Author: saadhak

रजत का राज्य परिषद अधिवेशन संपन्न

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु के माध्यम से राजस्थानी समाज ने सेवा के कीर्तिमान स्थापित किए हैं तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय अन्नादुरई के कर कमलों से स्थापित आपकी यह एसोसिएशन स्थानीय समाज के साथ तालमेल के साथ सेवा कार्य कर रही है तदर्थ बहुत बहुत बधाई ये उद्गार व्यक्त किए तमिलनाडु विधानसभा के जोलारपेट श्रेत्र के विधायक श्री के देवराज ने। श्री के देवराज दिनांक 17 दिसंबर 2023 प्रातः 10:00 बजे येलगिरी की ...

मेगा हैल्थ स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्‌टालम में छात्र अभिभावकों के लिए हुआ आयोजित Sagevaani.com /चेन्नई : तेरापंथ एजूकेशनल एण्ड मेडीकल ट्रस्ट एवं आचार्य श्री तुलसी डाइग्नोसिस सेंटर- संचालक तेरापंथ युवक परिषद् के द्वारा तेरापंथ जैन विद्यालय पट्टालम के प्रांगण में प्रातः स्वास्थ्य सघन जाँच शिविर का स्कूल छात्र अभिभावकों के लिए आयोजन किया गया।  विद्यालय सिल्बर जुबली वर्ष के सुअवसर पर मेगा हैल्थ चैकअप कैंप का एटीड...

बद्रीनाथ जी को श्रद्धांजलि

आज संकरा नेत्रालय हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ बद्रीनाथ जी को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हॉस्पिटल के वीडी स्वामी ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित किया गयाl करीबन दो सो लोगों ने श्रद्धांजलि सभा में भाग लियाl उसमे फतेहराज जैन को भी जाने का मौका मिलाl इस मैके पर उन्होने कहा कि डॉ बद्रीनाथ जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने जीवन में हर व्यक्ति को खुशी से हस्ते हस्ते आखों के हज़ारों ऑपरेशन कराए l कई बार हमने भी गुरु...

विपत्ति एक कसौटी है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री संभवनाथ जैन मंदिर व्यापारी जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि संघर्ष जीवन की एक कसौटी है जो अंत में विजय का द्वार खोलती है और समस्या का समाधान करती है। संघर्ष का जीवन जीना है तो भूल को भूलना सीखना होगा। प्रतिशोध के कटु परिणाम ही आते हैं। इसलिए क्षमा सहज-सरल जीवनशैली का मूल मंत्र है। जीवन में परिवर्तन का क्रम चलता रहता है। अगर एक जैसी परिस्थितियां बार-बार हो र...

पाप तीन कारणों से होते है: विजयराज जी म.सा.

पू.आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया की शिष्य ने पूछा गुरुदेव से श्रावक की क्या पहचान है? श्रावक की *दो पहचान है* पहली है *पापभीरु ओर दूसरी है व्यवहार कुशलता* 🔻 *पाप* होते है तीन कारणों से- मन से होते है वो मानसिक, काय से होते हे वो कायिक पाप है। काया से पाप होते है वे कायिक पाप है । लोग *पुण्य व धर्म* कम करते है पाप ज्यादा करते है क्योंकि *आकर्षण होता है* परिणाम दुखदायी होती है। प्रवर्तिया प...

पापों में मनवा घुम रहा, माला फिराये तो क्या हुआ: विजयराज जी म.सा.

पू.आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया की साफ न किया अगर दिल को गंगा नहाये तो क्या हुआ,, पापों में मनवा घुम रहा, माला फिराये तो क्या हुआ,,   साफ किया न मगर दिल को गंगा नहाये तो क्या हुआ….. भगवद गीता, रामामण, निस दिन सुनता रहता है,, अमल किया इन पर कुछ भी, , नर तन मिला तो क्या हुआ,, मुख से राम-राम करता है और मन में हेरा फेरी है, जाकर मंदिर मस्जिद में सीस झुकाये तो क्या हुआ….. झूठ...

जो पाप से डरता है श्रावक है: विजयराज जी म.सा.

पू.आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया की तिस धममे नीचे सासाइये, सिझ्झी सिझम चाणेणं, सिझी संति तहावरे (तर्फ: दिल के मरमान) साधना का है समय सोना नहीं , मनुज जन्म हमको खोना नहीं, भाग्य से जीन देव का शासन मिला … भुलकर के भी कभी रोना नहीं, मनुज तन हमको मिला खोना नही.. साधना का हे समय—- 🔻किसी ने पुंछा गुरु देव श्रावक की क्या पहचान है? ①श्रावक पापभीरू होता है – जो पाप से डरता, भयभीत...

अहंकार भी पतन का एक कारण है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री वासुपूज्यस्वामी जैन संघ मैलापुर के आराधना भवन में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि छह विकारों में मद अर्थात् अहंकार पतन का चौथा कारण द्वार है। यह मनुष्य का स्वयं अर्जित किया हुआ मनोरोग है। रोग का अर्थ होता है शरीर की प्रक्रिया को विकृत कर देना। जिस प्रकार भला-चंगा हाथी मदांध हो जाता है तो वह विवेक खो देता है और गलत आचरण करने लगता है उसी प्रकार मनुष्य जब मदांध हो जाता ह...

आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल सम्मानित हुई राष्ट्रीय स्तर पर

◆ एजुकेशन टुडे ने सीबीएसई बोर्ड में समग्र शिक्षा के अन्तर्गत किया सम्मानित ◆ बंगलुरू में आयोजित समारोह में प्राप्त हुआ पुरस्कार  Sagevaani.com /Chennai : परम श्रद्धेय गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमणजी के वर्ष 2018 के चेन्नै चातुर्मास स्थल पर जैन तेरापंथ वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा संचालित आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल, माधावरम को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित ‘एजुकेशन टुडे’ द्वारा किये गए एक सर्...

विनाश का प्रमुख कारण अहंकार ही हैं : देवेंद्रसागरसूरि

राजा, रंक किसी के लिए अहंकार फलदायी नहीं है। विनाश का प्रमुख कारण अहंकार ही हैं। धन, संपदा, यश, वैभव, कीर्ति, ताकत किसी भी चीज का घमंड मनुष्य में नहीं होना चाहिए और यदि ऐसा है तो एक समय यह सभी तत्व साथ छोड़ देते हैं। अहंकार हमें पतन की ओर ले जाता है। हमारे शास्त्रों में इसका स्पष्ट उल्लेख भी हैं। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने मैलापुर के श्री वासुपूज्यस्वामी जैन संघ में प्रवचन देते...

पाप से डरना चाहिए: विजयराज जी म.सा.

पू.आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया की शिष्य ने पुछा गुरुदेव श्रावक की – क्या पहचान हे? 1 पाप भीरुता – गुरु ने बताई पाप से डरते है श्रावक होते हैं। साधु या श्रावक पहली पहचान पाप से डरना चाहिए, पाप से डरते नही पर आप साधु या श्रावक नहीं है। श्रावक वह जिसके जीवन में पाप से डर है पापो का सीरमोर कौन है? *मोह* पापों का सिरमौर है दो मानव है संसार में *एक मोह को जीतने वाले साधक*, *दूसरे ...

दूसरों के प्रति करूणा का भाव मन में सेवा का भाव उत्पन्न करता है : देवेंद्रसागरसूरि

आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी एवं मुनि श्री महापद्मसागरजी का सोमवार को मैलापुर के श्री वासुपूज्यस्वामी जैन संघ में पदार्पण हुआ, हर्षोल्लास के साथ आचार्य श्री का संघ जनों ने स्वागत किया, पश्चात धर्म सभा का आयोजन हुआ, आचार्य श्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में विभिन्न रसों के रूप में शृंगार, करूणा, हास्य, वीर, अद्भुत, रौद्र, भय, वीभत्स और शांत के रूप में किया गया है। जिस प्रकार रक्त का प्रवाह मनुष्य...

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