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व्रतों का अठाई तप सम्पन्न हुआ

आज परम श्रद्धेय उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में प्रवचन सभा में तपस्वी श्री नरेश जैन (सुपुत्र स्व श्री राज कुमार जैन)मैसर्ज आर जे इम्पेकस एवं तपस्वी श्री गौरिश जैन सुपुत्र श्रीमती शालू-संजय जैन (शेर सिंह कालोनी) के व्रतों का अठाई तप सम्पन्न होने पर फोर एस परिवार, जैन सभा जालंधर एवं भावी तपस्वियों द्वारा माल्यार्पण सिरोपा व आदर की चादर ओढ़ा सम्मानित करते हुए गणमान्य सदस्यगण। दोनों तपस्वियों का हार्दिक सुख साता पूछते हुए उनके तप का अनुमोदन करते हैं।

सारभूत पदार्थो का अवश्य दान करना चाहिए

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 3️⃣5️⃣ ⚡ सारभूत पदार्थो का अवश्य दान करना चाहिए.. 🛑 शक्तिसंपन्न होते हुए भी जो व्यक्ति दानधर्म पालन नहीं करता, उसको भवांतर में प्राप्ति दुर्लभ हो जाती है.! ✒️ सबसे सरल सुलभ दानधर्म का जो आचरण नही करेगा वो दुष्कर शील कैसे पालेगा.? जो शीलपालन नहीं करेगा वो तप त्याग कैसे करेगा.? जो तप नही करेगा उसको शुभभाव एवं निर्जरा प्राप्ति कैसे होगी.? 🌳 अभय दान, सुपात्र,आहार दान औषध दान आदि दान से अपार वैभव ऋद्धि वृद्धि सुख संपदा की प्राप्ति होती हैं.!. ⚡ *दान का उद्देश्य* परिग्रह एवं आसक्ति त्याग ही होना चाहिए.! *📕श्री दान कुलकम्📕* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.

तृष्णा दुख का मूल कारण है- डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि संसार में हर किसी के जीवन में दुखों का साम्राज्य छाया हुआ है। कोई तन से दुखी तो कोई मन से दुखी है। इस दुख का मूल कारण है तृष्णा। हमारे समस्त दु:खों की जड़ तृष्णा ही है और तृष्णा का यह स्वभाव है कि जितना इसके समीप पहुंचते जाओगे, वह बढ़ती ही जाएगी। जब तक यह तृष्णा छाई रहेगी तब तक मन में दुख का साम्राज्य बना रहेगा। कामनाओं से सुख की इच्छा करने से जीवन में दुखों के वार- प्रहार होते रहेंगे। यह मेरे पास है, यह नहीं है, यह मैंने कर लिया है और यह करना बाक़ी है – इन चार बातो में ही इंसान का पूरा जीवन व्यतीत हो जाता है। तृष्णा की एक और विशेषता है, यह मनुष्य के जन्म के साथ ही उससे जुड़ जाती है। जैसे जैसे मनुष्य बूढा होता जाता है, वैसे वैसे तृष्णा उम्र के साथ और भी ...

तेरापंथ जैन विद्यालय में ज्वाला 2024 अन्तर विद्यालय प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

12 विद्यालयों के 333 विद्यार्थियों ने निभाई सहभागिता                         Sagevaani.com /चेन्नई: तेरापंथ जैन विद्यालय, साहुकारपेट के प्रांगण में ज्वाला 2024 अन्तर विद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 12 विद्यालयों के एल के जी से बारहवीं कक्षा तक के 333 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर विद्यालय चेयरमेन श्री गौतमचंद बोहरा, मेनेजिंग ट्रस्टी श्री मेघराज लूणावत, महासंवाददाता श्री महावीरचंद गेलडा, कोषाध्यक्ष श्री गौतमचंद समदड़िया व पट्टालम स्कूल महासंवाददाता श्री संजय कुमार भंसाली उपस्थित थे। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मर्सी जेसिंटा ने सभी का हार्दिक अभिनन्दन किया व सम्मानित सदस्यों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।  प्रतिवर्ष समायोजित इस प्रतियोंगिता में फेंसी ड्रेस, राइम ओ फन, मॉम एण्ड मी, एकल नृत्य, तिरुक्कुरल रेसिटेशन, ओरिगामि, गस ...

स्वाध्याय का सार है अनुप्रेक्षा

*🌧️ विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 3️⃣4️⃣ 🪔 स्वाध्याय का सार है अनुप्रेक्षा… वितराग मार्ग के शास्त्रों में बारह अनुप्रेक्षाओ का विधान है, अनुप्रेक्षा को भावना भी कहते है.! ✨ समस्त दुखों के कारणभूत धन वैभव, घर परिवार एवं स्वजनों की चिंतारूप आर्तध्यान छोड़कर पदार्थो के तात्त्विक स्वरूप की अनुप्रेक्षा करनी ही हितकारी है.! 🪜 भावना चिंतन की🪜 सीडियों का 🪜 आलंबन🪜 न मिले तो 🪜 संसार से विरक्त 🪜 आत्मा भी मोक्ष प्राप्ति🪜 नही कर सकता.!🪜 *📘श्रीभवभावना प्रकरणम्📘* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

धूमधाम से मानाया जाएगा जन्माष्टमी कार्यक्रम

मंडी डबवाली में बड़े ही आनंद एवं उत्साह पूर्वक गुरुणीमैया महासाध्वी श्री वीरकांता जी महाराज आदि ठाणा – 4 का चातुर्मास चल रहा है। आज महासाध्वी डॉ . अर्पिता जी म. ने फरमाया – कलह,लड़ाई , झगड़ा विवाद ये सभी समाज को परिवार को , घर को खोखला बनाते है। ये एक दीमक की तरह हमारे घर में घुस तो जाते है , फिर घर के व्यक्तियों में अपनापन खत्म हो जाता है। परिवार में से अपनत्व घटता रहता है। लड़ाई का कारण बताते हुए साध्वी जी ने कहा – मान को ठेस पहुँचने से व्यक्ति लड़ाई करता है । वस्तु कम मिले तो हक के लिए लड़ता है। ये लड़ाई टी.वी . सीरियल , वीडियो गेम या अखबार के माध्यम से हमारे घर तक पहुंचती है । घर में पहुँचकर फिर घर को तोडने और बिखेरने के बाद भी ये लड़ाई चैन से नही बैठती । ये लड़ाई जिव्हा से शुरू होती है और फिर अपशब्दों से डंडो तक हाथा पाई तक और फिर मरने मारने तक पहुँच जाती है । संघ के...

ईश्वर पर भरोसा है तो समाप्त हो जाएंगी मुश्किलें: डॉ चन्द्र प्रभा

वीरपत्ता की पावन भूमि पर आमेट के महावीर भवन मे चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा कि ईश्वर पर भरोसा है तो समाप्त हो जाएंगी मुश्किलें संतों की बातें एक कान से सुनकर दूसरे से उड़ाने का कोई लाभ नहीं बल्कि इसे जीवन में उतारना ही वास्तविक सत्संग है। आयोजन का उद्देश्य भी यही है ताकि लोगों के मन को निर्मल किया जा सके। जीवन में मौका व धोखा दोनों साथ-साथ आते हैं। कभी अच्छा मिलता है जिसे लोग मौका समझकर लाभ उठाना चाहते है लेकिन अक्सर वह धोखा भी साबित होता है। उदाहरण देते हुए कहा कि माता सीता के पास रावण साधु का वेश धारण कर नहीं आता तो मां सीता कभी धोखा न खातीं। मनुष्य के जीवन में समस्याएं आती जाती रहती हैं इनका डटकर सामना करना चाहिए। ईश्वर पर भरोसा है तो मुश्किलें स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी। महाभारत के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि पांडव-कौरव युद्ध के दौरान दुर्योधन ने भगवान श्री...

गुरु अमर अमृत संयम महोत्सव आगामी 22 सितंबर को

आगामी सितम्बर में आयोजित उत्तर भारतीय प्रवर्तक साहित्य सम्राट अमरमुनि के संयम अमृत वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विश्व शांति जप एवं गुरु गुणगान महोत्सव में सानिध्यता के लिए कृष्णगिरी शक्तिपीठाधिपति डॉ वसंतविजय महाराज को आमंत्रण पत्रिका देने श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के पदाधिकारी कृष्णगिरी पधारे। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रकाशचंद चाणोदिया, उपाध्यक्ष रोशनलाल नाहर, मंत्री नेमीचंद दलाल एवं कोषाध्यक्ष प्रसन्न भलगट उपस्थित रहे। ज्ञातव्य है कि गुरु अमर अमृत संयम महोत्सव आगामी 22 सितंबर को बैंगलौर में विराजित समस्त चारित्र आत्माओ के सानिध्य में तप त्याग एवं धर्म आराधना द्वारा मनाया जायेगा।  

शुद्ध भावों से वन्दना करने से होता तीर्थंकर गौत्र का बंधन: मुनि श्री हिमांशुकुमारजी

 वन्दना से आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्षों के लाभों को किया उजागर Sagevaani.com /चेन्नई: साधना के छोटे छोटे प्रयोग भी उपयोगी बनते हैं, नव निर्माण में सहायक बनते हैं, आत्मोन्नति के साधक बनते हैं। उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री हिमांशुकुमारजी ने तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए कहें।  मुनिश्री ने कहा कि साधना का एक अंग है- वन्दना। जिनेन्द्र प्रभु, पंच महाव्रतधारी साधुओं को मन, वचन, काया की एकलयता में शुद्ध भावों से वन्दना की जाती हैं, तो अनेकानेक लाभ होते हैं। उत्तराध्यन सूत्र में 29वें अध्याय के 11वें सूत्र में भगवान महावीर ने बताया कि सम्यक् भावना से वन्दना करने से- 1. नीच गौत्र कर्म क्षय और उच्च गौत्र का बन्धन होता है। 2. वन्दना से विनम्रता आती है और उससे सभी उसकी आज्ञा का पालन करते हैं। 3. अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण होता है। य...

“इलेक्ट्रिकल साईकल का करेंगे उत्पादन

सन इलेक्ट्रो डिवायसेस प्रा. लि. के मोबिलीटी डिविजन का शानदार उद्घाटन! “इलेक्ट्रिकल साईकल का करेंगे उत्पादन! पुर्व विधायक श्री विलास जी लांडे जी के करकमलो द्वारा अनेक गणमान्यवरोंके उपस्थिती मे हुआ उद् घाटन! चाकण औद्योगिक वसाहत मे स्थापित सन -इलेक्ट्रो डिवाईसेस अपने फ़िलहाल में बनाये जानेवाले उत्पादनोसंग नये क्षेत्रमे पदार्पण कर रही है! बॅटरीपर चलनेवाली सायकल बनाकर पर्यावरण का संतुलन साधने हेतु प्रयास इस माध्यमसे होगा! नये प्लॉंट का उद् घाटन भोसरी क्षेत्र के पुर्व विधायक विलासजी लांडे जी के करकमलो द्वारा अनेक गणमान्य उद्योजक, विविध कंपनीयों के वरिष्ठ अधिकारी, एवं सन परिवारके सदस्योंके प्रमुख उपस्थीती में हुआ! पहली इलेक्ट्रीक साईकल कंपनी के संचालक मंडल राघवेंन्द्र जी खेडकर,महेश जी खेडकर,संकेत जी जैन, विक्रांत जी लांडे, रोहन जी खेडकर, सुभाषजी जैन ललवाणी आदि द्वारा लॉंच की गयी ! 5 प्रकार की साई...

माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।- डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि संसार में माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मां बाप की सेवा ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है।हम अपने जीवन मे कितने भी धर्म कर्म करें पर यदि अपने माता पिता का तिरस्कार कर रहे है , उनका मान सम्मान नहीं कर रहे है तो हमारे सारे धर्म कर्म व्यर्थ है। जीवन भर जप तप किया, बहुत पूजा पाठ की लेकिन माँ बाप को सुख नहीं दिया वे दुखी है। उनकी सेवा न की, उनका हमेशा अपमान किया तो इस सब पूजा पाठ का कोई अस्तित्व नहीं । अगर कोई भी व्यक्ति अपने मां-बाप और गुरुदेव की आज्ञा नहीं मानता और उनका तिरस्कार करता है उसका कभी कल्याण नहीं हो सकता। जो मनुष्य अपने मां-बाप की सेवा नहीं करते, वे जीवन में कभी सुखी नही रह पाते हैं। व्यक्ति भलें धन बहुत कमा ले, मगर उसकी आध्यात्मिक उन्नाति कभी ...

देह में ममत्व बुद्धि आर्तध्यान का कारण है

*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 3️⃣2️⃣ 🪔 *देह में* *ममत्व बुद्धि* *आर्तध्यान का कारण है.!* ⛓️ आत्मा के साथ संयोग से जुड़ा हुआ देह भी आत्मा से भिन्न है, तो फिर बाकी पदार्थो अपने कैसे हो सकते है.! 🧘‍♂️ देह से आत्मा की भिन्नता को जो जानता है, उसी को समाधि प्राप्त होती है.! *_📗श्री भाव कुलक📗_* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

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