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उपासक कर्म निर्जरा में बनते सहभागी : साध्वी अणिमाश्री

साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में, तेरापंथ सभा की आयोजना में उपासक कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में किया गया।  साध्वीश्री ने उपासकों को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि उपासक जहां अपनी ज्ञानाराधना को बढ़ाते हैं, वहीं दूसरों की कर्म निर्जरा में भी सहभागी बनते हैं। इस वर्ष पर्युषण उपासक यात्रा में जाने वालों के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना करते हुए कहा कि वे जिस क्षेत्र में भी जाएं, वहां अपनी संघीय रीति नीति के अनुरूप, वहां के श्रावक समाज में तेरापंथ की मर्यादा, अनुशासन, समर्पण की भावना को बलवती बनाने में योगभूत बने। उपासक अपने ज्ञान के साथ चिन्तन पक्ष को भी निरन्तर सरल, विनम्र बनायें। अपने सादगीपूर्ण व्यवहार से सभी के दिल में सम्मान के भाव से अपनी पहचान बनायें। वर्तमान परिस्थिति के अनुरुप स्वयं अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। आपने पर्युषण कालीन करणीय कार्यों की संक्ष...

नौ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद संत महापुरुषो का वर्षावास

दुर्ग/ आचार्य प्रवर् 1008 श्री रामलाल जी म.सा. और उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा.की कृपा से इस वर्ष साधुमार्गी संघ दुर्ग को शासन दीपक श्री हर्षित मुनि जी म.सा. एवं श्री धीरज मुनि जी आदि ठाणा 2 एवं महासती श्री हेमप्रभा जी म. सा. आदि ठाणा 4 का वर्षावास चातुर्मास प्राप्त हुआ है। 9 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद संत महापुरुषो का वर्षावास प्राप्त होने से पूरे संघ में विशेष उत्साह बना हुआ है महापुरुषो के मंगल प्रवेश के साथ ही म् सा श्री नेएक चौका( धर)एक अठाई का प्रकल्प प्रदान किया था।आचार्य भगवन राम गुरु के आशीर्वाद एवं श्री हर्षित मुनि जी की वाणी और ओज का प्रभाव एवं श्री धीरज मुनि जी म.सा. की प्रेरणा और पुरुषार्थ का ही जादू है कि आज तक 8 मासखमन और 136 अठाई और उससे अधिक की तपस्या सम्पन्न हो चुकी है। जिसमे प्रमुख रूप से दुर्ग की तपस्वी रत्ना श्री मति सुनन्दा देवी धर्मपत्नी ज्ञान चन्द पारख ने ...

उपासक कर्म निर्जरा में बनते सहभागी : साध्वी अणिमाश्री

साध्वीश्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में, तेरापंथ सभा की आयोजना में उपासक कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में किया गया।  साध्वीश्री ने उपासकों को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि उपासक जहां अपनी ज्ञानाराधना को बढ़ाते हैं, वहीं दूसरों की कर्म निर्जरा में भी सहभागी बनते हैं। इस वर्ष पर्युषण उपासक यात्रा में जाने वालों के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना करते हुए कहा कि वे जिस क्षेत्र में भी जाएं, वहां अपनी संघीय रीति नीति के अनुरूप, वहां के श्रावक समाज में तेरापंथ की मर्यादा, अनुशासन, समर्पण की भावना को बलवती बनाने में योगभूत बने। उपासक अपने ज्ञान के साथ चिन्तन पक्ष को भी निरन्तर सरल, विनम्र बनायें। अपने सादगीपूर्ण व्यवहार से सभी के दिल में सम्मान के भाव से अपनी पहचान बनायें। वर्तमान परिस्थिति के अनुरुप स्वयं अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। आपने पर्युषण कालीन करणीय कार्यों की संक्ष...

जन जन के प्रेरणा दायक श्री कृष्ण जी का जीवन दर्शन: डाक्टर राजेन्द्र जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र जी ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर बोलते हुए कहा कि साल भर अनेक अष्टमी आती जाती है किन्तु आज की अष्टमी श्री कृष्ण के जन्म के साथ इतिहास में अमर होगी। श्री कृष्ण का जीवन दर्शन बाल युवा व वृद्ध सभी के लिए प्रेरणादायी है! वे एक आदर्श राजपुरुष होकर भी अमीर गरीब सभी के साथ एक समान भाव से व्यवहार करते रहे! गरीब सुदामा के घर के चावल भी पकवान समझ कर ग्रहण कर लेते है! ग्रामीण संस्कृति में पले पोसे श्री कृष्ण सभी के लिए भगवान स्वरूप बन गए! गीता का बेजोड़ ज्ञान बड़े बड़े विद्वानों के लिए आम जनों के लिए आज भी प्रेरणा प्रदान कर रहा है! उनके कारण गीता भी अमर हो गई है! गीता को पढ़कर हताश निराश व्यक्ति में भी जबरदस्त जीवन को जीने की प्रेरणा दे रहा है! वे महान गुणी थे, मृत कुत्ते में भी दांतो को देखकर उसकी विशेषता का वर्णन इनके द्वारा किया गया! रासलीला गोपीओं के संग रहकर उन्होंने उसका महत्व...

रिश्तों में मिठास, वह घर मन्दिर : साध्वी अणिमाश्री

वृहद सास बहू सम्मेलन  साध्वीश्री अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में वृहद् सास बहू सम्मेलन का आयोजन साहुकारपेट तेरापंथ सभा भवन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर साध्वीश्रीजी द्वारा प्रदत्त नमस्कार महामंत्र के द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सास बहू की जोड़ियों को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने अपने मार्मिक एवं सारगर्भित शब्दों में कहा की सास-बहू का एक अहम रिश्ता है। इस रिश्ते को सलोना बनाना है, तो हमें कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। ईट-चुने से मकान बनता है, लेकिन वह घर तब बनता है, जब कोई वहां रहता है। वही घर मंदिर तब बनता है, जब रिश्तो में मिठास होती है और आपसी रिश्ते दिल से निभाये जाते है। एक दूसरे को सहन करना सीखें, गुणवत्ता का प्रमोद भाव के साथ गुणगान करें, जब भी कोई अच्छी बात हो तो मोटिवेशन दे। इस तरह के सम्मेलन यदा-कदा आयोजित होते रहने चाहिए,  इससे नई दिशा म...

संस्कारों की वाटिका ज्ञानशाला : साध्वी उज्जवलप्रभा

ज्ञानशाला दिवस का आयोजन आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस मनाया गया। साध्वीश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि परम पूज्य गुरुदेव द्वारा निर्देशित इन 4 नियमों का जीवन में होना जरूरी है – 1. Be polite, 2. Be Honest, 3. Be Merciful & 4). Be Cooperative.  इन नियमों के पालन से ही हम नंबर वन बन पाएंगे और यह गणाधिपति पूज्य गुरुदेव तुलसी की इस वरदाई ज्ञानशाला के उपक्रम से ही संभव है। साध्वी अनुप्रेक्षाश्री ने कहा कि जीवन रूपी फूल को महकाने एवं संस्कारों द्वारा सर्वांगीण विकास ज्ञानशाला के द्वारा ही संभव है। स्कूली शिक्षा तो केवल भौतिक विकास कराती है, जबकि आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा ही विनम्रता एवं सहिष्णुता के गुण बच्चों में अवतरित होते हैं। मंगलाचरण से श्रीमती स्नेहा भंडारी ने, कन्या मंडल से सुश्री भव्या सेठिया, प्रशिक्षिकाओं से श...

संस्कारों के दीपों से अपने जीवन को ज्योतिर्मय बनाएं – साध्वी अणिमाश्री

ज्ञानशाला दिवस का आयोजन साध्वी अणिमाश्री के सान्निष्य में तेरापंथी सभा के तत्वावधान में ज्ञानशाला प्रकोष्ठ चेन्नई द्वारा तेरापंथ भवन में ज्ञानशाला दिवस मनाया गया। जिसमें सैकड़ों बच्चों एवं प्रशिक्षिकाओं की सहभागिता रही।  साध्वीश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा ज्ञानशाला वो महफिल है, जहां बच्चों के अन्तर्मन में संस्कारो के दीप प्रज्वलित होते है। उन संस्कार रूपी दीपों की रोशनी से, ज्योती से बच्चों का पूरा जीवन ज्योतिर्मय बन सकता है। ज्ञानशाला बच्चों के लिए वो दिशासूचक यंत्र है, जो बालकों के स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। बालक ज्ञानशाला में सिर्फ ज्ञानार्जन ही नहीं करते, बल्कि संस्कारार्जन भी करते हैं। बच्चों को स्कूल में अच्छी तालीम मिल सकती, वो उनके अच्छे जॉब में योगभूत बन सकती है। स्कूली शिक्षा आजीविका अर्जन में निपुण बनाती है, जबकि ‘ज्ञानशाला’ सुन्दर भविष्य का निर्म...

माता पिता के उपकार को जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता: गौरव मुनि

दुर्ग/माता पिता के उपकार को जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। मां संस्कार दायनी होती है तो पिता प्रकाश पुंज होता है। इन दोनों के बिना सुख समृद्ध और शक्तिशाली जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती। अगर माता पिता पुत्र के व्यवहार से दुखी है तो वह पुत्र जीवन पर्यंत सुख की प्राप्ति नहीं कर सकता और जिस घर में माता-पिता पुत्र के व्यवहार से सुखी हैं उस घर में ईश्वर का आशीर्वाद सदैव अनेक रूपों में बरसता रहता है और वही घर स्वर्ग से सुंदर कहलाता है। उक्त बातें जय आनंद मत कर रतन भगवान की धर्म सभा में संत गौरव मुनि ने व्यक्त किए मुन्नी श्री लागे कहा अपने जीवन प्रदाता हमारे मां पिता होते हैं। आगम माहिर भगवान ने अपने माता-पिता का अंतकरण से ध्यान रखा था उन्होंने गर्भावस्था में ही सोचा था। मैं अपने माता-पिता को तकलीफ हो ऐसा कार्य नहीं करूंगा। आज गौरव मुनि के मार्गदर्शन में मात-पिता वंदनावली का कार्यक्रम हर्ष और उल...

श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में कृष्ण जन्माष्टमी मनाया गया

श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में रविवार प्रातः दिनांक 29 अगस्त 2021 को श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में कृष्ण जन्माष्टमी मनाया गया। साध्वी श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने प्रवचन में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर फ़रमाया कि जिसे केवल जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है, जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही कहा जाता है। उनके माता पिता वसुदेव और देवकी जी के विवाह के समय मामा कंस जब अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुँचाने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई थी जिसमें बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र कंस को मारेगा। अर्थात् यह होना पहले से ही निश्चित था अतः वसुदेव ...

दुख आ जाने पर भी मन पर संयम रखना चाहिए: उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि जी

जोधपुर में चातुर्मास के प्रवचन के दौरान उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि जी ने कहा कि दुख के क्षणों में व्यक्ति को अपनी भावनाओं पर संयम रखना चाहिए। व्यक्ति को प्रतिशोध की भावना नहीं रखनी चाहिए इससे समस्या बढ़ती है। दुख में व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए, ऐसे समय में अपने मनोबल को मजबूत रखना चाहिए। जैन उपन्यास में अनेक भव में कहानियां प्रचलित हैं। बैर कभी व्यक्ति को शांति से नहीं रहने देता है। गैंगवार भी वैर प्रवृत्ति का उदाहरण है। इस पर पूर्ण विराम लगाने की जरूरत है। यह तभी संभव है जब हम आपस में समझौता कर ले। कभी खून से सने कपड़े को खून से नहीं धोया जा सकता। उसे साफ करने के लिए साफ पानी की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार बैर से बैर नहीं खत्म होता उल्टे बढ़ता जाता है। उपाध्याय प्रवर ने उग्र हिंदूवाद के बढ़ते चलन पर हुए चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज जैन समाज की नई नई पीढ़ी को उग्र हिंदू वाद का शिकार ...

निर्विघ्नं उनकी तपस्या जारी

दुर्ग / जैन साध्वी जयमाला जी महाराज की पावन प्रेरणा से उनके 2008 में दुर्ग चातुर्मास के दौरान श्रीमती नंदा देवी पारख ने तपस्या प्रारंभ की थी तब से लेकर आज तक निर्विघ्नं उनकी तपस्या जारी है। आज जय आनंद मधुकर रतन भवन में छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनी एवं विवेक मुनि के मुखारविंद से उन्होंने 52 उपवास की तपस्या का संकल्प धर्म सभा में लिया। हर चातुर्मास में तपस्या कर अपने परिवार का नाम रोशन करने वाली श्रीमती नंदा देवी अब तक की सबसे बड़ी तपस्या 81 उपवास एवं एक चातुर्मास में 2 मास खमण की तपस्या करने का रिकॉर्ड दर्ज है। उनके साथ साथ उनकी बेटी कुमारी पायल पारख ने अपनी माता का तपस्या में साथ देते हुए उन्होंने भी तपस्या प्रारंभ की थी और आज कुमारी पायल ने 28 उपवास का संकल्प रतन मुनि के हाथों ग्रहण किया। कुमारी पायल ने भी इसके पूर्व 9,11,की तपस्या करते हुए 31 उपवास की तपस्या की ओर अग्रसर है। इसी तरह ...

मंत्र जप प्रसुप्त शक्तियों को जागृत करता है – साध्वी अणिमाश्री

साध्वी अणिमाश्री ने तेरापंथ भवन में भक्तामर स्तोत्र अनुष्ठान साधना के द्वितीय चरण में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विधिपूर्वक किया गया जप अनुष्ठान व्यक्ति की भीतरी ऊर्जा को संवर्धित करता है। बीज मंत्रों का जप व्यक्ति को शक्तिशाली तो बनाता ही है साथ ही साथ आनेवाली अनेक प्रकार की बाधाओं से बचा लेता है। मंत्र जाप के प्रति घनीभूत श्रद्धा के साथ निरन्तरता व नियमितता जप साधना को प्राणवान बना देती है। मंत्र जाप के द्वारा व्यक्ति अपनी प्रसुप्त शक्तियों को जाग्रत करता है। नियमित किया जाने वाला जप अनुष्ठान सिद्धि की दिशाओं का उद्घाटन करता है। मंत्र जप की ध्वनि तरंगें इतनी प्रभावशाली होती है कि वे पूरे वातावरण को तरंगित कर देती है। वह भूमि भी पवित्र बन जाती है, जहां साधक पवित्रता के साथ जप करता है। विधिपूर्वक ग्रहण की हुई औषधि और पथ्य भोजन हितकारी होता है, वैसे ही विधि-विधान सहित किया गया जप अनुष्ठ...

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