तिनका तिनका इकट्ठा कर एक चिड़िया घोंसला बनाती है हर एक मनके को पिरोकर माला बनती है एक जौहरी सुंदर माला बनाते हैंl ऐसे ही जीवो को अभयदान देकर जेनी पर्व मानता हैl एक बार सुकरात दर्पण में चेहरा देख रहे थे किसी ने पूछा आप दर्पण क्यों देख रहे हो जवाब मिला मैं सुंदर नहीं हूं तो सुंदर बनने की कोशिश करो और सुंदर हो तो सुंदर टापू सुरक्षित रखोl यह बात सिर्फ चेहरे को देखने पर हमारा चरित्र सुंदर है या नहीं यह जानने के लिए हमें दर्पण चाहिएl हम अपने आप को पहचान सके हम क्या है इस सवाल का जवाब यह पर्व देता हैl आज हम आईने के सामने बैठकर चेहरे को देखते हैं अगर चेहरा ठीक नहीं है तो बराबर कर लेते हैं पर पर्व कहता है हमें अपने आप को पहचानना हैl मैंने क्या किया है क्या नहीं किया कितनों को सताया है कितनो को रुलाया है कितनों का भला बुरा किया है यह देखने के लिए यह पर्व मजबूर कर देता हैl आओ किसी के भी प्रति वैर विर...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣2️⃣ 🪔 256) आर्त रौद्र एवं द्वेष का मूल है राग.! 257) प्रायश्चित से शुद्ध धर्म प्रगट होता हैं.! 258) उदारता के धनी ही महानता के स्वामी बन सकते हैं.! परिग्रही कभी महान नही बन सकते.! 259) अध्यात्म से जुड़ गया हो उसका माया प्रपंच से कोई नाता नहीं रहता.! 260) परम शांति परम समाधि परम आनंददायक एक ही स्थान है प्रभु शरण.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ-तमिलनाडु के तत्वावधान मे सांवत्सरिक प्रतिक्रमण क्षमापना सम्पन्न श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट मे पर्युषण पर्वराधना सम्पन्न हुई| श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने सांवत्सरिक प्रतिक्रमण पश्चात श्रावक संघ युवक परिषद, श्राविका मण्डल, स्वाध्याय संघ के समस्त सदस्यों व सर्व जीव राशि से क्षमायाचना करते हुए पर्वाधिराज पर्युषण पर्व पर प्रतिक्रमण कराने हेतु लीलमचंदजी बागमार, संदीपजी ओस्तवाल, राजेंद्रजी सांखला, शांतिलालजी कर्णावट, मांगीलालजी सेठिया, विक्रमजी बागमार व लोगस्स का प्रकट ध्यान कराने हेतु समकितजी कांकरिया व शांतिलालजी कर्णावट को साधुवाद ज्ञापित किया व एकान्तर तपस्या करने वाले सभी तपस्वी रत्नों के संघ की और से सुखसाता पूछते हुए मंगल कामना की | पर्युषण पर्व मे कांतिलालजी तातेड़ वीरे...
जैन भारती कोकिल कंठी महासाध्वी श्री मीना जी महाराज ठाणे 5 जी के सानिध्य में एवं प्रधान सुरेंद्र जैन की अगुवाई में जैन स्थानक नवांशहर में संवत्सरी महापर्व बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह से मनाया गया! एसएस जैन सभा के महामंत्री रतन कुमार जैन ने बताया कि इसी उपलक्ष्य में जैन स्थानक में पिछले 8 दिन से लगातार महामंत्र नवकार का अखंड जाप चल रहा है! मासखमण, अठाई व्रत एवं विभिन्न प्रकार की तपस्या करने वालों को सम्मानित किया जाएगा! इस अवसर पर एस एस जैन सभा के प्रधान सुरेंद्र जैन, महामंत्री रतन कुमार जैन, तृप्ता जैन, रजनी जैन, चंद्र मोहन जैन, दीपक जैन, परीशा जैन ने भजन एवं भाषण के द्वारा अपने विचार रखे! महासाध्वी श्री समृद्धि जी महाराज के निर्देशन में श्री महावीर जैन युवक मंडल, श्री चंदनबाला जैन युवती मंडल, श्री रमणीक बाल कला मंडल के सदस्यों एवं श्री रूपचंद जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल बंगा के बच्चों ने बहुत ही...
पर्युषण पर्व का सामुहिक क्षमापना, अष्ट दिवसीय अखंड नवकार महामंत्र जाप एवं पारणा से समापन! आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ मे चातुर्मासार्थ विराजीत डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षा श्रीजी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के निश्रा में आठ दिवसीय पर्युषण पर्व जप, तप, धर्म आराधना, दान, पौषद, दया के माध्यमसे एवं जिनवाणी , प्रतियोगिता की सुंदर उपाहार द्वारा अध्यात्म पुर्व बडे धुमधामसे मनाया गया! 100 से अधिक तेले, 13 अठाई एवं उपर की तपस्या, 50 पौषध एवं 400 के क़रीबन एक दिवसीय उपवास की आराधना हुई! आठ दिवसीय अखंड नवकार महामंत्र जाप के कलश का बहुमान रेश्मा जी गणेश जी बोरा परिवार को मिला और पॉंच नवकार माला का बहुमान उज्ज्वल धर्मेंन्द्रजी रायसोनी , लिलाजी धनराजजी छाजेड, वंदना जी चंद्रकांत जी छाजेड, सोनल जी डोशी, विक्रमजी वैभवजी छाजेड इन परिवारोंको मिला! पर्युषण पर्व के आयोजन नियोजन मे स...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣1️⃣ 🪔 251) समर्पण से सामर्थ्य प्रगट होता हैं.! 252) दया करुणा को आत्मसात किये बिना मात्र क्रिया से धर्मी नही बन सकते.! 253) कितना भी धर्म करो,क्रिया करो, तप त्याग अनुष्ठान करो, लेकिन मैत्री मानवता नही है, तो सब बिना शिखर के मंदिर जैसा व्यर्थ हैं ! 354) धर्म का प्रारंभ क्रिया अनुष्ठान से नही, सम्यक सोच से होता है..! 255) सद्बुद्धि से सुख दुर्बुद्धि से दुःख होगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
Sagevaani.com /माधावरम्: आत्मशुद्धि के महान पर्व क्षमायाचना का महत्व उजागर करते हुए डॉ. साध्वी श्री गवेषणाश्री जी ने कहा कि सृप्त चेतना के बंद कपाटों को खोलने के लिए क्षमा की दस्तक जरूरी है। मन की धरती पर उगी वैमनस्य की कंटीली झारियों को उखाड़ने के लिए क्षमा की कुल्हाडी जरूरी है। सरलमना, शुद्धमना होकर इस पर्व में मन की गाँठो को सुलझाना है, मन की दूरियों को दूर करना है। दिल और दिमाग की खिड़कियों पर जमी परतों को दूर कर स्वच्छ बनना है। साध्वी श्री मयंकप्रभा जी ने कहा कि हमारे मस्तिष्क में क्रोध का बटन है, तो क्षमा का स्विच भी है। आज हमें क्षमा का स्वीच ऑन करना है और मन के अंधकार को दूर करना है। 5 करोड़ से क्षमा मांगे या न मांगे पर जिनके साथ हमारी अनबन है, उन 5 व्यक्तियों से क्षमा अवश्य मांगे। साध्वी श्री मेरुप्रभाजी ने सुमधुर गितिका प्रस्तुत की। साध्वी श्री दक्षप्रभा के मंगलाचरण से कार्यक्र...
*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 5️⃣0️⃣ 🟤 आरंभ समारंभ अर्थात हिंसा युक्त प्रवृत्ति.. परिणाम निर्ध्वंश एवं मलिन करें ऐसी प्रवृत्ति.. ⚫ परिग्रह अर्थात निर्वाह के अतिरिक्त वस्त्र, पात्र, आहार आदि वस्तुओ का संग्रह करना.. ⚪ प्रवज्या अर्थात आरंभ एवं परिग्रह दोनों का त्रियोगसे सम्यक त्याग.. 🧘♂️ सफलता पूर्वक राधावेध करनेवाले व्यक्ति जैसा स्थिर चित्त ही प्रवज्या का पालन कर सकता हैं, सत्वहीन व्यक्ति का ये कार्य नही.! *📙श्री पंच वस्तुक ग्रंथ📙* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
धर्म नगरी बंगा में लगे धर्म के ठाठ…. स्थानीय बंगा जैन स्थानक में श्रुत वरिधि जैन भारती परम पूज्य महासाध्वी श्री मीना जी म. सा. क़ी सुशिष्या हरफ़नमौला महासाध्वी श्री समर्थ श्री जी म. परम विचक्षण महासाध्वी श्री समबुद्ध श्री जी म. परम सेवाभावी महासाध्वी श्री साधिका जी म. आदि ठाणे -3 के पावन सानिध्य में जैन धर्म के महान 8 दिवसीय पर्युषण पर्व व संवत्सरी महापर्व बड़े ही श्रद्धा भक्ति के साथ मनाये गए l बंगा जैन समाज द्वारा 8 दिन णमोकार महामंत्र का अखण्ड जाप हुआ l धर्म सभा का आगाज़ सामूहिक नवकार महा मंत्र के उच्चारण से हुआ l प्रवचन सभा में महासाध्वी श्री समर्थ श्री जी महाराज महासाध्वी श्री समबुद्ध जी म. साध्वी श्री साधिका जी ने कहा की पर्युषण पर्व में की गई तपस्या से आत्मशुद्धि होती है तथा शरीर कुन्दन के समान हो जाता है। संवत्सरी महापर्व पर श्री अंत कृत दशांग सुत्र के आठों वर्गो को पुरा किया और ...
वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा ने कहा क्षमा आत्मा का स्वभाव है, किंतु हम हमेशा क्रोध को स्वभाव मान कर उसकी अनिवार्यता पर बल देते आए हैं। क्रोध को यदि स्वभाव कहेंगे तो वह आवश्यक हो जाएगा, इसीलिए जैन आगमों में क्रोध को विभाव कहा गया है, स्वभाव नहीं। ‘क्षमा’ शब्द ‘क्षम’ से बना है, जिससे ‘क्षमता’ भी बनता है। क्षमता का मतलब होता है सामथ्र्य और क्षमा का मतलब है किसी की गलती या अपराध का प्रतिकार नहीं करना। क्योंकि क्षमा का अर्थ सहनशीलता भी है। क्षमा कर देना बहुत बड़ी क्षमता का परिचायक है। इसीलिए नीति में कहा गया है -‘क्षमावीरस्य भूषणं’ अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा कि ‘क्षमा वाणी’ उत्तम क्षमा का व्यावहारिक रूप है। वचनों से अपने मन की बात को कहकर जिनसे बोलचाल बंद है, उन...
दान, शील, तप, भावना, धर्म के आधार पर खड़ी इमारत पर क्षमा का कलश लगाना है! प्रतिक्रमण आत्मा का स्नान है ! डॉ. राज श्री जी। क्रोध म्रुत्यु समान है, क्षमा जीवन है! अनंतकाल से चढे हुये कर्मो के मैल को साफ़ करने का क्षमा पर्व है! डॉ. मेघाश्री जी। दान और धर्म परभवके साथी है – क्षमा के तीन गुण क्षमा राखो, क्षमा मॉंगो, क्षमा आपे -साध्वी जिनाज्ञा श्री जी। आज आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण मे संवत्सरी महापर्व जप, तप, दान, धर्म आराधना संग मनाया गया! डॉ. मेघाश्री जी ने आलोयणा का वॉंचन किया ! विविध क्षेत्र से शेकडो धर्म अनुरागीयो ने उपस्थिती जताकर धर्म आराधना की ! महासाध्वीयो ने संघ समाज से क्षमायाचना की और श्री संघ के माध्यम से संघाध्य़क्ष ने महासाध्वीयो से एवं सभी उपस्थितीयो से क्षमा मॉंगी! अठाई एवं ज्यादा तप करने वाले तपस्वीयों का सन्मान तपस्या के बोली से एवं श्री. संघ द्वार...
*☀️ प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 4️⃣9️⃣ *💧 पर्युषण तत्त्वधारा-14💧* 241) संबोधन संबंध की नीव हैं… बनाना,बिगाड़ना सब भाषा का खेल है.! 242) घर के सेवको के साथ तुच्छ व्यवहार करना नही वह आपकी फर्ज निभा रहे है अतः वह भी कुटुंब के सदस्य हैं.! 243) परमात्मा को अंतर में अवतरित करने मन को शल्यरहित बनाना होगा.! 244) आत्म बोध+ संत समागम का संयोग मिलना दुर्लभ है मिल गया तो न्याल हो जायेंगे.! 245) अयोग्य व्यक्ति की प्रसंशा अनर्थकारी होती है.. मरीचि के दृष्टांत को समझो.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *तीर्थ प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर