साध्वी जी ने बताया कि भक्ति जब साकार होती है तब भगवान मिलते हैं
Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। भक्त होना आसान नहीं है। भक्ति को जीवन में वहीं उतार सकता है जो अपने भगवान के लिए सब कुछ न्यौछाबर करने को तैयार रहता है। सच्चा भक्त वहीं है जो भगवान के लिए नरक जाने तक को तैयार हो जाए। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बल्लभचंद जी, शैलेष कुमार जी कोचेटा के निवास स्थान पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी वंदना श्री जी ने भगवान मेरा जीवन कल्याण के लिए है, भजन का सुमधुर स्वर में गायन किया।
धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने भगवान के प्रति भक्त की भक्ति कैसी होनी चाहिए। इसे एक कथा के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि नारद मुनि ने भगवान कृष्ण से पूछा कि आपके कितने भक्त है तो उनका जवाब था कि कोई बिरला ही मेरा भक्त है। यह जवाब सुनकर नारद मुनि आश्चर्य चकित हो गए और उन्होंने भगवान से पूछा ऐसा कैसे संभव है। इस पर मुस्कराते हुए श्री कृष्ण भगवान बोले कि समय आने पर मैं इसका उत्तर दूंगा। एक दिन जब नारद ऋषि कृष्ण भगवान के पास पहुंच तो वह पेट के दर्द से बुरी तरह तड़प रहे थे। कोई भी दवा उन पर असर नहीं कर रही थी। इस पर नारद जी ने उनसे पूछा कि ऐसा दर्द पहले आपको कभी हुआ है।
तो उन्होंने कहा कि एक बार। नारद जी फिर बोले कि कैसे ठीक हुआ तो भगवान कृष्ण का जवाब था कि किसी सच्चे भक्त ने अपने चरणों की रज मेरे पेट पर लगा दी और मैं ठीक हो गया। नारद जी बोले कि तमाम भक्त है कोई भी ऐसा कर सकता है। इस पर भगवान का जवाब था कि लेकिन जो भी भक्त अपने चरणों की रज मेरे पेट पर लगाएगा तो उसे नरक जाना पड़ेगा। बड़ी मुश्किल से नारद मुनि एक किसान को डूढ़ कर लाए और उसने कहा कि भगवान के आनंद के लिए मैं नरक जाने को तैयार हूं। नारद उसे लेकर भगवान के पास आए तो भगवान ठीक थे और मुस्करा रहे थे। उनका जवाब था कि नारद तुम्हारे सवाल का यही जवाब है। सच्चा भक्त वहीं है जो समर्पण की पराकाष्ठा है। उसे अपने सुख दुख से कोई सरोकार नहीं है।
सिर्फ भगवान की फिक्र है। साध्वी जी ने इस उदाहरण से स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति यही है। ऐसी भक्ति जब साकार होती है तब ही भगवान मिलते हैं। गुरू का आशीर्वाद भी ऐसे ही भक्तों को मिलता है। अपनी बात को पूर्णता प्रदान करते हुए साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कहा कि परमात्मा जिसके साथ है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसके पूर्व श्रीमती अनूपमा कोचेटा ने अपने निवास स्थान पर पधारने तथा अपनी चरण रज से घर को पवित्र करने पर गुरूणी मैया के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। श्रीमती सुनयना कोचेटा ने इस अवसर पर गुरूणी मैया के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हुए एक सुन्दर भजन का गायन किया।

14 वर्ष पश्चात पड़े गुरूणी मैया के चरण कमल
कोचेटा निवास स्थान पर इसके पूर्व गुरूणी मैया के चरण कमल 14 वर्ष पूर्व पड़े थे। जब उन्होंने वर्ष 2009 के चार्तुमास में वल्लभ भवन पर भक्तों के आध्यात्मिक कल्याण हेतु बड़ी मांगलिक का लाभ प्रदान किया था। इसे याद करते हुए गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी ने कहा कि उस समय की यादें आज भी मनमें है। कोचेटा परिवार शिवपुरी का धर्मनिष्ठ परिवार है। इसका जवाब देते हुए शैलेष कोचेटा ने कहा कि हमारे पुण्यों के प्रभाव से आपके चरण कमल हमारे निवास स्थान पर पड़े हैं। यह हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है।
पांच माह तक दी धर्मप्रभावना अब दो हमें गुरू दक्षिणा
साध्वी नूतन प्रभा श्री जी ने कहा कि हमने पांच माह तक चार्तुमास के दौरान आप सबको जिनवाणी श्रवण का लाभ दिया है। अब विदाई की बेला में हमें गुरू दक्षिणा भी दीजिए। गुरू दक्षिणा वैसे तो बिना मांगे दी जाती है लेकिन जब आप दे नही रहे तो हमें मांगना पड़ी। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा हमें दी गई सबसे बड़ी गुरू दक्षिणा यहीं होगी कि प्रतिदिन मंदिर स्थानक या धर्म स्थान में अवश्य जाऐं और भगवान के दर्शन करें।
संभव हो तो एक माला अवश्य फेरे। लेकिन यदि आप प्रतिदिन मंदिर जाते हैं तो यह संकल्प अवश्य लें कि माह में चार दिन आप सामायिक करेंगे अथवा कम से कम चार दिन रात्रि भोजन का त्याग करेंगे। हमारे चार्तुमास से यदि आपके जीवन में जरासा भी परिवर्तन आया तो हमारा चार्तुमास करना सार्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आपको धन की पेड़ी प्रिय है ठीक उससे ज्यादा प्रिय धर्म की पेड़ी होना चाहिए।