आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला को आगे बढ़ाते हुए मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने शुक्रवार को फरमाया कि सामायिक बहुत बड़ी साधना है। समुचितपूर्वक, समतापूर्वक एवं विधिपूर्वक करने से एक सामायिक भी आत्म कल्याण में सहायक हो सकती है। सामायिक का मतलब है समभाव यानी समता भाव में रमण करना। सामायिक इंद्रियों की प्रवृत्ति को शांत करती है और उसे अध्यात्म की ओर ले जाती हैं, जिससे हमारा कल्याण होता है।
मुनि रमेश कुमार ने कहा कि हमारी इंद्रियां नियंत्रित नहीं होने से यह शत्रु बन जाती हैं। मन विषय-वासनाओं में डूबा रहेगा तो वह कुशल कैसे रह सकता है। मोह-वासनाओं में फंसकर इंद्रियां विवेकशून्य हो जाती हैं तथा इंद्रियों के विषयासक्त रहने पर जीव प्राण तक गंवा देता है। इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए इसका प्रशिक्षण आवश्यक है। अपेक्षा है, इंद्रिय संयम का अभ्यास करें, इसे साधें तो हम इस पर विजय प्राप्त कर सकते हैं, तब यह मित्र बनकर हमारा कल्याण करेगी।
मुनि पद्म कुमार ने कहा कि अपने दिमाग को कभी खाली न छोड़ें, अन्यथा यह आपको भटका सकता है। इसे सत्कर्मों में लगाए रखें, जिससे हमारा कल्याण होगा। इस आशय की जानकारी सभा के मंत्री राजकुमार बैद ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
*संप्रसारक- जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी असम*





