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जो धर्म व पुण्य कर्म करता है वो ही श्रावक है, साध्वी उदितप्रभा

वेलूर. यहां बेरी बकाली गली स्थित श्री एस एस जैन स्थानक भवन में विराजित साध्वी सुप्रभा के सनिधय में साध्वी उदितप्रभा ने अपने चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि भगवान महावीर के धर्म संघ के चार स्तंभ साधु,साध्वी, श्रावक एवं श्राविका हैं। जिसमें साधु व साध्वी अनगार एवं श्रावक व श्राविका आभार कहलाते हैं। जो श्रमणों की उपासना करता है, उनके पास जाकर धर्म विचरण करता है उनके ज्ञान दर्शन व चरित्र में सहयोगी बनता है उसे ही श्रमणोंवासक कहते हैं। जो धर्म श्रवण करता है वो श्रावक, जो श्रद्धावान होता है वो श्रावक और जो धर्म व पुण्य कर्म करता है वो श्रावक होता है। श्रावक के दस लक्षण होते हैं जैसे जीवन जीने का विवेक रखता हो, श्रद्धावान होना, जो क्रियावान होता है वो क्रियाओं की आराधना में सजगता पूर्वक रहता है, वहीं सबसे धर्मवान श्रावक कहलाता है। इसके अलावा धर्म सभा में साध्वी इमितप्रभा ने कहा कि आत्मा में अनंत शक...

आध्यात्मिक साधनामय वर्षावास में वर्च्युअल पर्युषण महापर्व का सीधा प्रसारण अवध संगरीला से

श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य डॉ श्री शिवमुनिजी म. सा. के मंगलमय सान्निध्य में इस वर्ष घर बैठे आप सभी श्री अंतकृत दशांग सूत्र का वांचन एवं आत्मज्ञानी सद्गुरु की मंगल वाणी श्रवण कर सकते हैं। सूरत। अखिल भारतवर्षीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रमण संघीय श्रावक समिति के राष्ट्रीय प्रचार प्रसार मंत्री सुनील सांखला जैन ने बताया कि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण एवं प्रशासन के नियमानुसार व सभी के स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवध संग्रीला सूरत चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य डॉ. श्री शिवमुनिजी महाराज के मंगलमय सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व इस वर्ष घर बैठे जैनाचार्यजी यूट्यूब चैनल एवं जैनाचार्य वेबसाइट पर शनिवार, दिनांक 4 सितंबर से शनिवार, 11 सितम्बर 2021 प्रातः 8.30 बजे से पूरे विश्व के सभी श्रद्धालु श्री अंतकृतदशांग सूत्र का...

संसार के समस्त पदार्थ यहां के यही रह जाते है: संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने संसार के समस्त अनित्य पदार्थों का वर्णन करते हुए कहा कि मानव भ्रान्तिवश कई बार अनित्य पदार्थों को भी नित्य मान लेता है! उसके पीछे रात दिन एक कर देता है! मन की चाह अनन्त है इसका कभी अन्त नहीं होता अपितु चाह रखने वाले का ही अन्त हो जाता है! शरीर के साथ समस्त पदार्थ अनित्य होते हुए भी मोहवश उसी के पीछे जीवन यात्रा का प्रारम्भ व अन्त हो जाता है! मुनि जी ने उदाहरण देते हुए महात्मा बुद्ध के जीवन का एक प्रसंग सुनाया कि जब वह राजकुमार पद पर आसीन थे पिता की ओर से सख्त हिदायत दी गई की ऐसी कोई वस्तु या घटना बुद्ध के सामने न हो जिसे देखकर वराग्य भाव उत्पन्न हो जाये! लाख सचेत रहने के बाद भी एक दिन रथ पर आरुढ होकर निकले तो सामने से उन्हें मरा हुआ आदमी का कलेवर नजर आया, पूछने पर सारथी ने कहा जो मरण इसके साथ घटा है वह सभी के साथ घटने वाला है! इस छोटी सी घटना से बुद्ध का...

संसार के समस्त पदार्थ यहां के यही रह जाते है: संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने संसार के समस्त अनित्य पदार्थों का वर्णन करते हुए कहा कि मानव भ्रान्तिवश कई बार अनित्य पदार्थों को भी नित्य मान लेता है! उसके पीछे रात दिन एक कर देता है! मन की चाह अनन्त है इसका कभी अन्त नहीं होता अपितु चाह रखने वाले का ही अन्त हो जाता है! शरीर के साथ समस्त पदार्थ अनित्य होते हुए भी मोहवश उसी के पीछे जीवन यात्रा का प्रारम्भ व अन्त हो जाता है! मुनि जी ने उदाहरण देते हुए महात्मा बुद्ध के जीवन का एक प्रसंग सुनाया कि जब वह राजकुमार पद पर आसीन थे पिता की ओर से सख्त हिदायत दी गई की ऐसी कोई वस्तु या घटना बुद्ध के सामने न हो जिसे देखकर वराग्य भाव उत्पन्न हो जाये! लाख सचेत रहने के बाद भी एक दिन रथ पर आरुढ होकर निकले तो सामने से उन्हें मरा हुआ आदमी का कलेवर नजर आया, पूछने पर सारथी ने कहा जो मरण इसके साथ घटा है वह सभी के साथ घटने वाला है! इस छोटी सी घटना से बुद्ध का...

संसार के समस्त पदार्थ यहां के यही रह जाते है: संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने संसार के समस्त अनित्य पदार्थों का वर्णन करते हुए कहा कि मानव भ्रान्तिवश कई बार अनित्य पदार्थों को भी नित्य मान लेता है! उसके पीछे रात दिन एक कर देता है! मन की चाह अनन्त है इसका कभी अन्त नहीं होता अपितु चाह रखने वाले का ही अन्त हो जाता है! शरीर के साथ समस्त पदार्थ अनित्य होते हुए भी मोहवश उसी के पीछे जीवन यात्रा का प्रारम्भ व अन्त हो जाता है! मुनि जी ने उदाहरण देते हुए महात्मा बुद्ध के जीवन का एक प्रसंग सुनाया कि जब वह राजकुमार पद पर आसीन थे पिता की ओर से सख्त हिदायत दी गई की ऐसी कोई वस्तु या घटना बुद्ध के सामने न हो जिसे देखकर वराग्य भाव उत्पन्न हो जाये! लाख सचेत रहने के बाद भी एक दिन रथ पर आरुढ होकर निकले तो सामने से उन्हें मरा हुआ आदमी का कलेवर नजर आया, पूछने पर सारथी ने कहा जो मरण इसके साथ घटा है वह सभी के साथ घटने वाला है! इस छोटी सी घटना से बुद्ध का...

वाणी की कटुता लंबे समय तक लोगों को पीड़ा देती है: ऋषि मुनि जी महाराज

जोधपुर में चातुर्मास एक प्रवचन के दौरान ऋषि मुनि महाराज ने कहा कि यदि आपकी किसी क्रिया से व्यक्ति को चोट पहुंचता है तो वह अल्पकालीन होता है, लेकिन वही जवाब की वाणी की वजह से किसी को कोई चोट पहुंचता है तो वह दीर्घकालीन होता है। इसलिए हमें ऐसी कोशिश हमेशा रखनी चाहिए कि दूसरों को किसी प्रकार का कटु वचन बोलने से बचें। लोगों को धर्म को अपने जीवन के अतिरिक्त कार्य के रूप में लेकर नहीं चलना चाहिए। धर्म जीवन का अभिन्न अंग होना चाहिए तब जाकर धर्म आपके जीवन का बल बनता है। धार्मिक व्यक्ति अनजाने में भी किसी व्यक्ति को छूट नहीं पहुंचाता। चातुर्मास प्रवचन की ज्ञान धारा बहाते हुए उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि जी कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति पाप से दूर रहता है। धार्मिक व्यक्ति किसी का दिल नहीं दुखाता, ईर्ष्या नहीं करता, चोरी-बेईमानी नहीं करता, विनय भाव रखता है, अहंकार नहीं करता और अपने द्वारा किए गए धान क...

हृदय को शुद्ध बनाने वाला ही भक्त भगवान का प्रिय होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्ति के महत्व का प्रतिपादित करते हुए कहा कि जिस कार्य में भक्ति भावना मिल जाती है वह साधारण वस्तु भी असाधारण रूप ग्रहण कर लेती है! मुनि जी ने सुदामा के चावलो का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने बाल मित्र श्री कृष्ण को देख कर हर्ष से विभोर होकर मित्रवत व्यवहार करता हुआ चावलो का आहार देता है, भगवान श्री कृष्ण भी उसे महाप्रसाद समझकर सहर्ष ग्रहण कर लेते है! भगवान राम के जीवन में शबरी भीलनी का वर्णन आता है श्री राम बड़े बड़े ऋषियों के आश्रम को छोड़ कर शबरी के झोपड़े पर पधार जाते है! भक्तिवश मान भूलकर झूठे बेर श्री राम को ग्रहण करने हेतू प्रदान करती है एवं श्री राम भी उसे आनंदित मन से ग्रहण करके प्रसन्नता व्यक्त करते है! वास्तव में भक्ति वही सफल सार्थक होती है जिसमें भावना का प्रवाह हो!वर्तमान समय में भक्ति का बाहरी रूप चमक दमक सजावट मंदिरो में नजर आता है किन्तु भक्त ...

हृदय को शुद्ध बनाने वाला ही भक्त भगवान का प्रिय होता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्ति के महत्व का प्रतिपादित करते हुए कहा कि जिस कार्य में भक्ति भावना मिल जाती है वह साधारण वस्तु भी असाधारण रूप ग्रहण कर लेती है! मुनि जी ने सुदामा के चावलो का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने बाल मित्र श्री कृष्ण को देख कर हर्ष से विभोर होकर मित्रवत व्यवहार करता हुआ चावलो का आहार देता है, भगवान श्री कृष्ण भी उसे महाप्रसाद समझकर सहर्ष ग्रहण कर लेते है! भगवान राम के जीवन में शबरी भीलनी का वर्णन आता है श्री राम बड़े बड़े ऋषियों के आश्रम को छोड़ कर शबरी के झोपड़े पर पधार जाते है! भक्तिवश मान भूलकर झूठे बेर श्री राम को ग्रहण करने हेतू प्रदान करती है एवं श्री राम भी उसे आनंदित मन से ग्रहण करके प्रसन्नता व्यक्त करते है! वास्तव में भक्ति वही सफल सार्थक होती है जिसमें भावना का प्रवाह हो! वर्तमान समय में भक्ति का बाहरी रूप चमक दमक सजावट मंदिरो में नजर आता है किन्तु भक्त...

तपस्वी दृढ़ संकल्प से नए इतिहास का सृजन करता है : साध्वी श्री अणिमाश्री

कंठी तप अनुमोदना कार्यक्रम साहुकारपेट, चेन्नई : – साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में साध्वी कर्णिकाश्री के “कंठी तप अनुमोदना एवं अभ्यर्थना कार्यक्रम” तेरापंथ सभा भवन में मनाया गया। साध्वीश्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा चातुर्मास के समय जिनशासन गगनांगण में तप के चाँद सितारे चमकने लगते हैं। इस मिट्टी से तप की भीनी-भीनी सुगंध फूटने लगती है। मन की कोयल तप की तान सुनाती है। चारों तरफ तप की बहार आ जाती है। तप की सुर-सरिता बहने लगती है। इसके अनुकूल मौसम व समय को देखकर तपस्वीयों का संकल्प परवान चढ़ जाता है और वह अपने दृढ़ संकल्प से नए इतिहास का सृजन कर लेता हैं।साध्वी कर्णिकाश्रीजी ने अपने आत्मबल, मनोबल एवं संकल्पबल से कंठी तप की तपस्या की है। गुरुकृपा एवं श्रद्धेया महाश्रमणीजी के आशीर्वाद से ही इनका तप सानन्द संपन्न हुआ है। साध्वी कर्णिकाश्रीजी हर कार्य में दक्ष एवं कार्...

गायों के उपचार के लिए विधायक एवं महापौर ने अस्पताल का किया भूमि पूजन

संत रमण मुनि, आदित्य मुनि एवं गौरव मुनि के सानिध्य में गायों के उपचार के लिए विधायक एवं महापौर ने अस्पताल का किया भूमि पूजन। श्री कृष्ण गौशाला एवं जीव रक्षा केंद्र मोहल्लाई छातागढ़  में जैन संतो के सानिध्य में नगर विधायक अरुण वोरा एवं नगर निगम के महापौर धीरज बाकलीवाल ने प्राथमिक उपचार केंद्र अस्पताल का भूमि पूजन किया। तीर्थंकर परमात्मा के जाप अनुष्ठान के साथ संपन्न हुआ।कृष्ण गौशाला में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संत गौरव मुनि ने कहा हमारे गुरु भगवंत श्री गणेश लाल जी महाराज गौ सेवा के सच्चे प्रेमी थे। उन्होंने गौ सेवा की रक्षा हेतु हमेशा प्रेरणा दी। मैं आप सभी से  आह्वान करना चाहता हूं हर घर में गो सेवा की रक्षा हेतु एक दांन पेटी संस्था की मदद से घर घर तक पहुंची जाए और हर दो महीने के अंदर उस दान पेटी में संग्रहित राशि का उपयोग गौ रक्षा के लिए खर्च की जाए। प्रतिदिन घर पे हर सदस्य इस दान ...

जन्माष्टमी के अवसर पर फैंसी ड्रेस कार्यक्रम

दुर्ग कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में छोटे छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। फैंसी ड्रेस के कार्यक्रम के दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने कृष्ण राधा के रूप में सजधज कर एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। संत गौरव मुनि के मार्गदर्शन में कृष्णा अष्टमी के आयोजन से दौरान छोटे-छोटे त्याग संकल्प मटका हांडी में रखा गया था जिसे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को एक-एक पर्ची निकालने को कहा गया। जिस पर्ची में जो संकल्प दिलाया गया था उस संकल्प का उस व्यक्ति को पालन करना था। उपस्थित जनसमूह जो पर्ची जिसकी निकली उसने उस संकल्प को पूरा करने का आश्वासन दिया। श्री कृष्ण एवं राधा के संदर्भ में अनेक विषयों पर संत गौरव मुनि ने प्रेरक मार्गदर्शन दिया।

भगवान की तरह प्रकृति भी किसी के साथ भेदभाव नहीं करते: ऋषि मुनि जी

सभी धर्मों का त्याग कर सनातन धर्म को अपनाओ, तुम मेरी शरण में आओ मैं तुम्हें पापों से मुक्त कर दूंगा। यह कहना है भगवान श्री कृष्ण का। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के कथनों की चर्चा करते हुए ऋषि मुनि जी ने कहा कि सत्य जाने की भगवान श्री कृष्ण का भरोसा करो और किसी का नहीं। उन्होंने इस मौके पर एक कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि एक ब्राह्मण रोज भिक्षा मांग कर अपना गुजारा करता था। एक दिन ब्राह्मण की मुलाकात अर्जुन से हुई। अर्जुन ने ब्राह्मण को 1000 स्वर्ण मुद्राएं यह सोच कर दी कि ब्राह्मण अब के बाद भिक्षा मांगने नहीं जाएगा। लेकिन रास्ते में ही ब्राह्मण को एक लुटेरा मिला और लुटेरे ने ब्राह्मण से सारी सोने की हजार मुद्राएं लूट ली। अब ब्राह्मण फिर से भी भिक्षा मांगने लगा। दो दिनों के बाद अर्जुन की नजर फिर से उस ब्राह्मण देवता पर पड़ी। अर्जुन ने ब्राह्मण को बुलाकर के उस से भिक्षा मांगने का ...

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