उत्तराध्यान सूत्र के 18वें अध्याय की 23वीं गाथा में भगवान महावीर ने बताया है की हमारा जो शरीर है वो अनित्य है अशाश्वत है। इस शरीर पर भरोसा नही करना चाहिए, यह कभी भी नष्ट हो जाएगा। सावन भादों में चंद पलों के लिये बिजली चमकती है फिर घोर अंधेरा हो जाता है, शाम के समय कुछ मिनटों के लिये सूरज की लालिमा छाती है फिर अंधेरा छा जाता है। हमारा शरीर भी इसी बिजली की क्षणिक चमक एंव सूरज की लालिमा के समान है । संसार के जितने भी पदार्थ है वे सब अनित्य है, जो कभी भी समाप्त हो सकते है, तन और धन दोनों का कोई भरोसा नही है, तन कांच के बर्तन के समान है, ताश के पत्तो के महल के समान है। क्षण क्षण हमारा शरीर क्षीण हो रहा है । यह सारगर्भित प्रवचन तप चक्रेश्वरी आयम्बिल आराधिका पूज्या श्री अरुणाप्रभाजी म.सा. ने नीमचौक स्थानक की धर्मसभा में प्रदान किये।
शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्ति जी मसा ने फरमाया की किसी के यँहा बार बार जाने से व्यक्ति की वैल्यु घट जाती है, लेकिन धर्म स्थान ही एक ऐसी जगह है जँहा जितनी बार जाओगे उतनी आपकी वैल्यु बढ़ेगी। अपनी आत्मा में प्रवेश करने से वैल्यु बढ़ती है । व्यक्ति हर जगह अपनी सेफ्टी देखता है, गाड़ी खरीदने जाता है तो भी शरीर की सुरक्षा के सब फीचर देखता है, यह चातुर्मास आपकी आत्मा का सुरक्षा कवच है । दान शील तप भाव ये आत्मा के सेफ्टी फीचर है। बाल साध्वी पूज्याश्री गुरु निधि जी म.सा. ने सुमधुर भजन गाया। संघ प्रवक्ता ने बताया की दिनाँक 13 तारीख से चातुर्मास प्रारंभ होगा। जिसमें प्रतिदिन सुबह 6.30 से 7.00 प्रार्थना, प्रातः 09 से 10 प्रवचन होंगे। पूरे 4 माह घर घर 12 घण्टे के जाप प्रातः 07 से शाम 07 तक रखे जाएंगे। दिनाँक 13 तारीख को प्रथम जाप संघ के वरिष्ठ श्रावक बापूलालजी बोथरा परिवार महेंद्र कुमार सौरभ कुमार बोथरा के निवास स्थान 48 नीमचौक पर रखे गए है।