Author: saadhak

अनित्य भावना – धनप्राप्तीचा मार्ग आणि मनाचा बदल

प्रवचन – 13.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) भगवंत महावीर स्वामींनी सांगितलेल्या 12 भावनांपैकी पहिली भावना म्हणजे अनित्य भावना. ‘अनित्य’ म्हणजे न टिकणारे, क्षणभंगुर. या जगात काहीही कायमचे नाही – शरीर, संपत्ती, मान, पद, नाती, सुख-दुःख… हे सारे बदलणारे आहे. या भावनेचे चिंतन केल्याने आपण बाह्य वस्तूंवर अनावश्यक मोह ठेवत नाही आणि जीवनाचा खरा उद्देश ओळखतो. धन ह...

आध्यात्मिक प्रक्रिया है प्रतिक्रमण : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में बुधवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि जैन धर्म में प्रतिक्रमण एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है अपनी गलतियों को स्वीकार करना, पश्चाताप करना और भविष्य में उन गलतियों को न दोहर...

संसार मे जन्म मरण का कारण आयुष्य कर्म: साध्वी संबोधि 

आयुष्य कर्म के अस्तित्व से प्राणी जीवित रहता है और इसका क्षय होने पर मृत्यु को प्राप्त करता है। इस कर्म का स्वभाव कारागृह के समान बताया है। यह कर्म आत्मा के अविनाशी गुण को रोकता है। जैसे पैर में बेड़ी पड़ जाने पर मनुष्य एक ही स्थान से बन्ध जाता है वैसे ही आयुष्य कर्म आत्मा को अमुक जन्म में निर्धारित अवधि तक रोके रखता है। जब आयुष्य कर्म समाप्ति की ओर होता है तब दुनिया की कोई भी शक्ति उसे रोक नहीं स...

हरी को पाने के लिये हीरे का त्याग करना ही पड़ेगा-पूज्याश्री कमलप्रज्ञा मसा

परिग्रह करोगे तो या तो खाएगा परिवार, या ले जाएगी सरकार-पूज्याश्री डॉ संयमलताजी मसा मालव केसरी श्री सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा के आज्ञानुवर्तिनी पंडित रत्न मालव भूषण श्री महेन्द्र मुनि जी मसा के देवलोक गमन पर श्री वर्धमान स्थनकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक द्वारा गुणानुवाद सभा का आयोजन रखा गया, जिसमें महासाध्वी डॉ संयमलता जी मसा ने 04 लोग्गस का काउसग्ग करवा...

थॅंक्स गिव्हींग की भावना रहनी चाहिए! – साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा.

जन्मदेनेवाले माता पिता , शिक्षा देनेवाले गुरुजन, धर्मआराधना सिखानेवाले धर्मगुरु, अन्नदाता, समाज, परिवार, एवं अपने हर कार्य मे सहाय्यभुत होने वाली व्यक्ति के प्रति हमे धन्यवाद अदा करने चाहिये!     परिवार को एक सुत्र में बॉंध रखनेकी ज़िम्मेवारी हर नारी पर है ! नारी घर परिवार की शान है, सन्मान है ! आज के धर्मसभा में विस्तार से थॅंक्स गिव्हींग का महत्व विशद साध्वी स्नेहाश्रीजी ने किया!

थॅंक्स गिव्हींग की भावना रहनी चाहिए! – साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा.

जन्मदेनेवाले माता पिता , शिक्षा देनेवाले गुरुजन, धर्मआराधना सिखानेवाले धर्मगुरु, अन्नदाता, समाज, परिवार, एवं अपने हर कार्य मे सहाय्यभुत होने वाली व्यक्ति के प्रति हमे धन्यवाद अदा करने चाहिये! परिवार को एक सुत्र में बॉंध रखनेकी ज़िम्मेवारी हर नारी पर है ! नारी घर परिवार की शान है, सन्मान है ! आज के धर्मसभा में विस्तार से थॅंक्स गिव्हींग का महत्व विशद साध्वी स्नेहाश्रीजी ने किया!

प्रतिक्रमण से विशुद्ध होती है आत्मा : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्वी गौरव कुंडलिया का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में मंगलवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में गौरव कुंडलिया (सुपुत्र : धनपत कुंडलिया, सरदारशहर) के नौ (9) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को ...

प्रभु की भक्ति श्रद्धा भक्ति से करें: डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने कहा कि प्रभु की भक्ति श्रद्धा भक्ति भाव से करें। क्योंकि भक्ति की शक्ति अपार है। वीतराग प्रभु के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति रखते हुए भक्त जो भी पूजा भक्ति,गुण कीर्तन, नाम स्मरण पाठ करता है,वह मनुष्य जन्म का पहला फल है। हमें भी परमात्मा को प्राप्त करने की प्यास जगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज...

अर्जुन, राजा जनक आणि जम्बूस्वामींप्रमाणे जिज्ञासा पाहिजे -प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना: प्रभू भगवान महावीरांच्या अंतर जगतामध्ये फुलांचा सुंगध आणि फळाचा रस आपल्याला चाखायला मिळतो. त्यांचे गुणवर्णन किती म्हणून करावे तेवढे ते थोडेच आहेत. म्हणूनच म्हटले आहे की, अर्जुन, राजा जनक आणि जम्बूस्वामींप्रमाणे जिज्ञासा पाहिजे, तुमची, आमची जिज्ञासा कशी आहे? याचा कधी तरी विचार केला का, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात...

धन्यवाद देना और क्षमायाचना करना कभी ना भुले- आगमज्ञाता डॉ. सुयोगऋषिजी

नवकार आराधक उपप्रवर्तक पु तारकऋषिजी म.सा. आगमज्ञाता डॉ. सुयोगऋषिजी म.सा. आदि ठाणा 7 सादड़ी सदन स्थानकभवनमे चातुर्मासार्थ विराजमान है! धर्मआराधना एवं तपआराधना के माध्यमसे चातुर्मास गतिमान है! जिनवाणी की मधुर रसना भक्तगण ग्रहण कर रहै है! आज डॉ. सुयोगऋषिजी म.सा. ने धन्यवाद एवं क्षमा का महत्व अपने मधुरवाणी से द्रुष्टांतो सह समझाया! और दो छोटे शब्दोकी महानता बतायी! जन्म देनेवाले मॉं-बापका धन्यवाद यह सब...

तपस्वी करते हैं धर्मसंघ की प्रभावना : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तपस्विनी बहिन लीला देवी के 35 दिन की तपस्या पर तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनिश्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में सोमवार को तेरापंथ धर्मस्थल में लीला देवी महनोत के मासखमण तप (35 दिन) एवं प्रतीक बोथरा के धर्मचक्र तप के उपलक्ष्य पर तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अच्छी संख्या में लोग उपस्थित हुए। तपस्विनी बहन लीला दे...

गुरु अमर संयम अमृत वर्ष समापन समारोह का विराट आयोजन 5 अक्टूबर को बेंगलुरु में

कर्नाटक प्रदेश की राजधानी फूलों की नगरी बेंगलुरु की धर्मधरा पर तुरकिया जैन भवन, गांधीनगर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य गुरुदेव श्री पंकज मुनि जी म. सा., दक्षिण सूर्य अमर शिष्य प.पू. डॉ. श्री वरुणमुनि जी म. सा., मधुर गायक मुनिरत्न प.पू. श्री रूपेशमुनि जी म.सा आदि ठाणा 3 एवं बेंगलुरु में विराजित समस्त साधु-साध्वीजी भगवंतो की पावन निश्रा में 5 अक्टूबर 2025 को सरदार वल्लभ ...

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