परम्परा के मूलपुरुष पूज्यश्री कुशलचन्द्रजी म.सा का 243 वां स्मृति दिवस समर्पण संकल्प दिवस के रुप में चेन्नई साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन मे मनाया गया | उपस्थित श्रदालुओं ने प्रसंग पर गुणगान रुप में स्तुति की |
वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया ने आचार्य पूज्यश्री हस्तीमलजी म.सा द्वारा अर्थ व भावार्थ किये गए आगम “प्रश्न व्याकरण सूत्र” में वर्णित पांचवे परिग्रह द्वार का विस्तृत विवेचन किया |
श्री जैन रत्न श्रावक संघ, तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने परम्परा के मूल महापुरुष श्री कुशलचंद्रजी म.सा के गुणगान करते हुए कहा कि आपका जन्म मारवाड़ के सेठो की रिया ग्राम मे श्री लादूरामजी चंगेरिया-कानूबाई जी के यहां हुआ | बाल वय मे ही आपके पिताश्री का वियोग हो गया और बचपन मे ही आप पर परिवार की जिम्मेदारी आ गयी | संसार की नश्वरता को जानकर आपको विरक्ति हो गयी और आचार्यश्री भूधरजी म. सा का सानिध्य पाकर दृढ़तम वैराग्य हो गया और उनके मुखारविन्द से जैन भागवती दीक्षा ले ली व प्रथम चातुर्मास मेड़ता में किया | आपके संयम की निर्मलता व तपस्तेज से प्रभावित होकर अनेक भाईयों ने आपके मुखारविन्द से जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की | योग्यता होते हुए भी आपने आचार्य पद ग्रहण नही किया |
महापुरुषों के गुणगान करते हुए उनकी विशेषता बताते हुए धर्मसभा मे कहा कि आचार्यश्री जयमलजी म.सा और श्री कुशलचन्द्रजी म.सा का परस्पर इतना घनिष्ठ प्रेम रहा कि दोनो के शिष्य परिवार अलग-अलग होते हुए भी दोनो महापुरुष प्रायः साथ-साथ ही रहे | आपके मुखारविन्द से गुमानचंद्रजी म.सा दुर्गादासजी म.सा आदि अनेक सन्त रत्नों की जैन भागवती दीक्षाएं हुई | आपके गुरुदेव आचार्य भूधरजी म.सा का वियोग होने पर आपने अपने गुरुभाई जयमलजी म.सा की तरह ही ज़िन्दगी भर आड़ा आसन नही करने की अर्थात नही सोने की दृढ़ प्रतिज्ञा की | आपके संथारा पूर्वक समाधिमरण के पश्चात,आपने जिस बीज को अंकुरित पल्लवित-पुष्पित किया उसके संवर्धन का भार शिष्य श्री गुमानचंद्रजी म.सा ने रत्नवंश के प्रथम आचार्य के रुप मे बखुबी निभाया और जिनशासन में अति सुन्दर अभिवृद्धि की |
धर्म सभा मे महावीरचंदजी कर्णावट,गौतमचंदजी मुणोत, इन्दरचंदजी कर्णावट, हितेनजी कोठारी, महावीरचन्दजी बागमार पदमचन्दजी दीपकजी योगेशजी श्रीश्रीमाल, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग की सामायिक परिवेश में उपस्थिति रही |
हितेनजी कोठारी ने संकल्प मनोरथ चिन्तन सूत्र प्रस्तुत किया | महावीरचन्द जी बागमार ने सामूहिक नियम, प्रत्याख्यान कराये जैन संकल्प व गौतमचन्दजी मुणोत के गुरु सुखसाता पृच्छा पाठ के पश्चात वीरपिता बाबू धनपतराजजी सुराणा ने मंगलपाठ किया | तीर्थंकरों, आचार्य भगवन्तों, उपाध्याय भगवन्त,भावी आचार्य,साध्वी प्रमुखा व चरित्र आत्माओं की जय जयकार के संग पुण्य स्मृति दिवस कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |