पनवेल श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी श्री संयमलताजी म. सा.,श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में रक्षाबंधन- एक अटूट बंधन पर्व मनाया गया। महामंगलकारी वज्रपंजर स्तोत्र का सामूहिक सजोड़े भाई-बहन का अनुष्ठान होने के पश्चात आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने कहा श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है। जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है तो वह यह कामना करती है कि उसके भाई के जीवन में कभी कोई कष्ट ना हो, वह उन्नति करें और उसका जीवन सुखमय हो। वही भाई भी इस रक्षा सूत्र को बंधवाकर जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाते हैं।
साध्वी ने आगे इतिहास की घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महारानी कर्मावती ने एक रक्षा सूत्र हुमायूं के पास भेजा था। रक्षा सूत्र पाकर हुमायूं, रानी कर्मावती की रक्षा हेतु एक मुसलमान भाई से ही युद्ध में भिड़ गया। एक निर्जीव धागे में कितनी शक्ति है, जिस शक्ति के कारण ही गुजरात के बादशाह बहादुरशाह को हुमायूं ने पराजित किया था और कर्मावती की रक्षा की थी। साध्वी जी ने आगे कहा -रक्षाबंधन का दिन बहनों के सम्मान की रक्षा का दिन है। आज संसार में नारी और असुरक्षित है, उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्राणी मात्र की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प करें, रक्षा के लिए बंद जाए। रक्षाबंधन के पवित्र दिन पर नारी मात्र को बहन मानकर उसकी अस्मिता की, उसकी पवित्रता की रक्षा करने का एक दृढ़ संकल्प सभी भाइयों को लेना चाहिए। व्यापारी अपने हाथों में कलम उठाता है तो वह आज के दिन यह संकल्प लेता है कि मैं इस कलम से कभी काला काम नहीं करूंगा। क्षत्रिय लोग तलवार को राखी बांधकर यह संकल्प लेते हैं कि किसी भी गलत व्यक्ति का गलत काम ना होने देंगे, हम भी प्राणी मात्र की रक्षा का संकल्प ले।
प्रवचन पश्चात सामूहिक रक्षाबंधन का आयोजन हुआ जिसमें बहन ने भाई के ललाट पर कुमकुम चावल का तिलक लगाया। मुंह मीठा करवाकर कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। महासती संयमलता ने सभी भाइयों को खड़े होकर बहनों की रक्षा की प्रतिज्ञा दिलवाई। मेवाड़ महिला मंडल द्वारा 12 फीट की राखी आकर्षण का विषय बनी रही।
कार्यक्रम का लाभ श्री मनोहरलालजी, शैलेंद्र जी खेरोदिया परिवार, श्री दिलीपजी खेरोदिया परिवार, श्री चंद्रकांतजी, विजयजी, अशोकजी, वैभवजी, किरणजी, धीरजजी, प्रथमेशजी चोपड़ा परिवार ने लिया। राखी सजावट प्रतियोगिता, थाली सजावट प्रतियोगिता एवं बेस्ट भारतीय वेशभूषा प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। एकाशना, आयंबिल, उपवास, तेले की कड़ी निरंतर जारी है।