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भगवता का अवतरण कराता है – भक्तामर : साध्वी अणिमाश्री

भक्तामर स्त्रोत एवं सामूहिक आयम्बिल अनुष्ठान का आयोजन ‘बहुरत्ना वसुंधरा’ यानी हमारी यह धरती अनेकों प्रकार के रत्नों से भरी पड़ी है। विभिन्न धर्मों के संगम से प्रवाहित हैं। विविधता के बीच सभी का लक्ष्य होता है, साधना के द्वारा सिद्धि को प्राप्त करना – उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में आयोजित भक्तामर स्त्रोत अनुष्ठान के अवसर पर साध्वी अणिमाश्री ने कहे। मंत्र साधना के साथ तपोसाधना में सलग्न साधकों को सिद्धि के रहस्य बताते हुए साध्वीश्री ने कहा कि हर साधक का लक्ष्य होता हैं, भगवता को प्राप्त करना और सिढ़ी होती है आध्यात्मिक साधना। साधना के अनेक रूपों में एक मंत्र अनुष्ठान भी है। भक्तामर स्त्रोत एक विशिष्ट साधना का प्रयोग हैं। आचार्य मानतुंग द्वारा रचित इस भक्तामर स्त्रोत की साधना श्रद्धा, आस्था और भक्ति भाव से की जाती है, तो भक्तों में भगवता का अवतरण हो जाता है।  साध्वीश्री न...

तत्वविज्ञ परीक्षा का आयोजन

अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार एवं चेन्नई तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में  साहुकारपेट तेरापंथ सभा भवन में तत्व विज्ञ परीक्षा का आयोजन हुआ।  साध्वीश्री अणिमाश्रीजी द्वारा प्रदत मंगल पाठ का श्रवण के बाद परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। महिला मण्डल द्वारा साध्वीश्रीजी को परीक्षा संबंधी जानकारी निवेदित की गई।  तत्पश्चात निर्धारित समय पर परीक्षा का आयोजन हुआ। जिसमें 8 परीक्षार्थियों ने चेन्नई में एवं एक परीक्षार्थी ने भीलवाड़ा में गुरुदेव की सन्निधि में परीक्षा दी। सभी परीक्षार्थियों ने बडे उत्साह के साथ परीक्षा दी। स्वागत व्यक्तव्य अध्यक्षा पुष्पा जी हिरण ने एवं धन्यवाद मंत्री रीमा सिंघवी ने दिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या मालाजी  कातरेला एवं अनिताजी चोपड़ा के साथ दीपाली सेठिया, हेमलता नाहर एवं लता पारख उपस्थित थे। संयोजिका प्रीति डूंगरवाल, कनक पुगलिया के परिश्र...

विनयवान मनुष्य को ही भव मिलता है: उपाध्याय प्रवर रविंद्र मनी

कर्मों के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद के तीसरे दिन की श्रृंखला प्रज्ञान दयाचंद करते हुए उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने कहा कि जो व्यक्ति विनयवान हो और प्रकृति से सरल हो उसे ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। गौतम स्वामी और भगवान महावीर के बीच कर्म आधारित संवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो मनुष्य मछली के कड़े आदि पुरानी को तड़पा तड़पा कर मारते हैं उनके शरीर में ही कीड़े लगते हैं। इसलिए व्यक्ति को ऐसा पाप करने से बचना चाहिए। जो मनुष्य रिश्वत लेकर सच्चे को झूठा सिद्ध करता है। अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए सच को झूठ और झूठ को सच साबित करता है वैसे लोग किसी ना किसी मानसिक पीड़ा का शिकार होते हैं। किसी के बनते काम को बिगाड़ने वाले लोगों के जीवन में हमेशा कोई न कोई बाधा आती रहती है। पुण्य कर्म प्राणी मात्र पर दया रखने अथवा परोपकार की भावना करने से ऐसे लोगों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है...

कर्म और उसके फल के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद

कर्मों के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद की विवेचना की गई। जोधपुर में चातुर्मास इक प्रवचन की धारा बह रही है। चातुर्मास के प्रवचन के क्रम में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि जी ने गौतम स्वामी और भगवान महावीर के बीच कर्म आधारित संवाद का जिक्र किया। इस प्रश्नोत्तर का वर्णन करते हुए उपाध्याय प्रवर बताते हैं कि जो लोग अपने ज्ञान पर अहंकार करते हैं। शराब और मांसाहार एवं ऐसे पदार्थ जो खाने के योग्य नहीं है उसका भक्षण करते हैं, ऐसे लोग अपने कर्मों के परिणाम स्वरूप पागल या विक्षिप्त हो जाते हैं। ऐसे लोग जो ईर्ष्यावस सगे-संबंधियों या फिर समाज के लोगों के बीच विवाद कराते हैं उनके बच्चे या शिष्य आज्ञाकारी नहीं होते। जो व्यक्ति दूसरों की रखी अमानत को हड़प जाता है उन्हें अपने सगे संबंधियों की अकाल मृत्यु का भोग भोगना पड़ता है। जो व्यक्ति हरे भरे पेड़ों को कटवा ते हैं वैसे लोग निसंतान रह जाते हैं। जो म...

धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाला बनता शीघ्र मोक्षगामी : साध्वी अणिमाश्री

टीपीएफ नवगठित टीम का हुआ शपथग्रहण  आयम्बिल, एकासन मासखमण एवं अठाई के तपस्वियों का किया अभिनन्दन तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में मोक्ष के पच्चीस बोलों में दसवें बोल का विवेचन करते हुए साध्वी अणिमाश्री ने कहा कि धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाला शीघ्र मोक्षगामी बनता है। श्रद्धा के साथ किया गया कार्य भाव क्रिया की श्रेणी में आता है और श्रद्धा के बिना करणी फलहीन द्रव्य क्रिया मात्र रह जाती है। सच्ची श्रद्धा के लिये क्रिया के साथ मन, वचन और काया के भावों का जुड़ना आवश्यक है। श्रद्धा व शील का भी जोड़ा माना जाता है। सच्ची श्रद्धा वाला व्यक्ति ही शील धर्म का पालन कर सकता है।  मोक्ष के ग्यारहवें बोल के बारे में साध्वीश्री ने बताया कि धर्म ध्यान व शुक्ल ध्यान शुद्ध मन से ध्याये तो जीव शीघ्र मोक्षगामी बनता है। ध्यान के चार प्रकार हैं -आर्त्त, रौद्र, धर्म व शुक्ल ध्यान। ध्यान का सरल अर्थ एकाग्रता ...

पुण्य पाप का कर्ता धर्ता हमारा अपना मन है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भावना को धर्म का मुख्य अंग बतलाते हुए मन के विचारों को सदा पवित्र रखना ही भाव शुद्धि है जब जब हमारा मन काम क्रोध मद मोह लोभ की तरफ आकर्षित होता है औरों का बुरा हमारा भला सोचने लगता है वे ही अशुभ भाव कर्म बन्धन के कारण बन जाते है!जिसने भावना को पवित्र बनाने की कला सीख ली हो, जीवन में अपना ली हो वह कई प्रकार के पापों से मुक्त बन जाता है! भाव ही नरक में एवं शुभ भाव मोक्ष में लें जाने के कारण बनते है!आज का मानव बाहर से तो अपने शरीर की वस्त्रों की घरों की सुन्दरता स्वछता पर तो जोर देता है लेकिन उसको अपने मन की चिन्ता नहीं है मन में राग द्वेष की मेरे तेरे की गंदगी भरी पड़ी रहती है यही गंदगी आगे जाकर तनको भी बीमार बना डालती है!मन स्वस्थ तो तन स्वस्थ नितिकारों की यही नीति हमें हमारे मन को सदा स्वस्थ व स्वच्छ बनाती है!मन का असर तुरंत मन पर पड़े बिन नहीं रहता!मन बीम...

भावों की शुद्धि के बिना आत्मा का कल्याण संभव नहीं: उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि

जोधपुर / बाबू की शुद्धि के बिना आत्मा का कल्याण संभव नहीं है। जोधपुर में अपने चतुर्मासिक प्रवचन के दौरान उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने कहा कि साधना की उर्जा व्यक्ति के कर्मों के आवरण को हटाती है। साधना से ही व्यक्ति के भावों में शुद्धि आती है और तब जाकर आत्मा का कल्याण संभव होता है। जो व्यक्ति दूसरों का तिरस्कार करता है वैसा व्यक्ति संसार रूपी जंगल में लंबे समय तक भटकता रहता है। तिरस्कार व्यक्ति अपनी भाषा शब्दों के माध्यम से भी करता है। तिरस्कार व्यवहार के माध्यम अथवा अहंकार और घमंड से भी होता है। भारत काल की एक घटना का जिक्र करते हुए उपाध्याय प्रवर ने बताया कि एक बार दुर्योधन पांडवों से मिलने उनके महल आया और महल की सुंदरता और चकाचौंध में दुर्योधन को धोखा हो गया और वह पानी की होद में जा गिरा। इस घटना को द्रोपति दूर से ही देख रही थी। दुर्योधन के पानी में गिरने के बाद द्रौपदी ने ठहाका लगाते...

तप से आता आत्म सौंदर्य में निखार : साध्वी उज्जवलप्रभा

सावन तपस्या की बहार भाद्रव महीने में भी    नन्हे बालक खुश भण्डारी ने किया एकासन मासखमण विल्लुपुरम में विराजित आचार्यश्री महाश्रमण की विदुषी शिष्या साध्वी उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में तप का ठाठ लगा हुआ है। यहां दो निराहार, एक एकासन का मासखमण हो चुके हैं और आज फिर एक एकासन के मासखमण का प्रत्याख्यान हुआ, वह भी एक नन्हे बालक 11 वर्षीय खुश भंडारी का।  साध्वी उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया तप आत्म सौंदर्य में निखार लाता है। जिसमें तप की अंतरवृति जागृत हो जाती है, वह व्यक्ति तप के महायज्ञ में अपनी आहुति देता है। दीपक जलने से प्रकाश देता है, भले ही दीपक छोटा हो या बड़ा। वैसे ही तपस्या भी भले छोटी हो या बड़ी, आत्म प्रकाश और आत्मा सौंदर्य को बढ़ाने वाली होती है।  साध्वी अनुप्रेक्षाश्री ने कहा कि हमारा जीवन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मौलिकता से भरा पड़ा है। मौलिकता अपने आप बाहर नहीं आती, ...

ज्ञानी होने का सार अहिंसा से प्रेम करना: उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि

भगवान महावीर का कहना है कि अहिंसा मुलक समता ही धर्म का सार है। जोधपुर में चातुर्मास प्रवचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने लोगों को अहिंसा से प्रेम और हिंसा से बैर करने की सीख दी। उन्होंने बताया कि यहां हिंसा केवल मनुष्यों से ही नहीं बल्कि पशु पक्षियों के साथ भी नहीं होनी चाहिए। अहिंसा और समता दोनों ही विश्व में शांति का मुख्य आधार हैं। हमें दूसरे धर्म और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए। हिंसा का अंत नहीं है। ज्ञान का अभाव ही हिंसा को बल देता है। आगमकार ने पहले ही कह दिया है कि हिंसा करने वाले व्यक्ति पर कोई विश्वास नहीं करता। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति का विवरण देते हुए उपाध्याय प्रवर ने बताया कि वहां अब तालिबान ने कब्जा कर लिया है। तालिबानी सभी को और अन्य देशों के लोगों को यह विश्वास दिलाने में लग गए हैं कि वह पहले जैसे नहीं हैं। वे बताते हैं क...

दुर्ग में सामूहिक रक्षाबंधन हर्ष और उल्लास से मनाया गया

दुर्ग में भाई ने बहनों के रक्षा के संकल्प के साथ सामूहिक रक्षाबंधन हर्ष और उल्लास के वातावरण में जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में मनाया गया। संत गौरव मुनि जी ने जैन विधि विधान के साथ भाई-बहनों के रक्षा का संकल्प दिलाते हुए बहनों ने भाइयों की कलाई में जैन विधि विधान से राखी बांधी और भाइयों ने बहनों का जीवनभर रक्षा करने का संकल्प दोहराया। 9 भाइयों ने बहनों को चांदी की मंत्र अभीमंत्रीत अंगूठी पहनाई आज रक्षाबंधन के कार्यक्रम के दौरान भाई-बहनों ने जीव रक्षा जीव दया के लिए राशि का संग्रहण किया। आज 9 अंगूठी की धर्म सभा में बढ़-चढ़कर बोली लगाई गई। भरत श्रीश्रीमाल, प्रशांत चौरड़िया, सुरेश संचेती, जोधपुर नवीन संचेती, विजय बैधमुथा,राकेश संचेती, प्रवीण ओसवाल और निर्मल बाफना को चांदी की अंगूठी गुरुदेव रतन मुनि के हाथों प्रदान की गयी। संग्रहित इस धनराशि का जीव दया के कार्य में श्रमण संघ महिला...

राज्यपाल को बांधा रक्षासूत्र

तेरापंथ महिला मण्डल की बहनों ने राजभवन भवन में महामहिम राज्यपाल श्री बनवारीलाल पुरोहित को तेरापंथ महिला मण्डल बहनों द्वारा रक्षासूत्र बांधा गया।   राज्यपाल महोदय ने आचार्य महाश्रमणजी के सुखद संवाद सुनने के साथ उनको भाववन्दना की। दिल्ली साथ में पैदल विहार, गुवाहाटी एवं चेन्नई चातुर्मास में आचार्य श्री के साथ उनकी सौहार्दपूर्ण मुलाकातों को आपने अपने जीवन सुधार में सहभागी माना। मुनि कमलकुमार एवं साहुकारपेट तेरापंथ भवन में विराजित साध्वी अणिमाश्री को वन्दना निवेदित की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिस समाज की महिला शक्ति सशक्त एवं जागरूक होती हैं, वह समाज चिरंजीवी रहता है।  आप ने आश्वासन दिया कि समय की अनुकूलता होने पर तेरापंथ समाज के किसी भी कार्यक्रम में आने की जरूर कोशिश करूंगा। लगभग 30 मिनट के इस वार्तालाप में विशेष सहयोगी भरत डी मरलेचा भी उपस्थित थे। महिला मण्डल अध्यक्षा पुष्पा हिरण, रेखा...

पैसों के साथ हो प्रेम का समावेश : साध्वी अणिमाश्री

  जैन संस्कार विधि द्वारा समायोजित रक्षाबंधन का बताया गया डेमो    टीपीएफ नवगठित टीम का हुआ शपथग्रहण रिश्तों में मिठास भरने में सहभागी बनते है त्योहार। अपनत्व की भावधारा को जागृत करते है त्योहार।सहआस्तित्व का जागरण करते है त्योहार – उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में रक्षाबंधन पर्व पर साध्वी अणिमाश्री ने कहे।  साध्वीश्री ने विभिन्न रक्षा सूत्रों की अवगति दिराते हुए कहा कि ऋजुर्वेद में गुरू-शिष्य रक्षा सूत्र, वृक्ष रक्षा सूत्र, गौ रक्षा सूत्र इत्यादि के साथ भातृ रक्षा सूत्र का उल्लेख आता है। भातृ रक्षा सूत्र में जहां बहन भाई के प्रति मंगलकामना करती है, वही भाई बहन की रक्षा का संकल्प करता है, निभाता है। द्वापद युग की चर्चा करते हुए साध्वीश्री ने बताया की वचनबद्ध श्रीकृष्ण शिशुपाल की 99 गलतियों को क्षमा कर 100वीं गलती के वध के समय अगूंठे से खून निकलने पर अपनी साड़ी के पल्लू को फाडकर द्रौप...

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