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माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।- डॉ वरुणमुनि

माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।- डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि संसार में माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मां बाप की सेवा ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है।हम अपने जीवन मे कितने भी धर्म कर्म करें पर यदि अपने माता पिता का तिरस्कार कर रहे है , उनका मान सम्मान नहीं कर रहे है तो हमारे सारे धर्म कर्म व्यर्थ है।

जीवन भर जप तप किया, बहुत पूजा पाठ की लेकिन माँ बाप को सुख नहीं दिया वे दुखी है। उनकी सेवा न की, उनका हमेशा अपमान किया तो इस सब पूजा पाठ का कोई अस्तित्व नहीं । अगर कोई भी व्यक्ति अपने मां-बाप और गुरुदेव की आज्ञा नहीं मानता और उनका तिरस्कार करता है उसका कभी कल्याण नहीं हो सकता।

जो मनुष्य अपने मां-बाप की सेवा नहीं करते, वे जीवन में कभी सुखी नही रह पाते हैं। व्यक्ति भलें धन बहुत कमा ले, मगर उसकी आध्यात्मिक उन्नाति कभी नहीं हो पाती।

जिस संतान को माता-पिता की सेवा का अवसर मिले, तो समझ लीजिये वह बहुत भाग्यशाली है। जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करता है और उनका अपमान करता है उसे कभी भी जीवन में सुख-शांति प्राप्त नहीं होती है।

पूर्व में रूपेशमुनि ने गुरु स्तवन की प्रस्तुति दी और अंत में पंकजमुनि ने मंगलपाठ प्रदान किया। नवकार महामंत्र जाप एवं आयंबिल की लड़ी गतिमान है। अध्यक्ष प्रकाशचंद चाणोदिया ने आभार व्यक्त किया और संचालन संघ महामंत्री नेमीचंद दलाल ने किया।

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