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पैसों के साथ हो प्रेम का समावेश : साध्वी अणिमाश्री

  जैन संस्कार विधि द्वारा समायोजित रक्षाबंधन का बताया गया डेमो    टीपीएफ नवगठित टीम का हुआ शपथग्रहण रिश्तों में मिठास भरने में सहभागी बनते है त्योहार। अपनत्व की भावधारा को जागृत करते है त्योहार।सहआस्तित्व का जागरण करते है त्योहार – उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में रक्षाबंधन पर्व पर साध्वी अणिमाश्री ने कहे।  साध्वीश्री ने विभिन्न रक्षा सूत्रों की अवगति दिराते हुए कहा कि ऋजुर्वेद में गुरू-शिष्य रक्षा सूत्र, वृक्ष रक्षा सूत्र, गौ रक्षा सूत्र इत्यादि के साथ भातृ रक्षा सूत्र का उल्लेख आता है। भातृ रक्षा सूत्र में जहां बहन भाई के प्रति मंगलकामना करती है, वही भाई बहन की रक्षा का संकल्प करता है, निभाता है। द्वापद युग की चर्चा करते हुए साध्वीश्री ने बताया की वचनबद्ध श्रीकृष्ण शिशुपाल की 99 गलतियों को क्षमा कर 100वीं गलती के वध के समय अगूंठे से खून निकलने पर अपनी साड़...

सृजन के शिखर पर करें आरोहण : साध्वी अणिमाश्री

कन्या किशोर उड़ान कार्यशाला का आयोजन साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में तेरापंथ युवक परिषद् व महिला मंडल के तत्वावधान में कन्या किशोर कार्यशाला उड़ान का आयोजन किया गया।   “बढ़े शिखर की ओर” विषय पर प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री ने कहा आज परिषद् में कन्या व किशोर उपस्थित है। ये वो पीढ़ी है, जो देश, परिवार व समाज का उज्ज्वल भविष्य है। जिनकी आंखों में कामयाबी के इन्द्रधनुषी सपने है। जो हाथ में धैर्य की कलम लेकर, पुरुषार्थ की स्याही लेकर, सृजन के अमिट हस्ताक्षर करने को आतुर है। जिनके पांव शिखर तक पहुंचने के लिए बेताब है। जो अपनी योग्यता के आधार ऊंची उड़ान भरना चाहते हैं। मैं कहना चाहती हूं कन्याओं एवं किशोरों से सिर्फ कल्पना, सोच, चिन्तन, विचार एवं भावों से ही शिखर तक पहुंच सकते।  साध्वीश्री ने आगे कहा कि सफलता के आरोहण के लिए जीवन संस्कारों से परिपूर्ण होन...

श्री रतन मुनि की पावन प्रेरणा से इन दिनों तपस्या करने वालों का ठाट लगा हुआ है

दुर्ग जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में आध्यात्मिक वर्षावास के दौरान त्याग तपस्या जोर शोर से श्रमण संघ के परिवार जन अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि की पावन प्रेरणा से इन दिनों तपस्या करने वालों का ठाट लगा हुआ है। अपनी छोटी सी उम्र में कठिन उग्र तपस्या करने वाले श्री आशीष अमरचंद बेगानी ने आज धर्म सभा में 34 उपवास का संकल्प पूर्ण किया। इसी तरह कमल श्री श्री माल ने 11 उपवास कुमारी पाया बोहरा ने 6 उपवास एवं तनीश बेगानी ने आज पांच उपवास का संकल्प लिया। यह सभी तपस्वी सिर्फ दिन में दो बार गर्म पानी पीते हुए सूर्यास्त के पश्चात पानी का त्याग करते हुए अपनी तपस्या में आगे बढ़ रहे हैं।। तपस्वीयों के सम्मान में महिलाओं ने गाया मंगल गान आज श्रमण संघ महिला मंडल की सदस्यों ने तपस्वी आशीष बेगानी, कमल श्रीश्री माल, पाया बोहरा, तनीश बेगानी के सम्मान में जय आनंद मध...

जिनशासन का प्राण तत्व है- तपस्या : साध्वी अणियाश्री

साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन के तपोमय प्रागंण में श्रीमती सुशीलादेवी धारीवाल के मासखमण तप की अनुमोदना में तेरापंथी सभा एवं संघीय संस्थाओं द्वारा तप अनुमोदना का कार्यक्रम आयोजित हुआ। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में साध्वीश्री ने कहा जिनशासन का प्राण तत्व है- तपस्या। तपस्या जिनशासन की नीवों को मजबूती प्रदान करता है। तपस्या जिनशासन का श्रृंगार है। तपस्या जीवन की बहार है। तपस्या से जीवन गुलजार है। तपस्या कर्म निर्जरा का अमोध साधन है। तपस्या एक ऐसी पावक है, जिसमे तपकर आत्मा कुंदन सी पावन बन जाती है। तपस्या वो मंदार है, जिसकी छांव तले बैठने वाला व्यक्ति परम आनंद व समाधि की अनुभूति करता है। विशेषकर सावन व भादव महिने में जिनशासन के उपवन में तप के खिलने लगते हैं। तप फूलों की मोहक परिमल से पूरा वातावरण सौरभमय बन जाता है। साध्वीश्री ने कहा श्रीमती सुशीलाजी धारीवाल मासखमण तप की भेंट लेकर...

भंवरलाल प्रकाशचंद धोका आजीवन रोलिंग शिल्ड प्रश्न मंच प्रतियोगिता

साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में चेन्नई तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में साहूकारपेट सभा भवन में भंवरलाल प्रकाशचन्द धोका आजीवन रोलिंग शिल्ड प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। साध्वीश्रीजी के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्र द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साध्वीश्रीजी ने प्रेरणा पाथेय से लाभान्वित कराते हुए कहा की महाप्रज्ञजी के जीवन में विनय, श्रद्धा एवं समर्पण भाव ऐसा अटूट था की, जिसके कारण अपने गुरु के दिल में ऐसा स्थान बना लिया था, कि आचार्य तुलसी ने अपने आचार्य पद का विसर्जन कर युवाचार्य महाप्रज्ञजी को आचार्य पद पर आरुढ कर दिया। यह इतिहास की एक विलक्षण घटना है।  विनय, श्रद्धा और समर्पण इसमें से अगर एक गुण भी हम अपना ले, तो हमारा जीवन भी एक अच्छा जीवन बन सकता है। सभी प्रतियोगियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि स्वाध्याय करने से ज्ञान का विकास होता है, इसलिए जो भी कंठस्थ करें, उसका...

तप से होती शुद्धि, मिलती सिद्धि : साध्वी उज्जवलप्रभा

विल्लुपुरम में तप अभिनंदन समारोह तमिलनाडु का छोटा सा क्षेत्र है विल्लुपुरम, जहां पर श्रद्धा के मात्र 16 परिवार है और पहला ही चातुर्मास। लोगों का उत्साह मानो आकाश को छुता हुवा सा प्रतीत होता है।   साध्वीश्री उज्जवलप्रभा ने दूसरे मासखमण तप अभिनन्दन के कार्यक्रम में अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया तेयुप कर्मठ कार्यकर्ता पवन कुमार सुराणा ने मासखमण किया है। विल्लुपूरम में संपूर्ण जैन समाज का भाइयों में प्रथम मासखमण है। पवन सुराणा ने ना केवल नाम चमकाया है, बल्कि अपना जीवन भी चमकाया है। तपस्या अभ्युत्थान का मार्ग है। जीवन की प्रक्रिया है। तपस्या धीर व्यक्ति ही कर सकता है, धैर्य के साथ अगर निर्जरा का लक्ष्य होता है, तो व्यक्ति अचिंतन्य लाभ प्राप्त कर लेता है।   कार्यक्रम का शुभारम्भ वलवनूर महिला मंडल के मंगल संगान से हुआ। तेरापंथ सभा की ओर से प्रेम सुराणा, महिला मंडल से चंचल सेठिया, तेयुप से निखिल भं...

तपस्या कर्म निर्जरा का अमोघ साधन है : साध्वी अणिमाश्री

मासखमण तप अनुमोदना साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथी सभा के तत्वावधान में श्री सोहनलाल रायसोनी के मासखमण तपस्या पर तप अनुमोदना का कार्यक्रम तेरापंथ भवन में समायोजित हुआ।   साध्वी अणिमाश्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जैन धर्म में तपस्या का महत्वपूर्ण स्थान है। तप के प्रभाव से मनुष्य अचिन्त्य शक्तियों और लब्धियों को प्राप्त कर लेता है। भगवान महावीर ने इसे कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन बताया है। स्वयं भगवान महावीर ने लम्बे समय तक तपस्या के द्वारा स्वयं को साधा और आध्यात्म की अतुल गहराई में छिपी आनंद की मुक्ताओं को प्राप्त किया। जैन धर्मावलम्बियों ने तपस्या के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। तपस्या के द्वारा जहां कर्मों की महान निर्जरा होती है, वहीं अनेक व्याधियों से भी छुटकारा मिल जाता है। हमारे भीतर जमे हुए विजातीय तत्व को तपस्या के द्वारा आसानी से बाहर निकाला जा...

अपनी शक्ति का सृजनात्मक कार्यों में करे उपयोग : साध्वी अणिमाश्री

कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं अणुव्रत समिति के शपथग्रहण समारोह का हुआ आयोजन    साध्वी अणिमाश्री जी के सान्निध्य में अणुव्रत समिति के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।   साध्वीश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जो व्यक्ति संगठन, संस्था से जुड़कर समाज की सेवा करता है, संस्था को चिरंजीवी बनाता है, वह कार्यकर्ता कहलाता है। संगठन व्यक्ति की योग्यता में निखार का माध्यम बनता है, उससे उसकी प्रतिभा बढ़ती है, उसकी मूल्यवत्ता बढ़ती है।  जो कार्यकर्ता अपने समय, श्रम का नियोजन कर, परिवार की परिस्थितियों, रिश्तो की मजबूती को साथ निभा, अपने दायित्व बोध को पहचान कर, समाज और मंच पर आकर सेवा देता है, वह वर्तमान के क्षण का उपयोग कर वर्धमान बन जाता है।  साध्वीश्री ने कार्यकर्ताओं के विभिन्न गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि...

मदुरै में चली तप की बसंती बहार तप निखरता है आत्मा के सौंदर्य को- मुनि अर्हत कुमार

तप वह प्रयोगशाला है जहाँ आत्मा तपकर स्वर्ण समान निखर जाती हैं| तप जीवन में सुनहरी सौगात को लाता है। हिमायती हिम्मत के बिना तप की साधना संभव नहीं है। फौलादी साहस के द्वारा ही तप शिखरों पर चढा जा सकता है। तप शुरवीरों का मार्ग है इस पथ पर मनोबली ओर हिम्मतवान व्यक्ति ही बढ सकता है। मनोबल की ही नीव पर तपरूपी महल खड़ा होता है। तप को अपनाने वाले धन्य होते हैं। इसी कड़ी में मदुरै के तीन तपस्वी अग्रसर है। सभा के मंत्री धीरज दूगड़ , तेममं उपाध्यक्ष रेखा दुगड, तेममं कोषाध्यक्ष सपना गोलछा ने जीवन में कीर्तिमान बनाया है। दो मास खमण और 21 का तप कर कुल पर स्वर्णिम कलश चढ़ाया है। उपरोक्त विचार शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री अर्हत् कुमार जी ने मास खमण तप अभिनंदन मैं व्यक्त किये,उन्होंने आगे कहा-सभा मंत्री धीरज दूगड़ ने मनोबल का परीचय दिया है और अपने परिवार में पहला मास खमण किया है रे...

तेरापंथ सभा द्वारा संगीत प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

संगीत की मधुरता, समरसता से कोई भी उदासी हो या अवसाद हो उससे पार पाया जा सकता हैं। संगीत ऐसी विधा है, जो आत्मा को परमात्मा की ओर बढ़ने का सेतु बनती है। उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा द्वारा आयोजित संगीत प्रतियोगिता में साध्वी अणिमाश्री ने कहें।   केसरीचन्द बालचन्द भटेरा आजीवन रोलिंग शील्ड संगीत प्रतियोगिता में साध्वी श्री ने कहा कि प्रतियोगिता कर्म निर्जरा की हेतु भी बनती हैं। यह मंच समाज की प्रतिभाओं को निखारने में सहभागी बनता है।  संगीत प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के प्रर्दशन के आधार पर निर्णायक श्री कन्हैयालाल पुंगलिया, श्री हेमन्त डुंगरवाल, श्रीमती मनीषा चोरडिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीमती काव्या बाँठिया को प्रथम, श्री स्वरूप चन्द दाँती को द्वितीय एवं सुश्री गरिमा आच्छा को तृतीय स्थान पर घोषित किया। तेरापंथ सभा मंत्री गजेन्द्र खांटेड़, निवर्तमान अध्यक्ष श्री विमल चिप्पड़, पुर्वाध्...

रिश्ते वही-सोच नयी : साध्वी आणिमाश्री

तेरापंथ सभा द्वारा “परिवर्तन : परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला” का हुआ आयोजन परिवार बचपन का झूला, यौवन की क्रीड़ास्थली और बुढ़ापे की शरणस्थली होता है। परिवार वह आसमान है, जहां प्रत्येक सदस्य सेवा, सहकार तथा सहयोग की भावना से निश्चिंत होकर सोते है। उपरोक्त विचार साध्वी अणिमाश्री ने तेरापंथी सभा चेन्नई के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में आयोजित “परिवर्तन – परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला” में कहें। साध्वीश्री ने रिश्ते वही सोच नई विषय पर धर्म परिषद् को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति के लिए परिवार किसी पक्षी के नीड़ के समान हैं, जहां उसकी थकावट को विश्राम  मिलता है। परिवार वह रसमयी धरती है, जहां हर बीज को फलने-फूलने का अवसर मिलता है। परिवार वह झरना है जहां आनन्द का जल बहता है। परिवार व्यक्ति के लिए त्राण, शरण, गति और प्रतिष्ठा है तथा जीवन में बहार और खुशहाली ...

मां का ह्रदय बच्चे की अद्भुत पाठशाला: मुनि अर्हत कुमार जी

मां बाप को घर में नहीं दिल में रखें मां दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कृति है।। मां के ममता की एक बूंद अमृत के समुद्र से भी ज्यादा मीठी होती है मां का ह्रदय बच्चे की अद्भुत पाठशाला है। बच्चे का भाग्य सदैव उसकी मां की कृति है मां का आंचल शीतल जल का सागर है पत्नी तो पसंद से मिलती है पर मां पुण्य से मिलती है। हम मां बाप को घर में ना रखें बल्कि दिल में रखें। यह सुविचार शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि अर्हत कुमार जी ने महिला मंडल के बैनर तले मेरी मां के कार्यक्रम में कहे , उन्होंने आगे कहा-मां-बाप का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, पर आज के दौर में माता पिता का सम्मान घट रहा है।     भारत की संस्कृति में वृद्धाश्रम होना एक आश्चर्य की बात है। जो मां 25 साल तक अपने बेटे के लिए जी जान दांव पर लगा देती है, वही बेटा उस मां को एक क्षण भी नहीं चाहता हमें मदर की कदर करनी है और फादर का आदर...

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