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ज्याचं आचारण चांगलं त्याचं चरणसुध्दा चांगलं!-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : सम्यक दर्शन आखिर म्हणायचं कशाला! प्रभु भगवान महावीरायचे समस्यक दर्शन कसे होते, याचा तरी विचार करायला हवा. पाचवी गाथा ही म्हत्वाची असून तीच आपल्याला तारु शकते. परंतू सम्यक दर्शन आपल्याा घडले पाहिजे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, दोन अडीच वर्षापूर्वी सुधर्मा स्वामी येथेच होते. परंतू त्यांच्यात एक गुण होता. आणि तो म्हणजे सर्व दोष रहित होते. म्हणजेच ते निर्दोष होते. आत्म्यातही राहणे ते पंसंत करीत असतं. अखीर आत्मासे जुडे कैसे। ये मन बडा विचित्र है। मोहनिया करम हमे गुलाम बना द...

रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के बैनर का अनावरण

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद, किलपॉक द्वारा 17 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाले रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के बैनर का अनावरण युगप्रधान शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री मोहजीतकुमारजी ठाणा 3, के पावन सान्निध्य में भिक्षु निलयम में किया गया।  इस अवसर पर तेयुप किलपॉक अध्यक्ष श्री राकेश डोसी, उपाध्यक्ष द्वितीय श्री अरुण परमार, मंत्री श्री सुनील सकलेचा, अभातेयुप से श्री संदीप मुथा, श्री दिलीप गेलडा, बारह व्रत सलाहकार श्री विकास सेठिया, किलपॉक सभाध्यक्ष श्री अशोक परमार, चेन्नई सभा मंत्री श्री गजेंद्र खांटेड, साहूकारपेट ट्रस्ट बोर्ड प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड़, माधावरम ट्रस्ट बोर्ड प्रबंधन्यासी श्री घीसुलाल बोहरा, आचार्य महाश्रमण पब्लिक स्कूल चेयरमैन श्री तनसुखलाल नाहर, अणुव्रत समिति चेन्नई मंत्री श्री कुशल बाँठिया, जैन विश्व भारती पंचम...

सुधर्मा स्वामींचे थोडे तरी गुण घ्या!-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : दर्शन, ज्ञान, आणि यांचा संगम झालेला आपल्या दिसतो. परंतु या तीन्ही गोष्टी का एकत्र आल्या. याचा विचार करावा, तेवढा असला तरी सुधर्मा स्वामींपासून काही तरी गुण घ्यायला हवेत, अशी त्यांची वाणी होती, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, हिरो- हिरोराईन सारखी स्टाईल आम्हाला चांगली वाटू लागली. पूर्वी साधू- संत आले तर सर्वजण आनंद होतं.त्यांचा तो आनंद गगणात मानवणारा नव्हता. परंतू आता हे सर्व राहिलेले नाही. त्यांचं चरित्र निर्मळ होतं. म्हणून त्यांचा आत्माही शुध्द होता, चांगला होता. हे मन सा...

परमार्थ सेवा का भाव, सुखी जीवन का मूल मंत्र: डॉ . श्री वरूण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर, बैंगलोर में चातुर्मासार्थ विराजित, दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार परम पूज्य डॉ . श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने को धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी सोच हमेशा सकारात्मक पाज़िटिव रखनी चाहिए। क्योंकि कहा गया है कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।हमेशा यह याद रखें कि हमारे दैनिक जीवन व्यवहार में जो हम अपने या दूसरों के बारे में अच्छा – बुरा सोचते हैं उसका प्रभाव आगे चलकर घटित होने की संभावना बनी रहती है। क्योंकि आप जो सोचते हो भावनाये् उन शुभ अशुभ तरंगों को खींचती है। भावना भव नाशिनी। अर्थात् भावना भव का नाश करती है। किसी के साथ शत्रुता रखना, क्लेश करना, द्वेष रखना ये सब पाशविक प्रवृति है। जानवर आपस में लड़ते हैं। तात्पर्य यह है कि द्वेष,कलह आदि दुर्गुण प्रायः पशुओं में पाये जाते हैं। एक गली का श्वान दूसरी गली के कुत्ते से शत्रु भाव रखता है। कलह करत...

सामायिक आत्म कल्याण में सहायक : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला को आगे बढ़ाते हुए मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने शुक्रवार को फरमाया कि सामायिक बहुत बड़ी साधना है। समुचितपूर्वक, समतापूर्वक एवं विधिपूर्वक करने से एक सामायिक भी आत्म कल्याण में सहायक हो सकती है। सामायिक का मतलब है समभाव यानी समता भाव में रमण करना। सामायिक इंद्रियों की प्रवृत्ति को शांत करती है और उसे अध्यात्म की ओर ले जाती हैं, जिससे हमारा कल्याण होता है।   मुनि रमेश कुमार ने कहा कि हमारी इंद्रियां नियंत्रित नहीं होने से यह शत्रु बन जाती हैं। मन विषय-वासनाओं में डूबा रहेगा तो वह कुशल कैसे रह सकता है। मोह-वासनाओं में फंसकर इंद्रियां विवेकशून्य हो जाती हैं तथा इंद्रियों के विषयासक्त रहने पर जीव प्राण तक...

आचार्य भगवंत राष्ट्रसंत पु आनंदऋषिजी म.सा.का 126वाँ जन्मोत्सव जाप- तप आराधनासे संप्पन्न

आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे आचार्य सम्राट श्रमण संघ के द्वितीय पट्टधर पु. आनंद ऋषिजी म.सा. की जन्मोत्सव जप- तप- गुणानुवाद द्वारा असंख्य धर्मप्रेमीयों के उपस्थिती मे संप्पन्न हुआ! साध्वी श्रुतप्रज्ञा श्री जी ने गुरु आनंद के जीवनपट पर हर प्रसंगका वर्णन कर प्रकाश डाला! संघाध्यक्ष सुभाष ललवाणी ने आकुर्डी संघ के साथ गुरुदेव के अटुट श्रध्दावंत स्नेहकी बात बतायी और गुरुदेव के आशिर्वाद से आकुर्डी स्थानक भवनका निर्माण हुआ यह गर्वसे कहा! उपाध्यक्षा शारदा चोरडीया, पुर्व विश्वस्त प्रकाश मुनोत, नीता ओस्तवाल, मीनल नहार पुजा भंसाली आदि ने मनोगत एवं स्तवन के माध्यमसे अपने श्रध्दा सुमन अर्पित किये! आचार्य सम्राट पु गुरुदेव के नाम का सामुहिक जाप पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी ने करवाया! 63 आयंबील आराधकोने एवं 11 गणधर तप आराधको ने आज प्रत्याख्यान लिये! आयंबील आराधकोके आयंबील व्रत एवं बियासना...

… तरच सामाईक केल्याचं फळ -प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : आपण जर मनातून सामाईक करत असाल तरच आपल्या त्याचे फळ मिळेल, अन्यथा नाही. हे साधे- सरळ गणित आहे. त्यासाठी सामाईक करतांना मन आपलं विचलीत झालं नाही पाहिजे, त्यातच आपले हित आहे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आपण जर मनातून सामाईक करत असाल तरच आपल्या त्याचे फळ मिळेल, अन्यथा नाही. सामाईकमध्ये ढोंग नको. हे साधे- सरळ गणित आहे. त्यासाठी सामाईक करतांना मन आपलं विचलीत झालं नाही पाहिजे, त्यातच आपले हित आहे, धर्म हा आपला वैरी नाही. धर्मात सर्व काही आहे. म्हणूनच धर्माला कधीही विसरुन जाऊ ...

परमार्थ सेवा का भाव, सुखी जीवन का मूल मंत्र: डॉ . श्री वरूण मुनि जी

 श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर बैंगलोर में चातुर्मासार्थ विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार परम पूज्य डॉ . श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने गुरुवार को धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति जीवन में स्वार्थ की नहीं परमार्थ की भावना अपने जीवन में विकसित करें क्योंकि तीर्थंकर परमात्मा प्रभु महावीर की जिनवाणी का यही असली सार है और वर्तमान में संसार में सुखी जीवन का मूल मंत्र है। जहां स्वार्थ का भाव व्यक्ति को संकुचित बनाता है। वहीं परमार्थ सेवा, परोपकार का भाव व्यक्ति को उदार चित खुश हाल बनाता है और जीवन में एक नये असीम आनन्द का संगीत का सर्जन करता है। परोपकार जीवन को महान बनता है। सभा में मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी ने भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की। अन्त में परम पूज्य उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी महाराज ने सबको मंगल पाठ प्रदान किया।

गुरु आनंद जन्मोत्सव सप्ताहात आज “ नमोथ्थुणं” जाप चे सामुहिक पठण व अठाई तप धारकांचा सन्मान

आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघाच्या प्रांगणात महाराष्ट्र सौरभ पु चंद्रकलाश्रीजी म.सा आदि ठाणा 3च्या सानिध्यात आचार्य सम्राट राष्ट्रसंत पु आनंदऋषिजी म.सा. यांच्या 126व्या जन्मोत्सवा निमित्त आनंदोत्सव सप्ताहाचे विविध धार्मिक कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले आहे. आज साध्वी श्रुतप्रज्ञा श्री जी म. सा. च्या सानिध्यात सामुहिक “ नमोथ्थुणं” जापचे आयोजन करण्यात आले होते. श्री संघ क्षेत्रातील 9 अठाई तप धारकांचा सन्मान या प्रसंगी श्री संघाच्या वतीने स्वागताध्यक्ष परिवार श्री मोतीलालजी चोरडीया व श्री देवेंन्द्र जी लुंकड यांचे शुभहस्ते करण्यात आला. श्री संघाचे अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी व उपाध्यक्षा शारदा चोरडीयांनी तपस्वी व उपस्थित मान्यवरांचे स्वागत केले. तपस्वींना गुरुमॉं चंद्रकलाश्री जींच्या मखान्वये प्रत्याख्यान देण्यात आले. अठाई तप करणारे तपस्वी श्रीमती चंदनबाला रांका, हर्षा सोनिमिंडीया, पायल मुथा, स...

तपस्या आत्मबल से संभव : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

तीन तपस्विनी बहिनों का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथी सभा के तत्वावधान में वृहस्पतिवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में सुश्री वैदेही डोसी (सुपुत्री : जितेंद्र-सुनीता डोसी), सुश्री राशि भटेरा एवं सुश्री ऋषिका भटेरा (सुपुत्री : रितेश-संजना भटेरा) के नौ (9) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी के अध्यक्ष बाबूलाल सुराणा के द्वारा साहित्य एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर तपस्विनी बहनों के तप की अनुमोदना की गई।  मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी आशीर्वाद देते हुए फरमाया कि तप शरीरबल से अधिक आत्मबल के द्वारा संभव है। जब संकल्प जागता है तो व्यक्ति कुछ भी करने में समर्थ हो जाता है। तपस्या मुक्ति का सोपान है। इससे त...

धार्मिक गतिविधियों में संलग्न होने का एक महत्वपूर्ण दिन है चतुर्दशी : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में नित्य प्रवचन एवं धर्मप्रभावना का कार्य उत्तरोत्तर प्रगति पर है। काफी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं समाजबंधु धर्मलाभ ले रहे हैं। गुवाहाटी में तपस्या का क्रम भी अनवरत चल रहा है। इसी क्रम में बुधवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चतुर्दशी, धार्मिक गतिविधियों में संलग्न होने का एक महत्वपूर्ण दिन है। चातुर्मास के दिन तीव्र गति से निकलते जा रहे हैं। अभी भी समय है आप चातुर्मास का भरपूर लाभ लें। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को अपने भावों एवं शब्दों को ठीक करने की प्रेरणा दी। उन्होंने चतुर्दशी के अवसर पर कहा कि धर्मसंघ के साधु-साध्वी कठोर नियमों का पालन करते हैं। साधु-साध्वियों की पूंजी अहि...

क्षमा, सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं: डाॅ. वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर, बेंगलुरु में चातुर्मास के लिए विराजमान दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार परम पूज्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने अपने मंगलमय संबोधन में कहा कि धर्म स्थान का भाव है मन में ही धर्म का निवास हो। धन, विद्या, संपत्ति, रूप, पदवी, इन सब से बढ़कर धर्म है। उन्होंने कहा कि क्षमा, सत्य से ऊपर कोई धर्म नहीं। धर्म प्रेमी बहनों-भाइयों को जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि भवन को भोजनशाला नहीं बनाना चाहिए। धर्म स्थान का मतलब है जहाँ साधना का कार्यक्रम बने। उन्होंने आगे कहा कि सत्संग, साधना करने से मन की शुद्धि होती है। पूज्य गुरुदेव ने कहा कि धर्म सिर्फ धर्म स्थान में ही नहीं बल्कि सब स्थानों पर होता है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु रोजाना अपनी व्यस्त जिंदगी में से कुछ समय निकाल कर परमात्मा का जाप करते हैं, परमात्मा उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। परमात्मा की व्याख्या करते हुए उ...

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