जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने कहा कि भगवान की स्तुति करने से पापों का नाश होता है क्योंकि स्तुति से मन के विकार नष्ट होते है भावों मे शुद्धिकरण होता है! मानव मन सांसारिक कार्यों मे जब रहता है तब राग द्वेष आए बिना नहीं रह पाते क्योंकि कार्य की सम्पनता मे राग है कार्य की सम्पन्नता मे राग है कार्य के अवरोध होने पर द्वेष की सम्भावना रहती है! भक्ति मे सांसारिक स्वार्थ भावनाएं समाप्त हो जाती है! जीवन निर्माण की शुभभावनाये, आत्म भाव का जागरण होता है अत : वहां पुण्योपार्जन होता रहता है! आचार्य मानतुंग जी कह रहे है हे प्रभो! आपका तो मात्र नाम स्मरण ही हमारे पापों को नष्ट करने मे सक्षम है! आपके जीवन के गुणनुवाद से हमारे पाप नष्ट होते है। आपका जीवन गुणों का सागर है आपने मानव मात्र के कल्याण के लिए जो मार्ग बतलाया है जिसे अपना कर अनेकानेक जीवों ने मोक्ष प्राप्त किया है। आपके बतलाए गए उपदेश अहिंस...
क्या होता है आयबिल तप दुर्ग विगत 72 वर्षों से लगातार दुर्ग शहर के अंदर आयबिल तप की अराधना चल रही है। भादवा सुदी पूनम के दिन इसकी वर्षगांठ मनाई जाती है। आज जहां आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तलाब दुर्ग में संत श्री रतन मुनि जी महाराज डॉ सतीश मुनि जी एवं विवेक मुनि जी कल्पज्ञसागर, हर्षित मुनि साध्वी प्रभा कवर जी के पावन प्रेरणा एवं सानिध्य में आज आयबिल तप की आराधना कराई गई। लगभग 225 श्रावक श्रावक-श्राविकाओं ने इस तप की तपस्या कीदुर्ग नगर की पुरानी प्रतिष्ठित फर्म रावत मल हनुतमल के वरिष्ठ सदस्य स्वर्गीय श्री प्रेम राज श्री श्रीमाल ने आयबिल तप को प्रारंभ किया था। आज उनके परिवार से सदस्य इस तपस्या को निर्विघ्नं संपन्न करा रहे हैं। रसना इंद्रीय या जीभ के स्वाद जीतना ही आयबिल तप लक्ष्य होता है। इस तप के तहत 24 घंटे में एक बार सादा भोजन में खटाई मिठाई चिकनाई युक्त खाद्य एवं पेय पदार्थ का त्याग होता है...
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा भादुड़ी तेरस के अवसर पर विराट धम्मजागरणा का आयोजन किया गया। जय तुलसी संगीत मंडल की प्रस्तुति में संयोजक हेमंत डूंगरवाल और उनकी पूरी टीम ने एक से एक सुन्दर गीतों का संगान कर वातावरण को भिक्षुमय बना दिया। संचालन राहुल चोपड़ा ने किया। आभार ज्ञापन सहमंत्री दिलीप मुड़ोत ने किया। तेरापंथ सभा के निवर्तमान अध्यक्ष विमल चिप्पड़, संगठन मंत्री राजेन्द्र भण्डारी ने कलाकारों का सम्मान किया। साध्वी अणिमाश्रीजी ने पावन पाठेय प्रदान किया। इस अवसर पर अनेकों गणमान्य व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। स्वरुप चन्द दाँती प्रचार प्रसार प्रभारीश्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई
दुर्ग विगत 72 वर्षों से लगातार दुर्ग शहर के अंदर आयबिल तप की अराधना चल रही है भादवा सुदी पूनम तेजी के दिन इसकी वर्षगांठ मनाई जाती है। आज जहां नंद मधुकर रतन धन बांधा तलाब दुर्ग में संत श्री रतन मुनि जी महाराज डॉ सतीश मुनि जी एवं विवेक मुनि जी कल्पज्ञसागर, हर्षित मुनि साध्वी प्रभा कवर जी के पावन प्रेरणा एवं सानिध्य में आज आयबिल तप की आराधना कराई गई। लगभग 225 श्रावक श्रावक-श्राविकाओं ने इस तप की तपस्या की दुर्ग नगर की पुरानी प्रतिष्ठित फर्म रावत मल हनुतमल के वरिष्ठ सदस्य श्री प्रेम राज श्री श्रीमाल ने आयबिल तप को प्रारंभ किया था। आज उनसे परिवार से सदस्य इस तपस्या को निर्विघ्नं संपन्न करा रहे हैं। क्या होता है आयबिल तप==================रसना इंद्रीय या जीव के स्वाद खो जीतना ही आई एम दिल सबका लक्ष होता है। अनिल तब के तहत 24 घंटे में एक बार सादा भोजन में खटाई मिठाई चिकनाई युक्त खाद्य एवं पेपर दार...
विल्लुपुरम :- आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में श्री सुसवाणी भवन में तप अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री के मंगल मंगलाचरण द्वारा हुआ। साध्वी उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि तप द्वारा आत्म विशोधन एवं आत्म अभ्युदय से कर्मों की निर्जरा होती है। साध्वी अनुप्रेक्षाश्री ने तप द्वारा आत्मशुद्धि एवं अचिंत्य लाभ की प्राप्ति के विषय में प्रेरणा दी। साध्वी प्रबोधयशा ने श्रद्धा, आस्था एवं भावना से धर्म के मार्ग पर चलना एवं संकल्प शक्ति बढ़ाने के उपाय बताएं। तपस्विनी बहन संतोष सुराणा ने साध्वीश्री की प्रबल प्रेरणा से 16 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। उनकी तपस्या प्रवर्धमान भाव के साथ गतिमान है। श्रीमती चंचल सुराणा ने 27 एकासन पूर्ण कर उपवास का प्रत्याख्यान किया। तप अभिनंदन में महिला मंडल से श्रीमती अनीता बडोला, कन्य...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने भक्ति का महत्व प्रतिपादित करते हुए भक्ति साधना का सर्वोतम मार्ग बतलाया की भक्ति से हमारे मन वचन काया के रसायनो मे परिवर्तन होता है! जिससे मानसिक शारीरिक आधी व्याधीया भी समाप्त हो जाती है!आधुनिक विज्ञानिको ने भी इस बात को स्वीकार किया है! महावीर ने इसे भाव ओशध रूप मे स्वीकारा है! जब सम्पूर्ण प्रकार की ओशधीया भी कार्य नहीं कर पाती तब मन के परिणाम भाव लाभ देते है! अस्वस्थ को स्वस्थ बना देते है शत्रु के प्रति मित्रता के भाव जागृत होते है परिणामत : शत्रु मित्र बन जाते है!जैसे कोई व्यक्ति निम्बू या इमली का नाम मात्र स्मरण करता है तो उसके मुँह मे खट्टा सा स्वाद उस पदार्थ का आना प्रारम्भ हो जाता है! यदिपी हमने उस पदार्थ को ग्रहण नहीं किया है! इसी प्रकार परमात्मा का स्मरण करते ही स्वाद रूप शुद्ध भावनाएं मन मे प्रारम्भ हो जाती है! शब्दों की ध्वनि मे जबरदस्त ऊर्जा ...
दादा-दादी चित्त समाधि शिविर भादुड़ी तेरस पर हुआ धम्मजागरणा का आयोजन चेन्नई, साहुकारपेठ :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथी सभा चेन्नई के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन में दादा-दादी चित्त समाधि शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें तीन पीढ़ियों ने भाग लेकर नई ऊर्जा प्राप्त की एवं कार्यक्रम का भरपूर आनन्द लिया। साध्वी अणिमाश्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जीवन की तीन अवस्थाएं हैं – बचपन, जवानी व बुढ़ापा। बुढ़ापे को पतझड़ की तरह कहा है। प्रकृति के प्रांगण में तो पतझड़ के बाद पुन: बसन्त, मधुमास आ जाता है, किन्तु बुढ़ापा कभी जवानी व बचपन में तब्दील नहीं हो सकता है। लेकिन हम अपनी वुद्धावस्था को आनन्दमय बना सकते हैं। बुढ़ापा न इस जीवन का इतिवृत्त है, न समापन और न ही अभिशाप। वह है उस सुनहरी जिन्दगी का सुनहरा अध्याय। हमें अपने चिन्तन से, विचार से, व्यवहार से, स्वभाव से, बर्ताव से स्वर्णि...
विल्लुपूरम श्री सुसवाणी भवन में आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में 219 वां भिक्षु चरमोत्सव मनाया गया। साध्वी उज्जवलप्रभा ने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आचार्य भिक्षु आलोक पुंज, तेजपुंज पुरुष थे। उन्होंने जीवनभर अध्यात्म का आलोक बांटा। आज भी आचार्य भिक्षु, तत्व दर्शन, ज्ञान रश्मियों से प्रकाशमान बने हुए हैं। वे ज्ञान रश्मियाँ श्रद्धाशील हृदय को निरंतर आलोकित कर रही हैं। साध्वी अनूप्रेक्षाश्री ने कहा आचार्य भिक्षु के जीवन का हर पहलू अध्यात्म से सरोबार था। इसी अध्यात्म बल के सहारे, विरोधी परिस्थितियों में भी अटल रहे। साध्वी प्रबोधयशा ने कहा आचार्य भिक्षु ने अपने साधना के बल पर शिथिलाचारों को खुले मैदान में चुनौती दी एवं कष्टों को आभार मानकर, उन्हें स्वीकार किया। तेरापंथ सभा मंत्री राजेश सुराणा एवं कन्या मंडल से आशिका बुरड़ ने आचार्य भिक्षु को श्रद्धांज...
जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने प्रवचन करते हुए भक्ति की तीव्रता का वर्णन करते हुए कहा जब भाव पूर्ण रूपेण शुद्ध होते है तब कई भवों के पाप कर्म भी नष्ट हो जाते है! मानव मन पुण्य के कार्य करने मे आलस्य कर जाता है इसके विपरीत पाप कर्म के लिए सदा तत्पर रहता है! इसी कारण जीवन मे सुख के क्षण भरपूर मात्रा मे रहते है!हमारा किया हुआ पुण्य पाप ही उदय मे आते है हम जैसे बीज बोते है वैसे ही फल प्राप्त होते है! हमारी भावना अनुसार कर्म बंधे चले जाते है! आचर्य मानतुंग जी महाराज ने उदारहण देते हुए कहा रात्रि कालीन घोर अंधकार चारों और छाया हुआ है कुछ भी दिखलाई नहीं देता हो मगर प्रात : कालीन सूर्य की किरणे निकलते ही अंधकार समाप्त हो जाता है!जैन धर्म का मानना है स्वयं किए पाप स्वयं को ही भुगतने पड़ते है! कहा जाता है दुनियां का पाप गंगा मे जाने से गंगा मैली होती जा रही है गंगा जी का पाप समुद्र me जाने से सम...
जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में आज आचार्य सम्राट जयमल जी महाराज की 314 एवं नश्रमण संघ के आचार्य श्री डॉ शिव मुनि जी महाराज की 80 वी जन्म जयंती मनाई गई। साथ ही महासाध्वी प्रभा कवर जी का 7 वां पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया। देश के विभिन्न शहरों से जन्म जयंती मनाने के लिए श्रावक श्राविका विशेष रूप से उपस्थित रहे। जन्म जयंती समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में सांसद विजय बघेल एवं लाभचंद बाफना विशेष रूप से उपस्थित रहे। धर्म सभा को संबोधित करते हुए संत गौरव मुनि ने महान संत श्री जयमल जी महाराज एवं श्रमण संघ के आचार्य शिव मुनि जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। सभा को संबोधित करते हुए दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री विजय बघेल ने गुरुदेव श्री रतन मुनि महाराज से आशीर्वाद लेकर कहा जब जब भी गुरुदेव का बुलावा आता है तो मैं दौड़ा चला आता हूं और आज इस धर्म सभा में मुझे संयम पथ की ओर बढ़ने वाली द...
गणेश बाग श्वेतांबर स्थानकवासी संप्रदाय में चातुर्मास हेतु विराजित शासन गौरव पुज्या गुरूवर्या डॉ.श्री रुचिका श्री जी म. सा. का प्रतिदिन प्रवचन गतिमान है प्रवचन से पूर्व संपुट पुच्छिसुनम का जाप चल रहा है। गुरु पुष्कर जन्म जयंती के उपलक्ष में 25 सितंबर 2021 को दोपहर 2:00 से 4:00 बजे विशाल प्रश्न मंच का आयोजन रखा गया है । आज गणेश बाग में विरक्ता बहन सोनू कोठारी का अभिनंदन किया गया । दिवाकर संप्रदाय के महासती अरुण प्रभा जी के सानिध्य में संयम ग्रहण करने जा रही बहन सोनू की दीक्षा 12 दिसंबर 2021को होने जा रही है। गणेश बाग में विराजित महासती डॉ. रुचिका जी म.सा.के सानिध्य में संघ के मंत्री श्री संपत राज जी मांडोत के द्वारा विरक्ता बहन की खोल भराई हुई!
13 करोड़ ॐ भिक्षु जप अनुष्ठान का समापन चेन्नई साहुकारपेट :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में भिक्षु भक्तों की गरिमामय उपस्थिति में 219वां भिक्षु चरमोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसी अवसर पर साध्वीश्री की प्रेरणा से चल रहे तेरह करोड़ ॐ भिक्षु जप का समापन विशिष्ट विधि से साध्वीश्रीजी द्वारा करवाया गया। श्रीमती मीनादेवी दाँती ने पन्द्रह की तपस्या के द्वारा आचार्य भिक्षु को श्रद्धासुमन समर्पित किए। साध्वी अणिमाश्री ने अपने श्रद्धासिक्त उद्गार व्यक्त करते हुए कहा आचार्य भिक्षु के हृदय में यौवन में ही संयम, तप, त्याग के बीज प्रस्फुटित हो गए। स्वयं ने सन्यास के कठोरपथ का वरण कर जन-जन को मर्यादा, अनुशासन व संयम का मार्ग बताया। आचार्य भिक्षु का जीवन सत्य को समर्पित था। उनका संकल्प था – सत्य की खोज। उनका साध्य था – वीतरागता। उसका साधन था – अहंकार व ममकार का वि...