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अहंकार जीवन विकास का बाधक तत्व: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने आदि नाथ के भक्ति स्वरूप को वन्दना करते हुए कहा कि तीर्थंकर ऋषभ देव भगवान ने हमें धर्म का सही स्वरूप समझाया! श्रावक धर्म साधु धर्म दो प्रकार के मार्ग बतलाए जिस मार्ग पर चल कर साधना सम्पन्न की जाती है! ज्ञान मार्ग क्रिया मार्ग मे कठोरता का अनुभव होता है किन्तु भक्ति मार्ग सीधा साधा सरल मार्ग है जिसमें कोई शर्त क़ानून नहीं होते किन्तु हृदय का समर्पण जरुरी है बिन हृदय समर्पण हमारा भक्ति मार्ग फलिभूत नहीं होता भक्ति मार्ग हेतू अपना अहं का विसर्जन करना पड़ता है! मानव मन का यह अहंकार जीवन विकास मे सबसे बड़ा अवरोधक होता है!एक बार शिष्य ने अपने गुरु से पूछा नरक मे जाने का मुख्य कारण क्या है? गुरु ने सहज मे पूछा यह प्रशन करने वाला कौन है! शिष्य अकड़ कर बोला मैं मैं मैं पूछ रहा हूं आपसे, गुरु ने कहा यह मैं ही नरक जाने का मुख्य कारण है! भक्ति मे मे आचार्य मानतुंग कहते ह...

अभातेयुप के जप-तप महायज्ञ में चेन्नई तेयुप की आहुति

चेन्नई बना महायज्ञ का कंट्रोल रूम  तेरापंथ धर्मसंघ के युवाओं का संगठन है – अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद्। सेवा, संस्कार, संगठन रुपी त्रिआयामों के साथ यह धर्मसंघ के देश-विदेश के युवाओं में संघ और संघपति के प्रति समर्पण के साथ उनके सामाजिक विकास और आध्यात्मिक उन्नयन में संलग्न बना रहता है। अभातेयुप द्वारा संस्कार के अन्तर्गत आत्मिक प्रसन्नता, कर्म निर्जरा के उद्देश्य से दिनांक 14 से 18 सितम्बर तक अखण्ड जप-तप महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। सभी शाखा परिषदें मिलकर जप तप महायज्ञ के माध्यम से एक नव इतिहास रचने जा रही है। इस कड़ी में चेन्नई में साध्वीश्री अणिमाश्रीजी की पावन सान्निध्य में 14 सितंबर से जप-तप महायज्ञ का शुभारम्भ हुआ। चेन्नई परिषद् के तेयुप साथियों के साथ किशोर मण्डल भी इस अखण्ड 108 घंटे के महायज्ञ में अपनी आहुति दे रहा हैं। जप के साथ आहुति देने वाले साधक उपवास, सिर्फ सफेद ...

आचार्य सम्राट जयमल जी महाराज के जन्म जयंती पर 200 सामूहिक ईकासना का आयोजन

दुर्ग जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में आचार्य सम्राट जयमल जी महाराज की जन्म जयंती एवं श्रमण संघ के आचार्य ध्यान योगी डॉ शिव मुनि महाराज की जन्म जयंती के प्रसंग पर 5 दिन से दिवसीय धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, इसी क्रम में बड़ी साधु वंदना स्वाध्याय साधना। आचार्य सम्राट जयमल जी महाराज के जन्म जयंती पर 200 सामूहिक ईकासना का आयोजन आज जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में किया गया। 19 सितंबर को आचार्य जयमल जी एवं शिव मुनि जी महाराज के जीवन दर्शन पर गुणानुवाद सभा रखी गई है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से गुरु भक्तों के गौतम प्रसादी की व्यवस्था श्री धर्मचंद डॉक्टर हर्ष जी लोढा के द्वारा रखी गई है। 51 दिवसीय पंच तीर्थंकर जाप प्रारंभ संसार के सभी व्यक्ति निरोगी हो सभी व्यक्ति सुखी हो और सभी समृद्धशाली बने इस भावना के साथ जय आनंद मधुकर रतन भवन में 51 दिवसीय पंच तीर्थंकर जाप प्रार...

दोष दृष्टि का परित्याग कर गुण को धारण करें: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने जीवन मे गुण दृष्टि को जागृत करने का सन्देश देते हुए कहा कि महान आचार्य मानतुंग जी महाराज ने प्रभु के श्री चरणों मे वन्दना करते हुए कहा आप गुण के सागर हो संसार मे सागरो मे स्वयंभूरमन सागर सर्वोतम माना जाता है। उससे बढ़कर अन्य सागर उसकी बराबरी नहीं करते ऐसे विशाल सागर मे भी जब अंधड़ आंधी धूल पडती है। पानी हिलोरे खा रहा हो बड़े बड़े समुद्र के जीव भी अस्त व्यस्त हो जाते है उस समय उस sagar को कोई अपनी भुजा के बल पर पार करना चाहे तो असम्भव प्रतीत होता होता है! हे प्रभो मैं भी आपके विशाल गुणी रूप सागर को अपनी जिव्हा से गुणगान करने को व्याकुल हो रहा हूँ पर आपके अनंत गुणों का पार पाना अर्थात गुणों का वर्णन करना असम्भव हाँ! आप चन्द्र वत सौम्यता को धारण किए हुए हो! यह संसार मोह सागर से भरा पड़ा है कक्षाय रूपी लहरे उठ रही है! इस मोह रूपी संसार को पार करना असम्भव सा लगता ...

तपस्या मंगल कलश है : साध्वी अणिमाश्री

साहुकारपेट, चेन्नई :- साध्वीश्री अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में श्रीमती कंचन बोथरा के तेरह, श्रीमती कोमल मुथा एवं सुश्री भावना मुथा के नौ की तपस्या के उपलक्ष्य में तप अनुमोदना का कार्यक्रम आयोजित हुआ। साध्वीश्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा तपस्या वह मंगल कलश है, जिसके जल को पीने वाला हर व्यक्ति मंगलमय बन जाता है। तपस्या वह प्रकाशदीप है, जो जिन्दगी की हर अंधेरी गली को रोशनी से भर देता है। तपस्या एक सुरम्य वाटिका है, जिसमें भ्रमण करने वाला ही अनुभव कर सकता है कि इसमें महक व रमणीयता कितनी है। धन्य व कृतपुण्य बनती हैं, वे भव्यात्माएं जो आत्मविश्वास, समर्पण एवं श्रद्धा के साथ अपनी आत्मशक्ति को जागृत कर तप के क्षेत्र में गतिमान बनती है। श्रीमती कंचन बोथरा व कोमल मुथा तथा भावना मुथा ने अपनी आत्मशक्ति का परिचय देते हुए तेरह व नौ की तपस्या की है। तपरुचि निरन्तर बढ़ती रहे, मंगलकाम...

आचार्य तुलसी विकास पुरूष थे – साध्वी उज्जवलप्रभा

विल्लुपुरम  :- आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री उज्जवलप्रभाजी के सान्निध्य में श्री सुसवाणी भवन, विल्लुपुरम में “विकास महोत्सव” बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया। कन्यामंडल की बालिकाओं के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। साध्वीश्री उज्जवलप्रभा जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा – व्यक्ति लक्ष्य को पाने के लिए जितना विनम्र रहता है, कर्मशीलता के साथ आगे बढ़ता है, तो समर्पण की मशाल से जीवन को प्रकाशित कर लेता है, निश्चित ही वह विकास के सृजन के नव स्वस्तिक रचता है। आचार्य तुलसी विकास पुरुष थे, जिन्होंने धर्मसंघ में विकास के नए क्षितिज उद्घाटित किए। साध्वीश्री अनुप्रेक्षाश्री ने कहा कि शुद्ध नीति-रीति के आधार पर ही धर्मसंघ ने ऊंचाइयां प्राप्त की। इस में आचार, शक्तिशाली समर्थ आचार्य का नेतृत्व और विनम्र साधु-साध्वी के योग से यह संघ आगे बढ़ा है। साध्वीश्री प्रब...

जीवन मे विनय गुण से महानता की प्राप्ति होती है

जैन सभा बठिंडा मे आयोजित भक्तामर अनुष्ठान मे भगवान आदिनाथ की स्तुति पर विवेचना की गई, आदिनाथ भगवान जैन धर्म के इस काल के धर्म की स्थापना करने वाले है उनके द्वारा की गई जप तप की साधना आज के युग मे सभी को महान प्रेरणा प्रदान कर रही है! तीर्थंकर बनकर उन्होंने अहिंसा सत्य ब्रह्माचरा अपरिग्रह का स्वरूप समझाया इस हेतू उन्होंने राज्य भार व सम्पदा का परितयाग कर दिया उपदेश देने मात्र से जीव का कल्याण नहीं होता जब तक उस उपदेश को जीवन मे आत्मसात -धारण नहीं किया जाता! जैनधर्म ने आचरण को ही धर्म स्वीकारा है! आचार्य मानतुंग जी ख्याति प्राप्त विद्वान थे अनेक विधाओं के ज्ञाता थे फिर भी वे अपने आपको लघु व छोटा बताकर उन महापुरषो की साधना को उत्कृष्ट मानते है एवं अपने आपको अल्पज्ञ बुद्धिवाला उस बालक के समान प्रभु के सामने प्रस्तुत करते है। जो रात्रि काल की बेला पर चमकता दमकता हुआ आकाश मे चन्द्र देव के दर्शन ...

जीवन को आनन्द का मानसरोवर बनाएं – साध्वी अणिमाश्री

दो सौ अठारह शिविर साधकों के कृतज्ञता के स्वर साध्वी श्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित पर्युषण – साधना शिविर में संभागी दो सौ अठारह साधकों द्वारा कृतज्ञता स्वर कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसी के साथ श्रीमती प्रेम देवी तातेड़ एवं श्रीमती रेशमादेवी बुबकिया के ग्यारह का एवं सुश्री गुंजन के नौ की तपस्या का प्रत्याख्यान हुआ। सभी तपस्वियों का सभा की ओर से अभिनंदन किया गया। साध्वी श्री अणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा – अपने जीवन को आनंद का मानसरोवर बनाया जा सकता है, जिसमें भावना रूपी राजहंस निर्मल जल में डुबकी लगाकर सत् चित्त आनन्द रुप बन जाते हैं। चित्त को निर्मल एवं पावन बनाने के लिए साधना आवश्यक है। साधना का फलित यह है कि हमारी सोच सकारात्मक हो। अपनी विचारधारा किसी भी परिस्थिति एवं प्रसंग पर विधेयात्मक ही बनी रहे, यह प्रयास अपेक्षित है...

प्रभु प्रार्थना से तन मन वाचा की शुद्धि होती है: डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी

जैन संत डाक्टर राजेन्द्र मुनि जी ने कल्पतरु श्री भक्तामर जी स्तोत्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य मानतुंग जी आदिनाथ भगवान की स्तुति के पहले वन्दन स्वरूप अपने को बड़े बड़े विद्वानों आचार्यो इन्द्र व देव के सम्मुख बल से कमजोर मानते हुए कहते है कि कहाँ तो सूर्य का प्रकाश और कहाँ दीपक की मौजूदगी हे प्रभो आपके सामने मैं अल्प सा दीपक हूं! आप सिंधु हो मैं तो उसमें एक बिंदु तुल्य हूँ भक्ति मे विनय गुण की प्रधानता रहती है विनय से विद्या आदि गुणों की प्राप्ति होती है, बड़ा व्यक्ति अपने मुँह से कभी भी अपने को बड़ा साबित नहीं करता, उसकी लघुता मे ही प्रभुता छिपी रहती है! हीरा चाहे लाखों का हो या फिर करोड़ों का हो अपने मुँह से वह अपनी महत्ता स्थापित नहीं करता ग्राहक लेनदार ही उसकी मूल्यवता पहचान लेता है! हमारे जीवन मे भी यह विनय गुण प्राप्त हो जाए तो महत्ता स्वतः बढ़ जाती है! भक्त का ह्रदय नम्रता से भरपूर...

तप से होता अभिनव शक्ति का संचार : साध्वी उज्जवलप्रभा

तपस्याओं का बह रहा निरन्तर झरना आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदूषी सुशिष्या साध्वीश्री उज्जवलप्रभा के सान्निध्य में कन्या मंडल बालिका सुश्री यशस्वी सेठिया के 11 उपवास का तप अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। साध्वीश्री उज्जवलप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा – तप से ही होता है, अभिनव शक्ति का संचार। जिस प्रकार दावानल के बिना कोई वन को जला नहीं सकता, मेघ के बिना दावानल को कोई बुझा नहीं सकता और पवन के बिना मेघ को कोई छिन्न-भिन्न नहीं कर सकता, उसी प्रकार पूर्व संचित कर्मों को तप के सिवाय कोई क्षीण नहीं कर सकता। मूर्तिपूजक संघ के पुजारी श्रीमान निर्मलजी ने भी 11 उपवास के तप का प्रत्याख्यान किया। तप अनुमोदन के अन्तर्गत साध्वी सन्मतिप्रभाजी ने कहा कि तप से व्यक्ति अपनी आत्मा के भीतर तल तक पहुंचे और अपनी आत्मा की उज्जवलता को प्राप्त करें। कन्या मंडल प्रतिनिधि दिशा बाफणा ने तप अभिनंदन समारोह का ...

क्षमावाणी के पर्व को जैन समाज के सभी संप्रदाय के लोगों ने मिलकर मनाया

दुर्ग/ छत्तीसगढ़ प्रवर्तक जैन संत श्री रतन मुनि श्री विवेक मुनि, श्री कल्प यज्ञ सागर एवं महासती प्रभा कवर जी मंगल में सानिध्य में आज जैन समाज के विभिन्न पंथ संप्रदाय के लोगों की उपस्थिति में सामूहिक रूप से क्षमा याचना की गयी। जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में आयोजित धर्म सभा में श्रमण संघ परिवार के अलावा श्री श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संध, सुधर्म श्रावक संघ समरथ जैन श्रावक संघ, शांत क्रांत साधुमार्गी जैन संघ, तेरापंथ धर्म संघ दुर्ग भिलाई, गुजराती जैन समाज ग्रुप भिलाई के सदस्यों की विशेष उपस्थिति में सामूहिक क्षमा याचना जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधना दुर्ग में आयोजित थी। संत गौरव मुनि की पावन प्रेरणा थी सभी जैन धर्म संप्रदाय लोग एक साथ सामूहिक छमा याचना के कार्यक्रम में शामिल हो। धर्म सभा में छम्मा याचना का काम को कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत कल्पयज्ञ सागर जी ने संबोधित करते हु...

आदिनाथ भगवान वन्दन स्वरूप भक्तामर अनुष्ठान प्रारम्भ

जैन स्थानक बठिंडा मे कल्पबृक्ष भक्तामर के शुभारम्भ के प्रसंग मे बोलते हुए डाक्टर राजेन्दर मुनि जी ने बोलते हुए कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ देव भगवान जिनका अपर नाम आदिनाथ के रूप मे विस्तृत हुआ है! आदि अर्थात धर्म की एवं न्याय नीति का शुभारम्भ कर्ता असि मसि कृषि के कार्य का प्रारम्भ कर्ता जनता को जीवन जीने का मार्ग बतलाने वाले है अत:उनको आदिनाथ भगवान के नाम से पुकारा जाता है! आपने भरत जैसे पुत्र रत्न को जन्म प्रदान किया इसीलिए हमारे देश का नाम भरत चक्रवर्ती राजा के नाम से भारत बना है! ऋषभ देव भगवान का पुरा परिवार जहाँ सामाजिक न्याय नीति मे अगुवा रहा वहां जीवन कल्याण हेतू अन्त मे संयम का मार्ग ग्रहण करके जनता को धर्म का स्वरूप भी समझा दिया! आज विज्ञान जितना भी विकसित हुआ हो रहा है उसके आध्या कर्ता नींव के रूप मे आदिनाथ रहे है! जैन समाज मे इनके आध्यात्मिक चमत्कारों से प्रभावित ह...

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