Sagevaani.com /चेन्नई : तेरापंथ जैन विद्यालय, साहुकारपेट, चेन्नई के प्रांगण में विद्यालय द्वारा गत शनिवार को पारितोषित दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय महासचिव श्री रेख धोका, संयुक्त सचिव डॉ. कमलेश नाहर, महासंवाददाता श्री महावीरचंद गेलड़ा, स्कूल कमेटी संयोजक श्री महेंद्रकुमार आंचलिया, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा व श्री नवीन कुमार दरला भूतपूर्व प्रसिडेन्ट युवक परिषद उपस्थित थे। विद्यालय प्रधानाचार्या श्रीमती एम शशिकला ने सभी सम्माननीय सदस्यों का हार्दिक अभिन्दन किया। सम्माननीय सदस्यों ने अपने कर-कमलों द्वारा, करुणा क्लब, प्रतिभा, साइन्स ओलम्पियाड़ व लिट फेस्ट द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में विजयी रहे छात्रों व शत प्रतिशत हाजिरी प्राप्त विद्यार्थियों को मेड़ल, ट्राफी और प्रमाण पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। श्री रमेश डागा ने विजेता विद्यार्थि...
Sagevaani.com /चेन्नई : चक्रवाती तूफान मिचौंग के कारण प्रभावित लोगों की सहायता के लिए अनेकों हाथ आगे आ रहे हैं। प्राकृतिक आपदा से कोई भी अछुता नहीं रह सकता, यह किसी के बस की बात भी नहीं है। तो उनको बचाने के लिए भी सरकार के साथ स्वयं सेवी समाजिक संस्थान अपने अपने स्तर पर लोगों की सहायता के लिए आगे आते है। इसी कड़ी में ए एम जैन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, मिनम्बाक्कम, चेन्नई द्वारा शुक्रवार दोपहर से लगभग 1000 व्यक्तियों के लिए खाना वितरित किया। सेक्रेटरी उधन चोरडिया ने बताया कि शनिवार रविवार को भी जरूरतमन्द लोगों को दोपहर का खाना खिलाया जायेगा। उसके साथ रविवार को राशन और घर के आवश्यक समानों यथा कपड़े, ब्लेंकेट इत्यादि से युक्त रविवार को 1000 कीट भी सहायार्थ परिवारों को दिये जायेंगे। अतिरिक्त सेक्रेटरी हेमंत चोरडिया ने कहा कि कमेटी सदस्य डॉ भवनेश कुमार देवड़ा के नेतृत्व में अगरचन्द मानमल जैन कॉलेज मे...
Sagevaani.com /चेन्नई :- आज शनिवार 9 दिसम्बर 2023 को रत्नवंश के पंचम पट्टधर आचार्य पूज्यश्री विनयचंद्रजी म.सा की पुण्यतिथि स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में स्वाध्याय दिवस के रुप में मनाई गयी | स्वाध्यायी बन्धुवरों लीलमचन्द बागमार व गौतमचंद मुणोत ने गौतम गणधर की स्तुति की | उपस्थित श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर महावीर चालीसा की सामूहिक रुप से स्तुति की | श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने राजस्थान के फलौदी ग्राम में प्रतापमलजी -रम्भादेवीजी पुंगलिया के यहां जन्मे विनयचंद्र के बाल्यकाल व माता-पिता के वियोग हो जाने पर युवा अवस्था में पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने व पाली में आचार्यश्री कजोडीमलजी म.सा का संयोग मिलने पर वैराग्य को प्राप्त करने के पश्चात अनुज भ्राता कस्तूरचंद के संग दीक्षित होने का उल्लेख किया | 15 वय की अवस्था में दीक्षित होने वाले विनयचंद्रजी म....
🔶 चातुर्मास प्रारंभ में ही लगभग 200 श्रावक- श्राविकाओं द्वारा चातुर्मास काल के दरम्यान लगभग 50000 (पचास हजार) से अधिक सामयिक करने के, साथ ही जमीकंद/होटल/सिनेमा/ मौज मस्ती के उद्देश्य से घूमने/अब्रह्म सेवन व रात्रि भोजन त्याग/दैनिक 14 नियम चित्तारना/प्रतिदिन नवकारसी/अंगूठी के पच्छक्खाण आदि 27 नियमों का संकल्प पत्र भरा गया। 🔷लगभग 125 से भी ज्यादा श्रावक- श्राविकाओं द्वारा श्रावक के व्रत (जघन्य 1 एक से उत्कृष्ट 12 व्रत) ग्रहण करना। 🔶 लगभग 150 से भी ज्यादा श्रावक श्राविकाओं द्वारा दैनिक 14 नियम ग्रहण ग्रहण करना। 🔷100 से भी ज्यादा भाई बहनों द्वारा पच्छक्खाण की अंगूठी धारण करना। 🔶 हर अमावस्या,पूर्णिमा महापुरुषों की जन्म जयंती एवं पुण्यतिथि प्रसंग पर 2-2 सामायिक के साथ मानव सेवा/अन्नदानं/तप-त्याग व साधर्मिक भाई बहनों को राशन किट/दवाइयाँ वितरण(गुप्त रूप से) कार्यक्रम। 🔷 चातुर्मास प्रारंभ से समापन ...
साध्वी जी ने बताया कि भक्ति जब साकार होती है तब भगवान मिलते हैं Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। भक्त होना आसान नहीं है। भक्ति को जीवन में वहीं उतार सकता है जो अपने भगवान के लिए सब कुछ न्यौछाबर करने को तैयार रहता है। सच्चा भक्त वहीं है जो भगवान के लिए नरक जाने तक को तैयार हो जाए। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बल्लभचंद जी, शैलेष कुमार जी कोचेटा के निवास स्थान पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी वंदना श्री जी ने भगवान मेरा जीवन कल्याण के लिए है, भजन का सुमधुर स्वर में गायन किया। धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने भगवान के प्रति भक्त की भक्ति कैसी होनी चाहिए। इसे एक कथा के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि नारद मुनि ने भगवान कृष्ण से पूछा कि आपके कितने भक्त है तो उनका जवाब था कि कोई बिरला ही मेरा भक्त है। यह जवाब सुनकर नारद मुनि आश्चर्य चकित ह...
राजस्थानी अशोसिएशन तमिलनाडु द्वारा दिनांक 3 दिसंबर रविवार को पट्टालम स्थित शांतिनाथ भवन में दंत चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा व डायबिटीज चेक अप कैंप का आयोजन किया गया। जिसमें दंत विशेषज्ञ एवं तमिलनाडु गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के एमिरटस प्रोफ़ेसर के. एस. नाजर व उनके डाक्टरों की टीम द्वारा 74 लोगों के दातों का इलाज किया गया। जैन मेडिकल सोशईटी द्वारा संचालित भगवान महावीर आई हॉस्पिटल, रायपुरम की टीम द्वारा 96 लोगों की आंखों की जांच की गई जिसमें से 70 लोगों को चश्मा बनाकर दिए जाएंगे साथ ही पांच लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन करवाया जाएगा । सुवा देवी नाहर डायबीटिक हॉस्पिटल, कोडम्बाकम द्वारा 74 जनों की बीपी व शुगर जांच की गई। व परामर्श दिया गया। प्रार्थना उपरांत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्ष मोहनलाल जी बजाज ने पधारे सभी का स्वागत किया। स्वास्थ्य समिति के चेयरमैन श्रीपाल कोठारी ने चिकित्सा शिविर...
जिसके गुण-कर्म-स्वभाव जितने सात्विक और सुरुचिपूर्ण होंगे, उसका जीवन उतना ही प्रसन्न, उतना ही सुंदर होगा। जो अविचारी, व्यभिचारी अथवा अवगुणी है, वह कितना ही धनवान, शान-शौकत वाला, सुंदर शरीर और रहन-सहन वाला क्यों न हो, सुंदर जीवन की परिधि में नहीं आ सकता। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही, वे आगे बोले कि इसके विपरीत जो सामान्य स्थिति का है, गरीब है, सुंदर शरीर वाला भी नहीं है, परंतु शिष्ट, सभ्य, सुशील, संतुष्ट और शांत है तो वह अधिक सुंदर जीवन वाला कहा जाएगा। जीवन की सफलता का प्रमाण जहां किसी के कार्य और कर्तृत्व से दिया जाता है, वहां उसकी अंतिम श्वास में सन्निहित शांति एवं संतोष की मात्रा भी इसका एक सुंदर प्रमाण है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक लक्ष्य, एक उद्देश्य होन...
माम्बलम (टी.नगर-चेन्नई) स्थानक में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन Sagevaani.com /Chennai: श्रमणसंघीय वरिष्ठ सलाहकार आयम्बिल तप के महान आराधक राजऋषि पूज्य गुरूदेव श्री सुमतिप्रकाशजी महाराज के देवलोकगमन पर श्री एस. एस. जैन संघ के तत्वावधान एवं जिन शासन प्रभावक श्री वीरेंद्रमुनिजी महाराज के सान्निध्य में रविवार सवेरे बर्किट रोड़ स्थित जैन स्थानक में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रखा गया। सवेरे 7.30 बजे से सामायिक साधना के साथ सामूहिक जाप का आयोजन हुआ। तदनन्तर श्री मरूधर केसरी जैन वैयावच्च सेन्टर से श्रद्धांजलि सभा में पधारे मुनिश्री वीरेंद्रमुनिजी म.सा. ने गुरूदेव श्री सुमतिप्रकासजी महाराज के व्यक्तित्व कृतित्त्व व संयम जीवन पर गुरूदेव के जन्म से लेकर महाप्रयाण तक का सारगर्भित वर्णन सभा को बताया और कहा कि मुनि श्रीसुमतिप्रकाशजी महाराज जन्म से तो जैन नहीं थे लेकिन कर्म से जैन धर्म को अपना कर भागव...
Sagevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में बिराजमान पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवनयापन और जीवन-लक्ष्य दो भिन्न बातें हैं। प्रायः सामान्य लोगों का जीवन-लक्ष्य जीवनयापन ही रहता है। खाना-कमाना, ब्याह- शादी, लेन-देन, व्यवहार-व्यापार आदि साधारण क्रमों को पूरा करते हुए मृत्यु तक पहुंच जाना, बस इसके अतिरिक्त उनका और कोई लक्ष्य नहीं होता। एक जीविका का साधन जुटा लेना, एक परिवार बसा लेना और बच्चों का पालन-पोषण करते हुए शादी-ब्याह आदि कर देना मात्र ही साधारणतया लोगों ने जीवन-लक्ष्य मान लिया है। मीठे फल खाने की इच्छा से दो मित्र एक बगीचे में गए। माली ने कहा इस बगीचे के मालिक की आज्ञानुसार यहां एक ही दिन ठहर सकते हो, सो शाम तक जितने फल खा सकते हो, खा लो।दोनों अपनी रुचि के फल खाने चल दिए। एक ने पेट भरकर...
श्रमणसंघीय वरिष्ठ सलाहकार गुरूदेव श्री सुमतिप्रकाशजी महाराज के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रविवार को श्रमणसंघीय भीष्म पितामाह राजऋषि गुरूदेव पूज्य श्री सुमतिप्रकाशजी महाराज का दिनाँक 27 नवम्बर सोमवार को उत्तर प्रदेश मेरठ में संथारा सहित देवलोक गमन हो गया। गुरूदेव सुमतिप्रकाशजी महाराज स्थानकवासी जैन समाज के एक ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने लगभग 60 से भी अधिक वर्षों तक जिन शासन की महति प्रभावना कर लाखों लोगों को जैन धर्म से जोड़ा एवं 125 भी ज्यादा भव्य आत्माओं को अपने मुखारविंद से भागवती जैन दीक्षा प्रदान की। लगभग 50 वर्षों से भी ज्यादा समय तक उन्होंने एकान्तर आयम्बिल तपश्चर्या की आराधना की एवं पूरे दिन नवकार महामंत्र की आराधना में लगे रहते थे। संघ अध्यक्ष डॉ.एम.उत्तमचन्द गोठी ने बताया कि ऐसे महापुरूष के संयम जीवन व्यक्तित्व कृतित्त्व पर प्रकाश डालने के लिए दिनाँक 3 दिसंबर रव...
आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि यह सारा संसार गुण-दोषमय है। संसार की कोई भी वस्तु अथवा प्राणी सर्वथा गुणसंपन्न अथवा दोषमुक्त नहीं है। सभी में कुछ-न-कुछ दोष मिलेगा। परमात्मा ही अकेले पूर्ण एवं दोष रहित है। अन्य सब कुछ गुण-दोषमय एवं अपूर्ण है। सामान्यतः मनुष्यों में दोष-दर्शन का भाव रहा करता है। दोषदर्शी का वास्तव में यह बड़ा भारी दुर्भाग्य है कि वह किसी व्यक्ति अथवा वस्तु में गुण ही नहीं पाता। दूसरों के दोष देखते रहने वाले व्यक्ति स्वभावतः दोषग्राही भर होते हैं। दोष दर्शन से मनुष्य में दूसरों के ऐसे अनेक दोष भी घर कर जाते हैं, जो उसमें पहले से नहीं थे। जिस विषय में रुचि रखकर उसकी चर्चा एवं चिंतन किया जाएगा, वह मनुष्य के स्वभाव का अंग बन जाता है और धीरे-धीरे चेतना पर छा जाया करता है। दोषदर्शी व्यक्ति दूसरों की निंदा करने के ...
सत्संग से जीवन अच्छा और कुसंग से जीवन बुरा बनता है Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। वर्षा की एक बूंद यदि सांप के मुंह में गिरती हैै तो वह जहर बन जाती है वहीं एक बूंद यदि सीप के मुंह में पड़ती है तो मोती बन जाती है। बूंद एक ही है लेकिन संगत से उसका असर अलग हो जाता है। इससे स्पष्ट है कि जीवन को दिशा देने में सत्संग का महत्वपूर्ण स्थान है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने सांखला निवास पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में प्रारंभ में सांखला परिवार की बहिनों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। वहीं प्रवचन के पूर्व भक्तांवर पाठ का गायन किया गया। धर्मसभा में सांखला परिवार ने गुरूणी मैया का आशीर्वाद लेने आए पूर्व सीएमओ रामनिवास शर्मा का स्वागत तेजमल सांखला और यशवंत सांड ने किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने प्रसिद्ध संत गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे संत समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ ...