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सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है: रविन्द्र मुनि जी म.सा.

सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है: रविन्द्र मुनि जी म.सा.

दिवाकर भवन पर चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के छठे दिवस पर मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने पर्युषण पर्व के अंतर्गत अन्तगड सूत्र के वाचन करते हुए गुरुदेव ने फ़रमाया की 8 वर्ष में अतिमुक्त कुमार ने अपने जीवन का लक्ष्य पा लीया लेकिन हम प्रतिवर्ष आगमो का अध्यन करते है सुनते है फिर भी हम प्रथम सीडी तक भी नहीं पहुच पाए सत्य को देखकर मुह मोड़ लेते हैl यह भूल हमारे अनंत भाव तक पीछा नहीं छोडती है सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है।

क्योंकि कहा भी गया है ‘सत्यमेव जयते’ सत्य की हमेशा विजय ही होती है। सत्य बोलने वाला हमेशा सुखी रहता है। झूठ बोलने वाले को एक झूठ को छिपाने के लिए कई झूठ बोलना पढ़ते है। झूठा व्यक्ति ठीक से जी भी नहीं पाता क्योंकि उसे सदा अपने झूठ के उजागर होने का भय बना रहता है।सत्य बोलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है परंतु कभी पराजित नहीं होता है। क्योंकि कहा भी गया है ‘सत्यमेव जयते’ सत्य की हमेशा विजय ही होती है।

मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है, उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये असत्य बोला करता है। असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। मनुष्य को सत्य बोलने से जब अपने ऊपर कोई आपत्ति आती हुई दिखाई देती है। अथवा अपनी कोई हानि होती दिखती है। उस समय वह डरकर झूठ बोल देता है, झूठ बोलकर वह उस विपत्ति या हानि से बचने का प्रयत्न करता है।सत्य का मूल सरलता है और असत्य का मूल क्रोध लोभ आदि विकार है।

विश्वसनीय और प्रामाणिक वह होता है जिसके हृदय में सरलता हो, आचरण में सच्चाई हो, और मन में सत्य के प्रति निष्ठा हो।सत्य बोलने वाला हमेशा सुखी रहता है। झूठ बोलने वाले को एक झूठ को छिपाने के लिए कई झूठ बोलना पढ़ते है। झूठा व्यक्ति ठीक से जी भी नहीं पाता क्योंकि उसे सदा अपने झूठ के उजागर होने का भय बना रहता है।सत्य के मायने हमेशा देश, काल, परिस्थिति, व्यवहार आदि बातों की अपेक्षा से बदल सकता है। हमें कभी भी ऐसा सत्य नहीं बोलना चाहिए जिससे किसी को नुकसान पहुंचता हो या किसी के प्राणों का हनन हो रहा हो। किसी भी विवाद की परिस्थिति में मौन रहना सर्वथा अच्छा साधन है। परंतु कभी बोलना जरूरी ही हो तो हित, मित और प्रिय वचन ही बोलना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़िया कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि बालिका मंडल द्वारा सोशल मीडिया के फायदे एवं नुकसान के बारे में नाटिका का मंचन किया गया।जिनशासनरत्न श्रीमान प्रकाश जी पिपलिया ने 78 उपवास एवं अनिल जी चपडोद, दर्शित श्रीश्रीमाल, शशि बालाजी छाजेड,माही सियार, मोना जी टुकड़िया स्मिता जी संघवी ओशीन राका दिया श्रीश्रीमाल ने 6 उपवास के प्रत्याख्यान गुरुदेव से लिए। प्रभावना का लाभ श्रीमती चांदबाईजी हस्तीमल जी वीरेन्द्र जी कओचट्टआ परिवार ने लिया धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार श्रीसंघ उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।

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