Author: saadhak

ढाई अक्षर से बनती रिश्तों की दुनिया खुशहाल : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com चेन्नई: ढाई अक्षर का शब्द है- प्रेम, प्यार, स्नेह, शक्ति, भक्ति, दुर्गा, लक्ष्मी आदि। ढाई अक्षर का अपना महत्व है। दो अक्षर का लक होता है और ढाई अक्षर का भाग्य। उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी ने जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् चेन्नई स्थित तीर्थकर समवसरण में ‘ढ़ाई अक्षर के शब्द’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए कहें।  साध्वीश्रीजी ने आगे कहां कि...

वैज्ञानिक प्रो. श्री नरेन्द्रजी भंडारी के सम्मान में परिचर्चा 

Sagevaani.com चेन्नई | इसरो और चंद्रयान मिशन से जुड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रो. नरेन्द्रजी भंडारी ने कहा कि साधु और गृहस्थ के बीच विद्वानों का वर्ग होना बहुत आवश्यक है |  किलपॉक में समाजसेवी सुगालचंदजी जैन के निवास पर उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने जैन धर्म को सर्वाधिक वैज्ञानिक धर्म निरूपित किया। भगवान महावीर फाउंडेशन के संस्थापक श्री सुगालचंदजी जैन ने कहा कि भगवान ऋषभदेव के शासन में...

वैज्ञानिक प्रोफेसर नरेन्द्रजी भंडारी का सम्मान

Sagevaani.com चेन्नई | इसरो और चंद्रयान मिशन से जुड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रो. नरेन्द्रजी भंडारी का श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु की ओर से सम्मान किया गया | सम्मान करते हुए श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने कहा कि प्रोफेसर भंडारी जैन अकादमी ऑफ स्कॉलर के संस्थापक हैं व अपोलो लूणार चन्द्र मिशन एवं भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम चन्द्रयान प्रथम मे मुख्य वैज्ञानिक रहे |...

अध्यात्म त्याग वीतराग

श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड में विराजित महासतीजी श्री आगमश्रीजी म.सा ने प्रवचन में बताया कि आत्माेपासना एक सुंदर उपक्रम है जिसमें साधक अपनी आत्मकथा खुली पुस्तक की तरह पढ़ लेता हैं। कहां कहां और कैसे कैसे दोषों का सेवन हुआ है उसकी जांच परख प्रतिक्रमण में हो जाता है। व्रत प्रत्याख्यान स्वीकार करने पर ही प्रतिक्रमण होता है।   साध्वी धैर्याश्रीजी ने बताया कि धर्म का भूषण वैराग्य हे वैभव ...

आस्तिकता समकित का मूल हैं

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 8️⃣ 💛 36) *आस्तिकता* *समकित का मूल हैं..* *आस्तिकता अर्थात* *आत्म स्वरूप की आस्था.!* 37) पूर्व के अनुसंधान के लिए सद् चारित्रो का उल्लेख है.! 38) *धर्म कथाएं* *कथनी करणी का* *अंतर मिटाने के लिए होती है.!* 39) हमारा संसार हमारे सुख दुख आदि सब विकृतियां पर की तरफ हमारे जुकाव का ही परिणाम हैं.! *इसमें अन्य कोई कारण नही हैं.!* 40) मन का संसार नही छूटा तो बाह्य त्याग का क्या अर्थ....

गुरु आज्ञा में, सेवा में, भक्ति में, विकल्प करते है: वीर गुरुदेव 

*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 7️⃣ ⚡ गुरु में.. गुरु आज्ञा में, सेवा में,भक्ति में, विकल्प करते है *उनके लिए मोक्ष दुर्लभ है.!*   ⚡ जो गुरु की विराधना अविनय आशातना करके रिद्धि सिद्धि की चाहना रखते है *उनके लिए रिद्धि सिद्धि* *मृत्युदंड प्राप्त अपराधी को* मिले अलंकारों के जैसी है.! *📖श्री गुरुबहुमान कुलक📖* 💫 *तत्त्व चिंतन:* *समयज्ञ गीतार्थ गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र शिष्य* श्री व...

‘जैन धर्म के ज्ञान को फैलाएं अन्यथा यह लुप्त हो जाएगा’

एएमकेएम में डाॅ. नरेन्द्र भंडारी का संबोधन एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित युवाचार्यश्री महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में शनिवार को हुई धर्मसभा में चंद्रयान मिशन के सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र भंडारी का आगमन हुआ। उन्होंने जैन धर्म के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि कई कारण हैं कि हम साधु- संतों के सामने नतमस्तक होते हैं। इनमें संयम, जप-तप, मार्गदर्शन आदि है। एक वि...

प्रसन्नता से बढ़ती रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

 ढ़ाई अक्षर के शब्द- विषय पर रविवार को विशेष प्रस्तुति Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या डॉ. साध्वी गवेषणाश्री के सान्निध्य में ‘बी हैप्पी, नॉर्मल बीपी’ कार्यशाला का आयोजन जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् में हुआ। डॉ साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि हम अपने कपड़े बदलतें है, हमारा एड्रेस बदलतें रहते है, लेकिन हम हमारे चेहरे को स्माईल नहीं रख पाते हैं, बदलतें रहते हैं। हमें अ...

भाव से ही मोक्ष भाव से ही संसार

*🪷 सदभाव संबोध 🪷* *🦚 श्रुतार्थ वर्षावास 🦚*   भाव से ही मोक्ष भाव से ही संसार है..! *सदभाव मोक्ष का एवं* *दुर्भाव संसार का कारण हैं.!* 💫 सदभाव से भव का विराम होता है, *भव के अंत से* *स्वभाव की प्राप्ति होती हैं.!* ✅ अभी तक हमारे भव भ्रमण का अंत नहीं हुआ है तो मानना पड़ेगा की हम सदभाव से पतित है.! 🪞 *दृष्टि को* *बाह्य भावो से* *निवृत करके अंतर में* *स्थिर करेंगे तो हमे अपना* *स्तर स्वतः पता चल ...

भावों की पवित्रता से अशुभ कर्मों का नाश होता है:- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में धर्मसभा का आयोजन एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने गुरुवार को प्रवचन में कहा कि कर्म पोद्गलिक है। वह अपनी चेतना के साथ जुड़े हुए होते है। कर्म को कई प्रकार की शक्तियां मिल जाती है। जो कर्म सत्ता में है और उदय में नहीं आए हैं, उनका प्रभाव उनके उदय के साथ अनुभव होता है। जो कर्म उदय में आ गया, वह मोक्ष के अंतिम पड़ाव तक चलता है। जो...

 धन की तीन ही गति हैं: साध्वी चन्दन बाला

जैन साध्वी चन्दन बाला ने सुख विपाक सूत्र के मध्याम से आमेट के जन सभा को फरमाया दान का महत्व दानं भोगो नाश:, तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। यो न ददाति न भुत्ते, तस्य तृतीया गतिर्भवति।।’ दान, भोग और नाश, धन की ये तीन ही गति हैं। जो न दान देता है और न उपभोग ही करता है उसके धन का ‘नाश’ हो जाना यही तीसरी गति होती है। तात्पर्य यही है जो अपने धन को पात्र दान आदि सत्कार्यों में लगा देते हैं वे तो अपने धन को...

कारगिल विजय दिवस पर पोधारोपण कार्यक्रम

राजस्थान पत्रिका और एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वाधान में चलाए जा रहे हरित प्रदेश अभियान के तहत आज शुक्रवार को पर्यावरण प्रेमी व मिसाइल मैन DR.APJ अब्दुल कलाम के 9th रिमेम्बर डे एवं कारगिल विजय दिवस पर पोधारोपण कार्यक्रम टी नगर स्तिथ श्री आरकेएम शारदा विद्यालय मै आयोजित किया गया । स्कूल की प्रधान अध्यापिका के रमा एवं अन्य अध्यापिकाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्य अतिथि DR पी ज्योथिमानी...

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