(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि:-आत्मा का मूल स्वभाव अणाहारी- अशरीरी है । परन्तु वह कर्म...
(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेनसुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि:-शरीर रूपी महल के चार स्तंभ हैं- आहार ,निद्रा ,श्रम और ब्...
(no subject) बस मे चाहे कितने ही यात्री क्यो न हो यदि उसे चलाने वाला ड्रायवर न हो तो बस आगे नही बढ़ सकती हैं, उसी तरह शरीर रुपी बस में इन्द्रियाँ यात्री हैं, जब...
(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेनसुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि:- मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति है । मोक्ष म...
(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेनसुरीश्वरजी म.सा ने रविवारिय युवा संस्कार प्रवचन श्रेणी मे “मन पर लगाम “...