Sagevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि ईर्ष्या एक ऐसा शब्द है जो मानव के खुद के जीवन को तो तहस-नहस करता है औरों के जीवन में भी खलबली मचाता है। यदि आप किसी को सुख या खुशी नहीं दे सकते तो कम से कम दूसरों के सुख और खुशी देखकर जलिए मत। यदि आपको खुश नहीं होना है न सही मत होइए खुश, किन्तु किसी की खुशियों को देखकर अपने आपको ईर्ष्या की आग में ना जलाएं। ईर्ष्यालु व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह किसी की सुख-शांति नहीं देख सकता, उन्नति सहन नहीं कर सकता। वह अकारण ही उन्नतिशील व्यक्तियों की आलोचना करता, उन पर झूठे दोषारोपण करता और उनके कार्यों का अवमूल्यन करता दिखाई देता है। ईर्ष्या का जन्म स्वयं अपनी उन कमजोरियों से होता है जो उन्नति-पथ में बाधक होती हैं। जब मनुष्य अपनी कमियों से असफलता का श...
सांखला निवास पर हुआ जैन साध्वियों का स्वागत, गुरूणी मैया ने कहा अपनी संपत्ति का करो सदुपयोग Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। चार्तुमास संपन्न होने के बाद बिहार करते हुए जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी ठाणा पांच सतियां सांखला परिवार की विनति को स्वीकार करते हुए उनके निवास स्थान पर पहुंची। यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि जीवन को यदि हमें स्वर्ग बनाना है तो पारिवारिक रिश्तों को जीने की कला सीखनी होगी। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने इस अवसर पर धमोपदेश देते हुए कहा कि अपनी धन संपत्ति का सदुपयोग करना सबसे बड़ा इन्वेशमेंट हैं। सदुपयोग क्या है? इसे भी उन्होंने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अपनी संपत्ति को परोपकार, परमार्थ और मानवता की भलाई के लिए खर्च करो। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने एक कहानी के माध्यम से अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के पश्चात हुए नरसंहा...
वर्धमान साधार्मिक सेवा एवं जीव दया समिति की ओर से 228 वां अनाज वितरण का कार्यक्रम दिनांक 29/11/ 2023 को आदिनाध जैन सेवा ट्रस्ट सुले के प्रांगण में हुआ। प्रति माह की भांति इस माह 150 परिवारों को अनाज व खाद्य सामग्री मिठाई पेकेट, साङिया, गुङ, शक्कर, रवा, मैदा, आटा सेमिया, दाल, चावल, आटा, बाजरी, दलिया आदि सामग्रियां वितरण किया गया। संस्था की अध्यक्ष कमला एस मेहता, महामंत्री ललीता सुराणा, कोषाध्यक्ष विमला चौरङिया, उपाध्यक्ष कंचन मेहता रतन जी बाफना सरोज पगारिया एवं सदस्यों द्वारा मंगल चरण एवं पंच परमेष्ठी जाप तथा प पू मणि प्रभ सुरिश्वर जी म सा के शिष्य रत्न के द्वारा मंगल पाठ श्रवण के साथ वितरण किए गए। कमला जी मेहता ने सबका स्वागत करते हुए संस्था गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर ऊषा चोरङिया, शान्ति बाई चोरङिया, संगीता पुंगलिया, रेणु सुराणा, गुलाब बोहरा, मंजु झाबक, मंजु छल्लाणी की सेवाएं सर...
Sagevaani.com /चेन्नई. बिन्नी नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ जैन मूर्तिपूजक संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि साधना में दो बातें मुख्य हैं स्वार्थ और अहंकार का त्याग। जगत के लौकिक व्यवहार चाहिए तो यह भी स्वार्थ के त्याग से मिल जाएगा। थोड़ा त्यागने से ज्यादा मिलता है। किसान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वह फसल के लिए खेत में बीज डालता है। फसल खराब हो जाए, उसे फिर से खेत में बीज बोना पड़ता है। इस प्रकार वह पहले त्याग करता है, उसके बाद ही कई गुना पाता है। किसी के साथ आप अपना स्वार्थ छोड़कर व्यवहार करेंगे तो वह उत्तम है। दुश्मन के साथ भी अगर आप स्वार्थ त्याग कर व्यवहार कर सकें तो भी आपको कुछ घाटा नहीं होगा। उसके मन में भी आपकी कीमत बढ़ जाएगी। स्वार्थ त्याग में सब तरह से लाभ ही है। त्याग से आप सबको अपना बना सकते हैं। इसी तरह से आप भी अगर पहले थोड़े सुख का त्याग करोगे तो...
श्रमण परम्परा के दिव्य नक्षत्र क्रान्तिकारी वीर लोंकाशाह की 608 वीं जन्मजयन्ति श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में श्रद्धा भक्ति दिवस के रुप में मनाई गयी | वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर आर. वीरेंद्रजी कांकरिया ने आठ कर्मों के बंध व उदय में आने के कारण,उनकी काल स्थिति आदि पर विस्तृत विवेचन किया | श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने गुजरात के अरहटवाडा ग्राम में पिता हेमाशाह व माता गंगाबाई दफ्तरी के यहां जन्म लेने वाले श्रमण परम्परा जिनशासन के दिव्य नक्षत्र क्रांतिवीर वीर लोंकाशाह का जीवन परिचय देते हुए बताया कि जिनशासन की शुद्ध परम्परा के प्रचारक के रुप में लोंकाशाह के सही पुरुषार्थ करने हेतु उनका नाम युगों-युगों तक अमर हो गया | श्रमण वर्ग में पनप रही शिथिलता व जिन-पूजा व जिन-भक्ति के नाम पर बढ़ते हुए अनावश्यक आड...
वीर लोकाशाह व जैन दिवाकर चोथमलजी महाराज की जन्म जयन्ती भी मनायी गई Sagevaani.com /चेन्नई :– श्री एस .एस .जैन संघ माम्बलम-टी.नगर चेन्नई के तत्वावधान व चातुर्मासार्थ विराजित स्वर्ण संयम आराधक पूज्य श्री वीरेन्द्रमुनीजी म.सा. के पावन सान्निध्य में धर्म प्राण वीर लोकशाह व जैन दिवाकर चोथमलजी महाराज की जन्म जयन्ती तप-त्याग सामायिक एवं वृद्धाश्रम में अन्नदानं के रूप में समायोजित की गई। मुनिश्री वीरेंद्रमुनि महाराज ने दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व व कृतित्त्व पर विस्तार पूर्वक बताया। संघ मंत्री महेन्द्र कुमार गादिया ने आगंतुक सभी दर्शनार्थियों का श्री संघ की तरफ से स्वागत भाव अभिनंदन किया। संघ अध्यक्ष श्रावक डॉ. एम.उत्तमचन्द गोठी ने दोनों महापुरुषों का गुणानुवाद करते हुए वर्ष 2023 के आदर्श एवं यशस्वी अनेक उपलब्धि युक्त चातुर्मास की झलकियां बताते हुए मुनिश्री के प्रति माम्बलम श्री स...
गुणानुवाद सभा में छाईं रही महिला शक्ति, भाईयों ने कहा गुरूणी मैया के चार्तुमास से उनके जीवन में आया परिवर्तन Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज साहब ठाणा पांच का शिवपुरी में पांच माह का चातुर्मास सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर कमला भवन में तीन दिवसीय विदाई समारोह आयोजित हुआ। विदाईर् समारोह के तीसरे दिन उपकार सभा में डेढ़ दर्जन से अधिक भाईयों एवं बहिनों ने अपने हृदय के उदगार व्यक्त करते हुए साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज के चार्तुर्मास को अद्वितीय चार्तुमास बताया। गुरूणी मैया रमणीक कुंवर जी, ओजस्वी प्रवचन प्रभाविका साध्वी नूतन प्रभाश्री जी, तपस्वी रत्ना की उपाधि से अलंकृत साध्वी पूनम श्री जी, मधुर गायिका साध्वी जयश्री जी और आशूकवि साध्वी वंदना श्री जी को लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा का अवतार बताया गया। उपकार सभा में बहिनों ने पूरी हार्दिकता के साथ अपनी ...
पत्रकारों को बताया- समाज और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक पत्रकारिता की होती है अहम भूमिका Sagevaani.com /शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी म.सा. ठाणा 5 जैन सतियों का शिवपुरी में पांच माह का सफल और सार्थक चातुर्मास संपन्न हुआ। आज रविवार चातुर्मासी चौदस के पश्चात जैन साधु और साध्वियों का गंतव्य स्थल से पदविहार प्रारंभ हो जाएगा। इसी कड़ी में साध्वी रमणीक कुंवर जी और उनकी सुशिष्याओं के शिवपुरी से बिदाई की बेला नजदीक आ गई है। 28 नवम्बर मंगलवार को वह शिवपुरी से विहार करेंगी और इसके पूर्व तीन दिवसीय बिदाई समारोह प्रारंभ हो गया है। बिदाई समारोह के दूसरे दिन साध्वी रमणीक कुंवर जी भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि बिदाई शब्द का इस्तेमाल मेरी दृष्टि में उचित नहीं है। हम भौतिक रुप से शिवपुरी से अवश्य जा रहे हैं, लेकिन शिवपुरीवासी हमेशा हमारे दिल में रहेंगे। सम्मान समारोह में उन्होंने शिवपुरी ...
जैन साध्वियों ने बताया कि जिनका मन सरल होता है वहीं होते है धार्मिक Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। कमल भवन में प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी और साध्वी वंदना श्री जी ने धर्म का मर्म का समझाते हुए कहा कि जिनका हृदय बच्चों के समान होता है, जिनका मन सरल होता है, जिसने अपने मन को मंदिर बना लिया भगवान वहां निवास करते हैं। जैन साध्वियों ने बताया कि ईट, पत्थर और गारे का मंदिर बनाना आसान है, लेकिन सही मायनों में धर्म तब होता है जब मन मंदिर बनता है। धर्मसभा में साध्वी जयश्री जी ने दुनिया का बनकर देख लिया, प्रभू का बनकर देख जरा भजन का गायन कर माहौल को भक्तिरस की गंगा से परिपूरित कर दिया। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धर्म से घबराती है। वह कहती है कि हमारे पास मंदिर जाने सामायिक करने, धर्म आराधना करने और तीर्थ स्थानों पर जाने के लिए समय नहीं है। साध्वी जी ने कहा कि ...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि ऐसा एक भी जीव नहीं जो सुख नहीं चाहता। सबसे बड़ा दुःख जन्म-मरण का है। जीवन तो सबको प्रिय है पर ज्ञानीजन कहते हैं जन्म है तो मरण भी अवश्य है । सभी जानते है फिर भी मरण की कोई कामना नहीं करता । स्वयं सुख पाने के लिए अनेक जीवों को दिन रात पीड़ा देता रहता है ये संसारी जीव का व्यव्हार माना जाता है तो ये व्यवहार गाढ़े कर्म करता है । जिनेश्वर का कथन है कि आप किसी जीव को पीड़ा पहुंचा सुख की प्राप्ति नहीं कर सकते, फिर भी जीव हंसते हंसते पाप कर्म कर नरक गति आदि का बंध करता है। दुख स्वयं के द्वारा उपार्जित किये गये कर्म है इसे भोगना ही पड़ता है । भोगे बिना छुटकारा नहीं है इसलिए भगवान कहते हैं। धर्म ध्यान के लिए सदाकाल लालायित रहो प्रत्येक क्षण, धर्म ध्यान की भावना होनी चाहिए जिससे पाप से छुटकारा मिल सके क्योंकि अव्रती को भगवान ने सबसे बड़ा पापी बताया अव्रती ...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि चार गति पांच जाति और छह काय में आत्मा अनादिकाल से भटक कर दुःख भोग रही हैl जिनेश्वर ने फरमाया संसार दुखों का सागर है चाहे आप कोई भी सांसारिक प्रकृति करो आपको दुख ही मिलेगा। परन्तु जिनेश्वर की वाणी सांसारिक दुखों से छुटकारा पाने का सुख दायक मार्ग प्रशस्त करती है। जिनवाणी श्रवण करने मात्र से जीव धर्म में रमण करने लगता है। जिसकी वाणी तन, मन सब धर्म से युक्त बन जाते है वहाँ सभी दुःख अपने आप नष्ट हो जाते हैं।! जिनवाणी को श्रवण करने से आत्मा पर लगे हुए कर्म क्षीण होने लग जाते जाते हैं जिससे आत्मा कर्म मुक्त होने लगती है और आत्मा को सुख की प्राप्ति होने लगती है। जिनवाणी श्रवण करने वाले को अलग से तंत्र मंत्र की आवश्यकता नहीं पड़ती। नरक में जाने वाला जीव जिनवाणी श्रवण करके देव गति जाने वाला बन जाता है। जिनवाणी श्रवण...
आज का ये दिवस चार्तुमास का अन्तिम दिवस है साथ ही विदाई दिवस। ये दो प्रसंग आपके सामने है। साथ ही तीसरा प्रसंग लोकाशाह जयंती का पर्व है। पर्व जीव को आत्मा से जोड़ता है ऊपर उठाता है। चार्तुमास सर्व पापों को धोने का काल है। इस काल के अन्तर्गत जीव अपने सभी पापों की निन्दा कर घृणा कर आत्म उत्थान का प्रयास करता है। जो आत्मा सदाकाल भोग विलास में रमण करती है उसे भोग विलास को विराम दे सब कुछ भूलकर ब्रह्मचर्य का भी पालन इस काल में किया जाता है। ये काल भोग विलास का नही, आत्मा की समृद्धि का काल है। इसमें जीव आत्म चिन्तन कर सभी पापों से निवृत होने का प्रयास करता है। ऐसे काल में कभी -2 जीव अकरणीय कार्य कर देता है। उस कार्य की आलोचना अंतिम दिन करते है। गलती तो सबसे होती है। ये चातुर्मास काल वैर बांधने का नही क्षमा करने व क्षमा लेन का काल है। जैन धर्म मे व्यवहार रुपी विदाई का दिन मनाया जाता है । हर दिन क...