जैन संत डाक्टर राजेन्द्र जी ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर बोलते हुए कहा कि साल भर अनेक अष्टमी आती जाती है किन्तु आज की अष्टमी श्री कृष्ण के जन्म के साथ इतिहास में अमर होगी। श्री कृष्ण का जीवन दर्शन बाल युवा व वृद्ध सभी के लिए प्रेरणादायी है! वे एक आदर्श राजपुरुष होकर भी अमीर गरीब सभी के साथ एक समान भाव से व्यवहार करते रहे! गरीब सुदामा के घर के चावल भी पकवान समझ कर ग्रहण कर लेते है! ग्रामीण संस्कृति में पले पोसे श्री कृष्ण सभी के लिए भगवान स्वरूप बन गए!
गीता का बेजोड़ ज्ञान बड़े बड़े विद्वानों के लिए आम जनों के लिए आज भी प्रेरणा प्रदान कर रहा है! उनके कारण गीता भी अमर हो गई है! गीता को पढ़कर हताश निराश व्यक्ति में भी जबरदस्त जीवन को जीने की प्रेरणा दे रहा है! वे महान गुणी थे, मृत कुत्ते में भी दांतो को देखकर उसकी विशेषता का वर्णन इनके द्वारा किया गया! रासलीला गोपीओं के संग रहकर उन्होंने उसका महत्व बढ़ा दिया! बांसुरी, मौर पँख, धनुष, सुदर्शन चक्र के धारी श्री कृष्ण ने जड़ पदार्थों से भी प्रेम करना सिखाया! सज्जनों की सुरक्षा करना दुर्जनों को नष्ट करने का साहस उनमे रहा, यधपी वे महाभारत युद्ध को टालने का भरसक प्रयास करते रहे, पर युद्ध होने पर सत्यमेव जयते का सन्देश देने के लिए वे पांडवो साथ देकर सत्यधर्म का महत्व बतला दे गए!

प्राणी मात्र व गोपालन के रूप में गौ माता की सेवा का सन्देश वाले कुशल राज्य संचालक रूप में उन्होंने प्रेरणाएं प्रदान की! जैन साहित्य में स्थान स्थान पर उनकी गौरव गाथा गाई गई है! वासुदेव के रूप में वे पूज्यनीय वंदनीय रहे है एवं भावी तीर्थंकर रूप में मोक्षगामी भगवान के रूप में उनको स्थान दिया गया!

सभा में साहित्यकार श्री सुरेन्द्र मुनि जी द्वारा श्री कृष्ण की महिमा में विचार व्यक्त कर महाभारत की घटनाओ का उल्लेख किया गया! इस अवसर पर पर उदयपुर व मोगा से आए समाज सेविओ का प्रधान महेश जैन द्वारा हार्दिक अभिनन्दन किया गया एवं चार सितंबर से महापर्व प्रयुषण पर सभी को आमंत्रित किया गया!
ROOPARAM JANGID
जय श्री कृष्णा