सर्वधर्म सद्भावना सम्मेलन का आयोजन धर्म मानवता की मुंडेर पर जलता हुआ चिराग है साहुकारपेट, चेन्नई :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन के प्रांगण में अणुव्रत समिति चेन्नई के तत्वावधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत आज प्रथम दिन सर्वधर्म सद्भावना सम्मेलन का गरिमामय कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में इस्लाम धर्म के जनाब अमील साहेब शेख इशाक भाई, ईसाई धर्म से फादर थाॅमस इलंगो, ब्रह्माकुमारी से नीलिमा बहन एवं बौद्ध धर्म से बोद्ध भिक्षुक बुद्ध प्रकाश का आगमन कार्यक्रम की शोभा को शतगुणित कर रहा था। साध्वी अणिमाश्री ने फरमाया कि धर्म संप्रदाय अलग अलग हो सकते हैं। जैसे दीये अलग-अलग होते हैं, तेल या जलाने वाले भी अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन उसमें से निकलने वाली ज्योति एक ही होती है। हमारी राहें अलग अलग हो सकती हैं, पर रास्ते सबके एक हैं। हम अपने दिल में शक्ति, भक्ति, अनुर...
सहजता, सरलता, सहिष्णुता की संगम स्थली है – नारी : साध्वी अणिमाश्री चेन्नई साहुकारपेट :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई के तत्वावधान में तेरापंथ भवन में वृहद जैन महिला सम्मेलन ‘संगम’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमे मंदिरमार्गी एवं स्थानकवासी समाज से लगभग पैंतीसमंडल की बहनों ने संभागिता दर्ज कराई। सभी बहिनें इस कार्यक्रम से अत्यधिक प्रभावित हुई एवं भावना व्यक्त की कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर होने चाहिए ताकि एकजुटता बढ़ती रहे। साध्वी अणिमाश्री ने अपने उद्बोधन में कहा आज महिला सम्मेलन संगम कार्यक्रम हो रहा है। संगम के अनेक प्रकार है – पारिवारिक संगम, सामाजिक संगम, जातीय संगम, भाई-बहन का संगम, दोस्त-संगम। पर यह संगम इससे हटकर है। यह संगम है आत्मिक गुणों का। हमारे जीवन में संगम हो, सरलता, सहिष्णुता व सहजता का। संगम हो जीवन में गंभीरता, विनम्रता ...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने तीर्थंकर शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि वे धर्म तीर्थ के प्रवतर्क होते है, धर्म के संस्थापक होते है! दुनियां मे अधिकांश जन अधर्म का प्रचार प्रसार करने वाले सहजता मे उपलब्ध होते है किन्तु लाखों मे कोई एक धर्म की स्थापना करते है! धर्म तीर्थ के चार प्रकार बतलाए गए है जिसके अंतर्गत साधु साध्वी श्रावक श्रविका का समावेश होता है! इनमे प्रथम दो संसार का पूर्णतः त्याग कर अपना सम्पूर्ण जीवन धर्म प्रचार व आचरण मे लगा देते है! उनका जीवन तप जप की रोशनी से रोशन हो जाता है! ऐसे आदर्श महापुरुष जगत के प्रेरणादायक होते है युगों युगों तक उनका स्मरण किया जाता है एवं उन के बताए महामार्ग पर जनता चलकर अपना आत्म कल्याण करती रहती है! ऐसे ही उत्तम पुरषों मे तीर्थंकर ईश्वर कहलाते है जो केवल ज्ञान दर्शन के धारी होते है उनके अनेक अतिशय चमत्कार विशेष जीवन भर मोजूद रहते है! वे पूर्ण...
श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में शनिवार दिनांक 25 सितम्बर 2021 को श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में श्री गुरु पुष्कर विशाल प्रश्न मंच आयोजित किया गया। गणेश बाग श्री संघ के सदस्य सुनील सांखला जैन ने सभी का स्वागत किया एवं बताया कि साधना के शिखर पुरुष, उपाध्याय प्रवर पूज्य श्री पुष्कर मुनि जी महाराज के 112 वी जन्म जयंती के उपलक्ष्य में श्री गुरु पुष्कर विशाल प्रश्न मंच में 18 टीम ने भाग लिया जिसमे प्रत्येक टीम में तीन सदस्य थे एवं अनेक श्रद्धालुओं की उपस्थिति में करीब 3 घंटे तक चला प्रश्न मंच में सभी उत्साहपूर्वक परीक्षा लिखे। पूज्या साध्वी वर्या की पावन उपस्थिति में एवं मार्गद...
दुर्ग श्रमण संघ के युवाओं को एकजुट करने के उद्देश्य छत्तीसगढ़ स्तरीय श्रमण संघ युवा सम्मेलन आत्मोत्थान का आयोजन जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में 26 सितंबर रविवार को आयोजित होगा। उक्त आयोजन श्रमण संघ स्वाध्याय मंडल के संयोजन में किया जा रहा है। आयोजन के संदर्भ में जानकारी देते हुए श्रमण संघ दुर्ग के प्रचार प्रसार प्रमुख नवीन संचेती ने बताया छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनी जी श्री विवेक मुनि जी के सानिध्य में एवं संत गौरव मुनि जी के मार्गदर्शन में श्रमण संघीय युवा सम्मेलन आत्मोत्थान आयोजित है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों एवं कस्बों से श्रमण संघ परिवार के युवा सदस्य इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। श्रमण संघ स्वाध्याय मंडल के सदस्य इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जी जान से लगे हुए हैं कार्यक्रम की तैयारियां अपने अंतिम चरण की ओर है। आत्मोत्थान के नाम से आयोजित इस युवा सम्मेलन मैं एक कदम...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्ति को परम विशुद्ध बनाने के लिए मन -वचन -काया की एकाग्रता पर बोलते हुए कहा कि किसी भी कार्य को सफल बनाने मे सर्व प्रथम मन की एकाग्रता होनी चाहिए। बिना मन जो भी कार्य किया जाता है वह कभी सफल नहीं हो पाता। मन को साधने के लिए कई प्रकार के तरीके प्राचीन काल से चले आ रहे है। आधुनिक काल मे भी इस मन की समस्या को सुलझाने हेतू डाक्टरी करण कर दिया गया, विविध प्रकार की दवाई का सेवन व मनो चिकित्सा की पद्धति अपनाई जाती है! सम्पूर्ण विश्व एक छोटे से बेजान मन के लिए पता नहीं क्या क्या उपाय करते जा रहे है कारण कि स्वयं उपाय करता भी मन की व्याधि से पीड़ित है! निर्माता ही मन के रोग से आत्म हत्या करने पर तुले हुए है! इस समस्या का समाधान तो वही कर पाते है जो इसको अपने जीवन मे विजय प्राप्त कर लेते है स्वयं रोगी हो तो वह रोगी का ईलाज नहीं कर पाता हमारे आदर्श पुरषों ने स्वयं ...
पट्टालम, चेन्नई :- तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (टीपीएफ) लगभग पिछले 3 वर्षों से, करोना महामारी के अंतर्गत भी, ऑफलाइन प्रशिक्षण द्वारा दो मासीक अकाउंट्स एंड टैली कोर्स, हुनर प्रोजेक्ट के तहत स्किल डेवलपमेंट सेंटर, पट्टालम में निरंतर चलाते हुए गतिमान है। हुनर प्रोजेक्ट के अंतर्गत टैली कोर्स, ग्राफिक डिजाइनिंग, स्पोकन इंग्लिश, एक्सएल एवं और भी कई कोर्सों का इन 3 वर्षों में संचालन किया जा रहा है और 200 से भी अधिक सदस्यों ने यहां पर ट्रेनिंग प्राप्त कर अपने कैरियर को संवारने का अवसर प्राप्त किया। इस कोर्स की फीस कम रखते हुए जन जन तक यह सुविधा पहुंचाने में टीपीएफ चेन्नई का भरसक प्रयत्न रहा है। इस हुनर प्रोजेक्ट का उद्देश्य औद्योगिकरण पूर्ण समय में सही ट्रेनिंग के साथ कैरियर बनाना रहा है। तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम के प्रांगण में नवे बैच का उद्घाटन रखा गया। इस अवसर पर टीपीएफ चेन्नई शाखा अध्यक्ष श्र...
श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस संप्रदाय जैन संघ ट्रस्ट, गणेश बाग श्री संघ के तत्वावधान में एवं शासन गौरव महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज, पूज्या श्री पुनितज्योति जी महाराज, पूज्या श्री जिनाज्ञाश्री जी महाराज के पावन सानिध्य में शुक्रवार प्रातः दिनांक 24 सितम्बर 2021 को श्री गुरु गणेश जैन स्थानक, गणेश बाग में प्रवचन एवं मास खमण तपस्वी साधिका का अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया। महासाध्वी पूज्या डॉ. श्री रुचिकाश्री जी महाराज ने अपने प्रवचन में श्रावक के 21 गुण की श्रृंखला में साध्वीजी ने कहा कि जो श्रावक 21 गुणों से सम्पन्न होता है सही मायनों में उसे ही श्रावक कहते है। जैन धर्म में श्रावक होने के लिए कुछ आवश्यक शर्ते बतायी गई हैं। प्रत्येक गृहस्थ श्रावक नहीं कहला सकता, वरन् विशिष्ट व्रतों को अंगीकार करने वाला गृहस्थ ही श्रावक कहलाता है। इन गुणों का धारक श्रावक निश्चित रूप से ...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि जिस इन्सान के मन मे धर्म के प्रति रूचि जागृत हो जाती है वह किसी भी समय अधर्म का सेवन नहीं कर सकता! जीवन मे दो ही प्रकार की आदते होती है एक अच्छी एक बुरी, जो अच्छी आदतों का आदि हो जाता है उसे बुरी आदते नहीं सुहाती इसके विपरीत जो बुरी आदतों का गुलाम हो जाता है वह अच्छे संस्कार नहीं ले पाता! कहा जाता है एक शराबी ने शराब छोड़ दिया लोगों ने उसे कुछ दिन बाद शराब घर मे पीते हुए देखा तो उससे पूछा तो उसने उतर दिया अब तो मै शराब छोड़ने की खुशी मे शराब पी रहा हूं! सज्जन जीवन भर सज्जनता मे रहना पसंद करता है तो दुर्जन जीवन भर दुर्जनता नहीं छोड़ता है! रावण कंस दुर्योधन के जीवन मे जो अवगुण पनपे वो इसी रूप मे जीवन व्यर्थ कर गए, राम कृष्ण महावीर बुद्ध गुरु नानक सज्जन पुरषों ने अनेकानेक कष्ट सह कर भी सभी का कल्याण करते रहे! आचार्य मानतुंग प्रभु के चरणो...
विल्लुपुरम के श्री सुसवाणी भवन में चातुर्मासरत आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में तपस्याओं की निरन्तर झड़ी लगी हुई हैं। विल्लुपुरम तेरापंथ के इतिहास में आयोजित इस प्रथम चातुर्मास में आज कृष (8वर्ष), साधना (9वर्ष) और श्रद्धा (12वर्ष) के एकासन मासखमन का तपोभिनन्दन कार्यक्रम समायोजित किया गया। नमस्कार महामंत्र से प्रारम्भ कार्यक्रम में साध्वी प्रबोधयशा ने मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया। साध्वी उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि अचिंत्य आत्म सिद्धियों का द्वार है तपस्या। आत्मबल, श्रद्धाबल एवं निष्ठाबल के द्वारा ही आत्म उज्ज्वलता प्राप्त होती है। तपोमान व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ता है और आत्मनिग्रह भाव से परमानन्द को प्राप्त करता हैं। छोटे-छोटे बच्चों ने एकासन के मासखमन कर अपने दृढ़ मनोबल एवं संकल्पबल का परिचय दिया है। मूर्तिपूजक संप्रदाय के पुजारी निर्म...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जैन धर्म की मान्यता अनुसार इस संसार मे उत्तारवाद को महत्व दिया जिसमें जीव आत्मा संसार से ऊपर उठकर उत्तार की और अर्थात मोक्ष की और प्रयान करती है अर्थात आत्मा मे परमात्मा बनने की शक्ति निहित है!जीव अपने पाप पुण्य रूपी कर्मानुसार चार गति चौरासी लाख योनिओं मे तीनों लोको मे नींचलोक मध्यलोक व उधर्व लोक मे भव भर्मण करता ही रहता है। सर्वभूत अर्थात समस्त जीवों मे यही संसार का चक्र चलता ही रहता है!अपने तप जप साधना संयम के कारण वह समस्त कर्म क्षय करके उपर की और मोक्ष की और प्रयान कर जाता है किन्तु मोक्ष जाने के बाद पुन : लौटकर नहीं आता जबकि अन्य धर्मों की मान्यता अनुसार अवतारवाद अर्थात ईश्वर समय समय पर पुन : जन्म धारण करके लोगों के दुखों का अन्त करते है! आचार्य मानतुंग इसी भाव को प्रगट करते हुए कहते है, हे प्रभो आपमें वह शक्ति है जो आपका स्मरण करता है आपकी आज्ञानु...
तमिलनाडु:गुरुराज पेठ जिला रानीपेठ में नारायण सेवा संस्थान उदयपुर राजस्थान द्वारा कोराना महामारी से बेरोजगार हुए असहाय गरीब मजदुर और दिव्यांग परिवारों को राशन वितरण किया गया जिसमे प्रति परिवार 25kg चावल 4kg चीनी 2kg तुअर दाल 2 लीटर तेल और अन्य मसाले भी दिए गए। इसमें मुख्य अतिथि परम पूज्य गुरुदेव कंदा गुरु सिदर कांचीपुरम नारायण सेवा संस्थान चैनई तमिलनाडु के परदेशाधयक्ष डॉ. केशरसिंह सिंह राजपुरोहित और विशिष्ठ अतिथि P A शेखर थे उदयपुर से लाल सिंह भाटी ने बताया की कोराना काल से पूरे भारत में 50,000 से अधिक परिवारको राशन वितरण किया गया है। सभी लाभार्थी राशन पाकर बहुत खुश हुएकोरोना काल में असहाय लोगों को राशन की सामग्री वितरण किया जिसे सभी लोगों ने संस्थान की सराहना की गई।