Author: saadhak

स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी उत्सव

सनातन धर्म विद्यालय के प्रांगण में विद्यालय सचिव श्री एस पी बाहेतीजी, विद्यालय प्राचार्या श्रीमती एस लता, मुख्य अतिथि श्री शिव कुमार गोइन्का (अध्यक्ष के जी आई क्लोथिंग ) विद्यालय कोषाध्यक्ष श्री सुनील डागा , विद्यालय इ सी ए समन्वयक श्री गिरी बागडी , श्रीमती संतोष दमानी, अध्यापिकाओं , अभिभावकों और विद्यालय की छात्राओं ने बड़े हर्षोल्लास के साथ 79 वाँ स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी उत्सव मनाया I     ...

स्वातंत्र्य – बाह्य आणि अंतःकरणातील

प्रवचन – 15.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) बंधूंनो-भगिनींनो, आज आपण सर्व भारतवासीयांसाठी अत्यंत पवित्र दिवस – 15 ऑगस्ट – स्वातंत्र्य दिन साजरा करीत आहोत. 1947 मध्ये आपल्याला परकीय सत्तेतून मुक्ती मिळाली. हा दिवस आपल्याला केवळ देशाच्या स्वातंत्र्याचीच आठवण करून देत नाही, तर स्वातंत्र्य या संकल्पनेचा खोल अर्थही सांगतो. जैन धर्म आपल्याला शिकवतो की, दोन प्रक...

गांधी नगर में मनाया गया 79 वा स्वतन्त्रता दिवस पर्व

श्रमण संघीय उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म सा, ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा, मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी म सा के पावन निश्रा में शुक्रवार को 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर्व बड़े ही उत्साह और उमंग हर्षौल्लास के साथ श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर के तत्वावधान में मनाया गया। इस अवसर पर दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी ने अपने संबोधन की शुरुआत में सभी श्रद्धालुओं और देशवा...

श्रध्देला वाचवून ठेवले तर काही ना काही लाभ होईल!-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना: श्रध्देला वाचवून ठेवावेच लागेल, त्याशिवाय आमच्याकडे दुसरा कोणताही पर्याय नाही, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प....

प्रसिद्धि और शरीर की विशेषता का कारण नाम कर्म: साध्वी संबोधि

शरीर और शरीर से सम्बन्धित अंग प्रत्यंग के कण-कण की रचना करने वाला नाम कर्म है। यश-अपयश, सुस्वर-दुस्वर और सौभाग्य-दुर्भाग्य भी नाम कर्म की देन है। आत्मा के अरुपी गुण को ढक कर रूपी (रूप, रस, गन्ध, स्पर्श) शरीर और उससे सम्बन्धित अंग-उपांग प्रदान करना नाम कर्म का कार्य है। जैसे चित्रकार अच्छी-बुरी विविध आकृतियाँ बनाता है, उनमें विभिन्न रंग भरता है और उन्हें सुरूप-कुरूप व सुडौल-बेडौल रूप में चित्रित कर...

“लोग्गस्स” जाप से महामंगलकारी अनुष्ठान संप्पन्न

पावन सानिध्य- गुरुमॉं पु. चंद्रकलाश्रीजी, साध्वी स्नेहाश्री जी, श्रुतप्रज्ञाश्री जी! आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण में सामुहिक लोग्गस्स जाप का महामंगलकारी अणुष्ठान संप्पन्न हुआ! “शासनसुर्या” पु. स्नेहाश्रीजी ने यह जाप करवाया! जापके लाभार्थी परिवार थे संघ कोषाध्यक्ष नेनसुखजी मांडोत, जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन अध्यक्ष नितीनजी बेदमुथा, विजयजी ओस्तवाल, मनोज जी ओस्तवाल! बड़ी भारी...

मिले शाश्वत मुक्ति: डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने गुरुवार को धर्म सभा में प्रथम तीर्थंकर परमात्मा श्री ऋषभदेव प्रभु की स्तुति रुप भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से कहा कि तीर्थंकर प्रभु स्वयं तीरते है और साधक भक्त आत्माओं को भी संसार रुपी सागर से तिराने वाले हैं। प्रभु की भक्ति स्तुति से जीवन में मिलने वाले अदभुत लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन...

हमारा मोह संसार में है: प.पूज्य डॉ श्री संयमलताजी म.सा.

हमारा मोह संसार में है। मोहनीय कर्म की स्थिती में 70 क्रोडा क्रोडी सागरोपम भोगना पडेगा। बडे बडे घरों मे कुत्ते बड़ी बड़ी गाडी में घूमते है है एसी घर मे रहते है मालिक उन्हें खुद नहलाता है, भले ही माता पिता की सेवा न करता हो, परिग्रह रखोगे तो सुख सुविधाएं मिलेगी लेकिन ऐसे कुत्ते जैसा भव मिलेगा। धन मे अत्याधिक आसक्ति रखोगे तो अगले जन्म में नाग बनकर उस धन की चौकीदारी करोगे। तो ताजगी गार्डन के फूल मे है,...

अच्छे कार्यकी अनुमोदना करते रहो!- साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा.

आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण में महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकलाश्री जी आदि ठाणा 3 का चातुर्मास अग्रेसर है! जिनवाणीका रसपान धर्म अनुरागी कर रहे हैं! अपने मधुर वाणी द्वारा शासन सुर्या पु. स्नेहाश्रीजी ने बताया, अनुमोदना का भाव का अर्थ है किसी और के अच्छे कार्यों या तपस्या की प्रशंसा करना और उसमें खुशी महसूस करना। इसे अनुमोदन, समर्थन या सहमति के रूप में भी समझा जा सकता है। अनुमोदन ...

संधीचं सोनं करा-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : मोहनिय कर्मातून बाहेर कसे पडावे. आपलं भाग्य आहे की, आपल्याला या दरबारात प्रभू महावीरांची गाथा आपल्याला श्रवण करण्याची संधी प्राप्त झाली आहे. या संधीचं आपण सोनं केलं पाहिजे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. या...

योगी बनू शकत नाही पण सहयोगी तर बना!-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : योगी बनू शकत नाही पण सहयोगी तर बना. असा हितोपदेश देतांनाच ते म्हणाले की, आपलं घर आहे ना, ते सुमेधापरवत असलं तरी प्रभू महावीरांना कधीच विसरु नका, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची ...

प्रभु की भक्ति निष्काम भाव से करें: डॉ वरुण मुनि जी।

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी ने बुधवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु की भक्ति निष्काम भाव से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य शरीर प्राप्त करके भी प्रभु की भक्ति धर्म की आराधना नहीं करते हैं। वे मनुष्य होकर भी पशु समान है। जिसके द्वारा भजन किया जाए और अपने मन को प्रभु मय बना लिया ज...

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