तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता-शांतिदूत-अहिंसा यात्रा के प्रणेता-महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी ने अपने मंगल प्रवचन में संबोधि ग्रंथ के पांचवे अध्याय का प्रारंभ करते हुए कहा कि शिष्य मेघ भगवान महावीर से प्रश्न करता है कि प्रभु आपने मुझे सहजानंद और मोक्ष के बारे में बताया।
अब आप मुझे मोक्ष को प्राप्त करने के साधन भी बताएं। शिष्य मेघ के प्रश्न का जवाब देते हुए भगवान महावीर ने कहा कि मोक्ष प्राप्त करने के साधन ज्ञान, दर्शन और चारित्र है।
अगर इन तीनों की सम्यक रूप में साधना की जाए तो मोक्ष का मार्ग प्राप्त हो जाता है। आचार्य प्रवर ने खीर का उदाहरण देते हुए कहा कि चावल, दूध और चीनी को निर्धारित मात्रा मिलाकर एक प्रक्रिया पूरी करने से खीर का निर्माण होता है उसी प्रकार व्यक्ति ज्ञान, दर्शन और चारित्र की सम्यक साधना करता है तो वह मोक्ष का वरण करता है।
जिस प्रकार केवल चावल या दूध या चीनी से खीर नहीं बन सकती उसी प्रकार मात्र ज्ञान, दर्शन या चारित्र की अलग-अलग साधना से मोक्ष प्राप्त नहीं किया जा सकता है। मोक्ष प्राप्त करने के लिए इन तीनों की एक साथ सम्यक साधना की अपेक्षा होती है।
संसार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो तत्व को जानते हैं परंतु उस पर आचरण नहीं कर सकते, कुछ लोग आचरण कर सकते हैं परंतु वे तत्व को नहीं जानते हैं और कुछ विरले लोग ऐसे होते हैं जो तत्व को जानते भी हैं और उसका आचरण भी करते हैं ऐसे व्यक्ति ही मोक्ष मार्ग पर प्रशस्त हो सकते हैं। जीवन में व्यक्ति को सातों सुख मिलना मुश्किल होता है परंतु जिस व्यक्ति को जो मिला है उसका सदुपयोग करना चाहिए। व्यक्ति जीवन में जिस दृष्टि से सक्षम हो उस दृष्टि में कार्य करते रहना चाहिए।
उम्र के साथ शरीर में व्याधि आ सकती है परंतु उस व्याधि को कभी मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। एक दूसरे के परस्पर सहयोग करने से जीवन में सही राह एवं समता भाव का भी निर्माण होता है। जीवों का परस्पर आलंबन होता है। सांसारिक जीवन हो या साधु जीवन एक ही व्यक्ति को सभी कार्य करने पड़े तो यह अधिक समय तक संभव नहीं होता है परंतु सभी एक-दूसरे के सहयोगी बन जाए तो कार्यों में आसानी हो जाती है।
आचार्य प्रवर ने एक कथानक के माध्यम से समझाया कि हर व्यक्ति अलग-अलग क्षेत्र में सक्षम होता है जो जिसमें सक्षम हो वह कार्य करें तो सभी की मुश्किलें हल हो जाती है। प्रवचन में श्री बिमल भंसाली, श्रीमती शशिकला नाहर आदि ने गुरु चरणों में कृतज्ञता के भाव प्रकट किए। चिकपेट क्षेत्र के सांसद श्री पीसी मोहन ने आचार्य प्रवर के दर्शन किए एवं आशीर्वाद ग्रहण किया।