‘संविधान की धार, मर्यादाओं का हो आधार’ मुख्य विषय पर आधारित हुई प्रतियोगिताएं किलपाॅक, चेन्नई : अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में, चेन्नई अणुव्रत समिति की आयोजना में अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 की तमिलनाडु राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन मुनिश्री मोहजीतकुमार जी के सान्निध्य में किलपाॅक भिक्षु निलयम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से हुआ। अणुव्रत महिला सदस्याओं ने अणुव्रत गीत से मंगलाचरण किया। अणुव्रत समिति अध्यक्षा एवं एसीसी राष्ट्रीय सहसंयोजिका श्रीमती सुभद्राजी लुणावत ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। मंत्री एवं एसीसी तमिलनाडू राज्य प्रभारी श्री कुशल बाँठिया ने अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 के बारे में जानकारी दी। मुनि श्री मोहजीतकुमार ने बच्चों को प्रेरणा देते हुए कहा कि अणुव्रत बच्चों को सही दिशा की और आगे बढ...
आज शुक्रवार 15 अगस्त 2025 को 79 वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जॉर्जटाउन, चेन्नई में स्थित शाखा 7 के मुख्य प्रबन्धक दिनेश कुमारजी ने झंडारोहण करते हुए शाखा तीन, सात व तेरह के अभिकर्ताओं को बधाई दी | इस अवसर पर शाखा 13 के मुख्य प्रबन्धक मुन्नुस्वामी,शाखा 3 के सह प्रबंधक आनन्दजी व बालाजी चैयरमैन सदस्य मुरली रामसेठीजी, गोविन्दस्वामीजी, भास्करणजी, अनिलकुमारजी जैन, आर नरेन्द्रजी कांकरिया, कुमार पेरुमाल स्वामीजी, वेणुगोपालजजी सहित अनेक अभिकर्ता उपस्थित थे | तीनो शाखाओं की संयुक्त गणतंत्र दिवस सभा में शाखा के मुख्य प्रबधंको व उप प्रबधंको द्वारा गणतन्त्र दिवस प्रतियोगिता के विजेता अभिकर्ताओं का स्वतंत्रता मेडल व शाल द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया | शाखा प्रबंधक दिनेश कुमारजी व मुन्नुस्वामीजी, उप प्रबधंको आनन्दजी व बालाजी, पेरुमाल स्वामीजी, ए टी गोविन्दस्वामीजी व शा...
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में गुरुवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि सामायिक नौवां व्रत है, जबकि पौषध ग्यारहवां व्रत है, इसलिए पौषध में सामायिक नहीं पचखी जा सकती है। सामयिक कभी भी की जा सकती है। जबकि पौषध चार प्रहर अथवा अहोरात्र का होता है। पौषध सामायिक के पश्चात शुरू होगा। सामायिक की आलोयना अलग होती है और पौषध की आलोयना अलग होती है। पौषध का त्याग अलग है। पौषध अपने आप में स्वतंत्र है। पौषध बिना उपवास के नहीं किया जा सकता, जबकि रात्रि संवर की साधना खा-पीकर भी की जा सकती है। मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – भारत की दो प्राचीन संस्कृतियां रही हैं-वैदिक एवं श्रमण संस्कृति । वेदों में, ईश्वरवाद...
79वाँ स्वतंत्रता दिवस महापुरुषो की आदाकारी साकार कर बड़े धुमधाम से मनाया गया! विशेष आकर्षण विश्वस्तो द्वारा महापुरुषो के वचन! रक्तदान एवं मॉं पद्मावती के 100 से अधिक बहनों के एकासन संप्पन्न! साध्वी स्नेहाश्री जी द्वारा रक्तदान!🩸। आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे गुरुमॉं महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा., शासन सुर्या स्नेहाश्रीजी म.सा., मधुर गायिका पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी म.सा. आदिठाणा 3 के पावन सानिध्य मे महापुरुषो की अदाकारी, जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन युवा शाखा एवं श्री संघ आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के संयुक्त प्रयास से रक्तदान एवं 100 से ज्यादा बहनो द्वारा मॉं पद्मावती के एकासन के प्रत्याख्यान हुये! विशेष आकर्षण रहा साध्वी स्नेहा़श्री जी द्वारा रक्तदान ! समारोह के आयोजन नियोजन में अॅक्टिव ग्रुप एवं युवामंच द्वारा प्रमुख सहभाग! रक्तदान शिबीर का उद्घाटन संघ ...
आत्मा को प्रतिष्ठित या अप्रतिष्ठित कुल में जन्म प्राप्त कराने वाला गोत्र कर्म है। ऊँच और नीच कुल का भेद कर्मकृत है, मनुष्यकृत नहीं है। किसी भी व्यक्ति की नीचता या उच्चता के मापदण्ड का आधार धन-सम्पत्ति या सत्ता नहीं है अपितु गोत्र कर्म ही है। इस कर्म की तुलना कुम्हार से की गई है। जैसे कुम्हार छोटे-बड़े अनेक घड़ों का निर्माण करता है वैसे ही आत्मा को ऊँच-नीच गोत्र में पैदा कराने वाला यह कर्म है। अनीति और अधर्म के कारण जिस कुल ने बदनामी प्राप्त की हो वह नीच कुल है तथा जिस कुल ने सत्य, न्याय, सेवा और त्याग से प्रतिष्ठा प्राप्त ही है वह उच्च कुल है। उच्च कुल में रक्त के संस्कार, खानदानी, सभ्यता – संस्कृति की महत्ता एवं भव्यता के संस्कार मिलते हैं, जबकि नीच कुल में कलह, पापाचरण, बेईमानी और स्वभाव की मलिनता के कुटिल संस्कार विरासत में मिलते हैं। गोत्र कर्म की इस उच्चता और नीचता का आधार निरहं...
सनातन धर्म विद्यालय के प्रांगण में विद्यालय सचिव श्री एस पी बाहेतीजी, विद्यालय प्राचार्या श्रीमती एस लता, मुख्य अतिथि श्री शिव कुमार गोइन्का (अध्यक्ष के जी आई क्लोथिंग ) विद्यालय कोषाध्यक्ष श्री सुनील डागा , विद्यालय इ सी ए समन्वयक श्री गिरी बागडी , श्रीमती संतोष दमानी, अध्यापिकाओं , अभिभावकों और विद्यालय की छात्राओं ने बड़े हर्षोल्लास के साथ 79 वाँ स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी उत्सव मनाया I रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और प्रार्थना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया तत्पश्चात कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई I मुख्य अतिथि ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। धन्यावाद भाषण और राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ I
प्रवचन – 15.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) बंधूंनो-भगिनींनो, आज आपण सर्व भारतवासीयांसाठी अत्यंत पवित्र दिवस – 15 ऑगस्ट – स्वातंत्र्य दिन साजरा करीत आहोत. 1947 मध्ये आपल्याला परकीय सत्तेतून मुक्ती मिळाली. हा दिवस आपल्याला केवळ देशाच्या स्वातंत्र्याचीच आठवण करून देत नाही, तर स्वातंत्र्य या संकल्पनेचा खोल अर्थही सांगतो. जैन धर्म आपल्याला शिकवतो की, दोन प्रकारचे स्वातंत्र्य असतात – बाह्य स्वातंत्र्य आणि अंतःकरणातील स्वातंत्र्य . 1. बाह्य स्वातंत्र्य • परकीय सत्तेच्या जुलूमातून मुक्त होणे, आपल्या इच्छेनुसार देशाचा कारभार चालविण्याचा अधिकार मिळणे, हा बाह्य स्वातंत्र्याचा भाग आहे. • या स्वातंत्र्यासाठी आपल्या स्वातंत्र्यसैनिकांनी बलिदान दिले, त्याग केला, तुरुंगवास सहन केला. • आपल्याला मिळालेल्या या स्वातंत्र्याची किंमत प्रचंड आहे. 2. अंतःकरणातील स्वातंत...
श्रमण संघीय उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म सा, ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा, मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी म सा के पावन निश्रा में शुक्रवार को 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर्व बड़े ही उत्साह और उमंग हर्षौल्लास के साथ श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर के तत्वावधान में मनाया गया। इस अवसर पर दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी ने अपने संबोधन की शुरुआत में सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई देते हुए कहा कि स्वतन्त्रता दिवस यह उन बहादुर स्वतन्त्रता सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने देश की आजादी के लिए अथाह तन मन धन से संघर्ष किया और अपने भारत देश को गुलामी की जंजीरो से आजाद कराते हुए अपने प्राणों का भी बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि आज का यह पावन दिवस सभी भारतीयों में गर्व और देशभक्ति की गहरी भावना पैदा करता है। ...
जालना: श्रध्देला वाचवून ठेवावेच लागेल, त्याशिवाय आमच्याकडे दुसरा कोणताही पर्याय नाही, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आपण कल्लू मनाली जाते हो! यहा- वहा जाते हो! जब हम सिध्दालय में जायेंगें तभी हम कोई ना कोई ना तो काम करगें। भगवान महावीर का समोरन कोई कम नही. यही तो है संपूर्ण! सब कुछ यही पर है! बोल रहे सुधर्मा स्वामी की हमारे लिए यही नंदनवन है। आदमी कहा झुकता है! जो उससे जादा हो! धन हो, दौलत हो! इनके पासही आदमी झुकता है! महावीर को अगर बाहर से देखो गे तो, उनमे सब अवगुणही दिखेगे!लेक...
शरीर और शरीर से सम्बन्धित अंग प्रत्यंग के कण-कण की रचना करने वाला नाम कर्म है। यश-अपयश, सुस्वर-दुस्वर और सौभाग्य-दुर्भाग्य भी नाम कर्म की देन है। आत्मा के अरुपी गुण को ढक कर रूपी (रूप, रस, गन्ध, स्पर्श) शरीर और उससे सम्बन्धित अंग-उपांग प्रदान करना नाम कर्म का कार्य है। जैसे चित्रकार अच्छी-बुरी विविध आकृतियाँ बनाता है, उनमें विभिन्न रंग भरता है और उन्हें सुरूप-कुरूप व सुडौल-बेडौल रूप में चित्रित करता है। इसी भाँति नाम कर्म आत्मा के अच्छे-बुरे विभिन्न रूप बना देता है। इसी कर्म के कारण एक मनुष्य काला-कलूटा या बीभत्स है तो एक सुन्दर एवं चित्ताकर्षक है। नाम कर्म दो प्रकार का है, शुभ नाम कर्म और अशुभनाम कर्म। शुभ प्रकृतियाँ पुण्य रूप है तो अशुभ प्रकृतियाँ पाप रूप हैं। नाम कर्म का स्वरूप जानकर यह भी सिद्ध हो जाता है कि शरीर और शरीर से सम्बद्ध जो भी मिला है, वह परमात्मा द्वारा नहीं अपितु नाम कर्म ...
पावन सानिध्य- गुरुमॉं पु. चंद्रकलाश्रीजी, साध्वी स्नेहाश्री जी, श्रुतप्रज्ञाश्री जी! आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण में सामुहिक लोग्गस्स जाप का महामंगलकारी अणुष्ठान संप्पन्न हुआ! “शासनसुर्या” पु. स्नेहाश्रीजी ने यह जाप करवाया! जापके लाभार्थी परिवार थे संघ कोषाध्यक्ष नेनसुखजी मांडोत, जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन अध्यक्ष नितीनजी बेदमुथा, विजयजी ओस्तवाल, मनोज जी ओस्तवाल! बड़ी भारी संख्या मे धर्मअनुरागीयो ने इस अनुष्ठान में सहभाग लिया! उपस्थित मान्यवरों का संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं उपाध्यक्षा शारदाजी चोरडीया ने स्वागत किया! कल 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर विशेष प्रवचन एवं विशेष देश भक्ति की पहचान विश्वस्त मंडल के विविध प्रस्तुति द्वारा होंगी! समारोह का आयोजन ॲक्टिव ग्रुप के माध्यम से सारिका ओस्तवाल एवं ऑंचल रांका, पल्लवी नहार, आदि के अथक प्रयास से संप्पन्न हो...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने गुरुवार को धर्म सभा में प्रथम तीर्थंकर परमात्मा श्री ऋषभदेव प्रभु की स्तुति रुप भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से कहा कि तीर्थंकर प्रभु स्वयं तीरते है और साधक भक्त आत्माओं को भी संसार रुपी सागर से तिराने वाले हैं। प्रभु की भक्ति स्तुति से जीवन में मिलने वाले अदभुत लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिनेश्वर भगवान की श्रद्धा पूर्वक भक्ति में करने से साधक आत्मा के पूर्व संचित कर्म अपने आप ही यों क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं जैसे कि मयूर की ध्वनि मात्र से ही चंदन वृक्षों के ओर लिपटे हुए सर्प अपने अपने बिलों में घुस जाते हैं। भक्ति में इतनी अपार शक्ति होती है। भक्ति एक अमर गुण है। इसलिए यह गुण आत्मा को भी अमर बना देता है। मुनि श्री ने वाणी के जादूगर, श्रुताचार्य उत्तर भारतीय प्रर्व...