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कषायों से मुक्त हुए बिना नहीं हो सकता जीवन का कल्याण- इन्दुप्रभाजी म.सा.

एक पाप समाप्त कर सकता हमारे जीवन के सारे सुख-दर्शनप्रभाजी म.सा. गोड़ादरा स्थित महावीर भवन में चातुर्मासिक प्रवचन Sagevaani.com /सूरत। हमे दूसरों की निंदा करने की बजाय अपने अंदर झांकना चाहिए ओर निंदा करनी है तो समय की करो। जब तक आत्मा में क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषाय रहेंगे तब तक उसका कल्याण नहीं हो सकता है। कषायमुक्त होने पर ही आत्मकल्याण की राह खुलेगी। धर्म की शरण लेने ओर जिनवाणी सुनने से कषाय मुक्त होना आसान हो जाता है। तप त्याग करने से जीवन निखरता है। जो तपस्या कर शरीर को तपाते है उनकी आत्मा पावन हो जाती है। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने गुरूवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्त...

शांति का स्थान सिर्फ धर्मस्थानक है

जिनेश्वर देव जिनका वात्सल्य एक एक माता जैसा होता है, इसलिए उनको जगत माता कहा जाता हैl भगवान का उपकार भी अनंत है, आज जगत में तीन जनों के उपकार हैl माता-पिता मालिक सद्गुरु माता-पिता के उपकार हम चुका नहीं सकते पर शुभ कार्य में निमित्त बन सकते हैं। उनका धर्म के सम्मुख ले जा सकते हैं उनके हाथों से सात कार्य कर सकते हैं। यही अवसर उपकार चुकाने का माता-पिता के उपकार इस भौतिक है तीर्थंकर का उपकार अनंत अनंत जन्म तक होता है। आज अगर तीर्थंकर तीर्थ की स्थापना नहीं करते धर्म चारों ओर ना होता तो आपका वातावरण अंधकार में होता बंधन से मुक्त होने के लिए बहुत अच्छी शिक्षा दी है। प्रभु का धर्म जन्म जन्म तक उभरने वाला है संसार एक चक्र है इस चक्र में जो घूम रहा हैl कहीं पर भी स्थिर नहीं हो सकता कोई नरक में गया कोई डी में गया कोई मनुष्य में गया कोई ना कोई दुख तो पाया ही हैl वह तो दुख से उभरने वाले परमात्मा ने हमे...

इच्छाओं का निरोध करना ही तप का परिपालन है: साध्वी चन्दन बाला

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट मे किया तपस्या का स्वागत  लक्ष्य संचेती ने 8 के प्रत्यक्षण लिए एवं कैलाश खाब्या की सुपुत्री डॉक्टर निधि खाब्या के 9 के उपवास के प्रत्यक्षण लिए । इस अवसर पर आमेट श्री संघ, चंदनबाला महिला मंडल ने व युवा मंडल ने दोनो तपस्वी का शाल-माला से स्वागत सत्कार किया । तपस्या के स्वागत मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा कि इच्छाओं का निरोध करना ही तप का परिपालन है। जिस प्रकार आकाश अनंत और विशाल है उसी प्रकार इच्छाएं अनंत हैं। इच्छाओं के बीच मानव जीवन यात्रा करता है। मनुष्य ही व्रत नियम और तपस्या कर सकता है। देवता व्रत नियम और तप नहीं कर सकते हैं। पशु का कोई लक्ष्य नहीं होता उसे उसका मालिक जो देता है उतना खा लेता है। किंतु मानव सोच विचार करके कुछ भी कर सकता है।तप की बड़ी महिमा है तपस्वी की अनुमोदना करना व कराने का समान फल प्राप्त होता है। तपस्या की पूर्णता देव, गुरु और धर्म की कृपा पर...

जीवन को उन्नत व आध्यात्मिक बनाने का मार्ग तप त्याग- इन्दुप्रभाजी म.सा.

दान देने का अवसर उनको ही मिलता जो सौभाग्यशाली होते है-दर्शनप्रभाजी म.सा. गोड़ादरा स्थित महावीर भवन में चातुर्मासिक प्रवचन Sagevaani.com /सूरत,। तप त्याग करके हम अपने जीवन को उन्नत व आध्यात्मिक बना सकते है। तप शरीर को तपाने के साथ आत्मा को भी पावन बनाता है। तप करने से आत्मा निखरती है। तप करने की भावना कई लोगों के मन में लेकिन सभी कर नहीं पाते है। जो तपस्वी करते है उनकी अनुमोदना करके भी हम पुण्य प्राप्त कर सकते है। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने बुधवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस बात की खुशी है कि पर्युषण समाप्ति के बाद भी तपस्याओं का दौर निरन्तर जारी है। तपस्या करके हम अपनी आत्मा का कल्याण कर...

तप आत्मा, शरीर, मन और बुद्धि को बनाता मंगल: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com /माधावरम्: तपोभिनन्दन समारोह में तपस्वियों के साथ धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्री जी ने कहा कि तप मंगल है, टॉनिक है, शक्ति है। तप आत्मा, शरीर, मन और बुद्धि चारों को मंगल बनाता है। भगवान महावीर से प्रश्न पूछा गया- तवेणं भंते! जीवे किं जणयइ?- भंते! तप से जीव क्या प्राप्त करता है? भगवान ने कहा- ‘तवेणं, वोदाणं जणयइ’- तप से वह व्यवदान को प्राप्त करता है। निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन है। पूर्वोर्जित कर्म संचय को क्षीण करने का एक अच्छा माध्यम है। तपस्या साधक का धन है। तप की साधना प्रतिक्रमण आदि आवश्यकों की आराधना में बड़ा निमित्त बनती है। साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा कि तप न मैगों है, न फ्रूटी है, यह जीवन की सिक्युरिटी है, न फ्रूट है, न ड्रायफ्रूट- यह ‌मोक्ष का सीधा रूट है। इन्द्रियों का संयम के लिए खाने का संयम आवश्यक है। आयुर्वेद में कहा गया ह...

स्विकारभाव में सुख है- साध्वी जिनाज्ञा श्रीजी।

स्विकारभाव में सुख है- साध्वी जिनाज्ञा श्रीजी। आकुर्डी स्थानक भवन मे आज “पुच्छिसुणं” अनुष्ठान के दुसरी गाथा का जाप हुआ! “ कहं च णाणं कहं दंसणं से,सीलं कहं नायसुयस्स आसि। जाणासि क्षण भिक्खु जहातहेणं,अहासुयं बुहि जहां णिसंतं! “। जिनाज्ञा श्री जी ने लिखनेवाले पेन्सील के पॉंच उपयुक्त गुणोकी तुलना जीवन में सुख पानेके सिध्दांतोसे की! आज सौ. ममता विनोदजी रुंगलेचा जैन की 11 उपवासकी पचछकावणी हुई! येरवडा जैन श्रावक संघ अध्यक्ष चंद्रकांतजी लोढ़ा के नेत्रुत्वमे सौ सरसबाई कटारिया आयोजित दर्शन यात्रामे गुरु चरणोमे आया! उपvस्थित महानुभावोंका संघाध्यक्ष सुभाष ललवाणी एवं विश्वस्तोने स्वागत किया!

जो अज्ञान से पीड़ित है वही दुखी हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣3️⃣ 🪔 261) समकिती सुख में भी धर्म दुःख में भी धर्म करता हैं.! 262) देह परिवर्तन के पूर्व कर्तृत्व भाव की भ्रांति को तोड़ना होगा.! 263) जो अज्ञान से पीड़ित है वही दुखी हैं.! 264) इन्द्रियों की शक्ति का उपयोग साधना के लिए करेंगे तो संसार से तीर जाएंगे…. भोग के लिए करेंगे तो डूब जायेंगे.! 265) प्रायश्चित भाव से भव्यता का प्रारंभ होता हैं.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

सुख जगत में कोई नहीं

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 5️⃣2️⃣ 🪷 जो साधक समर्पण भाव से जिनेश्वर की शरण में रहता है, जिनाज्ञा के आधीन रहता हैं, जगत की कोई दीनता, उदासी उसको छू नही सकती.! ⚪ मोक्ष न मिले तब तक प्रभु शरण से उत्कृष्ट सुख जगत में कोई नहीं.! ⚪ प्रभु स्मरण से भावित सन्मति हो तो नरक भी सद् गति है.! ⚪ कोई भी क्रिया जिनाज्ञा अनुसार हो तो ही हितकारी बनती हैं.! ⚪ जिनाज्ञा से, विपरित किया हुआ लाखो करोड़ों का दान महिनों के उपवास भी कल्याणकारी नही बन सकते.! 🟡 जिनाज्ञा की आराधना से मोक्ष विराधना से संसार हैं.! *📗श्री वीतराग स्तोत्र📗* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

भीतर के भाव शुद्धि पर जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो जाएगा: इन्दुप्रभाजी म.सा.

अपने निंदक स्वयं बने ओर आत्मा की सफाई करते रहे-दर्शनप्रभाजी म.सा. गोड़ादरा स्थित महावीर भवन में चातुर्मासिक प्रवचन Sagevaani.com /सूरत। जीवन में जो समय बीत चुका वह लौट कर नहीं आता। इसलिए बीते हुए का पछतावा करने से अधिक ध्यान जो समय आने वाला है उसे कल्याणकारी कैसे बना सकते इस पर देना चाहिए। धर्म ध्यान के माध्यम से हम अपने को निर्मल व पावन बना सकते है। हमे आत्मा की खोज बाहरी दुनिया में अपने भीतर करनी होगी। हमने अपनी भीतर के भाव शुद्ध कर लिए तो जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो जाएगा। हर हाल में हम अपने धर्म व श्रद्धा पर अडिग रहना चाहिए। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने मंगलवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। रोचक व्याख्यानी प्र...

पाप कर्म का बंध नहीं हो सकता

पाप कर्म का बंध नहीं हो सकता! पापोका अंत करना है तो शुभ कर्मोका भुगतान करना पड़ेगा!- साध्वी जिनाज्ञा श्री जी आकुर्डी स्थानक भवनमे आजसे 29 दिवसीय “पुच्छिसुणं “ जाप का अणुष्ठान प्रारंभ हुआ! डॉ. मेघाश्री जी ने नवकार महामंत्र एवं लोग्गस्स मंत्र कह इस अणुष्ठान का प्रारंभ किया ! हर रोज़ एक पद से प्रारंभ कर अगले पदोका उच्चारण कर यह अणुष्ठान 29 दिन चलेंगा! आज नेहा खिरोदिया ने 11 उपवास के प्रत्याख्यान किये! सेवाधारी रस्सोय्या अमर का श्री संघ द्वारा विश्वस्त मदनलालजी कोचर एवं नेनसुख जी मांडोत ने सन्मानीत किया! आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के औरसे “ आनंद की रोटी” YCM अस्पताल में जुरुरत मंदोको एवं मरीज़ों को बाँटी गयी! इस अवसरपर पिंपरी चिंचवड महानगर निगम की नगर सेविका सौ. सुलक्षणा शिलवंत धर भी पहुँची और अपने करकमलोद्वारा अन्नदान किया! उसके पुर्व स्थानक भवनमें महासाध्वी डॉ. राज श्री जी महाराज ...

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट मे किया तपस्या का स्वागत 

साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा इच्छाओं का निरोध करना ही तप का परिपालन है। जिस प्रकार आकाश अनंत और विशाल है उसी प्रकार इच्छाएं अनंत हैं। इच्छाओं के बीच मानव जीवन यात्रा करता है। मनुष्य ही व्रत नियम और तपस्या कर सकता है। देवता व्रत नियम और तप नहीं कर सकते हैं। पशु का कोई लक्ष्य नहीं होता उसे उसका मालिक जो देता है उतना खा लेता है। किंतु मानव सोच विचार करके कुछ भी कर सकता है। तप की बड़ी महिमा है तपस्वी की अनुमोदना करना व कराने का समान फल प्राप्त होता है। तपस्या की पूर्णता देव, गुरु और धर्म की कृपा पर आधारित होती है। तप की अनुमोदना करने से जिन शासन की प्रभावना होती है और अनेक लोगों को प्रेरणा मिलती है। तप करने के लिए द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की आवश्यकता होती है यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद बडोला ने दी। इस कार्यक्रम में साध्वी चंदनबाला साध्वी डॉक्टर चंद्रप्रभा साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा भी शा...

श्रावक श्रविकायों ने मंगल पाठ गुरू दर्शन कर आत्म कल्याण किया

आज दिनांक 10 सितम्बर-2024 मंगलवार को जैन स्थानक बंगा में विराजमान हरफ़नमौला महासाध्वी श्री समर्थ श्री जी म. परम विचक्षण महासाध्वी श्री समबुद्ध श्री जी म. परम सेवाभावी महासाध्वी श्री साधिका जी म. आदि ठाणे -3 जी क़ी आज्ञा अनुसार बंगा श्री संघ सभा प्रधान एडवोकेट एस एल जैन जी क़ी अध्यक्षता में नवांशहर में विराजमान श्रुत वरिधि जैन भारती परम पूज्य महासाध्वी श्री मीना जी म. सा.- ठाणे-5 जी के प्रवचन का लाभ लिया l लगभग 20 श्रावक श्रविकायों ने मंगल पाठ गुरू दर्शन कर आत्म कल्याण किया  l श्री अनिल जैन जी श्रीमती पूनम जैन जी द्वारा रास्ते में सभी के लिए रिफ्रेशमेंट क़ी व्यवस्था क़ी गयी l बंगा जैन सभा के सेक्रेटरी ने मंच संचालन कर संघ क़ी और से गुरू भगवंतो को संवत्सरी सम्बन्धी खिमत खिमोना व क्षमायाचना क़ी l

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