चेन्नई. लाखों लोगों को धर्म की राह पर लगाने वाले, जीवन जीने की कला सिखाने वाले महापुरुष थे श्रमण सूर्य मरुधर केसरी मिश्रीमल म.। सही मायनों में वे एक युग दिवाकर महान धर्म सूर्य थे। यह विचार श्रमण संघीय उप प्रवर्तक पंकज मुनि ने जैन भवन साहुकारपेट में प्रात: स्मरणीय मिश्रीमल म. की पावन जन्म जयंति पर व्यक्त किए। प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि दिव्य विभूति मिश्रीमल जी म.सा. जैन एवं भारतीय वांड़मय के महान ज्ञाता थे। उनके जीवन में न केवल मानवों के प्रति अपितु पशु-पक्षियों के लिए भी अपार करुणा एवं प्रेम था। उनकी सद्प्रेरणाओं से न जाने कितने ही जीवों को अभय दान (जीवन दान) प्राप्त हुआ। वास्तव में ऐसे करुणा पुरुष संदियों बाद अवतरित होते हैं। वे ऐसे महापुरुष थे जिनके जीवन में प्रमाद का अंशमात्र भी स्थान नहीं था। उनके जीवन का कण-कण और क्षण-क्षण लोक मंगल व जन कल्याण की भावना से अनुप्राणित था। वे एक सच्चे अप्रमत्त योगी महात्मा थे। हम उनके संयम-साधना मय जीवन को शत-शत नमन करते हैं।
श्री संघ के अध्यक्ष सम्पत्तराज सिंघवी ने बताया कि 21 अगस्त को मरुधर केसरी गुरु मिश्री रूप रजत जन्म जयंति श्री एस. एस. जैन श्रावक संघ के तत्वावधाम में धूमधाम से मनाई जाएगी। संघ के चेयरमैन धर्मेश लोढ़ा ने बताया कि 18-19-20 अगस्त को तेले तप की सामूहिक आराधना की जाएगी। तेला तप आराधक तपस्वी भाई-बहनों का श्रीसंघ की ओर से विशेष सम्मान किया जाएगा। जैन भवन साहुकारपेट के प्रांगण में स्वाध्याय प्रेमी लाभचन्द खारीवाल की पुत्रवधू ‘बहन विनीता खारीवाल के ‘मासखमण तप के पचखान एवं मासखमण की बोली से विशेष सम्मान हुआ। संघ के उपाध्यक्ष सुरेश कोठारी की ओर से तपस्वी का अभिनंदन किया गया।






