
इस महोत्सव के लिए महाराष्ट्र शासन का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है। महाराष्ट्र के मंत्री एवं नासिक के पालक मंत्री श्री छगन भुजबल जी के नेतृत्व में तथा जिलाधिकारी नाशिक श्री गंगाथरण डी. के दिशानिर्देशानुसर शासन-प्रशासन द्वारा विभिन्न सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बिजली के पोल लगाकर नीचे से ऋषभगिरि पहाड़ तक कड़ी मेहनत के साथ बिजली सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है। इसके साथ पानी की पाइपलाइन भी पहाड़ पर डालकर पानी ऊपर पहुॅंचाया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था हेतु सैकड़ों पुलिसकर्मियों का प्रबंध हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडीकल कैम्प, आई.सी.यू. बेड सुविधा, एम्बुलेंस आदि का प्रबंध, आई.टी. विभाग द्वारा इंटरनेट लाइन का प्रबंध, यात्री सुविधा हेतु पी.डब्ल्यू. डी. द्वारा सड़क का व्यवस्थीकरण आदि अनेक कार्य शासन-प्रशासन के स्तर पर चल रहे हैं।
समस्त कार्य मूर्ति निर्माण कमेटी एवं महोत्सव समिति के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति के दिशानिर्देश में कुशलता के साथ सुचारू सम्पन्न हो रहे हैं, जिसका मार्गदर्शन प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न डॉ. श्री चंदनामती माताजी द्वारा किया जा रहा है।
इसी क्रम में समिति के अधिष्ठाता इंजी. श्री सी.आर.पाटिल-मांगीतुंगी, कार्याध्यक्ष श्री अनिल कुमार प्रीतविहार-दिल्ली, महामंत्री श्री संजय पन्नालाल पापड़ीवाल-औरंगाबाद, कोषाध्यक्ष श्री प्रमोद जम्मनलाल कासलीवाल-औरंगाबाद, मंत्री श्री भूषण जयचंद कासलीवाल-चांदवड़, डॉ. जीवन प्रकाश जैन-जम्बूद्वीप, प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन-जम्बूद्वीप, श्री चन्द्रशेखर कासलीवाल-चांदवड़ आदि अनेक भक्तजन इस कार्य की सफलता हेतु परिश्रम में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही महोत्सव समिति का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्माण किया गया है, जिसमें देश और विदेश के सभी प्रान्त और शहरों के आधार पर विभिन्न वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का चयन करके उन्हें विभिन्न पदों पर जिम्मेवारियां सौंपी गई हैं। अतः सभी प्रान्तीय व शहरी स्तर के और विदेश विभाग के पदाधिकारीगण भी तन-मन-धन के साथ इस महोत्सव को सफल करने में अपना योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार हेतु पारस चैनल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से भक्तों को घर-घर में जानकारी पहुॅंचाई जा रही है तथा पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से मीडिया का सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।
कमेटी द्वारा प्रत्येक 6 वर्ष में 108 फुट भगवान ऋषभदेव प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक महोत्सव घोषित किया गया है अतः वर्ष 2016 के बाद प्रथम बार वर्ष 2022 में यह 6 वर्षीय प्रथम महामस्तकाभिषेक महोत्सव 15 जून से किया जायेगा। महामस्तकाभिषेक में प्रतिदिन विशेष सौभाग्यशाली भक्तपरिवार द्वारा प्रथम कलश सम्पन्न होगा और अन्य सौभाग्यशाली भक्तों के द्वारा भगवान का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक सम्पन्न होगा। पंचामृत अभिषेक में भगवान का दूध, दही, केशर, सर्वोषधि, हरिद्रा, अष्टगंध आदि अनेक सामग्रियों से अभिषेक किया जायेगा। पश्चात् अंत में प्रतिदिन देश व समाज में शांति की स्थापना के लिए भगवान की शांतिधारा सम्पन्न होगी। महामस्तकाभिषेक का आयोजन प्रतिदिन प्रातः 7 से 10 बजे तक सम्पन्न किया जायेगा। पश्चात् मध्यान्हकाल में प्रतिदिन 2 से 5 बजे तक ऋषभदेवपुरम् तीर्थ परिसर में भगवान के विशेष पूजा-अनुष्ठान सम्पन्न होंगे एवं सायंकाल 7 बजे के बाद भगवान की आरती तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न होंगे। समस्त कार्यक्रम में देश के लाखों भक्तों की भीड़ धर्मलाभ प्राप्त करेगी। महोत्सव में आने वाले भक्तों को समिति द्वारा निःशुल्क आवास एवं भोजन व्यवस्था प्रदान की जायेगी तथा इसके साथ ही विभिन्न कलश धारकों को पूजन वस्त्र व प्रतीकचिन्ह भी दिए जायेंगे।
इस महोत्सव का झण्डारोहण 15 जून को प्रातः 8 बजे श्री कमल जी ठोलिया परिवार-चेन्नई के द्वारा किया जायेगा। पुनः भगवान के मस्तक पर ़6 वर्षीय महामस्तकाभिषेक के प्रथम कलश का सौभाग्य श्री जम्बूप्रसाद जी जैन परिवार-गाजियाबाद को प्राप्त होगा। 15 से 30 जून तक समस्त कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पारस चैनल के माध्यम से टी.वी. पर देश-विदेश में प्रसारित किया जायेगा, जिससे घर बैठे भी करोड़ों भक्त इस महामस्तकाभिषेक का दिग्दर्शन कर सकेंगे।
समस्त कार्यक्रम में देश में विराजित दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के विभिन्न साधु-संतों का आशीर्वाद एवं सान्निध्य वर्जुअल माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त किया जायेगा। इसी क्रम में मूर्ति निर्माण की सम्प्रेरिका भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी संघ सहित हस्तिनापुर से अपना सान्निध्य व मंगल आशीर्वाद प्रदान करेंगी।