सर्टिफिकेशन के लिए देशभर से 9 फैकल्टी के ट्रेनर्स पहुंचे लालगंगा पटवा भवन Sagevaani.com /रायपुर। 5 माह का चातुर्मास अपने अंतिम दौर में है, लालगंगा पटवा भवन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के मुखारविंद से श्रावक पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) आराधना का लाभ ले रहे हैं। इस दौरान देशभर से अर्हम विज्जा के लगभग 400 से 500 ट्रेनर्स लालगंगा पटवा भवन पहुँच चुके है। अर्हम विज्जा के इतिहास में पहली बार एक साथ 9 फैकल...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि श्रावक धर्म एक प्रकार से साधक को तारने वाला, पाप को अल्प कराने वाला और ज्यादा से ज्यादा समय आत्म साधना, त्याग तप आदि में लगाने वाला है। श्रावक धर्म यही प्रेरणा देता है कि अपने आपको आत्मा से जोडो और संसार से निवृत हो। संसारी जीव जो पाप करने में लगा है उसे सीमित करने का निर्देश श्रावक धर्म देता है। सागर जितनी मर्यादा को ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने सपने साकार करने के लिए कड़ी मेहनत और अपने समय का सही उपयोग करने की जरूरत है। सफलता केवल उन्हें ही मिलती है जो इसके काबिल होते हैं। लोग अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने समय का सही इस्तेमाल और कड़ी मेहनत और उसी के अनुसार काम करते हैं। असफलत...
Sagevaani.com/चैन्नई। संसार में सांसो का कोई भरोसा नहींं दुसरी सांस आऐ भी या नहीं आऐगी कोई भी बता नहीं सकता है।मंगलवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रोताओं को धर्मसंदेश प्रदान करतें हुए कहा कि समय अमूल्य है और जीवन क्षणभंगुर है और मनुष्य शरीर की नश्वरता को जानतें हुए भी संसार के क्षण मात्र के सुख को पाने की चाह में वो परलोक के सुख को खो रहा है। जबकि संसारी सुख से ...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि जिनेश्वर भगवान ने सकल जीवों को धर्म मार्ग का निरुपण तारने के लिए किया। श्रुत यानि सुनना, चारित्र यानी आचरण करना। कुछ विशिष्ट आत्मायें होती है जिनके पास जन्म से ही ज्ञान होता है ऐसी भवि आत्माएं ही मोक्ष गामी होती हैं। मोक्षगामी आत्माओं से जो वचन श्रवण किये जाते है वो वानी जिनवाणी कहलाती है। जीवन तभी सफल होता है जब कर्म बन्धन...
Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि समय बड़ा मूल्यवान है। इस संसार ने उत्कृष्ठ स्थित दो जगहों की है, एक है 33 सागरोपम और दूसरी है सर्वार्थ सिद्धि विमान की। इन दो जगहों की स्थिति उत्कृष्ट है। लेकिन दोनों ही स्थितियों का बंद है। 33 सागरोपम को लवसप्तम कहा गया है। सात श्वास का एक प्राण होता है, सात प्राण का एक स्तोक होता है और सात स्तोक का एक लव होता है। आज के समय में लव सप्तम का...
Sagevaani.com /रायपुर। सुधर्मा स्वामी की अनुभूति जिन शब्दों में अक्षुण्य है, उन्ही शब्दों के माध्यम से परमात्मा महावीर के उस अक्षर स्वरुप को जानने के लिए लालगंगा पटवा भवन में पुच्छिंसुणं आराधना अनवरत जारी है। जंबूस्वामी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए सुधर्मा स्वामी ने जिस स्तोत्र की रचना की थी, उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि में मुखारविंद से श्रावक उसका रसपान कर रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रम...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैंl बंधुओं जैसे कि वर्धमान जैन स्थानक वासी भायंदर मैं कल हमारे यहां पर विराज सत्य साधना जी महाराज साहब अर्हत ज्योति जी महाराज साहब तन्मय श्री जी महाराज साहब हित साधना जी महाराज साहब हर्ष प्रज्ञा जी महाराज साहब गुरु छाया जी महाराज ...
पूर्ण अनुशासन, समर्पण व लगन से ही जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का रास्ता खुलता है। सफलता के ये सुझाव आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमति वल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कुछ कर गुजरने का जुनून है तो कोई लक्ष्य कितना भी कठिन क्यों न हो, उसे प्राप्त कर सकते हैं। जब तक समर्पण नहीं होता, तब तक सच्चा सुख नहीं म...
जैन साध्वी ने बताया कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप है मोक्ष के मार्ग Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। भगवान महावीर स्वामी की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन करते हुए साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि अपने जीवन और आत्मा को सरल बनाने के लिए साधक को गुरू के समक्ष अपने पापों की आलोचना करना चाहिए और गुरू द्वारा बताए गए दण्ड को स्वीकार कर प्रायश्चित्त करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ज्ञान दर्शन चारित...
नार्थ टाउन में ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि आत्म बधुओ, जिनेशवर भगवान महावीर की वाणी धर्म को प्रस्तुत करने वाली हैl उनकी वाणी से ही जन-2 को ये ज्ञान प्राप्त होता है कि धर्म क्या है, धर्म पालन कैसे करना है। शुद्ध रूप से धर्म का मार्ग बताने वाली धर्म में आगे बढाने वाली एक मात्र वाणी जिनवाणी है। जिसने भी इस जिनवाणी को सुना और अपने साम्थर्य से अपनाया, अपनायेगें और अप...
साध्वी जी ने बताया भगवान महावीर ने कहा साधना के जो आठ सूत्रों को उपलब्ध है उसे ही बोलने का अधिकार है Sagevaani.com /शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी भगवान महावीर की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन कर रही हैं। उत्तराध्यन सूत्र के 25 वें अध्ययन में उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने साधू और साध्वियों के लिए साधना के आठ सूत्र बताए हैं। इन आठ सूत्रों में पारंगत होने पर ही उन्हें धर्म ...