बड़े ही आनंद एवं उत्साह पूर्वक गुरुणीमैया महा साध्वी श्री वीरकांता जी महाराज आदि ठाणा- 4 का चातुर्मास चल रहा है । आज महासाध्वी जी ने फरमाया- द्वेष हमारी आत्मा का पतन करता है। द्वेष से आत्मा भव-भव भ्रमण करती है। द्वेष का जन्म ईष्या, वैर घृणा, तिरस्कार से होता है । और जैसे- जैसे ये सब बढ़ते जाऐंगे वैसे वैसे द द्वेष बढ़ता जाएगा । वर्तमान में लोग कभी व्यक्ति से, द्वेष करते है, कभी धर्म से, द्वेष करते हुए संप्रदायिक दंगों को बढ़ावा, देते हैं। ये सभी दंगे है देश को सर्वनाश की ओर लेकर जाते है। देश में अराजकता फैलाते है। लोगों में भेद-भाव पैदा करते है। इन्हीं दंगों के कारण अशांति का वातावरण पैदा हो जाता है। ये अशांति जन-मन को भी, अशांत बनाती है। देष की जड़े देश और परिवार को खोखला बनती है । परिवार में प्रेम -प्यार खत्म हो जाता है । इसीलिए जीवन से द्वेष को खत्म करके प्यार को दिल में स्थान देना है . ...
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 🌧️ 3️⃣2️⃣ 🪔 156) निर्लेप भाव से रहेंगे तो कर्म बंधन में नही पड़ेंगे.! 157) श्रुतसंकल्प से ही समाधि की प्राप्ति होती हैं.! 158) कथा श्रवणसे कान राजी अनुशरण से आत्मा राजी.! 159) जागृति अभय हैं, प्रमाद ही महाभय हैं.! 160) अपने मूल से जुड़ना ही, शासनप्राप्ति का उद्देश्य है.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
आमेट के महावीर भवन मे वीरपत्ता की पावन भूमि पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी तपाचार्य जयमाला मा. सा. आदि ठाणा-6 के सानिध्य मे साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा कि मेरी भावना’ में एक पंक्ति आती है ‘फैले प्रेम परस्पर जग में, मोह दूर ही रहा करे’ इसका अर्थ ही यह होता है, मोह शरीर और वस्तुओं से ही होता है जिससे दूर रहने को कहा गया है। समाज में निंदा का कारण मोह और वासना बनती है, प्रेम नहीं। अपने बच्चों को धार्मिक, नैतिक संस्कारों की वसीयत लिखकर जाइए। धर्म की वसीयत के अभाव में धन देकर जाओगे तो वे आपस में लड़ेंगे। कहा भी है पुत्र सुपुत्र तो का धन संचय, वह खुद कमा लोगा। पुत्र कुपुत्र तो का धन संचय वह व्यसनों में गवां देगा। साध्वी चंदनबाला ने कहा कि चेहरे का रंग नहीं जीवन जीने का ढंग बदलना होगा चेहरे का रंग नहीं जीवन जीने का ढंग बदलना होगा, क्योंकि आदमी की पहचान चेहरे के रंग से नहीं जीवन ज...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि आत्मज्ञान तभी हो सकता है जब सभी वासनाओं का त्याग हो। वासनाओं के त्याग के बिना आत्मज्ञान नहीं हो सकता। शास्त्रों में वासना के त्याग को मुक्ति संज्ञा दी गई है। किसी भी वस्तु को तीव्र भाव से ग्रहण करने को वासना कहते है। जब ज्ञान में अभिमान आ जाता है वह वासना बन जाता है। तीन प्रकार की वासनाओं का जिक्र बताया गया है लोक वासना, देह वासना और शास्त्र वासना। जगत् के अनात्म वस्तुओं में ममता मोह का बना रहना ही परस्पर लोक-देह-और शास्त्र की वासना है। लोक वासना यानि मेरा नाम हो मेरी पहचान हो। नाम के लिए दिया गया दान भी व्यर्थ है। इसीलिए गुप्त दान का महत्व बताया गया है। वासना का सेवन जितना अधिक करोगे उतनी ही यह बढ़ती जाएगी। वासना का सेवन कर व्यक्ति अपना जीवन नष्ट कर रहा है। स...
श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड बेंगलुरू में विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने पाप पुण्य के बारे में बताते हुए कहा कि जल ओषधि है। रोगों को नाश करने वाला है। इसका दुरूपयोग मत करो, इसे अमृत की तरह, गंगा जल की तरह उपयोग करें। यदि जल नहीं है तो न वृक्ष, वनस्पति उत्पन होंगे न अन्न मिलेगा। सागर संग्रह करता है तो पानी खारा रहता है पर जल बहता है तो पवित्र शुद्ध होता है। प्रातः काल जब हम ऊषापान करते है तो कब्ज जैसी घातक बीमारीयों के लिए राम बाण दवा है। गीता में कहा गया है सभी रसों में जल ही श्रेष्ठ है। साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने आरुग्ग बोहिलाभमं के बारे मे बताया वैद्यत्विक स्वास्थ्य आज व्यक्ति कैरियर की चिंता करता है, करैक्टर की नहीं। करैक्टर को दांव पर लगा कर कैरियर बनाना चाहता है। सुधारना है खानदान तो खानपान सुधारो। मानसिक स्वास्थ्य इसका संबंध सद विचारों के साथ है। अन्न सात्विक है तो वि...
राजाजीनगर संघ के सदस्यों द्वारा सात दिवसीय गुरु दर्शन यात्रा में सूरत में विराजित आचार्य डॉ शिवमुनि, दिल्ली में विराजित उपाध्याय रविंद्रमुनि, उपाध्याय रमेशमुनि, उपाध्याय राजेंद्रमुनि, उत्तर भारतीय प्रवर्तक सुभद्रमुनि, सोजत में विराजित प्रवर्तक सुकनमुनि, भीम में विराजित उप प्रवर्तक विनयमुनि एवं गौतममुनि गुणाकर, रानीया में विराजित सलाहकार दिनेशमुनि, शर्दूलगढ़ में विराजित सुमतिमुनि एवं तप सिद्ध योगिनी साध्वी सुमित्रा, मुंबई में विराजित साध्वी कुमुदलता, उदयपुर में विराजित साध्वी संयमलता, साध्वी उमरावकंवर, सूरत में विराजित साध्वी इन्दुप्रभा, साध्वी मनीषा व अन्य साधु साध्वीवृन्द के दर्शन का लाभ लिया। इस अवसर राजाजीनगर संघ से महामंत्री नेमीचंद दलाल, पूर्व उपाध्यक्ष शांतिलाल चाणोदिया, किशोरकुमार दलाल, पूर्व मंत्री ज्ञानचंद लोढ़ा व अन्य उपस्थित रहे।
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 🌧️ 3️⃣1️⃣ 🪔 151) दृढ़ निश्चय किए बिना पापो का नाश नही होता.! 152) अज्ञानता से बंधे कर्मो का नाश सम्यक स्वाध्याय से होगा सावद्य क्रियाओं से बंधे कर्मो का नाश आवश्यक क्रिया से होगा.! 153) प्रायश्चित भाव से पापो के मूल शिथिल होते है.! 154) *संसार की* *कथा कभी नहीं रुकेगी,* *सिर्फ केरेक्टर बदलते रहेंगे,* *हमें उसमे रोल न निभाना पड़े,* *उसका पुरुषार्थ करना ही* *छूटने का उपाय है..!* 155) आत्म बोध के साथ किया हुआ धर्म प्रत्येक भव में साथ आएगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड बेंगलुरू में विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने आरुग्ग बोहिलाभमं को अलग अलग तरह से बताया है। बौद्धिक स्तर पर हम अलग अलग कक्षाओं में पढ़ते है, पर हम आध्यात्मिक क्षेत्र में कौनसी कक्षा में हैं हमे देखना है। हम कौन से गुणस्थान में है। गुणस्थान में चढ़ने के लिए समय लगता है, पर गिरने मे समय नही लगता है। सदाचार जीवन का श्रृंगार है। अनाचार धधकता अंगारा है। व्यक्ति का पैसा गया तो कुछ नहीं, पर स्वास्थ गया तो सब कुछ गया। एक कमजोर कड़ी पूरी जंजीर को खतरे में डाल सकती है। वैसे ही आध्यात्मिक क्षेत्र में आत्मा को ऊपर से नीचे गिरा देती है। संतो की वाणी सुनकर जो संभल जाएगा वही ऊपर उठेगा। जो जीव धरती पर अवतरित होता है, जीवन को जीता है। उसे जीवन को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। पैट्रोल के बिना गाड़ी नहीं चलती, उसी प्रकार भोजन के बिना शरीर नहीं चलता। एक ...
*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 2️⃣9️⃣ ⚡ अनुकूल स्थान, समर्पित भक्तवर्ग, वैभवसंपन्न व्यक्ति का राग किए बिना अलीप्त रहते हुए जबतक शक्ति हो तबतक वीर श्रमण अविरत एवं *अप्रतिबद्ध विहार करते है.!* 🛑 विशेष कारण के अभाव में एक स्थान में चातुर्मास के अतिरिक्त समय में एक माह से अधिक समय स्थिरता नही करते.! 🌼 *उनके* *संपर्क में* *आते है उनको* *अध्यात्म स्नान का* *अमूल्य लाभ प्राप्त होता है.!* 💛 अप्रतिबद्ध विहारी वीर श्रमण जहा जाते है वहां सोना ही सोना.. जहां से जाते है वहां सुना सुना हो जाता है.! *_📕श्री प्रवचन सारोद्धार📕_* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
आज रक्षाबंधन के दिवस पर साध्वी जी ने फरमाया ब्राह्मी – सुन्दरी ने अपने बाहुबली भाई को केवल ज्ञान दिलवाया । ऐसा मधुर रिश्ता जो माता – पिता से तो जुड़ा ही है । साथ – ही साथ एक ही उदर से जन्म लेने वाले भाई – बहन का सम्बन्ध मधुर बनता है। ये राखी भाई और बहन के प्यार को बढ़ाता है। साध्वी जी ने बहुत सुन्दर इतिहास बताया । इस उपलक्ष्य में सामूहिक जाप किया गया । भाई – बहन के जोड़े ने जाप किया और फिर भाईयो की कलाई पर राखी भी बांधी । बहुत ही सुन्दर कार्यक्रम रहा ।
आध्यात्मिक संकल्प राखी से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व Sagevaani.com /चेन्नई: मुनि श्री हिमांशुकुमारजी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ महिला मण्डल के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में ‘आध्यात्मिक संकल्प राखी’ का कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुनिश्री ने ‘आत्मा का रक्षाकवच’ विषयक उपस्थित जनमानस को सम्बोधित करते हुए कहा कि रक्षा बंधन में जहां भाई बहन की रक्षा की सुरक्षा देता है, वहीं बहन भाई के सुखी स्वास्थ की कामना करती है। भौतिकता के मार्ग पर व्यक्ति जहां शरीर, धन, परिवार, पर्दाथों की सुरक्षा के इर्द गिर्द घूमता है, वहीं आध्यात्म के मार्ग पर चल कर वह आत्म रक्षा की ओर चरणन्यास करता है। उसके लिए वह इन्द्रियों और मन को संयमित करता है। धर्म की शरण को स्वीकार करता है। नवकार महामंत्र के जप से अपने आप को सुरक्षा कवच से सुरक्षित करता है। मुनिश्री हेमंतकुमारजी ने भी ...
आमेट के महावीर भवन मे वीरपत्ता की पावन भूमि पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी तपाचार्य जयमाला मा. सा. आदि ठाणा-6 के सानिध्य मे आज श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मंडल संयुक्त मेवाड़ के सानिध्य मे प्रथम युवा अधिवेशन 25 अगस्त 2024 मंगलवाड़ जिला-चितौड़गढ़ मे होने जा रहा है । जिसकी आमन्त्रण पत्रिका लेकर श्री अंबेश सौभाग्य नवयुवक मंडल संयुक्त संरक्षक अनिल खटोड़ और अध्यक्ष प्रमोद सिंघवी उपाध्यक्ष जितेन्द्र कोठारी उपस्थित हुए । आमन्त्रण पत्रिका का विमोचन साध्वी जी एवं श्री वर्धमान स्थानक वासी जैन श्रावक संघ एवं श्री अम्बेश नवयुक मंडल आमेट के सानिध्य मे हुआ । इस अवसर पर आमेट संघ से सुशील सूर्या, प्रकाश चंद्र बड़ोला, पारसमल बाबेल, सुरेश चंद्र दक, प्रकाश हिरण, चंदनमल बाफना, ललित डांगी, नरेंद्र बडोला पवन मेहता, अंकित सूर्या, दिनेश बाबेल, यश डांगी, सोनू दक, निमित कोठारी, हितेश सिरोया, मोहित कोठारी, अरिहंत सिरोया...