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अणुव्रत समिति द्वारा ध्वजारोहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा स्वतंत्रता के अमृत वर्ष में उध्वुम नन्बरगल प्राथमिक विद्यालय, आलथुर में नवनिर्वाचित अध्यक्ष ललित आंचलिया, संयोजिका श्रीमती निर्मला छल्लाणी ने ध्वजारोहण किया। विद्यालय के छात्राओं के साथ शिक्षक मेघलादेवी ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। स्कूल में लगाने के लिए प्रधानाचार्य श्रीमती किरूबाई को अणुव्रत आचार संहिता का बोर्ड भेट किया गया।  तत्पश्चात सेव्वापेट स्थित उध्वुम नन्बरगल अनाथ छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए नोटबुक एवं स्टेशनरी सामान प्रबंध न्यासी पार्थसारथी के साथ छात्राओं को प्रदान किए गए। नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री ललित आंचलिया ने जीवन को सुन्दर बनाने के लिए अणुव्रत की उपयोगिता बताने के साथ पर्यावरण जागरूकता की तमिल भाषा में प्रेरणा दी। छात्रावास परिसर में 30 पौधे लगाये गये।  अलग-अलग छात्रों को पौधों की सारसम्भाल के लिए दायित्व सौंपा गया। इस ...

अणुव्रत समिति द्वारा ध्वजारोहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा स्वतंत्रता के अमृत वर्ष में उध्वुम नन्बरगल प्राथमिक विद्यालय, आलथुर में नवनिर्वाचित अध्यक्ष ललित आंचलिया, संयोजिका श्रीमती निर्मला छल्लाणी ने ध्वजारोहण किया। विद्यालय के छात्राओं के साथ शिक्षक मेघलादेवी ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। स्कूल में लगाने के लिए प्रधानाचार्य श्रीमती किरूबाई को अणुव्रत आचार संहिता का बोर्ड भेट किया गया।  तत्पश्चात सेव्वापेट स्थित उध्वुम नन्बरगल अनाथ छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए नोटबुक एवं स्टेशनरी सामान प्रबंध न्यासी पार्थसारथी के साथ छात्राओं को प्रदान किए गए। नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री ललित आंचलिया ने जीवन को सुन्दर बनाने के लिए अणुव्रत की उपयोगिता बताने के साथ पर्यावरण जागरूकता की तमिल भाषा में प्रेरणा दी। छात्रावास परिसर में 30 पौधे लगाये गये।  अलग-अलग छात्रों को पौधों की सारसम्भाल के लिए दायित्व सौंपा गया। इस ...

देश भक्ति से ओतप्रोत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन दर्शन पर छोटे बड़े एवं बुजुर्ग सदस्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी

दुर्ग देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन आज जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब दुर्ग में संत श्री रतन मुनी एवं संत विवेक मुनि के सानिध्य में तथा गौरव मुनि के मार्गदर्शन में सामाजिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति श्रमण संघ परिवार के सदस्यों ने प्रस्तुत की। इस आयोजन में श्रमण संघ बालिका मंडल श्रमण संघ स्वाध्याय मंडल वर्धमान सेवा मंच एवं श्रमण संघ महिला मंडल के सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ समा बांधा। देश भक्ति से ओतप्रोत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन दर्शन पर छोटे बड़े एवं बुजुर्ग सदस्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। आज प्रातः 8:00 बजे जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब के प्रांगण में श्री पारसमल संचेती एनसी नाहर एवं जसराज पारख ने ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपादित किया। उक्त आयोजन पर श्रमण सं...

श्रद्धावान श्राविका भंवरीदेवी सेठिया : साध्वी अणिमाश्री

संथारें में हुआ देवलोक गमन   जैन संस्कार विधि से सम्पादित हुआ अंतिम संस्कार नार्थ टाउन, चेन्नई  –  हर श्रावक का परमलक्ष्य होता है कि मोक्ष की और सलक्ष्य गतिमान हो। श्रीमती भंवरीदेवी सेठिया धर्मपत्नी स्व. श्री संचियालाल ने श्रावक के तीसरे मनोरथ अनशन का स्वीकरण कर अपने जीवन को धन्य बनाया – उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में श्रीमती भंवरीदेवी सेठिया की स्मृति सभा में साध्वी अणिमाश्री ने कहें।   साध्वीश्री ने आगे कहां कि भंवरीदेवी संघ और संघपति के प्रति पूर्ण श्रद्धावान श्राविका थी। वे पिछले लगभग 40 वर्षों से रात्री भोजन नहीं करती। चातुर्मास में दो मास एकांतर तप करती। साधु-साध्वियों को आहार-पानी बहाराने की उनकी उत्कृष्ट भावना रहती हैं। प्रतिदिन सामायिक स्वाध्याय के साथ अपने बच्चों में भी धार्मिकता के संस्कार कूट कूट कर भरें। उन्होंने अंतिम समय में संथारा स्वीकार कर अपने जीवन का स्वर...

वाणी के जादूगर, श्रुताचार्य, साहित्य सम्राट उत्तर भारतीय प्रवर्तक श्री अमर मनि जी म.

दक्षिण सूर्य डॉ. वरुण मुनि जी म.सा. ‘अमर शिष्य’ उत्तर भारतीय प्रवर्तक पूज्य भण्डारी श्री पद्मचन्द्र जी महाराज के प्रथम, प्रधान और अतिजात शिष्य हुए पूज्य श्री अमर मुनि जी महाराज। सितारों के मध्य जो महिमा सूर्य की है, मुनियों के मध्य वही महिमा अमर मुनीश्वर की है। उनके व्यक्तित्व में हिमालय की ऊंचाई और सागर की गहराई है। जिस संगीतमय माधुर्य से उन्होंने जिनशासन की महति-महति प्रभावना की वह विलक्षण और अद्भुत है। अमर गुरुदेव अनुपमेय हैं। उन्हें उपमित करने के लिए सभी श्रेष्ठ उपमान बोने प्रतीत होते हैं। उन्हें कहने में भाषा स्वयं को पंगु पाती है। अमर अलेख्य अक्षर हैं। वाचस्पतियों से भी अमरनहीं है।सत्य के अनन्त पक्ष हैं। उसके सभी पक्षों का अंकन संभव नहीं है। अमर मुनीश्वर की महिमा के भी अनेक पक्ष हैं। उनका अंकन कैसे संभव हो सकता है? गूंगे केरी सरकरा… उस सर्वतोभद्र व्यक्तित्व के विषय ...

मासखमण की तपस्या की ओर आशीष बंगानी के बढ़ते कदम

दुर्ग / जय आनंद मधुकर रतन भवन के प्रांगण में आध्यात्मिक चातुर्मास में त्याग तपस्या जप अनुष्ठान के कार्यक्रम हर्ष और उल्लास के वातावरण में संपन्न हो रहे हैं। अपनी छोटी सी उम्र में श्रमण संघ स्वाध्याय मंडल के सक्रिय सदस्य आशीष बंगानी में आज 24 उपवास का संकल्प छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि एवं विवेक मुनि के से लिया। डॉ सतीश मुनि एवं गौरव मुनि की पावन प्रेरणा से उपवास से अपना संकल्प लेते हुए नित्य प्रतिदिन अपने उपवास का संकल्प दोहराते हुए आज 24 उपवास का संकल्प पूर्ण किया। जय आनंद मधुकर रतन भवन की धर्म सभा में आशीष बंगानी इसके पूर्व भी उपवास 2 उपवास की तपस्या के साथ-साथ 15 उपवास तक की तपस्या कई बार पूर्ण की है। श्री आशीष बंगानी के पिता श्री अमरचंद बंगानी एवं माता पुष्पा देवी बंगानी ने भी लगातार साथ मिलकर 30 उपवास की कठिन तपस्या कई बार पूर्ण की है। माता-पिता की सद प्रेरणा से आशीष ने भी मास खम...

ललित आंचलिया बने तमिलनाडु अणुव्रत समिति के अध्यक्ष

साध्वी अणिमाश्री का मिला पावन पाथेय आचार्य श्री तुलसी का मानव को मानव बनाने की महान देन है – अणुव्रत। अणुव्रत एक असाम्प्रदायिक धर्म हैं। उसके छोटे छोटे नियमों को अपना कर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है – उपरोक्त विचार नवनिर्वाचित तमिलनाडु अणुव्रत समिति के अध्यक्ष के साथ सदस्यों के दर्शन करने पर साध्वी अणिमाश्री ने कहें। साध्वीश्री ने कहा कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष ललित आंचलिया एक उत्साही युवा कार्यकर्ता है। वह अपने साथ एक अच्छी टीम का निर्माण कर तमिलनाडु के जन मानस में अणुव्रत के साथ जीवन विज्ञान को साथ में जोड कर प्रचार-प्रसार कर ज्यादा से ज्यादा संघ सेवा में योगभूत बने। इससे पुर्व तमिलनाडु अणुव्रत समिति चेन्नई की साधारण सदन तेरापंथ भवन, साहुकारपेट में हुई। मंगलाचरण श्रीमती मिलन चौपडा, गुणवंती खांटेड़, मंजु गेलड़ा ने किया। लोगस्स ध्यान के बाद अध्यक्ष श्री सुरेश बोहरा न...

संत गौरव मुनि के दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन में यह 48 दिवसीय अनुष्ठान हुआ शुरू

दुर्ग/ जय आनंद मधुकर रतन भवन के सभागृह में छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनिएवं विवेक मुनि के सानिध्य में कलश की स्थापना हुई। शोभा यात्रा के रूप में श्रमण संघ परिवार की महिलाएं केसरिया साड़ी पहनकर कलश अपने सिर पर रख कर जय घोष की ध्वनि के साथ बांधा तालाब परिसर से जय आनंद मधुकर रतन भवन पहुंची। संत गौरव मुनि के दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन में यह 48 दिवसीय अनुष्ठान आज आनंद ऋषि जी एवं प्रभा कवर जी के जन्म जयंती प्रसंग पर प्रारंभ हुआ। आज 48 जैन परिवार के सदस्यों पति-पत्नी सह जोड़ें तथा वहां उपस्थित धर्म प्रेमी श्रावक श्रमिकों ने मिलकर भक्तांबर स्त्रोत का जाप अनुष्ठान प्रारंभ किया। इस अनुष्ठान में 53 कलश की स्थापना की गई जिसमें ज्ञान दर्शन चरित्र के कलश भी शामिल है। आनंद ऋषि जी एवं प्रभा कवर जी की जयंती मनी आज की धर्म सभा आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी के जीवन दर्शन पर केंद्रित रही। इस मौके पर संत श्री...

साधना का लक्ष्य है खोना ही खोना: मुनि अर्हत कुमार

  सन्यास जीवन जीने का उत्कृष्ट दर्शन हैं, स्वयं के द्वारा स्वयं का विमर्शण हैं, नवनीत के रूप में मुक्ति का वरण हैं और अंत में परमात्मा का प्रकटीकरण हैं ।आज की भौतिक युग की लहर में संसाधनों के चक्रव्यूह से अपने आप को बचाकररखना बहुत बड़ी बात हैं। तेरापंथ धर्मसंघ में एक गुरु का अनुशासन ,एक विधान, एक परंपरा में जीवन को सर्वात्मना समर्पित करना विलक्षण बात हैं। इस युग में जहां हर मानव एन्जॉय और मौज मस्ती में लगा हुआ हैं वही मुमुक्षु सुनीता बोकड़िया और मुमुक्षु पूजा वडेरा जीवन को सफल बनाने के लिए इस दुरूह पथ की पथिक बनी हैं । भोग से योग की और बढ़ने वाला पहला कदम हैं संयम, राग से त्याग की और बढ़ने का नाम संयम है। संसार से नाता तोड़ ,मन को मोड़,प्रभु से तार जोड़ने गुरुचरणों में संयम स्वीकारने जा रही है। धीर वीर गंभीर बन विनय से विद्यार्जनकर आत्म विकास करना हैं। गुरु दृष्टि की आराधना करना हैं और गुरुक...

दुर्ग जय आनंद मधुकर रतन भवन के आनंद गणेश रतन दरबार में कल से 48 दिवसीय भक्तांबर जाप

दुर्ग जय आनंद मधुकर रतन भवन के आनंद गणेश रतन दरबार में कल से 48 दिवसीय भक्तांबर जाप अनुष्ठान प्रारंभ हो रहा है। आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी महाराज एवं महा साध्वी प्रभा कवर जी के जन्म जयंती के प्रसंग पर नौ दिवसीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनी एवं श्री विवेक मुनि के सानिध्य में व संत गौरव मुनि के मार्गदर्शन में विगत दिनों से चल रहा है। इसी परिपेक्ष में कल भक्तांबर स्त्रोत की 48 गाथाओं का 48 दिन से दिवसीय जाप अनुष्ठान प्रारंभ हो रहा है। जिसमें जैन समाज के 48 परिवार प्रमुख रूप से अपनी इस अनुष्ठान को पूर्ण करने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। 8 अगस्त को आयोजित इस अनुष्ठान कार्यक्रम में प्रातः 8:00 ताराचंद श्री श्री माल के निवास में कलश विधि प्रारंभ होगी श्रमण संघ के श्रावक श्राविकाओं की विशेष उपस्थिति में एक शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो आनंद मधुकर रतन भवन में संपन...

आत्म शुद्धि का अभियान है – तप : साध्वी श्री उज्जवलप्रभा

संगीता ए बाफणा के मासखमण तप का अभिनन्दन समारोह आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में श्री सुसवाणी भवन, विल्लुपुरम (तमिलनाडु) में श्रीमती संगीता ए बाफणा के मासखमण का प्रत्याख्यान एवं तप अभिनंदन कार्यक्रम समायोजित हुआ। साध्वी श्री उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि तप कषाय मुक्ति एवं आत्म शुद्धि का अभियान हैं। तपस्या के ताप से कर्म शीलाएं पिघलने लगती है। तपस्या का लक्ष्य है – कर्म शरीर को तपाना। केवल भूखा रहना, तप नहीं है। साध्वीश्री ने विल्लुपुरम के श्रावक समाज के तपस्वियों की अनुमोदना के साथ कहा कि चातुर्मास प्रारंभ से पूर्व ही यहां तपस्या की झड़ी लग गई थी। कई भाई-बहनों के पंचोला, अठाई, नौ आदि की तपस्याएँ पूर्ण हो चुकी है और कई के तपस्यायों का क्रम प्रवर्धमान हैं। एकांतर, एकासन, बारी के उपवास का बहुत ही सुंदर क्रम चल रहा है।   साध्वी श...

जैन आचार दर्शन मनुष्य जीवन के व्यावहारिक पक्ष की उपेक्षा करके नहीं चलता: महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री

श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज आदि साध्वी वृन्द द्वारा दिनांक 5 अगस्त 2021 को प्रातः प्रवचन श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में आयोजित किया गया। साध्वी पूज्या श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने दैनिक प्रवचन श्रृंखला श्रावक के 21 गुण के अंतर्गत तीसरे गुण सौम्यता पर प्रवचन देते हुए फ़रमाया कि जैन आचार दर्शन मनुष्य जीवन के व्यावहारिक पक्ष की उपेक्षा करके नहीं चलता। जैनाचार्यों ने जीवन के व्यावहारिक पक्ष को गहराई से परखा है और उसे इतना सुसंस्कृत बनाने का प्रयास किया है कि जिसके द्वारा व्यक्ति इस जगत में भी सफल जीवन जी सकता है । यही नहीं, इन सद्गुणों में से अधिकांश का सम्बन्ध हमारे सामाजिक जीवन से है । व्यक्तिक जीवन में इनका विकास सामाजिक जीवन के मधुर संबंधों का सृजन करत...

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