Author: saadhak

स्वाध्याय भवन में डॉ. धर्मेंद्रकुमार का व्याख्यान और सम्मान

Sagevaani.com /चेन्नई: केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में वरिष्ठ प्राकृत विकास अधिकारी ब्रह्मचारी डॉ. धर्मेन्द्रकुमार जैन शास्त्री का शुक्रवार सुबह साहुकारपेट स्थित स्वाध्याय भवन में आगमन हुआ | इस पावन प्रसंग पर श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर. नरेन्द्र कांकरिया और साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने शॉल,मुक्ताहार और साहित्य प्रदान करके सम्मान किया | डॉ. दिलीप धी...

माँ होती पहला तीर्थ, पहला मंदिर : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी ने जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् के तीर्थंकर समवसरण में फरमाया कि दुनिया में अनेक बड़े बड़े तीर्थ है, हर तीर्थ पर काफी मात्रा में भीड़ होती है, लाइन लगानी पड़ती है, किंतु दुनिया का जीता जागता तीर्थ और मंदिर है- माँ। गणेशजी का शरीर भारी था, तीनों लोक की यात्रा करनी थी, किंतु उन्होंने अपने माता-पिता की 3 बार परिक्रमा की और विजय ...

मोड़ने पर वेग गति रुकती नहीं मगर परिवर्तित हो जाती है: धैर्या श्री जी म सा

श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड में विराजित धैर्या श्री जी म सा ने कहा कि वेग को एक दम रोको मत उसको मोड दो मोड़ने पर वेग गति रुकती तो नहीं मगर परिवर्तित हो जाती है। जो वेग विध्वंश करने वाला था वह निर्माण करने वाला बन जाता है। गति का प्रवाह साधना की ओर उन्मुख हो जाय तो वह वेग संवेग कहलाता है। शरीर में उत्पन्न बीमारी की ओर जब ध्यान केंद्रित है तो सारी शक्ति उसी ओर बहने लगती है तो वेग उद्वेग कहल...

पाप छूटना ही धर्म की सफलता है

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 1️⃣3️⃣ 🪔 61) धर्म का फल जानकर धर्म करते हो,तो फिर पाप का फल जानकर पाप क्यों नहीं छोड़ देते.? 62) पाप छूटना ही धर्म की सफलता है.! 63) जो आपका है वो आपसे दूर नही जाएगा, पदार्थ तो आते जाते रहते है, अर्थात उन पर आपका अधिकार नही हैं.! 64) देह के स्वरूप का सम्यक चिंतन करोगे तो अवश्य ही दुखमुक्ति मिलेगी.! 65) रसपूर्वक पाप प्रवृत्ति करने से तीव्रकर्मो का बंध होता है.! 🌧️ *प्रवचन प्रव...

विशेष कार्यशाला

*आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या* *साध्वी श्री डॉ गवेषणा श्री जी, साध्वी श्री मेरु प्रभाजी, साध्वी श्री मयंक प्रभाजी एवं साध्वी श्री दक्ष प्रभाजी*               के सान्निध्य में         *विशेष कार्यशाला*       *अगस्त 02 शुक्रवार*  🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼   *पहला तीर्थ,पहला मंदिर*  🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑 *साध्वी श्री जी द्वारा प्रभावी प्रवचन* आप अपने परिवार व बंधु मित्रों सहित पधारकर इस प्रभावी प्रवचन का श्रवण करें। दि...

रानी बाग़ चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश

!! श्री महावीराय नम: !! 🙏🏻जय शिव -जय सुभद्र- जय कैलाश- जय कुसुम- जय ओम- जय शक्ति🙏🏻   *🦶🏻रानी बाग़ चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश🦶🏻*   *अहोभाग्य हमारा, शुभ कर्मों का संचय, क्षेत्र की असीम पुण्यवाणी से*   🙏शासन प्रभाविका उपप्रवर्तनी महासाध्वी श्री कैलाशवती जी म० की पौत्र शिष्याएं एवं श्रमणी गौरव महासाध्वी श्री शक्ति प्रभा जी म० की सुशिष्याएं .. *😷शासन जयोति महासाध्वी श्री शुभा जी म०* *😷प्...

जिस घर के सदस्यों में आपसी प्रेम मजबूत वह घर स्वर्ग के समान : आलोक मुनि.. अमन मुनि

शांत मूर्ति, सेवा शिरोमणि जैन संत आलोक मुनि…अमन मुनि ने कहा कि जिस घर के लोगों में आपसी प्रेम मजबूत होता है, वह घर स्वर्ग के समान होता है। उन्होंने कहा कि लकीरों का खेल भी बड़ा अजीब खेल है। यह लकीरें यदि हथेलियों पर खिंच जाएं तो किस्मत बन जाती। जमीन पर खिंच जाएं तो सरहद बन जाती हैं। शरीर पर खिंच जाएं तो खून निकाल देती हैं और रिश्तों में खिंच जाएं तो दीवार बन जाती है। ये प्रवचन – जैन सं...

अत्र ही जीवन का अवलंबन है: साध्वी चन्दन बाला

आमेट के जैन स्थानक मे चातुर्मास गुरु माता तपाचार्य जयमाला जी मा. सा. आदि ठाणा 6 के सानिध्य मे विराजित साध्वी चन्दन बाला ने कहा की सबसेपहला पुण्य है, अन्न पुण्य। अन्न के आधार पर ही प्राण टिके रहते है। अत्र ही जीवन का अवलंबन है। अन्न से ही जीवन का निर्माण भी होता है। आहार से ही शरीर बनता है, इन्द्रियों का निर्माण होता है। अच्छे आहार से संस्कार भी अच्छे ही बनते हैं। जबकि, कुत्सित आहार से संस्कार बुरे...

कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है: साध्वी आनंद प्रभा

आमेट के जैन स्थानक में जैन साध्वी आनंद प्रभा ने कहा। की सुख-दुख का निर्धारण् स्वंय के कर्म होते हैं। कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है। पाप का प्रतिफल स्वंय को भुगतना पड़ता है। इसमेें कोई सहभागिता नहीं कर सकता है। सुख मे आपके साथ रहने वालों की भीड़ होती है, लेकिन दुख के दौरान आप अकेले हो जाते हैं। कहने का अर्थ यह है कि सुख में सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख में कोई मदद नहीं करता है। समझदार व्यक्ति एक ...

प्रभु का प्रिय करना ही भक्ति है

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 1️⃣1️⃣ 🪔 51) *जो स्वयं की* *चिंता करता है,* उसको ही परचिंता का परोपकार का अधिकार हैं.! 52) कर्मक्षय का पुरुषार्थ ही प्रभु की सर्वोत्तम भक्ति है क्योंकि *जीव कर्मबंधन में रहे,* *वो प्रभु को प्रिय नही है, तो* प्रभु का प्रिय करना ही भक्ति है.! 53) संसार से *अपनेपन की* आसक्ति तोड़ना ही साधना की सफलता हैं.! 54) कर्म जीव के साथ संयोग संबंध से जुड़कर ही दुखी करता है.. कर्म अलग रहकर ...

रसना को जीतना बड़ा ही कठिन है: साध्वीजी आगम श्री म:स

साध्वीजी आगम श्री म:स ने बताया धन दौलत पुत्र परिवार छोड़ना बहुत सरल है पर रसना को जीतना बड़ा ही कठिन है! इसके कारण अच्छे अच्छे तपस्वियों का पतन हो गया ! जो तत्काल प्रवेश बनाता है वो टैप है! आत्मा के शत्रुओं को तपता है! इस के प्रभाव से अनेक लब्धियों को प्राप्त कर सकते है! वानर वृत्ति से की गई साधनाओं चंचल होती है! पक्षी की वृत्ति से की गई साधना स्थूल होती है!पिपीलिका की वृत्ति से की गई साधना ढेर गं...

परार्थ व्यसनी बनो पुदगल व्यसनी मत बनो

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 9️⃣ 🪔 41) परार्थ व्यसनी बनो पुदगल व्यसनी मत बनो.! 42) *प्रभु प्रिय* *तभी लगेंगे जब,* *पर पदार्थ अप्रिय लगेंगे.!* आत्मप्रियता ही प्रभु प्रियता हैं.! 43) *गुणों का पक्ष होगा तो ही* पुण्यानुबंधी पुण्य एवं सर्व रिद्धि सिद्धि समृद्धि मिल सकती है.! 44) जो स्वयं की चिंता करता है उसको ही परचिंता का *परोपकार का अधिकार हैं.!* 45) करूणता ये है की शत प्रतिशत समय *”जो छूटनेवाला है* ...

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