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धर्म आपस मे मेल मिलाप भाईचारा देता है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने गुरु पुष्कर जन्मोत्सव व भक्तामर साधना के प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि गुरु के भीतर एक महान परम्परा छिपी हुई है जिसका अंत परमपिता परमात्मा तीर्थंकर आदिनाथ तक व्याप्त है! इस काल के धर्मका शुभारम्भ कर्ता ऋषभ देव प्रभु कहलाते है उनके द्वारा जो धर्म का मूल स्वरूप समझाया गया वहीं बीज रूप मे विकसित होता होता महावीर भगवान तक वट बृक्ष के रूप मे जन जन मे व्याप्त हो गया। वर्तमान मे इसी महावीर परम्परा की साधना उपासना करते हुए आचार्यजन गुरुजन तक यह उपदेश चला आ रहा है! जीवदया से लेकर शाकाहार अहिंसा सत्य क्षमा विनय विवेक कर्मवाद लेश्यावाद तत्ववाद यह सारा उपदेश न केवल किसी सम्प्रदाय या धर्म विशेष के लिए स्थापित किया गया अपितु जन जन के आत्म कल्याण हेतू दिया गया है! मुनि जी ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि महापुरषो के सर्वजन हिताय सर्व जन सुखाय दिए गए अमृत तुल्य उपदेश वर्तम...

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का चौथा दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में मनाया गया

चेन्नै 29.09.2021, तेरापंथ भवन साहूकारपेट में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का चौथा दिन पर्यावरण शुद्धि दिवस के रूप में मनाया गया।उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए साध्वीश्री आणिमाश्री ने फरमाया कि मनुष्य ने अपने लालच से प्रकृति का इतना अधिक विनाश किया है कि आज विश्व भर के वैज्ञानिक पर्यावरण की समस्या के प्रति चिन्तित हैं।अन्य प्रदूषण की शुद्धि के साथ मानसिक प्रदूषण का भी शोधन होना चाहिए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीवृन्द द्वारा सुमधुर  पर्यावरण शुद्धि आह्वान गीत से हुआ। कार्यक्रम संयोजक मनोज गादिया ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में पर्यावरण शुद्धि की आवश्यकता बताते हुए आज से अणुव्रत समिति के तत्वावधान में हर-घर तुलसी, घर-घर तुलसी अभियान की जानकारी दी। कार्यक्रम संपन्नता के पश्चात घर-घर तुलसी अभियान का शुभारंभ करते हुए अध्यक्ष ललित आंचलिया व मंत्री अरिहंत बोथरा के नेतृत्व में अणुव्रत समि...

संसार मे कौइ किसी का नहीं: प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज

29 सितंबर अशोक नगर संसार मे तु किसी का नहीं तैरा कौई नहीं यह बात इंसान के समझ मे आ जाये तो संसार की चौरासी लाख योनियों से आत्मा मुक्त हो जायेगी परन्तु वह दुनिया को अपनी समझ रहा है या कौई किसी का नहीं है, जबकि संसार असार है। प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने बुधवार को लोकाशाह जैन स्थाकन मे वैरागनों के सम्मान कै दौरान उपस्थित श्रध्दालुओं से धर्मसभा में कहें ! हरीश मुनि व सचिन मुनि ने कहां कि सुख दुख जीवन का हिस्सा है भाग्य कब बदल जायें यह कौई नहीं जानता परन्तु परमात्मा के बतायें मार्ग पर चलकर भाग्य को बदल सकते है ! धर्मसभा में चेतना चंदन खुशी वैरागनों का श्री संघ के कांतिलाल जैन ओकरसिंह सिरोया, राजेन्द्र खोखवत ललित चौधरी अम्बागुरू शोध संस्थान के अध्यक्ष नरेश लोढ़ा लक्ष्मीलाल वीरवाल शंकरलाल डांगी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांति लाल चपलोत नीलीमा सिरोया मेवाड़ कन्या मंडल की महामंत्री दिव्या लोढ़ा आदि अतिथ...

आदि नाथ भगवान सूर्य के समान देदीपयमान है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आदिनाथ भगवान के भक्ति स्वरूप आचार्य मानतुंग विरचित श्री भक्तामर स्तोत्र पर प्रवचन करते हुए कहा कि तीर्थंकरो मे उत्तम से उत्तम ज्ञान होता है! जिसे केवल ज्ञान कहा जाता है जिसका भावर्थ है सर्वोच्च ज्ञान जहाँ सदा सदा के लिए अज्ञानता नष्ट हो जाती है! तीनों लोको मे प्रकाशमान रातदिन सतत विदमान संसार की कोई भी उथल पुथल घटना जिनसे छुपी नहीं रह पाती! यहाँ तक मानव पशु पक्षी एकांन्द्रिय से लेकर पंचाइन्द्रिय तक के मनोभावो को चाहे शुभ हो या अशुभ हो समस्त भावों को पाप पुण्य के वे ज्ञाता होते है! अत : इंसान दुनियां से तो अपने पाप कई बार छिपा लेता है लेकिन ईश्वर के आगे पाप छिप नहीं पाते। उनका दिव्य ज्ञान दीपक की रोशनी से भी महान होता है क्योंकि दिए की एक सीमा होती है तेल बाती के बिन वह जल भी नहीं पाता और हवा के झोंके से वह बुझ जाता है। कहा भी गया है दिए तले अँधेरा उसके भ...

श्री जैन पार्श्व महिला मंडल नेहरू नगर भिलाई द्वारा क्षमापना दिवस मनाया गया

श्री जैन पार्श्व महिला मंडल नेहरु नगर भिलाई द्वारा पर्युषण पर्व के पश्चात् किये जाने वाले क्षमापना दिवस को नेहरू नगर भिलाई में मनाया गया। कार्यक्रम काशुभारंभ मंगलाचरण एवं एकता गान के साथ किया गया। इसके पश्चात् भव्य समाजिक सामुहिक क्षमा याचना आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में बच्चों द्वारा चार्तुमास से संबंधित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं महिलाओं द्वारा धार्मिक प्रसंग पर नाट्य नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया साथ ही जैन धर्म से जुड़े अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। धार्मिक तपस्या करने वाले तपस्वीगणों का बहुमान जैन मंडल द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्वरुप श्रीमती रविकांता जैन उपस्थित रही उनके द्वारा क्षमायाचना कर सदस्यों के अच्छे भविष्य एवं धर्म के प्रति जागरुकता बनायें रखने हेतु उद्बोधन किया गया। कार्यक्रम में श्री जैन पार्श्व महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती पूनम पारखसहित सुषमा कोटे...

आध्यात्मिक एवं सामाजिक जीवन का समन्वय अणुव्रत

साहुकारपेट, चेन्नई  :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में अणुव्रत समिति चेन्नई के तत्वावधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तहत अणुव्रत प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया। साध्वी वृंद द्वारा मंगलाचरण से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मुख्यवक्ता राकेश खटेड ने अणुव्रत की महत्ता उजागर करते हुए जीवन के विविध पहलुओं को सादगी पूर्ण जीवन के साथ किस प्रकार जोड़ा जा सकता है, इस पर प्रकाश डाला। मुंबई से पधारे पूर्व सभा मंत्री अजीत कोठारी द्वारा साध्वीश्रीजी के प्रति कृतज्ञता के स्वरों के साथ अपने भावों की अभिव्यक्ति दी गई। साध्वी अणिमाश्री द्वारा मंगल उद्बोधन में अणुव्रत की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारे नवम् आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रदत्त असंप्रदायिक नैतिक आंदोलन ने आज नारी का सही सम्मान उसे प्रदान किया है। समाज की कुरीतियों रिवाजों पर प्रहार कर मानवता को मानव मात्र के लिए सुरक्षित करने का...

प्रथम स्मृति दिवस पर पुण्यशाली आत्मा थे श्रमण के महामंत्री सौभाग्य मुनि जी – प्रवर्तक सुकन महाराज

28 सितंबर अशोक नगर श्रमण संघ के महामंत्री सौभाग्य मुनि जी कुमद की प्रथम पुण्यतिथि लोकाशाह जैन स्थाकन मे आयंबिल एकासंन सामायिक व गुणगान के साथ मंगलवार को आयोजित विशेष धर्मसभा मे प्रवर्तक सुकन महाराज ने गुणगान करतें हुये कहां कि श्रमण संघ मे संतो मे मूर्धन्य स्थान था। आगार से अणगार बनकर महामंत्री के पद का निर्वाह करतें हुए समाज को सुसंगठित करके एकता के सूत्र मे बांधते हुए जैन की धर्म अलख जगाई आज सौभाग्य मुनि हमारे बिच नहीं है परन्तु उनकी स्मृति संतो व भक्तों मे सदैव रहेगी! उपप्रवर्तक अमृत मुनि महेश मुनि नानेश मुनि हितेश मुनि आदि संतों ने स्मृति दिवस पर गुणों का बखान करतें हुए कहाकि पुण्य तिथि मनाना तभी सार्थक हो पाएगा जब उनके बताये मार्गो पे चलेगे श्री संघ के महामंत्री राजेन्द्र खोखवत सुशीला भाणावत आदि ने सौभाग्य मुनि जी को याद करते हुये श्रध्दासुमन भेटें कियें ! अध्यक्ष कांतिलाल जैन बताया क...

समस्त जीवों को परिवार की तरह समझना ही धर्म है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जैन धर्म के सिद्धांतो को जीवन जीने की कला बतलाते हुए विनय विवेक की चर्चा करते हुए कहा कि जिस इन्सान के जीवन मे ये दो गुण आ जाते है उसी का जीवन धर्म मय कहलाता है। इसके विपरीत क्रोध व अहंकार रूपी अवगुण आते ही अधर्म पाप का जीवन निर्माण होता है! वर्तमान समय मे भी घर परिवार संघ समाज मे प्राय: देखा जाता है वही शान्ति को पा रहे है! जिनमे धर्म भावना मौजूद रहती है! हमारे देश की पावन परम्परा रही है कि सम्पूर्ण मानव जाती ही नहीं अपितु समस्त चराचर के जीव मात्र हमारे अपने ही कुटुम्ब परिवार की तरह ही है अत: सभी जीवों से अपनत्व की भावना रखे कोई पराया नहीं होता, अपना पराया हमारी अपनी अज्ञानता है! महवीर प्रभु ने तो कहा इस संसार मे ऐसा कोई स्थान या सम्बन्ध या व्यक्ति या जीवजंतु नहीं है जिसके साथ तेरे पारिवारिक सम्बन्ध नहीं रहे हो पूर्व भव या आगत भवों मे सम्बन्ध रहे व रहें...

जीवन विज्ञान जीने की कला सिखाता है: साध्वी अणिमाश्री

साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में अणुव्रत समिति के तत्वावधान में जीवन विज्ञान दिवस के रूप में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दूसरे दिन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्रीमती रिंकी बैद के मासखामण तप अनुमोदना का भी कार्यक्रम हुआ।  साध्वी श्री अणिमाश्री ने फरमाया आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के चिंतनशील मस्तिष्क की उपज है – जीवन विज्ञान। उनके आत्म चिंतन से उपजा क्रांतिकारी चितंन है – जीवन विज्ञान।शिक्षा के दो महत्वपूर्ण घटक है ग्रहण और अभ्यास। आज अभ्यास पक्ष गौण हो रहा है। जीवन विज्ञान सर्वागीण शिक्षा पद्धति है। जीवन विज्ञान जीने की कला सिखाता है। जीवन विज्ञान के प्रयोगों द्वारा अपने संवेगो पर नियंत्रण करके जीवन स्तर को संमुन्नत बना सकते हैं। श्रीमती रिंकी बैद मासखामण तप लेकर आई है। इस पावस का यह पांचवा मासखामण है और चार मासखामण अभी चल रहे हैं। तपस्या जैन धर्म का प्राण तत्व है...

श्रध्दां भाव से दी उपाध्याय श्री को देवलोकगमन पर अशोक नगर मे प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज के सानिध्य मे संतो व संघ द्वारा साथ श्रध्दांजली

27 सितंबर अशोक नगर प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज के सानिध्य मे सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति मे श्रमण संघ उपाध्याय मूलमुनि महाराज देवलोकगमन हो जाने पर सोमवार को लोकाशाह जैन स्थाकन मे श्रध्दांजली सभा का आयोजन किया गया। जिसमें सुकन मुनि ने उपाध्याय श्री को श्रध्दासुमन अर्पित करते हुए कहा कि समय का दो पल का भरोसा नहीं सांस आये कि नहीं यह कौई नहीं बता सकता परन्तु जिनशासन की सेवा करतें हुये शताब्दी नायक ने 99 के चक्कर से निकलकर सोमवार को कोटा मे मूल मुनि ने सौवे जन्मदिवस को अपना अंतिम दिन जानकर संथारा लेकर देवलोकगमन होना बहुत बड़ी बात है। उम्र और दिक्षा प्राय में जैन संतों में सबसे वरिष्ठ विद्वान संत रत्न थे ! उपप्रवर्तक अमृत मुनि, हितेश मुनि डॉक्टर वरूण मुनि आदि संतों ने कहां कि अंतिम समय तक परमात्मा का नाम लेते हुये देह का त्याग किया अनुभव शील गुण रत्नों की खान थें! संघ के राजेन्द्र खोखावत ...

तेरापंथ सभा ट्रस्ट बोर्ड का वार्षिक साधारण अधिवेशन

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा ट्रस्ट बोर्ड साहुकारपेट का वार्षिक साधारण अधिवेशन प्रबंध न्यासी श्री सुरेश कुमारजी नाहर की अध्यक्षता में तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में आयोजित हुआ। मंगलाचरण से अधिवेशन प्रारंभ हुआ। प्रबंध न्यासी ने सभी का स्वागत किया। मंत्री प्रतिवेदन श्री मंत्री श्री विमल चिप्पड़, भवन व्यवस्थापक प्रतिवेदन श्री गौतम आच्छा, कोषाध्यक्ष रिपोर्ट श्री मंगल चंद डूंगरवाल ने प्रस्तुत की। सफल कार्यकाल के लिए सभी ट्रस्टियों का सम्मान किया गया। तत्पश्चात चुनाव अधिकारी श्री सम्पतराज चोरड़िया की देखरेख में सत्र 2021-23 के लिए 15 ट्रस्टियों के चुनाव कराए गए। इस चुनाव प्रक्रिया में 15 ट्रस्टी चयनित हुए।श्री विमल चिप्पड़, श्री राजेंद्र भंडारी, श्री सुरेश नाहर, श्री तनसुख लाल नाहर,  श्री गौतम चंद सेठिया,  श्री गौतम चंद धारीवाल, श्री बाबूलाल डूंगरवाल, श्री अशोक कुमार डागा, श्री गौतम चंद आच्छा...

मानव मे मानवता नहीं तो वह दानव का रूप है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जैन धर्म की मान्यता नुसार इस संसार मे उत्तार वाद को महत्व दिया जिसमें जीवात्मा संसार से उपर उठकर उत्तार की और अर्थात मोक्ष की और प्रयान करता है अर्थात आत्मा मे परमात्मा बनने की शक्ति निहित है! जीव अपने पाप पुण्य रूपी कर्मानुसार चार गति चौरासी लाख योनिओं मे तीनों लोको मे निचालोक मध्यलोक व उधर्व लोक मे भव भर्मण करता ही रहता है सर्व भूत अर्थात समस्त जीवों मे यही संसार का चक्र चलता ही रहता है! अपने तप जप साधना संयम के कारण वह समस्त कर्म क्षय करके उपर की और मोक्ष की और प्रयान कर जाता है किन्तु मोक्ष जाने के बाद पुन :लौटकर नहीं आता। जबकि अन्य धर्मों की मान्यता नुसार अवतारवाद अर्थात ईश्वर समय समय पर पुन : जन्म धारण करके लोगों के दुखों का अन्त करते है! आचार्य मानतुंग इसी भाव को प्रगट करते हुए कहते है, हे प्रभो आपमें वह शक्ति है जो आप का स्मरण करता है आपकी आज्ञा ...

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