दादा-दादी चित्त समाधि शिविर
भादुड़ी तेरस पर हुआ धम्मजागरणा का आयोजन
चेन्नई, साहुकारपेठ :- साध्वी अणिमाश्री के सान्निध्य में तेरापंथी सभा चेन्नई के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन में दादा-दादी चित्त समाधि शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें तीन पीढ़ियों ने भाग लेकर नई ऊर्जा प्राप्त की एवं कार्यक्रम का भरपूर आनन्द लिया।
साध्वी अणिमाश्री ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जीवन की तीन अवस्थाएं हैं – बचपन, जवानी व बुढ़ापा। बुढ़ापे को पतझड़ की तरह कहा है। प्रकृति के प्रांगण में तो पतझड़ के बाद पुन: बसन्त, मधुमास आ जाता है, किन्तु बुढ़ापा कभी जवानी व बचपन में तब्दील नहीं हो सकता है। लेकिन हम अपनी वुद्धावस्था को आनन्दमय बना सकते हैं। बुढ़ापा न इस जीवन का इतिवृत्त है, न समापन और न ही अभिशाप। वह है उस सुनहरी जिन्दगी का सुनहरा अध्याय। हमें अपने चिन्तन से, विचार से, व्यवहार से, स्वभाव से, बर्ताव से स्वर्णिम आलेख लिखना है।
साध्वीश्री ने आनन्ददायी जीवन के टिप्स देते हुए कहा कि बुजुर्ग अपने आप पर कंट्रोल करे।
अगर वे हर बात में टोका-रोकी करेंगे तो परिवार में उनका मान-सम्मान, आदर-सत्कार घट जाएगा, इसलिए ज्यादा टिका टिप्पणी से बचे। दुःख का प्रमुख कारण है, आसक्ति। जितनी आसक्ति बढ़ेगी, उतनी ही समस्या बढ़ेगी। बुढ़ापे में अनासक्त चेतना का जागरण होना चाहिए। सकारात्मक सोच बुढ़ापे को आनन्ददायी बना सकती है। घर के बच्चे व जवान भी बड़े बुजुर्गों का दिल से सम्मान करें एवं उनकी चित्त समाधि में योगभूत बने। साध्वीश्री ने कहा- चेन्नई सभा ने सुंदर व्यवस्था की है एवं संयोजक संपतराजजी चौरडिया ने अच्छा श्रम किया है। उसी की निष्पत्ति है आज की यह विशाल उपस्थिति। मन बाग-बाग हो रहा है।
डॉ. साध्वी सुधाप्रभाजी ने कहा बुजुर्ग घर की शान होते हैं। घर के मंदार है। अनुभवों के भंडार है। बुजुर्गों के अनुभव जीवन की कई समस्याओं को चुटकियों में समाहित कर सकते है। इसलिए घर के सदस्य बुजुर्गों के अनुभवों का लाभ उठाएं। बुजुर्ग जो मिले है, उसमें आनन्द मनाएं एवं अपनी प्रमोद भावना के द्वारा जीवन को सुखमय बनाएं। साध्वी मैत्रीप्रभा ने मंच संचालन करते हुए कहा सूर्योदय हमारा बचपन, दोपहर जवानी एवं बुढ़ापा शाम की तरह होते हैं। हमें अपने जीवन की शाम को प्रसन्नता के साथ व्यतीत करनी है। बुजुर्ग बरगद की छांव की तरह होते हैं। बुजुर्ग रूपी बरगद की छांव तले बैठने वाला सौभाग्यशाली होता है।
कवि मनोहर कोठारी ‘महक’ ने मायड़ भाषा में गांव की गुवाड़ी कविता का रोचक कविता पाठ करके पूरी परिषद् को रोमांचित कर दिया। पूरी परिषद् को ऐसा महसूस हुआ मानो वो गांव में ही हों। श्रीमती अनिता, बबीता चौपड़ा ने कहा हमें गैंदा नहीं गेंदे के फूल की तरह बनना है। खुद के जीवन को भी सौरभमय बनाना है एवं परिवार को भी अपने अनुभवों की सुवास से सुवासित करना है। तेरापंथ सभा के निवर्तमान अध्यक्ष विमल चिप्पड़ ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक संपतजी चोरडिया ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी।
वरिष्ठ श्रावक मदनलालजी मरलेचा, जयन्तीलालजी सुराणा, ताराचन्दजी आंचलिया ने मंगल संगान व बुढ़ापे का गीत प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। जयपुर से समागत श्री अशोकजी बरडिया ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। सभा की ओर से मनोहर कोठारी व सम्पतराजजी चोरडिया का सम्मान किया गया। आभार ज्ञापन सभा सहमंत्री दिलीप मुणोत ने किया।
भिक्षु धम्मजागरणा
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा भादुड़ी तेरस के अवसर पर विराट धम्मजागरणा का आयोजन किया गया। जय तुलसी संगीत मंडल की प्रस्तुति में संयोजक हेमंत डूंगरवाल और उनकी पूरी टीम ने एक से एक सुन्दर गीतों का संगान किया। कुशल संचालन राहुल चोपड़ा ने किया। तेरापंथ सभा से विमल चिप्पड़, दिलीप मुणोत, राजेन्द्र भण्डारी और अन्य गणमान्य लोगों की भरपूर उपस्थिति रही।
स्वरुप चन्द दाँती
प्रचार प्रसार प्रभारी
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई






