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कर्म और उसके फल के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद

कर्म और उसके फल के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद

कर्मों के संबंध में भगवान और भक्त के बीच संवाद की विवेचना की गई। जोधपुर में चातुर्मास इक प्रवचन की धारा बह रही है। चातुर्मास के प्रवचन के क्रम में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि जी ने गौतम स्वामी और भगवान महावीर के बीच कर्म आधारित संवाद का जिक्र किया। इस प्रश्नोत्तर का वर्णन करते हुए उपाध्याय प्रवर बताते हैं कि जो लोग अपने ज्ञान पर अहंकार करते हैं। शराब और मांसाहार एवं ऐसे पदार्थ जो खाने के योग्य नहीं है उसका भक्षण करते हैं, ऐसे लोग अपने कर्मों के परिणाम स्वरूप पागल या विक्षिप्त हो जाते हैं। ऐसे लोग जो ईर्ष्यावस सगे-संबंधियों या फिर समाज के लोगों के बीच विवाद कराते हैं उनके बच्चे या शिष्य आज्ञाकारी नहीं होते।

जो व्यक्ति दूसरों की रखी अमानत को हड़प जाता है उन्हें अपने सगे संबंधियों की अकाल मृत्यु का भोग भोगना पड़ता है। जो व्यक्ति हरे भरे पेड़ों को कटवा ते हैं वैसे लोग निसंतान रह जाते हैं। जो मनुष्य दुर्भावना से प्रेरित होकर गांव या नगर में आग लग जाता है वह इस पाप के कारण विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित होता है। जो मनुष्य सदैव दूसरों का तिरस्कार करता है और अपनी शक्ति के अभिमान में चूर रहता है। ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में दुर्बल, कमजोर और कुपोषित रहता है।

जो दूसरों पर ईर्ष्या के कारण झूठा आरोप लगाता है उस पर भी कोई ना कोई झूठा आरोप लगता है। जो तू एक और एशिया से प्रेरित होकर साधु साध्वीयों को के साथ बुरा व्यवहार करता है या फिर उन्हें बांसिया खराब भोजन देता है ऐसे लोग आम तौर पर पेट की बीमारी से ग्रसित रहते है। जो मनुष्य सत्ता पाकर या फिर बड़ा पद पाकर निर्दोष पर झूठे इल्जाम लगाता है वह व्यक्ति अगले जन्म में काला या कुरूप पैदा होता है। जिस व्यक्ति ने बहु इंद्रिय जीवो को मारा होता है वह व्यक्ति किसी का प्रिय नहीं होता ना ही अपने परिवार में न समाज में।

जो व्यक्ति निर्दई होकर पशु पक्षियों को मारता है वह माता-पिता के वियोग में जीता है। पूर्व जन्म में स्वाद के लिए निरीह प्राणी को मारकर उनका भक्षण किया हो उनकी वाणी मीठी होने के कारण भी लोगों को प्रिय नहीं लगती।

जिस मनुष्य ने अपने पूर्व जन्म में अपने शरीर पर अभिमान किया हो वह अगले जन्म में नाटे या बोने पैदा होते हैं। जिसने पूर्व जन्म में अपने पैरों से प्राणी कुचलकर मारा हो वह व्यक्ति अगले जन्म में पंगु पैदा होता है। वही व्यक्ति अपने अगले जन्म में लूला लंगड़ा हो जाता है। जिसने पूर्व जन्म में पति-पत्नी के बीच बैर या वैमनस्य पैदा किया हो वैसा व्यक्ति का पारिवारिक जीवन कभी भी सुखमय नहीं होता।

असत्य वचन बोलने से इसके अलावा साधु साध्वीयो का तिरस्कार करने से दुख पूर्ण दीर्घकालीन जीवन मिलता है। धन की प्रचुर आमदनी देखकर जिसने अपने पूर्व जन्म में घमंड किया हो जीवन में कड़ी मेहनत के बाद भी अच्छी कमाई नसीब नहीं होती।

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